शौर्यपथ / ( शरद पंसारी ) / मार्च 2020 के संक्रमण के कारण पुरे देश में लॉक डाउन कर दिया गया था और विकास के पहिये थम गए थे . जिसके कारण लाखो करोडो को बदहाल आर्थिक स्थिति का सामना करना पडा था . जनता को परिवार की भूख के साथ बैंक ईएमआई की चिंता सताने लगी थी तब आरबीआई ने लोन मोराटोरियम तीन माह के लिए जून तक बढ़ा दिया किन्तु स्थिति ना सुधरने की हालत में इसे अगस्त तक बढ़ा दिया गया . वर्तमान में भारत में कोरोना का कहर सबसे ज्यादा है एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के अन्य देशो के मुकाबले भारत में सबसे ज्यादा तेजी से कोरोना के मरीज मिल रहे है . कोरोना के मरीज की संख्या भारत में 30 लाख पार कर चुकी है वही कोरोना से हुई मौतों की संख्या 58 हजार से भी ज्यादा हो गयी .
कहने को तो सरकार अनलॉक की प्रक्रिया में है किन्तु इस अनलाक में भी ऐसे कई संस्था है जो आज भी आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे है और कई ऐसे संस्था है जो अल्प समय के लिए व्यापार सञ्चालन कर दो वक्त की रोटी की व्यवस्था में लगे हुए है . ऐसे में अगर अगस्त में खत्म होने वाला लोन मोराटोरियम की समय सीमा आरबीआई द्वारा नहीं बधाई जाती तो निश्चित ही लाखो लोग लोन डिफाल्टर की श्रेणी में आ जायेंगे .
आज भी ऐसी कई संस्था है जो लगभग बंद जैसी स्थिति में है जिसमे से केटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोग , शिक्षा व्यवसाय से जुड़े लोग , पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग , वाहन व्यवसाय से जुड़े लोग , शापिंग माल चेन से जुड़े लोग , होटल व्यवसाय से जुड़े लोग , पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग आदि जिनका व्यवसाय लगभग बंद जैसी हालत में है पिछले 6 माह से ऐसे लोगो को वर्तमान में भूख की आग को शांत करने की ज़द्दोज़हद करनी पड़ रही है अगर इनके सामे ईएमआई जमा करने की स्थिति आ गयी तो इनके पास डिफाल्टर होने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा क्योकि लोन डिफाल्टर होना ज्यादा आसान है परिवार की भूख मिटाने से . ऐसे लोग परिणाम की परवाह किये बिना पहले पेट की आग बुझाएंगे .
उसी तरह वर्तमान में ऐसे कई संस्था ऐसी भी है जो व्यापार कर रही है किन्तु सिर्फ दिखावे मात्र के लिए क्योकि अनलाक की इस प्रक्रिया में उन्हें संस्थान खोलने की अनुमति तो मिली है किन्तु आम जनता के पास क्रय की शक्ति लगभग खत्म से हो गयी है और आम जनता सिर्फ जरुरत के हिसाब से ही खर्च कर रही है , भोग विलासता से भारत की जनता विगत 6 माह से दूर है , मुद्रा का चलन अति आवश्यक वस्तुओ पर ही हो रहा है ऐसी स्थिति में ना चाहते हुए भी लाखो लोग लोन डिफाल्टर की श्रेणी में आ सकते है .
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार लोन मोराटोरियम की सीमा बढाने आरबीआई विचार कर रही है और संस्थानों से लगातार चर्चा कर रही है आरबीआई इस बारे में कोई जल्दबाजी करने के मुड में नजर नहीं आ रही है . बाज़ार की स्थिति और आम जनता के आवक की स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए है . वर्तमान में कोरोना आपदा का संचार जिस तेजी से हो रहा है उस कारण कई क्षेत्रो में स्थिति बिगड़ रही है कई व्यवसाय धराशाई हो गए है ऐसी स्थिति में आरबीआई हर पहलु पर विचार कर ही कोई फैसला लेगी .
लोन मोराटोरियम की सीमा को बढाने और इसे तीसरे चरण दिसंबर माह में करने का विचार आरबीआई सभी पहलुओ पर विचार कर ही लेगी . किसी कारणवश अगर ये लोन मोराटोरियम की सीमा आगे नहीं बढ़ेगी तो लोन डिफाल्टरो की संख्या में जो आमूलचूल वृद्धि होगी उससे सिर्फ आक्रोश ही उत्त्पन्न होगा , नित नए विवाद ही जन्म लेंगे , मानसिक तनाव और अवसाद के कारण कई तरह के वाकये भी सामने आ जाये तो कोई बड़ी बात नहीं . बस अब आम जनता को इंतज़ार है कि ईएमआई पर आरबीआई का क्या फैसला आता है क्योकि अगस्त माह खत्म होने में अब कुछ दिन ही शेष है जो कि आम जनता के लिए और सरकार के लिए काफी विशेष है क्योकि कोरोना आपदा का कहर भारत में उच्च स्तर पर है और व्यवसाय निम्न .