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महिला कृषक का समूह हल्दी और अदरक की फसल लगाकर हो रहीं मालामाल : बीस से पच्चीस हजार प्रति कृषक हो रहा मुनाफा

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रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन की विभिन्न रोजगारमूलक योजनाओं से जुड़कर दूरस्थ अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों की महिलाएं भी अब शासन की योजनाओं का फायदा उठाकर आर्थिक उन्नति कर रही हैं। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा गांव की 10 महिलाओं के गायत्री स्व-सहायता समूह ने कृषि विभाग के ‘आत्मा‘ योजना से प्रेरित होकर हल्दी एवं अदरक की खेती करना प्रारम्भ किया है। जिससे उन्हें 25 हजार रूपए प्रति फसल मुनाफा हो रहा है। परंपरागत उत्पादन से उबरने में प्रयासरत 10 महिलाओं के कृषक समूह जिसका नाम गायत्री स्वयं सहायता समूह है के पास कुआकोंडा ग्राम में 20 एकड़ जमीन है, जिनमें मरहान, टिकरा, माल और गभार भूमि है। जिससे यह सभी अपनी मुख्य फसल देशी धान लगाते थे। जो सिर्फ उनके भरण-पोषण के लिए होती है, बाकी जरूरत के लिए अन्य कार्य या कृषि कार्य किए जाते हैं। जिले के कृषि विभाग के अधिकारियों ने गायत्री स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संपर्क कर कृषि विभाग में संचालित आत्मा योजना अंतर्गत फसल प्रदर्शन की जानकारी दी और विभाग के अधिकारियों द्वारा निःशुल्क बीज खाद दवाई एवं प्रशिक्षण दिया गया। फसलों की नई तकनीकी ज्ञान हेतु शैक्षणिक भ्रमण भी करवाया गया ताकि खेती करना भी सीख सकें।
कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा गायत्री स्व-सहायता समूह को हल्दी अदरक की फसल लगाने हेतु प्रेरित किया गया। हल्दी एवं अदरक ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में आसानी से बिक जाने वाली फसल है एवं उन के सही दाम तत्काल मिल भी जाते हैं। अधिकारियों द्वारा संबंधी प्रशिक्षण दिए गए जिससे फसल संबंधी जानकारी मिलती रहे। कृषि विभाग द्वारा गायत्री स्व-सहायता समूह के प्रत्येक महिला कृषक को 10 डीएम प्रदर्शन की दर से 5 कृषक को 40 किलोग्राम प्रदर्शन अदरक एव 5 कृषक को 40 किलोग्राम प्रदर्शन हल्दी लगाने हेतु बीज एव 10 किलोग्राम प्रति प्रदर्शन खाद उपलब्ध कराई गई एवं कीटांे के प्रकोप से बचाने हेतु जैविक कीटनाशक भी उपलब्ध कराया गया। गायत्री स्व-सहायता समूह द्वारा लगातार हल्दी एंव अदरक की फसल देखरेख एवं बढ़वार को देखते हुये प्रति प्रदर्शन 5 कृषक पैदावार मिलने की संभावना है, जिसे बाजार में बेचकर लगभग 20 से 25 हजार रूपए तक का मुनाफा प्रत्येक किसान आमदनी में इजाफा कर सकते है। गायत्री स्व-सहायता समूह के उन्नत खेती प्रबंध के लिए अपने गांव में ख्याति अर्जित कर चुकी है एव अन्य कृषकों को अन्य फसल लगाने एव कृषि विभाग क मार्गदर्शन लेने हेतु लोगों में रूचि पैदा करने में मिसाल कायम की हैद्य इस समूह के द्वारा ग्राम की अन्य महिला एव पुरुष कृषकों जैविक खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

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शौर्यपथ

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