August 04, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    दुर्ग / शौर्यपथ / यूजीसी की नई गाइड लाइन ने नियमित छात्र-छात्राओं की नींद उड़ा दी है। वहीं स्वाध्यायी परीक्षार्थियों के उलझन का भी कोई निवारण नहीं हो पा रहा है। महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए कोरोना महामारी एक तरह से जी का जंजाल बन गई है। छात्र-छात्राएं परीक्षा को लेकर कश्मकश भरे दौर का सामना करने मजबूर हो गये है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच जान बचाने की कवायद के साथ छात्र-छात्राओं को अपनी परीक्षा को लेकर बनी असमंजस्य भरी स्थिति ने बेचैन कर डाला है। ऐसी परिस्थितियों का सामना न केवल महाविद्यालयीन नियमित बल्कि स्वाध्यायी परीक्षार्थियों को भी करना पड़ रहा है। खासकर यूजीसी की नई गाइड लाइन जारी होने के बाद राज्य सरकार के आदेश पर जनरलप्रमोशन पा चुके प्रथम व द्वितीय वर्ष के नियमित छात्र-छात्राओं की बेचैनी बढ़ सी गई है।
    कोरोना संक्रमण को देखते हुए महाविद्यालयीन परीक्षाएं आयोजित नहीं की जा सकी है। छात्र संगठनों की मांग पर राज्य सरकार ने प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को बिना परीक्षा के लिए प्रमोशन दे दिया है। इस बीच यूजीसी ने आगामी सितंबर माह में महाविद्यालयीन परीक्षा आयोजित करने का निर्देश विश्व विद्यालयों को देकर जनरल प्रमोशन पा चुके प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को उलझन में डाल दिया है।
    राज्य शासन ने अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं को जनरल प्रमोशन दिए जाने की मांग पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में यूजीसी की नई गाइड लाइन के आधार पर सितंबर माह में अंतिम वर्ष के लिए परीक्षाएं आयोजित की जा सकती है। फिलहाल कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी महाविद्यालयों में ताला लटक रहा है और छात्र-छात्राओं की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है। लेकिन कोरोना संक्रमण के मामले जिस गति से बढ़ते चले जा रहे हैं उससे सितंबर में परीक्षा आयोजित किए जाने को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। परीक्षाएं होगी भी या नहीं, इस पर कुहांसा बने रहने से छात्र-छात्राओं में बनी असमंजस्य की स्थिति का नकारात्मक असर उनके तैयारी पर होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है।
    यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि महाविद्यालय की स्वाध्यायी परीक्षार्थियों को लेकर अब तक कोई गाइड लाइन जारी नहीं किया गया है। राज्य शासन के आदेश पर प्रथम व द्वितीय वर्ष के नियमित छात्र-छात्राओं को तो जनरल प्रमोशन दे दिया गया है। लेकिन इस स्तर की परीक्षा स्वाध्यायी परीक्षार्थी के रूप में देने की तैयारी में जुटे छात्र-छात्राओं के लिए कोई गाइड लाइन जारी नहीं किए जाने से उनकी दिन का चैन और रातों की नींद उड़ी हुई है।
    परीक्षा कराये जाने के यूजीसी के आदेश को जलाया एनएसयूआई ने
    एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा के आह्वान पर दुर्ग जि़ला अध्यक्ष आदित्य सिंह के निर्देश अनुसार यूजीसी द्वारा छात्रों की परीक्षा करवाये जाने के निर्देश पर पूर्व एसवीटीयू अध्यक्ष एवं प्रदेश सचिव एनएसयूआई आशीष यादव के नेतृत्व में स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय दुर्ग में यूजीसी के निर्देश की प्रति जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। एनएसयूआई के आशीष यादव ने बताया कि देश भर में कोरोना संक्रमण थन नहीं रहा है और केंद्र सरकार के इशारे पर यूजीसी ने परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दे दिए है जो कि के तानाशाही फरमान है। इस समय में परीक्षा आयोजित करना किसी भी तरह से संभव नहीं है और अगर ऐसा होता है तो छात्रों को कोरोना का भय बना रहेगा जिससे उनके रिज़ल्ट और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इस वजह से एनएसयूआई प्रदेश भर में आज यूजीसी के तुग़लकी फरमान का विरोध कर प्रतियाँ जलाकर विरोध कर रही है और परीक्षाएं नहीं आयोजित कराने की मांग करती है। पूर्व में एनएसयूआई की मांग पर राज्य सरकार द्वारा इस महामारी संकट को देखते हुए प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्रों को जनरल प्रमोशन दे दिया गया है। अंतिम वर्ष के छात्रों को भी प्रमोशन देने की मांग यूजीसी और केंद्र सरकार से लगतार की जा रही है।
    दसवी और बारहवी के छात्र भी उलझन में
    ऐसा नहीं कि कोरोना के चलते सिर्फ महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएं परेशान हैं, बल्कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों में भी बेचैनी का आलम है। इनकी उलझन आगे की पढ़ाई को लेकर है। दरअसल अभी तक पीईटी, पीएमटी और पीपीटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया जा सका है। इन परीक्षाओं में प्राप्त रंैक के आधार पर प्रदेश के इंजीनियरिंग, मेडिकल व पॉलिटेक्निक कालेज में प्रवेश की पात्रता हासिल होती है। अखिल भातीय स्तर पर भी उच्च शिक्षा के विभिन्न संस्थानों में प्रवेश की पात्रता के लिए परीक्षाएं आयोजित होती है। लेकिन इस बार कोरोना के चलते कुछ परीक्षाओं के आयोजन में खलल पड़ा है। दसवीं-बारहवीं की छत्तीसगढ़ व केन्द्रीय बोर्ड के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इसमें सफल छात्र-छात्राएं आगे की पढ़ाई को लेकर उलझन भरे दौर का सामना कर रहे हैं। यही स्थिति उनके पालकों की भी बनी हुई है।

         दुर्ग / शौर्यपथ / कुछ साल पहले तक कहा जा रहा था कि माइनिंग की टफ जॉब लड़कियों के बस की बात नहीं। इस मिथ्या को दरकिनार करते हुए छात्राओं के हक में बड़ा फैसला ले लिया गया है। माइनिंग इंजीनियरिंग में अब छात्राएं भी प्रवेश ले सकेंगी। प्रदेश के 2 सरकारी व 4 निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में माइनिंग की पढ़ाई अब छात्राएं भी कर सकेंगी, ऐसे ही पॉलीटेक्निक कॉलेजों में भी उन्हें प्रवेश मिलेगा। छत्तीसगढ़ माइनिंग की दृष्टि से अलग पहचान रखता है। खदानों के भीतर पहुंचकर इंजीनियरिंग करने से पहले तक लड़कियों को रोककर रखा गया था। उनको माइनिंग में नौकरी तो मिलती थी, लेकिन टेबल जॉब ही दिए जाते थे। अब लड़कियां खदानों से निकलने वाले प्राकृतिक संपदाओं में भी अपनी रूचि दिखाएंगी।
    अध्यादेश में सिर्फ लडक़ों के प्रवेश का था नियम
       पहले तक कोई भी छात्रा माइनिंग के लिए एप्लाई नहीं सकती थी। माइनिंग इंजीनियरिंग के लिए बनाए गए अध्यादेश में ही इनको जगह नहीं दी गई थी, लेकिन बाद में तकनीकी शिक्षा निदेशालय ने इसमें संशोधन कराया है। लड़कियों के लिए यह क्षेत्र सुरक्षित नहीं माना गया था। पिछले कुछ साल में देश व प्रदेश में कई खानें नई शुरू हुई हैं, जिनमें नौकरियों के लिए सिर्फ लडक़ों का एकाधिकार था, लेकिन इस साल से अब लड़कियां भी इसमें हाथ आजमाएंगी।
    ये हैं माइनिंग के टॉप रिक्रूटर्स
       अडानी माइनिंग , एरसेलर मित्तल , भारतीय उपक्रम कंपनिया, कोल इंडिया लिमिटेड, दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, एमएमटीसी लिमिटेड, यूरेनियम कॉपोर्रेशन ऑफ इंडिया, डीआडीओ,


    इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक में माइनिंग के लिए छात्राएं भी पात्र होंगी। नियम में संसोधन हुए हैं। राज्य शासन ने इसकी मंजूरी दी है।
    एके गर्ग, ज्वाइंट डायरेक्टर, डीटीई


    माइनिंग में शानदार कॅरियर की संभावना है। प्रदेश प्राकृतिक संपदाओं से धनी है। ऐसे में माइनिंग इंजीनियरिंग में बड़े मौके मिलना तय है। युवाओं के लिए यह अच्छा विकल्प है।
    सोनल रूंगटा, डायरेक्टर, संतोष रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट

    भिलाई / शौर्यपथ  / देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में बड़े शहरों की मोनोपली अब खत्म होती जा रही है। छोटे शहर के कॉलेज तेजी से अपना मुकाम बना रहे हैं। बखत साबित कर रहे हैं। इसी कड़ी में इंडिया टुडे ग्रुप ने एमडीआरए के साथ मिलकर 14 विषयों के 1302 कॉलेजों का सर्वे किया है। जिसमें कॉलेजों की खूबियां, फीस स्ट्रक्चर, इंफ्रास्ट्रक्चर, रिचर्स, बिजनेस इन्क्यूबेशन, प्लेसमेंट जैसे पहलूओं को बारीकी से परखने के बाद सभी की रैंकिंग तय की गई। खुशी की बात यह है कि प्रदेश के संतोष रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस को रैंकिंग में टॉप-100 कॉलेजों के बीच 21वां स्थान दिया गया है। यही नहीं वेस्टर्न रीजन में ग्रुप ने तीसरा और देश के सबसे तेज उभरते इंजीनियरिंग कॉलेजों की सूची में 6वां पायदान मिला है। रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के डायरेक्टर सोनल रूंगटा ने बताया कि एमडीआरए देश की एक प्रसिद्ध सर्वे एजेंसी है, जो सरकारी और गैर सरकारी विभागों के लिए सर्वे का कार्य करती है। बुधवार को सभी कॉलेजों की रैंकिंग जारी हुई तो छत्तीसगढ़ का मान एक बार फिर बढ़ गया। इस काबिलियत को तरजीह देते हुए इंडिया टुडे ग्रुप ने अपनी प्रसिद्ध मैग्जीन में संतोष रूंगटा ग्रुप को पहले पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित किया है। बता दें कि बीते दो साल से इस रैंकिंग में संतोष रूंगटा ग्रुप बेहतरीन प्रदर्शन करता आ रहा है। इस कामयाबी पर संस्थान के चेयरमैन संतोष रूंगटा और डायरेक्टर टेक्निकल सौरभ रूंगटा से खुशी जाहिर की है। 
    एनआईआरएफ में पाया मुकाम 
    हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी देशभर के सभी तकनीकी व गैर तकनीकी कॉलेजों की रैंकिंग जारी की है, जिसमें संतोष रूंगटा कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस एंड रिसर्च ने कीर्तिमान रचा। देश के टॉप-100 फार्मा कॉलेजों में अपनी जगह बनाई। छत्तीसगढ़ का यह इकलौता फार्मा कॉलेज रहा, जिसने देश में नाम कमाया। 
    इस तरह हुआ एमडीआरए सर्वे
    एमडीआरए ने यह सर्वे नवंबर 2019 से जून 2020 के बीच किया। कोविड महामारी के बीच जब तालीम हासिल करने के तरीके बदल रहे हैं, उस दौर में स्टूडेंट्स को सही संस्थान के चुनाव में मदद करने के लिए लिहाज से यह सर्वे किया गया। बीते साल के सर्वे में देश के 1206 कॉलेज शामिल हुए थे, जो इस साल बढकऱ 1302 हो गए। एमडीआरए ने सिर्फ इंजीनियरिंग कॉलेजों का ही सर्वे नहीं किया, बल्कि आट्र्स, साइंस, कॉमर्स, मेडिकल, डेंटल, बीबीए, बीसीए, सामाजिक कार्य और फैशन डिजाइनिंग को भी इस दायरे में रखा। 

    भिलाई / शौर्यपथ / पुलिस द्वारा लगातार ऑनलाइन फ्रॉड को लेकर लोगों को जागरुक किया जा रहा है इसके बाद भी ठगी की घटनाएं लगातार हो रही हैं। शातिर ठग रोज नए नए तरीके खोज कर लोगों को ठगने का कार्य कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सुपेला थाने में दर्ज हुआ। इस बार प्रार्थी को बैंक कर्मी के नाम से फोन आया और क्रेडिट कार्ड से डेबिट कार्ड में बैलेंस ट्रांसफर करने का झांसा देकर खाते से रकम उड़ा दी। जब के्रडिट कार्ड से रुपए उड़े और डेबिट कार्ड एकाउंट में जमा नहीं हुए तो उसके होश उड़े। खुद का ठगी का शिकार हुआ मानकर व्यक्ति ने सुपेला थाने में शिकायत दर्ज कराई। सुपेला पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धारा 420 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
    प्राप्त जानकारी के मुताबिक राधिका नगर निवासी ओम प्रकाश के मोबाइल नंबर पर 7024018856 से फोन आया। सामने से महिला की आवाज थी जिसमें कहा गया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से बोल रही हूं। आपका क्रेडिट कार्ड नंबर 4726428024018929 जो पैसा बैलेंस बचा है उसे डेबिट कार्ड मे नंबर 5103720462106798 में ट्रांसफर कर देंगे। बैंक कर्मी के झांसे में आकर ओम प्रकाश ने अपनी कार्ड की डिटेल दे दी। पहली बार में 1500 रुपए, दूसरी बार 4999 रूपये एकाउंट से कट गए। तीसरा बार 4999 रुपए कट गए। इस प्रकार 17997 रुपए कट गए। उक्त रुपए जब एकाउंट में ट्रांसफर नहीं हुए तो ठगी का शक हुआ। मामले में सुपेला थाने में शिकायत दर्ज कराई गई जिस पर जांच के बाद अपराध कायम किया गया।

    दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के ग्राम औरी, पटवारी हल्का नम्बर 04, राज्य निगम मंण्डल भिलाई-03, तहसील पाटन, जिला दुर्ग में नया कोरोना पाॅजिटिव केस पाये जाने पर संबंधित क्षेत्रों को कन्टेनमेंट जोन घोषित किया गया है। उक्त क्षेत्र को कन्टेनमेंट जोन घोषित करने के परिणामस्वरूप कन्टेनमेंट जोन में चिन्हांकित क्षेत्र में सभी प्रकार के दुकानें व वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद रहेगी। इसके अलावा सभी प्रकार की वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध रहेगा। मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर अन्य किसी भी कारण से घर से बाहर निकलना प्रतिबंधित होगा। उक्त क्षेत्र की निगरानी पुलिस विभाग के द्वारा पेट्रोलिंग कर की जावेगी। जिला चिकित्सालय व स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से संबंधित क्षेत्र में स्वास्थ्य की निगरानी के साथ ही निर्देशानुसार सेम्पल की जांच की जायेगी।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ  / दिल्ली के नजदीक मानेसर में एक रिसॉर्ट में राजस्थान के बागी कांग्रेस नेता सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों के ठहरने के बाद, रिसॉर्ट कोरोनोवायरस महामारी के लिए "क्वॉरंटीन सेंटर" होने का दावा कर रहा है. ये इसलिए अहम हो जाता है क्योंकि कांग्रेस ने बुधवार को सचिन पायलट से कहा कि वे हरियाणा में बीजेपी सरकार की सुरक्षा से बाहर आएं और जयपुर वापिस लौटें. राजस्थान में कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़ा संकट खड़ा करने वाले पायलट ने बीजेपी में शामिल होने की किसी भी योजना से इनकार किया है. बेस्ट वेस्टर्न रिसोर्ट के प्रवेश द्वार पर "क्वॉरंटीन सेंटर" साइन लगाया गया है. किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है,
    गेट पर तैनात गार्ड ने NDTV को बताया ,"COVID मरीज अंदर हैं." हालांकि गार्ड ने मरीजों की संख्या और नए क्वॉरंटीन सेंटर के बारे में अन्य सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया. रिसॉर्ट के कर्मचारियों ने भी जानकारी देने से इनकार कर दिया कि सोमवार से रिसॉर्ट "क्वॉरंटीन सेंटर " के रूप में कैसे काम कर रहा है.

    पायलट का समर्थन करने वाले विधायक पहले मानेसर के आईटीसी ग्रैंड भारत होटल में ठहरे थे. बाद में उनमें से कुछ बेस्ट वेस्टर्न रिसोर्ट में शिफ्ट हो गए. इस हफ्ते की शुरुआत में विधायकों के रिसॉर्ट में होने का वीडियो सामने आयाा था. 16 विधायकों को लॉन में बैठा देखा गया था. हालांकि पायलट वीडियो में नजर नहीं आए.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / 

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) देश की सैन्य तैयारियों का जायजा लेने और समग्र स्थिति की समीक्षा करने के लिए शुक्रवार को लद्दाख (Ladakh) का दौरा करेंगे. सरकारी सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी. सिंह का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और चीन (China) तनातनी वाले स्थानों से सैनिकों को पूरी तरह पीछे हटाने के लिए एक कार्ययोजना को अंतिम रूप देने की ओर बढ़ रहे हैं. रक्षा मंत्री के साथ थलसेना अध्यक्ष जनरल एम एम नरवणे भी होंगे. 

     भारत और चीन की सेनाओं के बीच पांच मई को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गतिरोध शुरू होने के बाद से राजनाथ सिंह का लद्दाख का यह पहला दौरा होगा. सिंह का दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के तीन जुलाई को लद्दाख के औचक दौरे के कुछ दिन बाद हो रहा है. मोदी ने अपने दौरे के दौरान सैनिकों को संबोधित किया था और सीमा पर जारी गतिरोध से सख्ती से निपटने का संकेत दिया था.

    सूत्रों ने कहा कि सिंह जनरल नरवणे, उत्तरी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी, 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह तथा अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति की समग्र समीक्षा करेंगे. लद्दाख से रक्षा मंत्री श्रीनगर जाएंगे जहां वह शनिवार को वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक में पाकिस्तान से लगती नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर स्थिति की समीक्षा करेंगे.

    सिंह को पहले तीन जुलाई को लद्दाख जाना था, लेकिन उनका यह दौरा टल गया था. पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच कई स्थानों पर पांच मई से गतिरोध जारी था. गलवान घाटी (Galwan Valley) में हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था जिसमें भारतीय सेना के 20 जवानों को जान गंवानी पड़ी थी. 

    झड़प में चीनी सेना को भी नुकसान हुआ जिसकी उसने अब तक जानकारी नहीं दी है. अमेरिका की एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार इस झड़प में चीन के 35 सैनिक हताहत हुए, जबकि भारतीय पक्ष ने विभिन्न आकलन के आधार पर यह संख्या इससे भी अधिक बताई थी. हालांकि, कूटनीतिक और सैन्य स्तर की सिलसिलेवार बातचीत के चलते दोनों पक्षों ने पारस्परिक सहमति के आधार पर छह जुलाई से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी और अब तनातनी वाले ज्यादातर स्थानों से सैनिक पीछे हट गए हैं.

    गुना / शौर्यपथ /  मध्यप्रदेश के गुना जिले में किराए की जमीन पर खेती कर रहे किसान पति-पत्नी ने आत्महत्या करने का प्रयास किया. स्थानीय प्रशासन पुलिस वालों के साथ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने पहुंचे था. परिजनों के मुताबिक परिवार पर तीन लाख रूपये से अधिक का कर्जा है, वो किराए पर खेत लेकर कर्ज की रकम चुकाना चाहते थे. दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. महिला की हालत नाजुक है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना की उच्च स्तरीय जांच का आदेश दे दिया है. गुना की घटना का गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुना के कलेक्टर और एसपी को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं.
    गुना के सरकारी पीजी कॉलेज की जमीन पर राजकुमार अहिरवार लंबे समय से खेती कर रहे थे, मंगलवार दोपहर अचानक गुना नगर पालिका का अतिक्रमण हटाओ दस्ता एसडीएम के नेतृत्व में यहां पहुंचा और राजकुमार की फसल पर जेसीबी चलवाना शुरू कर दिया. राजकुमार ने विरोध किया तो उसे पुलिस ने पकड़ लिया.

    राजकुमार का कहना था कि ये उसकी पैतृक जमीन है. दादा-परदादा इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं. उसके पास पट्टा नहीं है. जब जमीन खाली पड़ी थी तो कोई नहीं आया. उसने 4 लाख रुपए का कर्ज लेकर बोवनी की है. अब फसल अंकुरित हो आई है. इस पर बुल्डोजर न चलाया जाया. मेरे परिवार में 10-12 लोग हैं. अब मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है. आत्महत्या करूंगा.
    थोड़ी देर बाद उसकी पत्नी ने भी जान देने की कोशिश की, अतिक्रमण हटाने आए दस्ते के लोगों ने दोनों को पकड़ने का प्रयास किया तब तक काफी देर हो चुकी थी. बाद में दोनों को जबरन अस्पताल पहुंचाया गया. गुना तहसीलदार निर्मल राठौर ने कहा भूमि की नाप के बाद जब जेसीबी से कब्जा हटाया जा रहा था उस वक्त जो बटाईदार हैं उन्होंने किसी जहरीली वस्तु का सेवन कर लिया, उन्हें इलाज के लिये अस्पताल भेज दिया गया है. अस्पताल में राजकुमार की पत्नी की हालत नाजुक बताई जा रही है.

    गुना की घटना का गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुना के कलेक्टर और एसपी को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की बर्बरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. गुना मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं. जो भी इस घटना में दोषी है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

    प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि कल हुई घटना को सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है. मुख्यमंत्री ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं. घटना क्यों हुई, कैसे हुई और इसके पीछे कौन दोषी है, इन सब बातों की जल्द रिपोर्ट देने के लिए एक टीम भोपाल से गुना रवाना कर दी गई है.

    नई दिल्ली /शौर्यपथ / देश में बुधवार सुबह तक, बीते 24 घंटे में 20,572 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमण मुक्त होने के बाद रोगियों के ठीक होने की दर 63.24 प्रतिशत हो गई है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है. हालांकि इस दौरान देश में संक्रमण के 29,429 नए मामले भी सामने आए हैं. मंत्रालय ने कहा कि जांच में तेजी, समय पर इलाज और रोगियों की प्रभावी देखभाल के चलते ठीक होने वालों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है. फिलहाल देश में ठीक हो चुके लोगों की तादाद मौजूदा संक्रमितों की तुलना में 2,72,191 अधिक है.
    इस, बीच देश में संक्रमित पाए गए लोगों की कुल संख्या बुधवार को 9,36,181 हो गई. इसके अलावा 582 रोगियों की मौत के साथ ही मृतकों की तादाद 24,309 तक पहुंच गई है. भारत में लगातार चौथे दिन कोरोना वायरस संक्रमण के 28 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं. सुबह आठ बजे तक अपडेट किये गए स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीमारी से उबर चुके लोगों की तादाद 5,92,031 हो गई है. देश में अब भी 3,19,840 लोग वायरस से संक्रमित हैं. सभी रोगी चिकित्सा निगरानी में हैं.

    स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, ''रोगियों के ठीक होने की दर आज बढ़कर 63.24 प्रतिशत हो गई है.'' मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'मौजूदा रोगियों और ठीक हो चुके लोगों की संख्या में अंतराल लगातार बढ़ रहा है. फिलहाल मौजूदा रोगियों के मुकाबले 2,72,191 अधिक लोग ठीक हो चुके हैं.' मंत्रालय ने कहा कि घर में पृथक रहने के नियमों और मानकों तथा ऑक्सीमीटर के इस्तेमाल से अस्पतालों पर दबाव डाले बगैर हल्के लक्षणों वाले या बिना लक्षणों वाले रोगियों का पता लगाने में मदद मिली है.
    देश में कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिये 1,378 पूरी तरह से कोविड के लिये समर्पित अस्पताल, 3,077 कोविड स्वास्थ्य केन्द्र, 21,738 वेंटिलेटरों वाले 10,351 कोविड देखभाल केन्द्र, 46,487 आईसीयू बिस्तर और 1,65,361 ऑक्सीजन बिस्तर मौजूद हैं. केन्द्र सरकार ने कोविड-19 का प्रभावी नैदानिक प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिये राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों और केन्द्रीय संस्थानों को 230.98 लाख एन-95 मास्क, 123.56 लाख पीपीई किट और 11,660 वेंटिलेटर वितरित किये हैं.

    पटना / शौर्यपथ / बिहार के गोपालगंज में 264 करोड़ की लागत से बना सत्तरघाट महासेतु बुधवार को पानी के दबाव से ध्वस्त हो गया. वहीं इस महासेतु के ध्वस्त होने से चंपारण तिरहुत और सारण के कई जिलों का संपर्क टूट गया है. इस पुल पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है. बीते 16 जून को सीएम नीतीश कुमार ने पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस महासेतु का उद्घाटन किया था. गोपालगंज को चंपारण से और इसके साथ तिरहुत के कई जिलों से इस माह सेतु को जोड़ने का यह अतिमहत्वकांक्षी पुल था. इसके निर्माण में करीब 264 करोड़ की लागत आई थी.
    गोपालगंज में आज तीन लाख से ज्यादा क्यूसेक पानी का बहाव था गंडक के इतने बड़े जलस्तर के दबाव से इस महासेतु का एप्रोच रोड टूट गया. जिसकी वजह से आवागमन बंद हो गया है. बैकुंठपुर के फैजुल्लाहपुर में यह पुल टूटा है. जहां पर देखने के लिए लोगो का तांता लगा है.
    भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने इस मामले की जानकारी बिहार के पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव को दी है. उन्होंने कहा है कि इस मामले की जांच करने के लिए वह आगामी चार अगस्त को शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में उठाएंगे.
    इस सेतु का निर्माण बिहार पुल निर्माण विभाग द्वारा कराया गया था. वर्ष 2012 में इस पुल का निर्माण शुरू किया गया था. निर्माण पूरा होने के बाद 16 जून 2020 को इस महासेतु का उद्घाटन किया गया था.

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