दुर्ग। शौर्यपथ। नगर पालिका निगम के चुनाव प्रचार अब अपने अंतिम दौर में पहुंचता जा रहा है मतदान की तारीख में अब 5 दिन शेष रह गए हैं ऐसे में पार्षद प्रत्याशियों की धड़कने भी तेज हो रही है और आम जनता मौन रहकर उनकी चिताओं को बढ़ा रही हैं शहर के कुछ वर्ड ऐसे हैं जो शुरू से ही विवादित वार्ड के रूप में सामने आ गए राजनीतिक विवाद की स्थिति के कारण इन वार्डो के प्रत्याशी आराम से ही मानसिक तनाव से गुजरने लगे ऐसा ही एक बार दुर्गा नगर पालिक निगम का 45 नंबर वार्ड है 45 नंबर वार्ड से कांग्रेस पार्टी में घमासांग की जो जंग आरंभ हुई वह दुर्ग से लेकर दिल्ली तक पहुंच गई और जीत अंततः एक बार फिर पूरा बंगले की हुई इस बार से एक बार फिर रणछोड़ दास के रूप मे पिछले चुनाव मे प्रसिद्ध हुए राजेश शर्मा मैदान मे है. 2019 के नगर निगम चुनाव में अप्रत्यक्ष रूप से राजेश शर्मा ने स्वयं ही स्वीकार कर लिया था कि वह उनके द्वारा वार्ड नंबर 45 में कोई कार्य नहीं हुआ शायद यही कारण रहा कि राजेश शर्मा पिछले बार महिला आरक्षण के बाद वार्ड नंबर 45 से चुनाव ना लड़का वार्ड नंबर 46 से श्रीमती कमला देवी शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा और वार्ड नंबर 46 में आम जनता के लिए कार्य कर रहे तात्कालिक पार्षद लीलाधर पाल को वार्ड नंबर 45 से चुनावी मैदान में कांग्रेस ने भेज दिया राजेश शर्मा के कार्यकाल की असफलता का परिणाम या रहा की लीलाधर पाल जैसा सक्रिय कार्यकर्ता भी अपनी धर्म पत्नी को वार्ड नंबर 45 से चुनाव नहीं जीत सका पर समय का चक्र देखिए एक बार फिर आरक्षण के चलते वार्ड नंबर 46 पिछड़ा वर्ग में आरक्षित हो गया जिसके कारण राजेश शर्मा कोई अवार्ड छोड़ना पड़ा और वार्ड नंबर 45 सामान्य सीट होने पर एक बार फिर अपनी असफलता को सफल बनाने की कोशिश में वार्ड नंबर 45 से चुनावी मैदान में है वार्ड नंबर 45 की जनता में चर्चाओं का बाजार कम है की 5 साल में राजेश शर्मा ने इस वार्ड में कुछ कार्य किया नहीं और अपनी असफलता को छुपाने के लिए वार्ड नंबर 40 पहुंच गए तब कांग्रेस की स्थिति कुछ अलग थी वार्ड नंबर 46 में स्वर्गीय मोतीलाल बोरा का निवास स्थान होने और स्वर्गीय मोतीलाल वोरा की एक अलग पहचान होने के कारण राजेश शर्मा की माता श्रीमती कमला शर्मा को आसान सी जीत मिल गई परंतु वर्तमान समय में कांग्रेस के अंदरूनी घमासान और पिछले बार वार्ड को छोड़ने का जो कारण रहा हुआ फिर घूम के सामने आ गया परंतु कहते हैं कि नेता अपने करीबी को किसी भी हाल में टिकट दिलाने में पीछे नहीं हटते उनके लिए पार्टी और जीत कोई मायने नहीं रखती नहीं संगठन सिर्फ मैं के दाम में एक बार फिर राजेश शर्मा को वार्ड नंबर 45 से काफी विवादों के बाद टिकट मिल गया परंतु इस बार वार्ड नंबर 45 में राजेश शर्मा का मुकाबला संजय अग्रवाल से है संजय अग्रवाल पहली बार चुने मतदान में उतरे हैं और भारतीय जनता पार्टी क्या मजबूत संगठन उनके साथ है वही राजेश शर्मा की जंग पहले कांग्रेस से है फिर अपनी 5 साल पहले की असफलताओं से ऐसे में राजेश शर्मा के चुनावी जंग में उतरने से कांग्रेस की यह सीट भाजपा के खाते में जाते हुए नजर आ रही है जिसकी दुआ कांग्रेस के कई कार्यकर्ता भी कर रहे हैं सभी को मालूम है कि राजेश शर्मा कांग्रेस के आंदोलन में एवं संगठन के कार्यों में सक्रिय नहीं रहते उनकी सक्रियता से सिर्फ गोरा बंगले से है ऐसे में कांग्रेसी भी यही दुआ कर रहे हैं कि इस बार से राजेश शर्मा की हर हो अब देखना यह है कि आने वाले 11 फरवरी को मतदान के दिन कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की दुआ काम आएगी या फिर राजेश शर्मा की मेहनत क्योंकि अब पीछे वह बड़ा नाम नहीं रहा जिस नाम के भरोसे राजेश शर्मा सालों से कांग्रेस की राजनीति करते हुए कभी पार्षद तो कभी एल्डर मां की भूमिका में नजर आते हैं असली परीक्षा राजेश शर्मा की अब है जिसमें कितने सफल होते हैं यह 15 फरवरी को सामने आ जाएगा और उनकी काबिलियत भी आम जनता के साथ-साथ कांग्रेस संगठन के सामने प्रदर्शित हो जाएगा इंतजार परिणाम का है जिसके लिए अब चंद दिन ही बचे हैं ।