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नालों का डीपीआर प्राथमिकता के साथ तैयार करेंः सीईओ

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जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / राज्य शासन की महत्वकांक्षी योजना एनजीजीबी के तहत नरवा विकास योजना में नालों को पुनर्जीवित करने के लिए जो डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाए जा रहे है, उन्हें गंभीरता के साथ बनाए। किसी भी तरह की कोई भी लापरवाही डीपीआर को लेकर बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और तीन दिवस के भीतर सारी कर्मियों को दूर कर प्रस्तुत किया जाए। यह बात सोमवार को जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गजेन्द्र सिंह ठाकुर ने तकनीकी अमले से कही।
जिपं सीईओ ठाकुर ने जिला पंचायत सभाकक्ष में प्रत्येक जनपद पंचायत द्वारा नरवा विकास के तहत तैयार किए जा रहे डीपीआर की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से निर्माण कार्यों को किया जाना है। उन्होंने जनपद पंचायत के नरवा विकास के नोडल अधिकारी से प्रजेंटेशन के माध्यम से बनाए जा रहे डीपीआर के एक-एक बिंदुओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जिले में नालों को लेकर राज्य स्तर से जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसके मुताबिक डीपीआर तैयार किया जाना है। इसलिए जरूरी है कि डीपीआर के प्रत्येक बिंदुओं को शामिल किया जाए। नरवा विकास के तहत नालों से भूजल को बढ़ाना है, इसलिए प्रत्येक नाले की लंबाई, चौड़ाई, गहराई का सही तरीके से आंकलन करें और नाले पर बनने वाले स्ट्रक्चर का ध्यान रखे।
उन्होंने आरईएस एसडीओ, सब इंजीनियर, मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी, तकनीकी सहायक को नाले का निरीक्षण कर बेहतर डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। नालों के संरक्षण करने से जहां मनरेगा के मजदूरों को गांव में ही रोजगार मिलेगा तो वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण होने से नालों के आसपास किसान दोहरी फसल, सब्जी-बाड़ी जैसे कृषि कार्य कर सकेंगे तो वहीं मछली पालन का काम भी इसमें किया जा सकेगा। इससे ग्रामीणों के लिए रोजगार उपलब्ध होगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। उन्होंने इस दौरान मनरेगा कार्यों की समीक्षा करते हुए कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिए कि गांव की आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक, हितग्राही मूलक कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर भेजे जाए, जिससे गांव में अधिक से अधिक ग्रामीणों को रोजगार मिल सके। बैठक में आरईएस कार्यपालन अभियंता, मनरेगा सहायक परियोजना अधिकारी श्री विजयेन्द्र सिंह, आरईएस एसडीओ, सब इंजीनियर, मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी, तकनीकी सहायक उपस्थित थे।

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शौर्यपथ

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