दुर्ग / शौर्यपथ / कांग्रेस की सत्ता प्रदेश में लगभग दो साल का कार्यकाल पूरा कर ली है ऐसे में अब दो साल बाद दुर्ग निगम में एल्डरमैन की सूचि जारी हो गयी . राज्य शासन ने कई निकायों के एल्डरमैन की सूचि जारी कर दी जिसमे दुर्ग निगम भी शामिल है .सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एल्डरमैन की सूचि को अंतिम रूप देने के लिए क्षेत्रीय विधायको की अनुशंसा की का ख़ास ख्याल रखा जाता है . दुर्ग निगम में जारी एल्डरमैन की सूचि भी स्थानीय विधायक वोरा की अनुशंसा को आधार माना गया है . दुर्ग निगम में ६ एल्डरमैन के नामो की घोषणा हुई है एक एल्डरमैन की घोषणा साल भर पहले ही हो चुकी है . जारी सूचि में ऐसे कई नाम है जिनको एल्डरमैन का पद मिलने की पूरी उम्मीद थी किन्तु जारी सूचि से उनका नाम गायब है . ऐसे नामो में पूर्व पार्षद राजेश शर्मा , रमेश श्रीवास्तव , कन्या ढीमर , शकुन ढीमर , प्रकाश गीते , गौरव उमरे , आयुष शर्मा , नासिर खोखर , अजय सिन्हा , रामकली यादव , राकेश शर्मा , मोहित वाल्दे , सरवर चौहान , अजय शर्मा , अजय मिश्रा , अल्ताफ , संदीप श्रीवास्तव जैसे कई नाम शामिल रहे जिनको निराशा हाँथ लगी है . ये ऐसे दावेदार थे जिनको उम्मीद थी कि एल्डरमैन के पद से नवाजा जायेगा . किन्तु इन नामो को दरकिनार कर अंशुल पाण्डेय , जगमोहन ढीमर , अजय गुप्ता , रत्ना नारमदेव , देव सिन्हा , राकेश ठाकुर को निगम में जगह मिली .
लिस्ट जारी होते ही दुर्ग में राजनितिक हलचल तेज हो गयी ऐसे में असंतुष्टो को संतुष्ट करने की सारी जिम्मेदारी अब एक बार फिर विधायक वोरा के ऊपर आ गयी है . जैसा कि सभी को ज्ञात है दुर्ग में किसी भी पद पर मोहर लगने के लिए विधायक की अनुशंसा की आवश्यकता होती है वैसे ही अब इन असंतुष्ट दावेदार जो दो साल से उम्मीद लगाये हुए थे कि एल्डरमैन में जगह मिलेगी अब एक प्रकार से उम्मीद खत्म सी हो गयी है . हालाँकि अभी ३ नामो की घोषणा होनी बची है ऐसे में विधायक द्वारा इन तीन नामो में कुछ को जगह दिलाने का वादा जरुर किया जाएगा किन्तु एक अनार सौ बीमार वाली कहावत के आगे सभी जानते है कि सिर्फ तीन को ही जगह भविष्य में मिलेगी ऐसे में बाकी असंतुष्टो को कैसे समझायेंगे वोरा ये देखने वाली बात होगी . वैसे भी अगर दुर्ग कांग्रेस में राजनीती करनी है तो वोरा बंगले से कोई भी सीधे सीधे विरोध नहीं करेगा . किन्तु वर्तमान में जिस तरह शहर में वोरा की प्रसिद्धि का ग्राफ कम होता जा रहा है उससे ना चाहते हुए भी सभी को किसी ना किसी तरह संतुष्ट करने की जिम्मेदारी अब विधायक के उपर आ गयी है . वर्तमान राजनितिक परिवेश में दुर्ग में कांग्रेस कहने को तो उपरी टूर से एक है किन्तु आंतरिक रूप से तीन गुट बन गए है ऐसे में कांग्रेस के असंतुष्ट दावेदार अब किस खेमें में जा कर अपने लिए भविष्य के रास्ते अपनाएंगे ये देखने वाली बात होगी . हर बार वोरा परिवार में चुनावी सीजन में दुर्ग के कांग्रेस के सर्वेसर्वा बनने वाले शानू वोरा क्या अब दुर्ग आ कर सभी को फिर से संतुष्ट करेंगे या सत्ता होने के कारण कार्यकर्त्ता मौन रहकर सही समय का इंतज़ार करेंगे . स्थिति चाहे जैसी भी निर्मित हो किन्तु आने वाले कुछ दिन दुर्ग की राजनितिक हलचल काफी गरम रहने वाली है . ( शरद पंसारी )