August 19, 2026
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    शासकीय खंभों पर ‘सफेदी’ से लीपापोती — कार्रवाई या महज़ औपचारिकता?

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    नोटिस का पालन या दिखावा? कई पोलों पर अब भी साफ पढ़ा जा रहा ‘WILD WADI’

    By – नरेश देवांगन

    जगदलपुर, शौर्यपथ। आड़ावाल से कुरंदी मुख्य मार्ग पर शासकीय विद्युत लाइट खंभों पर पेंट के माध्यम से निजी प्रचार लिखे जाने संबंधी खबर “शौर्यपथ” में प्रकाशित हुए लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य होती दिखाई नहीं दे रही है। खबर के प्रकाशन के बाद संबंधित विभाग ने संज्ञान लेने, नोटिस जारी करने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

    मौके पर अवलोकन करने पर यह सामने आया कि खंभों पर लिखे गए प्रचार पर सफेद रंग पोतकर उसे ढकने का प्रयास किया गया है। हालांकि, कई स्थानों पर “WILD WADI” नाम अब भी स्पष्ट रूप से पढ़ा जा सकता है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मूल पेंट को तकनीकी तरीके से हटाने के बजाय उस पर रंग चढ़ाया गया है।

    विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार विभाग ने मामले की आंतरिक गणना कराई है, जिसमें लगभग 130 शासकीय खंभों पर उक्त नाम पेंट से लिखे जाने की जानकारी सामने आई है। यदि यह तथ्यात्मक रूप से सही है, तो यह उल्लंघन सीमित नहीं बल्कि व्यापक स्तर का माना जाएगा। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या नोटिस जारी कर आंशिक सफेदी कर देना पर्याप्त अनुपालन की श्रेणी में माना जा सकता है?

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शासकीय संपत्ति पर बिना विधिवत अनुमति किसी भी प्रकार का लेखन या विज्ञापन नियमानुसार प्रतिबंधित है। इसलिए कार्रवाई भी ऐसी होनी चाहिए जो स्पष्ट, पारदर्शी और उदाहरणात्मक हो। कई खंभों पर उभरते अक्षर संकेत देते हैं कि कार्य पूर्णतः संतोषजनक नहीं हुआ है।

    दूसरे मार्ग पर नए फ्लेक्स, उठे नए सवाल

    इसी बीच हाटगुड़ा से माड़पाल मार्ग पर मुख्य विद्युत खंभों पर “SIDDHARTH COMPUTER ACADEMY” के फ्लेक्स लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह हालिया स्थापना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक मामले में सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई होती, तो संभवतः अन्य स्थानों पर इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं होती।

    यदि संबंधित संस्थान या व्यक्ति के पास विधिवत अनुमति है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि अनुमति नहीं है, तो नियमानुसार समान रूप से कार्रवाई अपेक्षित है। नागरिकों का मत है कि नियमों का अनुपालन सभी पर समान रूप से होना चाहिए, अन्यथा कार्रवाई की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं।

    पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा

    प्रशासनिक कार्रवाई का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए। यदि लगभग 130 खंभों पर उल्लंघन दर्ज हुआ है, तो सुधारात्मक और संभावित दंडात्मक कदमों की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति पर भी रोक लगेगी।

    यह खबर किसी व्यक्ति या संस्था विशेष के विरुद्ध आरोप स्थापित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि शासकीय संपत्ति के संरक्षण और नियमों के समान अनुपालन की अपेक्षा को रेखांकित करने के लिए प्रकाशित की जा रही है।

    अब सबकी निगाहें संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या पेंट प्रचार को पूर्णतः तकनीकी तरीके से हटाकर एक स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया जाएगा, या वर्तमान स्थिति को ही पर्याप्त मान लिया जाएगा?

    सवाल सीधा है: क्या नियम व्यवहार में भी उतनी ही गंभीरता से लागू होंगे, जितनी कागज़ों में दिखाई देते हैं?

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