शौर्यपथ। आस्था एक ऐसा एहसास है जो किसी व्यक्ति विशेष दल विशेष संगठन विशेष का नहीं हो सकता ईश्वर में आस्था सभी की रहती है आस्था के रूप अलग-अलग हो सकते हैं किंतु विधाता एक ही है । वर्तमान समय में प्रभु श्री राम के नाम पर जिस पार्टी ने अपने अस्तित्व को आज इस मुकाम तक पहुंचाया कि वह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जानी जाती है जी हां बात अगर करें तो भारतीय जनता पार्टी ने जय श्रीराम के नारों के उद्घोष के साथ अपनी राजनीतिक पराकाष्ठा को एक नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया कोई भी दल अगर धर्म को महत्व देता है तो यह उस दल की अपनी सोच रहती है इस पर कोई आक्षेप नहीं लगा सकता और यह कोई गलत भी नहीं किंतु ऐसा भी नहीं की किसी अन्य दल के लोग आस्था पर अपना हक ना जमा सके हैं आस्था किसी दल के सदस्यों की सीमा में नहीं बंधी होती है व्यक्ति चाहे किसी भी दल की मानसिकता का हो किंतु अपने आराध्य को पूरे भाव पूर्ण तरीके से मानता है और अपनाता है वर्तमान में जिस तरह से कर्नाटक चुनाव में बजरंग दल के प्रतिबंध को लेकर राजनीतिक चर्चा जोरों पर है और बजरंग दल के प्रतिबंध को जहां एक और भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बजरंगबली को ताला लगाने का आरोप कांग्रेस पर लगा रहे हैं जिसके कारण राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो रहा है समाचार पत्रों में,न्यूज़ चैनलों में कांग्रेस को लगातार बजरंगबली का विरोधी करार दिया जा रहा है जिसकी आंच जब छत्तीसगढ़ में पहुंची तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उल्टे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही पलटवार कर दिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब फेंकने में माहिर हो गए हैं पूर्व में भी उन्होंने कई संतों को जिनके कार्यकाल की अवधि अलग-अलग सदी की थी 1 साल बैठाकर परिचर्चा की बात कर दी भारत की जनसंख्या को कई गुना बढ़ा दिया अब ऐसे ही बजरंगबली को ताला लगाने की बात कह रहे हैं जबकि कर्नाटक के मेनिफेस्टो में बजरंग दल पर बैन लगाने पर विचार करने की बात कही गई है ना कि बजरंगबली पर ताला.चुनावी मौसम है राजनीतिक चर्चा परिचर्चा तो चलती ही रहेगी आरोप-प्रत्यारोप तो लगते ही रहेंगे किंतु इन सब बातों में एक बात और सामने आई जोकि सोचने भी है और चिंतनीय भी छत्तीसगढ़ में साल 2003 से 2018 तक प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में थी ऐसे में श्रीराम के अनन्य भक्त के रूप में पहचान बना चुकी भारतीय जनता पार्टी आखिर कौशल्या माता को क्यों याद नहीं किया। विश्व के एकमात्र कौशल्या माता मंदिर जो कि रायपुर के चंदखुरी में स्थित है कौशल्या माता प्रभु श्री राम की माता है प्रभु श्री राम जो माता के चरणों में स्वर्ग देखते थे आखिर 15 साल भारतीय जनता पार्टी नीत रमन सरकार ने कौशल्या माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए क्या किया ।
कहने का तात्पर्य यह नहीं की माता कौशल्या को भूलकर भारतीय जनता पार्टी ने कोई अपराध कर दिया हो किंतु यह भी सत्य है कि कौशल्या माता मंदिर का जीर्णोद्धार और महोत्सव वर्तमान की भूपेश सरकार ने बड़े धूमधाम से किया वही वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम जिन मार्गों पर अपनी यात्रा किए उन मार्गों को राम वन गमन पथ के नाम से सौंदर्यीकरण करने का कार्य भी भूपेश सरकार ने किया ।
सरकारी कोई भी हो किंतु धर्म का महत्व और स्थान अपने आप में अलग है धर्म ना तो किसी दल की सीमा में है और ना ही किसी की निजी संपत्ति, धर्म और आस्था हर उस व्यक्ति का है जो अपने आराध्य को मन भाव से मानता है और अपनाता है आज राजनीति में विकास की बात रोजगार की बात स्वास्थ्य की बात शिक्षा की बात उद्योग की बात ना होकर अगर धर्म के सहारे राजनीति हो तो उस आम जनता का क्या होगा जो अपना धर्म अपने कर्म को मानता है जो सुबह उठकर यह सोचता है कि शाम तक कोई काम मिल जाए ताकि परिवार का पोषण कर सके उस गरीब और निचले तबकों के लिए सबसे बड़ा धर्म यही है कि उसे कोई ऐसा काम मिले जिससे वह अपने परिवार को दो वक्त की रोटी और सादगी पूर्ण जीवन बिताने के लिए मददगार साबित हो आज भी देश और प्रदेश के की बड़ी आबादी अपने कर्म को ही धर्म मानती है क्योंकि उसे यह मालूम है कि अगर कर्म नहीं करेंगे तो परिवार का पोषण नहीं कर पाएंगे. शास्त्रों में भी कर्म को ही पूजा जाता है अगर कर्म अच्छे रहें तो धर्म सर्वोच्च हो ही जाएगा काश वह दिन कब आएगा जब भारत की राजनीति में धर्म के जगह कर्म स्थान लेगा, बेरोजगारी का मुद्दा स्थान लेगा, स्वास्थ्य का मुद्दा स्थान लेगा, महंगाई का मुद्दा स्थान लेगा,उद्योग का मुद्दा स्थान लेगा,शिक्षा का मुद्दा स्थान लेगा,तरक्की और खुशहाली का मुद्दा स्थान लेगा, विकास का मुद्दा स्थान लेगा......