जनजातीय आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी ने किया शुभारंभ, रैंप शो में दिखा आदिवासी परिधानों का आकर्षण
रायपुर / शौर्यपथ /
राजधानी रायपुर में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के उत्सव ‘आदि परब’ का रंगारंग आगाज हो गया। दो दिवसीय इस आयोजन में छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उत्सव को जीवंत बना रहे हैं।
इस वर्ष आदि परब की थीम ‘परम्परा से पहचान तक’ रखी गई है। आयोजन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और जीवन शैली को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में छत्तीसगढ़ राज्य जनजातीय आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी ने किया। इस अवसर पर राज्य अंत्यावसायी आयोग के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कुमार बेहरा, प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, टीआरटीआई के संचालक श्री हिना अनिमेष नेताम, श्रीमती गायत्री नेताम सहित विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग उपस्थित रहे।
रैंप शो में दिखी जनजातीय संस्कृति की झलक
आदि परब के उद्घाटन अवसर पर जनजातीय युवाओं ने पारंपरिक आदिवासी परिधानों में सजे-धजे रैंप शो के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपराओं का आकर्षक प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगे परिधान, आभूषण और पारंपरिक शैली ने दर्शकों का खूब मन मोह लिया और लोगों ने उत्साह के साथ इस प्रस्तुति का आनंद लिया।
प्रदर्शनी और हाट बना आकर्षण का केंद्र
आदि परब में जनजातीय समाज के खान-पान, वेशभूषा, पारंपरिक कलाकृतियों और हस्तशिल्प की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई है, जो लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
कार्यक्रम के अंतर्गत “आदि रंग – जनजातीय चित्रकला महोत्सव” का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक चित्रकला की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।
इसी तरह “आदि-हाट जनजातीय शिल्प मेला” भी लगाया गया है, जहां छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जा रहा है।
समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री
आदि परब का समापन 14 मार्च को होगा। समापन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, जनजातीय समाज के पदाधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।