July 25, 2026
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    तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर: AIADMK को तगड़ा झटका, TVK का बढ़ता दबदबा

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    तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला है। अन्नाद्रमुक (AIADMK) के तीन विधायकों—मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम), पी. सत्यभामा (धरापुरम) और एस. जयकुमार (पेरुंदुरई)—ने अपने पद से इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) का दामन थाम लिया है। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद यह घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता संतुलन बदलने वाला माना जा रहा है।

    विश्वास मत से शुरू हुई राजनीतिक बगावत

    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार ये तीनों विधायक उस बागी गुट का हिस्सा थे जिसने हाल ही में विधानसभा में हुए विश्वास मत के दौरान TVK सरकार के पक्ष में मतदान किया था। उस समय ही यह संकेत मिल गया था कि AIADMK के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। अब इन विधायकों का औपचारिक रूप से TVK में शामिल होना इस बगावत को खुला राजनीतिक संदेश बना चुका है।

    इस्तीफा देने के तुरंत बाद तीनों नेताओं ने सचिवालय पहुंचकर TVK के वरिष्ठ नेता और मंत्री आधव अर्जुन से मुलाकात की तथा पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान TVK नेतृत्व ने इसे “जनता के विश्वास और विकास की राजनीति की जीत” बताया।

    उपचुनाव में TVK को बड़ा फायदा?

    इन तीन सीटों के खाली होने के साथ-साथ मुख्यमंत्री विजय द्वारा पहले ही तिरुचि ईस्ट सीट छोड़ने के कारण अब राज्य में कुल चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना तय माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा माहौल TVK के पक्ष में दिखाई दे रहा है।

    मुख्यमंत्री विजय की लोकप्रियता, युवा मतदाताओं का समर्थन और सरकार की आक्रामक राजनीतिक रणनीति TVK को उपचुनाव में मजबूत स्थिति में ला सकती है। यदि TVK इन सीटों पर जीत दर्ज करती है तो विधानसभा में उसकी स्थिति पहले से अधिक प्रभावशाली हो जाएगी और विपक्ष का दबाव और कमजोर पड़ सकता है।

    AIADMK और DMK का तीखा हमला

    इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। AIADMK और DMK दोनों ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए “हॉर्स ट्रेडिंग” यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है।

    AIADMK नेताओं का कहना है कि सत्ता के दबाव और राजनीतिक प्रलोभन के जरिए विपक्षी विधायकों को तोड़ा जा रहा है। वहीं DMK ने भी सरकार पर लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप लगाया है।

    हालांकि TVK ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष के विधायक जनता के हित में और विकास की राजनीति से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हो रहे हैं।

    विजय की राजनीति का नया दौर

    फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए मुख्यमंत्री विजय अब केवल लोकप्रिय चेहरा नहीं बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के केंद्र में स्थापित होते दिखाई दे रहे हैं। लगातार बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यता और विपक्षी दलों में सेंध लगाने की रणनीति ने TVK को तेजी से मजबूत किया है।

    आने वाले उपचुनाव अब केवल चार सीटों की लड़ाई नहीं रह गए हैं, बल्कि यह तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत माने जा रहे हैं। यदि TVK यहां जीत दर्ज करती है तो राज्य की राजनीति में विजय का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है, जबकि AIADMK के लिए यह संकट और गहरा सकता है।

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