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चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति के इतिहास में साल 2026 एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज किया गया है, जिसने दशकों पुराने द्रविड़ियन किलों की दीवारों को हिलाकर रख दिया। अभिनेता से राजनेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे पर्दे के पीछे खड़े जिस शख्स की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह हैं— प्रशांत किशोर (PK)।
प्रशांत किशोर, जिन्होंने खुद को कभी औपचारिक रणनीतिकार नहीं बल्कि एक "शुभचिंतक" कहा, उन्होंने विजय की लोकप्रियता को एक ऐसी चुनावी मशीनरी में तब्दील कर दिया, जिसने DMK और AIADMK के पारंपरिक प्रभुत्व को ध्वस्त कर दिया।
1. अकेले लड़ने का साहसिक जुआ (The Solo Warrior Ethos)
पीके की सबसे महत्वपूर्ण सलाह थी— "गठबंधन के जाल से बाहर निकलना।" जहाँ नए दल अक्सर किसी बड़े खेमे का सहारा ढूंढते हैं, वहीं किशोर ने विजय को सभी 234 सीटों पर अकेले लड़ने का आत्मविश्वास दिया। उनका तर्क स्पष्ट था: यदि आप विकल्प बनना चाहते हैं, तो आपको पुराने विकल्पों से अलग दिखना होगा। इस रणनीति ने TVK को एक स्वतंत्र और स्वच्छ छवि प्रदान की।
2. फैन क्लब से कैडर तक का सफर
विजय के पास लाखों प्रशंसकों की फौज थी, लेकिन चुनाव रैलियों की भीड़ को वोटों में बदलना एक चुनौती थी। प्रशांत किशोर ने 'विजय मक्कल इयक्कम' (VMI) के उत्साही प्रशंसकों को अनुशासित बूथ-स्तरीय कैडर में बदल दिया। उन्होंने 'बूथ मैपिंग' और 'वोटर सेगमेंटेशन' जैसे आधुनिक औजारों का इस्तेमाल कर स्टारडम को एक जमीन पर काम करने वाली 'पॉलिटिकल मशीन' बना दिया।
3. 'द्रविड़ियन थकान' को भांपना और 'नया विकल्प' पेश करना
तमिलनाडु की जनता दशकों से दो दलों के बीच बारी-बारी से सत्ता का खेल देख रही थी। पीके ने इस "राजनीतिक थकान" को सही समय पर पहचाना। उन्होंने विजय को महज एक अभिनेता नहीं, बल्कि "तमिलनाडु की नई उम्मीद" के रूप में ब्रांड किया। रोजगार, शिक्षा और नशामुक्त तमिलनाडु जैसे ठोस मुद्दों पर आधारित रोडमैप ने युवाओं और तटस्थ मतदाताओं को टीवीके की ओर आकर्षित किया।
4. भविष्यवाणी जो हकीकत बनी
फरवरी 2025 में प्रशांत किशोर ने एक साहसी दावा किया था कि यदि विजय अकेले लड़ते हैं, तो वह तमिलनाडु जीत सकते हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा था कि— "विजय को जिताने के बाद मैं तमिलनाडु में महेंद्र सिंह धोनी से भी ज्यादा लोकप्रिय बिहारी बन जाऊंगा।" आज, मई 2026 के चुनावी नतीजों ने इस भविष्यवाणी पर मुहर लगा दी है। भले ही पीके बिहार में अपनी पार्टी 'जन सुराज' में व्यस्त रहे, लेकिन उनके द्वारा खींची गई शुरुआती लकीर ही जीत का मार्ग बनी।
निष्कर्ष: एक नए युग का सूत्रपात
प्रशांत किशोर के रणनीतिक मार्गदर्शन और विजय के करिश्माई नेतृत्व के मेल ने यह साबित कर दिया कि सही माइक्रो-मोबिलाइजेशन और स्पष्ट नैरेटिव के साथ किसी भी राजनीतिक दुर्ग को जीता जा सकता है। 2026 की यह जीत केवल एक सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए 'कल्ट' के उदय की कहानी है।
मुख्य बिंदु (Quick Highlights):
रणनीति: सभी 234 सीटों पर बिना गठबंधन के चुनाव लड़ना।
बदलाव: फैन क्लब को बूथ-स्तर की चुनावी मशीनरी में तब्दील करना।
एजेंडा: शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार मुक्त शासन पर ध्यान।
परिणाम: तमिलनाडु की राजनीति में दशकों बाद एक तीसरे ध्रुव का पूर्ण उदय।
चेन्नई /
तमिलनाडु की सियासत में आज एक ऐसा सूर्योदय हुआ है जिसने पिछले पांच दशकों से चले आ रहे 'द्रविड़ियन' समीकरणों को जड़ से हिला दिया है। सिल्वर स्क्रीन पर अपनी एक मुस्कान से करोड़ों दिलों को धड़कने वाले जोसेफ विजय चंद्रशेखर, जिन्हें दुनिया 'थलपति' के नाम से जानती है, अब रील लाइफ के 'कमांडर' से रियल लाइफ के 'किंग' बन चुके हैं। उनकी नवनिर्मित पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) ने 2026 के विधानसभा चुनावों में वह कर दिखाया है जिसे कल तक राजनीतिक पंडित 'असंभव' मान रहे थे।
चुनावी आँकड़े: 'विजयरथ' की अविश्वसनीय रफ्तार
234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है। ताजा परिणामों ने राज्य को चौंका दिया है:
TVK की सुनामी: विजय की पार्टी 108 (107-109) सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है।
दिग्गजों का पतन: सबसे बड़ा उलटफेर कोलथुर सीट पर हुआ, जहाँ TVK के नवागंतुक वी.एस. बाबू ने मौजूदा मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को हराकर द्रविड़ राजनीति के सबसे बड़े स्तंभ को हिला दिया।
पेरम्बूर से विजय की हुंकार: स्वयं विजय ने पेरम्बूर सीट से DMK के कद्दावर नेता आर.डी. शेखर को भारी मतों के अंतर से शिकस्त देकर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता पर मुहर लगा दी है।
एक सितारे का 'राजनेता' में रूपांतरण
विजय का उदय कोई संयोग नहीं, बल्कि 15 वर्षों की सोची-समझी रणनीति का परिणाम है:
जमीनी नींव (2009-2021): विजय ने अपने प्रशंसक क्लबों (VMI) को केवल फिल्म प्रचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें जनकल्याण के औजार में बदला। 2021 के स्थानीय चुनावों में मिली जीत ने ही संकेत दे दिया था कि 'थलपति' की सेना तैयार है।
सिनेमा का त्याग: फरवरी 2024 में TVK की घोषणा के साथ विजय ने अपने करियर के चरम पर फिल्मों से संन्यास लेने का साहसी फैसला किया, जिसने जनता को संदेश दिया कि वे राजनीति में 'पार्ट-टाइम' नहीं बल्कि पूर्णतः समर्पित सेवक के रूप में आए हैं।
वैचारिक त्रिकोण: विजय ने अपनी राजनीति को अम्बेडकर, पेरियार और कामराज के सिद्धांतों पर टिकाया है। सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे ने युवाओं और महिलाओं को सबसे ज्यादा आकर्षित किया।
भविष्य की राह: क्या 'किंगमेकर' बनेंगे 'किंग'?
यद्यपि TVK बहुमत के आंकड़े (118) से मात्र 10 सीटें दूर है, लेकिन सबसे बड़ा दल होने के नाते सत्ता की चाबी विजय के हाथ में ही है।
विश्लेषकों का मानना है: "विजय अब राज्य के निर्विवाद केंद्र बिंदु हैं। कांग्रेस और अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन की संभावनाओं के बीच, यह लगभग तय है कि तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री के रूप में जोसेफ विजय चंद्रशेखर शपथ लेंगे।"
निष्कर्ष:
एम.जी. रामचंद्रन (MGR) और जयललिता के बाद, विजय तीसरे ऐसे अभिनेता बने हैं जिन्होंने तमिलनाडु की जनता के सर पर अपनी लोकप्रियता का जादू इस कदर चलाया है। यह जीत केवल एक पार्टी की जीत नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए 'तीसरे ध्रुव' का उदय है।
तमिलनाडु अब एक नए नेतृत्व की ओर देख रहा है। क्या थलपति अपनी फिल्मों की तरह राज्य की समस्याओं का 'क्लाइमेक्स' बदल पाएंगे? पूरी दुनिया की नजरें अब चेन्नई के 'विजय निवास' पर टिकी हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल में शासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक भावनात्मक उदाहरण सामने आया। सरोधी की रहने वाली सरलाबाई मरावी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष अपनी समस्या रखी और कुछ ही पलों में उसका समाधान भी मिल गया।
सरलाबाई मरावी, पति लल्लूराम मरावी, एक साधारण कृषक परिवार से हैं। उनके पास लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि है और परिवार में उनका एक बेटा है। खेती ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है।
चौपाल के दौरान सरलाबाई ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 1.50 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने जैसे ही यह बात सुनी, उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और तुरंत निराकरण सुनिश्चित कराया।
अपनी समस्या का त्वरित समाधान होते देख सरलाबाई भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बात इतनी जल्दी सुनी जाएगी और समाधान भी मिल जाएगा। उनकी आंखों में संतोष और चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी।
सरलाबाई ने यह भी बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे घरेलू खर्चों में सहारा मिलता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें महसूस हुआ कि सरकार वास्तव में गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनका समाधान कर रही है।
ग्राम सरोधी की यह घटना इस बात का सजीव प्रमाण है कि सुशासन तिहार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में भरोसा और राहत लेकर आने वाली पहल बन चुका है।
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं-12वीं के मेधावी विद्यार्थियों का किया सम्मान
रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हौसला बुलंद रखना सबसे आवश्यक है।
बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। अधिकांश विद्यार्थियों ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने की इच्छा व्यक्त की, वहीं कुछ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और न्यायिक सेवा में जाने का संकल्प व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों के सपनों की सराहना करते हुए कहा कि सपना देखना और उसे लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करना ही सफलता की कुंजी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि समर्पण, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि के लिए विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं शिक्षकों को भी बधाई देते हुए कहा कि बच्चों की सफलता के पीछे उनके मार्गदर्शन, सहयोग और त्याग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उत्कृष्ट विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री से मिलने का मिला अवसर
इस अवसर पर जिले के कक्षा 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों में वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करमडीहा की कुमारी प्रतिभा गुप्ता, रामचंद्रपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर की कुमारी स्नेहा कुशवाहा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सनवाल के सोनू, वाड्रफनगर के श्री कृष्णा, आदर्श हायर सेकंडरी विद्यालय बलंगी की कुमारी प्रिया लता कश्यप तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्तीकला के अजय गुप्ता, कक्षा 10वीं के मेधावी विद्यार्थियों में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर के आर्यन गुप्ता, नेशनल पब्लिक इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल रजखेता की कुमारी आराधना पटेल, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रघुनाथनगर की कुमारी रोशनी कांशी, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सेमरा कुसमी की आलिया परवीन तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय रामानुजगंज की आरजू परवीन को मुख्यमंत्री से मिलने और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।
रायपुर/कवर्धा।
सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत लोखान पंचायत के आश्रित बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल में आम के पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने पीएम जनमन योजना सहित विभिन्न कार्यों का निरीक्षण कर योजनाओं की जमीनी प्रगति जानी।
चौपाल में बड़ी संख्या में उपस्थित स्व-सहायता समूह की महिलाओं—‘लखपति दीदियों’—की आर्थिक प्रगति देखकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जताई और उन्हें आगे और मेहनत कर “करोड़पति बनने” की दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरित किया। गांव में 58 लखपति दीदियां विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। महिलाओं ने महुआ, चार और सब्जियां भेंट कर अपनी आत्मीयता व्यक्त की।
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन, पीएम आवास और बिहान योजना जैसे कार्यक्रमों के लाभार्थियों से चर्चा कर फीडबैक लिया। उन्होंने पाया कि दूरस्थ अंचलों तक योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है।
चौपाल में एक भावनात्मक क्षण तब आया जब एक महिला ने अपने नवजात शिशु का नामकरण करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने बच्चे का नाम “रविशंकर बघेल” रखा और आशीर्वाद स्वरूप राशि प्रदान की, जिस पर चौपाल तालियों से गूंज उठा।
इस दौरान मेधावी विद्यार्थियों को भी प्रोत्साहित किया गया। 94.5% अंक प्राप्त करने वाले छात्र राजेंद्र मसराम और कक्षा 9वीं की छात्रा हेम कुमारी को मुख्यमंत्री ने शुभकामनाएं देते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
ग्रामीणों की मांग पर मुख्यमंत्री ने कमराखोल में सामुदायिक भवन, रामखिलावन के घर से देवसरा तक लगभग 6 किमी मिट्टी-मुरुम सड़क, मुक्तिधाम शेड, महतारी सदन तथा मिशन तालाब गहरीकरण (ट्यूबवेल सहित) की घोषणाएं कीं।
चौपाल में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार, विशेष सचिव रजत बंसल, कलेक्टर गोपाल वर्मा, पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारी और ग्रामीण उपस्थित रहे।
कवर्धा । शौर्यपथ
सुशासन तिहार के तहत कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निर्माणाधीन पंचायत भवन का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वे सीधे श्रमिकों के बीच पहुंचे और कार्यों की समीक्षा के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का फीडबैक लिया।
निरीक्षण के दौरान महिला श्रमिकों ने मुख्यमंत्री को दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए उनके साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया। श्रमिकों द्वारा लाए गए पारंपरिक व्यंजन—बोरे बासी, रोटी, चना भाजी, चरोटा भाजी, मुनगा बड़ी और आम की चटनी—का उन्होंने स्वाद लिया।
भोजन के दौरान मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से जानकारी ली। श्रमिक महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति सामने आई।
गांव की समस्याओं पर चर्चा के दौरान महिलाओं ने पेयजल संकट की ओर ध्यान दिलाया। इस पर मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर से जानकारी लेकर निर्देश दिए कि 26 गांवों के लिए प्रस्तावित पेयजल योजना को शीघ्र स्वीकृति देकर क्रियान्वित किया जाए, ताकि ग्रामीणों को समय पर राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से आमजन तक पहुंचे और स्थानीय समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से किया जाए।
कोलकाता/रायपुर / शौर्यपथ /
भाजपा प्रदेश मंत्री जितेन्द्र वर्मा ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में पार्टी की जीत को “विकास, स्थिरता और पारदर्शिता के पक्ष में स्पष्ट जनादेश” बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के मार्गदर्शन का परिणाम है।
वर्मा ने बताया कि उन्होंने जनवरी से मई 2026 तक दुर्गापुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में प्रवास कर बूथ मैनेजमेंट से लेकर जनसंपर्क तक सक्रिय भूमिका निभाई। प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय के सानिध्य में कार्य करते हुए उन्होंने कई क्षेत्रों में संगठन को मजबूत किया।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में जीत को “भय और हिंसा के माहौल के विरुद्ध लोकतांत्रिक साहस की जीत” बताया, जहां मतदाताओं ने निडर होकर अपने अधिकार का प्रयोग किया। असम और पुडुचेरी के परिणामों को उन्होंने डबल इंजन सरकार के विकास मॉडल की स्वीकार्यता बताया।
वर्मा ने कहा कि यह विजय समर्पित कार्यकर्ताओं के परिश्रम को समर्पित है और “सबका साथ, सबका विकास” के संकल्प पर जनता के विश्वास की पुनर्पुष्टि है।
रायपुर / शौर्यपथ / उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में भाजपा-एनडीए की जीत को “ऐतिहासिक जनादेश” बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, सुशासन और जमीनी कार्यकर्ताओं के समर्पण पर जनता की स्पष्ट मुहर है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जनता ने विकास मॉडल और सांस्कृतिक अस्मिता के पक्ष में मतदान कर “सोनार बांग्ला” के संकल्प को बल दिया है। वहीं असम में लगातार तीसरी जीत को उन्होंने स्थिर नेतृत्व और डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों की स्वीकृति बताया। साव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने “नकारात्मक और तुष्टिकरण की राजनीति” को खारिज किया है।
पुडुचेरी में एनडीए की सफलता पर उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र-राज्य समन्वय से विकास के नए आयाम स्थापित होंगे।
उप मुख्यमंत्री साव, जिन्हें असम के लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रभार मिला था, ने बताया कि क्षेत्र की सभी आठ विधानसभा सीटों—धेमाजी, जोनाई, सिसिरबोरगांव, लखीमपुर, ढकुआखाना, डुमडुमा, सदिया और रोंगोनदी—पर भाजपा प्रत्याशियों ने प्रचंड जीत दर्ज की है, जिसे उन्होंने “राष्ट्रहित और विकास के संकल्प की विजय” करार दिया।
कोण्डागांव / शौर्यपथ /
कोण्डागांव पुलिस ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के गंभीर मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए फरार आरोपी को तमिलनाडु से गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। पुलिस की इस त्वरित और तकनीकी जांच आधारित कार्रवाई की क्षेत्र में सराहना हो रही है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 11 मार्च 2026 को प्रार्थी ने थाना कोण्डागांव में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 9 मार्च की शाम लगभग 6:30 बजे उसकी 16 वर्षीय पुत्री को अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर अपहरण कर लिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना कोण्डागांव में अपराध क्रमांक 71/2026 धारा 137(2) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई।
पुलिस अधीक्षक श्री आकाश श्रीश्रीमल (भा.पु.से.) के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कपील चन्द्रा के मार्गदर्शन तथा एसडीओपी कोण्डागांव श्री सतीश भार्गव एवं थाना प्रभारी निरीक्षक सौरभ उपाध्याय के नेतृत्व में थाना कोण्डागांव और साइबर सेल की संयुक्त टीम गठित की गई।
जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपहृता की लोकेशन तमिलनाडु में ट्रेस की गई। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति से पुलिस टीम तत्काल तमिलनाडु रवाना हुई, जहां से नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया गया।
पूछताछ में आरोपी ने अपहरण कर दुष्कर्म करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने आरोपी विकास मरकाम (19 वर्ष), निवासी जुगानी कलार, थाना फरसगांव, जिला कोण्डागांव को 2 मई 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को देने के बाद 3 मई 2026 को आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
दुर्ग। राजनीति में कथनी और करनी का अंतर जब गहरा हो जाए, तो वह 'असफलता' का प्रमाण बन जाता है। दुर्ग नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल एक विवादित वीडियो और उसके बाद दी गई अपनी 'अजीबोगरीब' सफाई को लेकर चर्चा में हैं।
गाली पर खेद, पर विफलता का क्या?
पिछले दिनों एक ठेले वाले को अपशब्द कहते हुए महापौर का वीडियो वायरल हुआ। इस पर सफाई देते हुए उन्होंने इसे 3 महीने पुराना बताया और कहा कि "लगातार समझाइश के बाद भी ठेला नहीं हटाने पर मुंह से शब्द निकल गए।"
यहाँ सवाल यह नहीं है कि उनके मुंह से क्या निकला, सवाल यह है कि 3 महीने बाद भी वह ठेला वहीं क्यों खड़ा है? यदि शहर की प्रथम नागरिक एक गुमटी नहीं हटवा पा रही हैं, तो क्या इसे उनकी लाचारी माना जाए या प्रशासनिक विफलता? महापौर ने अनजाने में ही सही, पर यह स्वीकार कर लिया है कि दुर्ग में अतिक्रमण हटाने के उनके तमाम दावे केवल 'कागजी शेर' हैं।
अमीरों पर मेहरबानी, गरीबों पर 'जुबानी' वार
महापौर की 'मानवता' और 'कड़े कदम' की थ्योरी उस वक्त हवा हो जाती है, जब नजर शहर के रसूखदारों के अवैध कब्जों पर पड़ती है। जनता पूछ रही है:
ओम ज्वैलर्स ने बरामदे से लेकर सड़क तक जो अवैध साम्राज्य फैलाया है, उस पर महापौर की 'कड़ी कार्रवाई' की धार कुंद क्यों पड़ गई?
गणेश मंदिर के सामने राम रसोई के संचालक द्वारा खुलेआम सड़क पर किए गए निर्माण पर महापौर मौन क्यों हैं?
बस स्टैंड की हजारों स्क्वायर फीट जमीन पर अनुबंध खत्म होने के बाद भी कब्जा जमाए बैठे रसूखदार के साथ महापौर मंच साझा कर उन्हें 'समाजसेवी' का सर्टिफिकेट क्यों बांट रही हैं?
चौतरफा अतिक्रमण: बदहाल दुर्ग की तस्वीर
कुआं चौक से लेकर महाराजा चौक और बोरसी चौक तक, यातायात व्यवस्था दम तोड़ रही है। साईं द्वारा के पास फल दुकानों के कारण जाम की स्थिति हो या शनिवार को चर्च रोड पर लगने वाला अवैध बाजार—प्रशासनिक इच्छाशक्ति पूरी तरह नदारद है। इंदिरा मार्केट के भीतर बड़े व्यापारियों ने सड़कों तक दुकानें सजा ली हैं, लेकिन महापौर केवल 'कपड़ा लाइन' का अतिक्रमण हटाकर अपनी पीठ थपथपा रही हैं।
"क्या आने वाले 4 साल भी इसी तरह 'मौन' रहकर और सोशल मीडिया पर भावनात्मक संदेश देकर बिताए जाएंगे?"
निष्कर्ष: सुशासन या सिर्फ महिमामंडन?
सोशल मीडिया पर चंद समर्थकों द्वारा महापौर का महिमामंडन जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकता। एक तरफ गरीबों को अपशब्द और दूसरी तरफ अवैध कब्जाधारियों को संरक्षण—यह दोहरा मापदंड दुर्ग की जनता देख रही है।
श्रीमती अलका बाघमार को यह समझना होगा कि शहर 'भावनात्मक पोस्ट' से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से चलता है। यदि वह एक कुआं चौक को 3 महीने में अतिक्रमण मुक्त नहीं करा पाईं, तो यह उनकी कार्यशैली पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न है। अब देखना यह होगा कि महापौर अपनी इस 'स्वीकृत असफलता' को सफलता में बदलती हैं या फिर दुर्ग इसी तरह अवैध कब्जों का बंधक बना रहेगा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
