Print this page

फ़िल्मी कहानी द केरल स्टोरी का वार अब भाजपा पर ही पड़ गया भारी....

मानवता शर्मशार : गायब हुए लोगो की संख्या मानवता शर्मशार : गायब हुए लोगो की संख्या
  • doing of business

नई दिल्ली / शौर्यपथ /  भाजपा के द्वारा चुनावी वर्ष में फिल्मो के सहारे अपनी नैय्या पार लगाने की कोशीश अब उलटे उसी पर भारी पड़ रही है . द केरल स्टोरी जो साउथ की कहानी है जिस पर तथ्यात्मक सच्चाई की कोई खबर अभी तक कही नहीं दिखाई गयी सिर्फ फ़िल्मी स्टोरी के दम पर ही भाजपा के दिग्गज नेता साउथ में अपनी पकड़ मजबूत करने की जुगत लगा रहे थे किन्तु कर्नाटक चुनाव में ना तो भाजपा के द्वारा उठाये गए फ़िल्मी कहानी द केरल स्टोरी  का सहारा मिला और ना ही बजरंगबली जी का आशीर्वाद मिला दोनों ही वार भाजपा के खाली हो गए हाँ ये जरुर रहा कि भाजपा के इस फिल्म के अपरोक्ष प्रचार के कारण फिल्म प्रोड्यूसर की अच्छी खासी कमाई हो गयी . पुरे देश में ऐसे कई भाजपा नेता देखे गए जो अपनी पूरी टीम के साथ इस फिल्म का आनंद लिया जिससे निर्माता को अच्छी कमाई और बिना खर्च किये अच्छा प्रचार मिल गया .
  वही अगर द केरल स्टोरी  विवाद की बात करे तो इस फिल्म में 32 हजार लडकियों के प्रताड़ना की बात प्रचारित की गयी किन्तु सत्यता के प्रमाण किसी ने नहीं दिए वही विपक्ष द्वारा एनसीआरबी के आंकड़े प्रस्तुत कर उलटे भाजपा को ही आइना दिखा दिया द केरल स्टोरी की बात तो सबने की किन्तु गुजरात में केन्द्रीय एजेंसी की प्रमाणित रिपोर्ट जिसमे 40 लडकियों के पिछले 5 साल में गायब होने के तथ्य पेश किये गए उस पर भाजपा के किसी कद्दावर नेता ने दो शब्द भी नहीं कहे क्या गुजरात की लडकियों को द केरल स्टोरी जैसी फ़िल्मी कहानी के आगे शून्य माना गया . क्यों नहीं भाजपा के नेता अब गुजरात से गायब हुई लडकियों के बारे में कोई जवाब दे रहे क्या लडकियों पर भी राजनीति अपने मतलब से की जा रही है . क्या ऐसे ही लोकतंत्र की स्वतंत्र भारत की कल्पना की थी आज़ादी के दीवानों ने जिन्होंने अपने खून से सींच कर देश को आजादी दिलाई क्या गुजरात की या अन्य प्रदेश से गायब हुई लडकियों के बारे में सभी एक होकर कोई ठोस कदम नहीं उठा सकते क्या फ़िल्मी कहानियों पर ही राजनितिक रोटी सकी जायेगी भविष्य में या धर्म के नाम पर बंटवारा किया जाएगा समाज को . आज धर्म के नाम पर कल समाज के नाम पर फिर जात के नाम पर फिर रंगभेद के नाम पर बस ये सिलसिला ही चलता रहेगा या फिर विकास और नवनिर्माण की बात पर होगी चर्चा ....
लेखक के निजी विचार
शरद पंसारी  

Rate this item
(0 votes)
शौर्यपथ

Latest from शौर्यपथ

Related items