Print this page

बेटी है तो जिन्दगी है ... Featured

  • devendra yadav birth day

शौर्य की बातें / सेल्फी लेना , फोटो खिंचवाना जैसे गुजरी बात हो गयी जब तक निक्की था सेल्फी लेना फोटो खिंचवाना बहुत अच्छा लगता था छोटे या बड़े किसी भी उत्सव / त्यौहार में फोटो की झड़ी लग जाती थी किन्तु अब सब सूनापन नजर आता है अपनी ही तस्वीर से आंख मिलाने की हिम्मत नहीं होती . १६ जनवरी को मेरे भतीजे के जन्मदिन में जाने के लिए मेरी लाडो निक्की की प्यारी बहना तैयार हुई मै घर से निकल रहा था कि मन किया सिद्धि के साथ फोटो खिंचवाऊ . दो साल हाँ लगभग दो साल हो गए बेटी के साथ फोटो लिए हुए . जब फोटो को गौर से देखा तब मेरे आँखों की उदासी तो चश्मे के कारण नजर नहीं आयी किन्तु सिद्धि का दमकता चेहरा ये अहसास करा गया कि मेरी जिन्दगी चाहे जितनी भी वीरान हो सिद्धि को उसके हिस्से की हर ख़ुशी देनी है गम के आंसू छुपाये उसे मुस्कुराने की वजह देनी है . ये मात्र एक फोटो नही है ये एक पिता की बेटी के प्रति प्यार और अधिकार के साथ ईश्वर द्वारा दी गई जिम्मेदारी के निर्वाहन का स्वरूप है । जब मेरा लाल मुझसे बिछड़ गया तो जीने का कोई मकसद ही नही रह जिंदगी वीरान सी हो गई कि बार दिल ने कहा कि निक्की के पास चले जाएं मेरी रत्ना ने भी साथ देने का वादा किया किन्तु तब एक चेहरा सामने आया वो था सिद्धि का मासूमियत भरा मुखड़ा उसे किसके सहारे छोड़ के जाते हमारे सिवा है ही कौन जो उसे पलको में बिठा के रखे मेरा लाल उसके आने पर खुश था बहुत खुश सिद्धि उसकी जान थी आज भी जो जिंदगी गुजार रहे वो उधार की बस ईश्वर से यही प्रार्थना है कि जल्दी समय का पहिया घूमे सिद्धि काबिल बने अपनी जिम्मेदारी निभाये  और हम अपने निक्की के पास जाए  । ( शरद पंसारी - सम्पादक , शौर्यपथ दैनिक समाचार )

Rate this item
(0 votes)
शौर्यपथ

Latest from शौर्यपथ