नरेश देवांगन कि खास रिपोर्ट
जगदलपुर, शौर्यपथ। बायो मेडिकल वेस्ट को लेकर भले ही गंभीरता बरतने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। स्थिति यह है कि अस्पतालों से व निजी क्लिनिको से प्रतिदिन सैकड़ों किलो बायो मेडिकल वेस्ट कचरा निकलता है, मरीजों को इंजेक्शन लगाने के बाद सिरिंज को भी खुले में फेंक दिया जाता है। अस्पतालों से बॉयो वेस्ट का निस्तारण भी नियमित रूप से नहीं होता। बॉयो वेस्ट सड़क किनारे कूड़े में फेंक दिया जाता है। मेडिकल कचरा खुले में डालने से पशुओं और लोगों को उनसे इंफेक्शन होने खतरा रहता है। बायो मेडिकल कचरा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए अत्यंत खतरनाक है। इससे न केवल बीमारियां फैलती है बल्कि जल, थल एवं वायु सभी दूषित होते हैं। ऐसा ही मामला शहर के जिला पशु चिकित्सालय जगदलपुर परिसर का है जहा यहाँ के कर्मचारी सामान्य कचरे के जैसे बायो मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंक कर उसे जला रहे है. जिससे आस पास के लोगो के सेहत को नुकसान हो रहा है , इस मामले पर जिम्मेदार अधिकारी बायोमेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन व निष्पादन के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर रहे है । समाप्त हो चुकी दवाइयां,सुइयां, ब्लेड, खाली बोतलें, शीशियां और अन्य औषधीय अपशिष्ट मेडिकल कचरे को परिसर के अंदर प्रतिदिन जमीन पर खुले में जलाया जा रहा है. इसका खामियाजा कार्यालय के आस पास के लोगो को भुगतना पड़ रहा है। वही आस पास के लोगो ने नाम नहीं छापने कि सर्त में बताया कि परिसर में प्रतिदिन मेडिकल वेस्ट को जलाया जाता है जिससे भीषण बदबू आस पास फैली रहती ही जिसकी शिकायत अधिकारी से कई बार कि गई है लेकिन विभाग के अधिकारी इस पर गंभीर नहीं है। अब देखने वाली बात है कि खबर प्रकाशित होने के बाद इस पर जिम्मेदार अधिकारी गैरजिम्मेदार लोगों पर क्या कार्यवाही करते है?