जगदलपुर से नरेश देवांगन की रिपोर्ट
जगदलपुर, शौर्यपथ। साय सरकार भले ही प्रदेश में सुशासन का ढोल पीट रही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत जगदलपुर के हाटगुड़ा क्षेत्र में उस ढोल की पोल खोलती साफ दिखाई दे रही है। लालबाग से गणपति रिसोर्ट होते हुए बस्तर सांसद के गृहग्राम जाने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों विकास नहीं, बल्कि धूल और लापरवाही की मिसाल बन चुका है।
PMGSY विभाग द्वारा चलाए जा रहे सड़क मरम्मत कार्य में निर्माण कम और “धूल का आतंक” ज़्यादा नजर आ रहा है। सड़क को उधेड़कर छोड़ दिया गया है, लेकिन डस्ट कंट्रोल के नाम पर न पानी का छिड़काव हो रहा है, न ही डामरीकरण का काम शुरू किया जा रहा है। नतीजा—दिनभर गुजरने वाले वाहनों से उड़ती घनी धूल ने हाटगुड़ा के दुकानदारों और रहवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। कुछ ही घंटों में दुकानों, घरों और सामानों पर धूल की मोटी परत जम जा रही है। स्थिति ऐसी है मानो यह कोई सड़क निर्माण स्थल नहीं, बल्कि धूल उत्पादन केंद्र बन गया हो। सांस लेना मुश्किल हो रहा है, आंखों में जलन, खांसी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
हाटगुड़ा के दुकानदारों का कहना हैं कि धूल के कारण न सिर्फ उनका सामान खराब हो रहा है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। बावजूद इसके, PMGSY विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ज़मीनी हालात से पूरी तरह बेखबर बने हुए हैं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यह वही मार्ग है, जिससे होकर बस्तर सांसद अपने गृहग्राम आते-जाते हैं, फिर भी PMGSY विभाग में कोई संवेदनशीलता नजर नहीं आ रही। जनता पूछ रही है—जब सांसद के मार्ग की यह हालत है, तो बाकी इलाकों का क्या हाल होगा?
काम के दौरान पानी तक न डालना, और डामर का काम शुरू न करना किसी तकनीकी कारण का नहीं, बल्कि सीधी लापरवाही और उदासीनता का संकेत है। हैरानी की बात यह है कि सब कुछ सामने होते हुए भी न विभाग हरकत में है, न जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया दिखाई दे रही है। काम के नाम पर धूल उड़ रही है, और जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठकर सुशासन की फाइलें झाड़ रहे हैं।
PMGSY विभाग के साथ-साथ बस्तर सांसद की चुप्पी भी अब सवालों के घेरे में है। क्या जनता की सेहत, रोज़मर्रा की परेशानी और नुकसान अब प्राथमिकता की सूची से बाहर हो चुके हैं? हाटगुड़ा के लोग अब सिर्फ सड़क नहीं, जवाब और जिम्मेदारी भी मांग रहे हैं।