Print this page

जनता की सेहत ‘सड़क’ से है कम, विकास की आड़ में जनता का घोंट रहे दम! ​

  • devendra yadav birth day

कोंडागांव में साय सरकार के ‘सुशासन’ को पलीता लगा रहे लापरवाह अफसर; बायपास के नाम पर बच्चों के फेफड़ों में भरा जा रहा डामर का जहर?

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। कहते हैं विकास की राह सुनहरी होती है, लेकिन कोंडागांव में यह राह 'धूल' और 'धुएं' से भरी है। नए बस स्टैंड के पीछे संचालित डामर फैक्ट्री ने इलाके में ऐसा तांडव मचाया है कि लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। हैरानी की बात यह है कि जहाँ सूबे के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी जनता को 'रामराज्य' और 'सुशासन' का अहसास कराने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं, वहीं कोंडागांव के कुछ गैर-जिम्मेदार नुमाइंदे अपनी कार्यशैली से इस सुशासन को 'कुशासन' की ओर धकेलने की सुपारी लिए बैठे हैं।

 

​अफसरों का अजीब तर्क: ‘सड़क बनने तक जहर पीना मजबूरी है’

इलाके के लोग जब धूल से बिलबिलाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के पास गुहार लगाने पहुँचते हैं, तो उन्हें जवाब मिलता है— "सड़क निर्माण तक कुछ दिन तो सहना पड़ेगा।" सवाल यह है कि क्या "कुछ दिन" के नाम पर प्रदूषण के नियमों को सूली पर चढ़ाया जा सकता है? क्या विकास की परिभाषा में आम आदमी की सेहत का कोई मोल नहीं है? इन अफसरों के तर्क सुनकर ऐसा लगता है मानो कोंडागांव की जनता की सेहत की कीमत इन सड़कों से भी कम आंकी गई है।

 

​सुशासन के नाम पर 'कागजी' छिड़काव

स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में धूल नियंत्रण के उपाय सिर्फ कागजों पर 'लहलहा' रहे हैं। जमीन पर न तो पानी का छिड़काव दिख रहा है और न ही सामग्री की कवरिंग। साय सरकार की मंशा अपनी जनता को हर सुख-सुविधा देने की है, लेकिन ग्राउंड जीरो पर बैठे कुछ लोग सरकार की साख को धूल में मिलाने का काम कर रहे हैं। घरों में रखे खाने पर धूल की परत जम रही है और स्कूलों में डस्ट का सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

 

​चर्चा आम है: 'साहब' का बंगला होता तो क्या यही होता?

शहर के चौक-चौराहों पर यह तंज आम है कि यदि यह डस्ट का गुबार किसी रसूखदार 'साहब' के बंगले की ओर मुड़ जाता, तो अब तक फैक्ट्री पर नोटिसों और जुर्मानों की झड़ी लग चुकी होती। लेकिन यहाँ मामला 'आम आदमी' का है, जिसके हिस्से में शायद सिर्फ धूल फांकना ही लिखा है। ​अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'धूलबाज' रवैये को कब तक संरक्षण देता है या फिर सुशासन के संकल्प को दोहराते हुए जनता को इस नरक से मुक्ति दिलाता है।

Rate this item
(2 votes)
Naresh Dewangan

Latest from Naresh Dewangan