ओस्लो / नई दिल्ली / एजेंसी /
भारत-नॉर्डिक तृतीय शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की। इस मुलाकात में दोनों देशों ने अपने संबंधों को डिजिटलीकरण और सतत विकास आधारित रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। भारत और फिनलैंड ने माना कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), 5G/6G तकनीक, क्वांटम टेक्नोलॉजी और हरित विकास निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
व्यापार और तकनीकी सहयोग पर बड़ा फोकस
दोनों देशों ने व्यापार एवं निवेश, अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा, चक्रीय अर्थव्यवस्था, नवाचार, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में जारी सहयोग की समीक्षा की। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य दोहराया। फिनलैंड ने अपने तकनीकी क्षेत्र में भारतीय पेशेवरों के योगदान की खुलकर सराहना की। वहीं, दोनों पक्षों ने तकनीकी कंपनियों की बढ़ती साझेदारी और एक-दूसरे के बाजारों में विस्तार को सकारात्मक संकेत बताया।
गांधीनगर में होगा विश्व चक्रीय आर्थिक फोरम
बैठक की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारत और फिनलैंड ने सितंबर 2026 में गुजरात के गांधीनगर में विश्व चक्रीय आर्थिक फोरम की संयुक्त मेजबानी करने की घोषणा की। इसे हरित अर्थव्यवस्था और सतत विकास के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत-यूरोपीय संघ संबंधों पर भी चर्चा
दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों में समन्वय मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
भारत और फिनलैंड के बीच संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, तकनीकी सहयोग और पारस्परिक विश्वास पर आधारित माने जाते हैं। फिनलैंड, यूरोपीय संघ और नॉर्डिक क्षेत्र में भारत का एक अहम रणनीतिक साझेदार बनकर उभर रहा है।