लेख - शरद पंसारी (संपादक - शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र )
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर में नक्सलवाद उन्मूलन और विकास की दिशा में पिछले दो वर्षों में ऐतिहासिक काम किए हैं। यह केवल सुरक्षा अभियान का परिणाम नहीं है, बल्कि यह “विश्वास, विकास और सुरक्षा” के त्रिकोणीय मॉडल का प्रतीक है, जिसने बस्तर को अबूझमाड़ और दुर्गम इलाकों में भी बदलाव की मिसाल बनाने में सक्षम किया है।
नक्सल समस्या में उल्लेखनीय कमी: निर्णायक चरण की ओर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि नक्सलवाद उन्मूलन अब निर्णायक चरण में है और मार्च 2026 तक इसे पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य है।
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सुरक्षा शिविरों का विस्तार: दिसंबर 2023 से अब तक 65 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं, जिससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी उपस्थिति मजबूत हुई।
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नक्सली नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई: प्रमुख माओवादी विचारकों और कमांडरों को निष्क्रिय कर उनके नेटवर्क को पूरी तरह कमजोर किया गया।
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सटीक आंकड़े:
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आत्मसमर्पण: 2,386+ नक्सली
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गिरफ्तार: 1,901+ नक्सली
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निष्क्रिय/मारे गए: 505+ नक्सली
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इन कदमों से नक्सलियों की कमांड और नियंत्रण प्रणाली टूट चुकी है और स्थानीय लोग अब खुले तौर पर सरकारी पहलों का समर्थन कर रहे हैं।
सुरक्षा और सामरिक रणनीति: कोर एरिया में प्रभावी नियंत्रण
सरकार ने नक्सलियों के “कोर एरिया” (अबूझमाड़ और घोर जंगली इलाके) में सक्रिय रूप से अभियान चलाकर उनके गढ़ों को निशाना बनाया।
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फॉरवर्ड लिंक कैंप: पिछले दो वर्षों में 50+ नए कैंप स्थापित, जिन्हें विकास केंद्र के रूप में विकसित किया गया।
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इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन: अब मुठभेड़ें केवल गश्त पर नहीं होतीं, बल्कि सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर विशेष ऑपरेशन किए जाते हैं।
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आधुनिक हथियार और तकनीक: ड्रोन, एन्टी-माइन वाहन, और अत्याधुनिक संचार उपकरणों से जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई, हताहत दर में भारी कमी आई।
इन रणनीतियों के परिणामस्वरूप नक्सलियों के बीच भय और अविश्वास का माहौल उत्पन्न हुआ और कई कमांडर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आए।
‘नियद नेल्लानार’ योजना: विकास का मॉडल और सामाजिक सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री की प्रमुख पहल ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गाँव) योजना ने सुरक्षा शिविरों के आसपास के गांवों में शत-प्रतिशत विकास की दिशा में काम किया।
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सुविधाओं का विस्तार: राशन दुकान, स्कूल, आंगनबाड़ी, खेल का मैदान, मुफ्त बिजली, पक्के आवास, स्वास्थ्य क्लिनिक और 25+ बुनियादी सुविधाओं का वितरण।
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शिक्षा और स्वास्थ्य: बंद 300+ स्कूलों को पुनः खोला गया, और ‘छू लो आसमान’ जैसी कोचिंग संस्थाओं के माध्यम से IIT/NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी उपलब्ध।
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स्थानीय सहभागिता: ग्रामीण अब स्वयं सुरक्षा शिविरों की मांग करने लगे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि विकास और सुरक्षा का मॉडल सफल हुआ है।
आर्थिक सशक्तिकरण और रोजगार: बस्तर की अर्थव्यवस्था में नवजीवन
बस्तर को केवल सुरक्षा के मोर्चे तक सीमित नहीं रखा गया; सरकार ने इसे स्थानीय उद्यमिता, वनोपज और पर्यटन से जोड़ा।
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वनोपज आधारित समर्थन: इमली, महुआ, कोसा वनोपजों का MSP बढ़ाया गया और बिचौलियों को खत्म किया गया।
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स्थानीय रोजगार: ‘बस्तर कैफे’ ब्रांड और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिला।
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पर्यटन और इको-टूरिज्म: ‘बस्तर पांडुम’, ‘बस्तर ओलंपिक’ और सुरक्षित पर्यटन स्थलों से स्थानीय आजीविका को बढ़ावा।
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कौशल विकास: आत्मसमर्पित नक्सलियों और युवाओं को ट्रैक्टर रिपेयरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, सोलर पंप तकनीशियन और अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान।
मुख्यधारा में वापसी और लोकतंत्र में विश्वास
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भरोसे का संकेत: 2025 में ‘लोन वर्राटू’ अभियान के तहत 2,000+ नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें कई अब ‘बस्तर फाइटर्स’ के रूप में पुलिस और प्रशासन की मदद कर रहे हैं।
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राजनीतिक भागीदारी: ग्राम सभाओं और स्थानीय चुनावों में मतदान प्रतिशत में वृद्धि, जो लोकतंत्र में विश्वास की बढ़ती दर को दर्शाती है।
ढांचागत क्रांति: कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे में सुधार
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सड़कों और पुलों का निर्माण: इंद्रावती नदी पर नए पुल और ग्रामीण सड़कों का निर्माण, जिससे मानसून के दौरान भी बस्तर का संपर्क टूटने का खतरा नहीं।
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स्वास्थ्य सेवाएं: ‘हाट बाजार क्लिनिक’ योजना के तहत जंगलों और दुर्गम इलाकों में डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध।
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शिक्षा और कौशल: बच्चों के लिए गुणवत्ता शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मार्गदर्शन।
निष्कर्ष: गोली का जवाब गोली से, विकास का रास्ता हर दरवाजे तक
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में दो वर्षों में सुरक्षा, विकास और विश्वास का त्रिकोणीय मॉडल सफल हुआ है। नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और विकास की मुख्यधारा के प्रति स्थानीय लोगों के विश्वास ने बस्तर को 'लाल आतंक' से मुक्त कर 'हरी-भरी संस्कृति और तेजी से बढ़ते विकास' की पहचान दिलाई है।
मार्च 2026 तक बस्तर को पूर्ण नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य अब within reach है, और यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनकी सरकार ने बस्तर को न केवल सुरक्षित, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।