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बेरोजगारी /शौर्यपथ/
रेलवे में नौकरियों को लेकर पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है. सरकार कह रही है कि लाखों पदों पर भर्ती होगी लेकिन हकीकत में पिछले 5 सालों में रेलवे ने कई पद सरेंडर कर दिए हैं. वर्ष 2014 में सत्ता में आने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर साल करोड़ों लोगों को रोजगार देने का वायदा किया था लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े नियोक्ता यानी रेलवे ने ही हर साल कई पद खत्म किए हैं. सड़क से लेकर संसद तक यह मुद्दा छाया हुआ है. राज्यसभा में बुधवार को आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने यह मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि रिजल्ट की जांच करानी चाहिए. छात्रों के साथ दुश्मनों की तरह व्यवहार नहीं होना चाहिए. छात्रों को घर में घुसकर मारा गया.
दरअसल, रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड नॉन टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरी यानी आरआरबी एनटीपीसी ने 35000 पद निकाले. इसके लिए 2019 में आवेदन मांगे गए. बताया गया कि सवा करोड़ से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन भर दिया. यानी रोजगार के मामले में सरकार ने अपना रिपोर्ट कार्ड खुद दे दिया. देश में एक तरफ तो बेरोजगारी बढ़ रही है वहीं दूसरी ओर नौकरियां घट रही हैं. अकेले भोपाल डिवीजन में 2016-17 में स्वीकृत पद 18717 थे, जो 2020-21 में घटकर 17998 हो गए. पिछले 5 सालों में रेलवे ने 1402 पद सरेंडर कर दिए लेकिन केवल 683 नए पद आए यानी अकेले भोपाल डिविजन में 719 पद कम हो गए. पूरे नॉर्दन रेलवे में पिछले 5 साल में 18011 पद सरेंडर कर दिए गए. नए पद आए 12881, यानी 5130 पद कम हो गए. ग्रुप सी में स्वीकृत पद 114065 हैं जबकि खाली पद 28550, इसी तरह ग्रुप डी में स्वीकृत पद 53770 हैं, खाली पद 8886.
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद मनोज झा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ' शायद लोगों को अभी पता चला हो लेकिन हम सबको यह पता था. धीरे-धीरे करके ऐसी प्रक्रिया को जन्म दिया गया जहां पोस्ट वापस लिए गए तो रोजगार सृजन कहां से होगा. बेरोजगारी दूर करने को लेकर सरकार के पास कोई रोड मैप ही नही है. पद सरेंडर करना, दूसरी तरफ मोनेटाइजेशन के नाम पर बेचना, बाजार के सामने हमारी पूरी सरकार आत्मसमर्पण कर चुकी है. उसका खामियाजा आने वाला कई पीढ़ी इस मुल्क में भुगतेंगी क्योंकि इनको कोई मतलब नही है.पांच साल बाद निकल चलेंगे. झोला उठाकर कहेंगे कि हम जा रहे है लेकिन इन्होंने देश का जो चरित्र होता है उसेक्षत विक्षत करके रख दिया है. आप अगर पड़ताल करेंगे तो नॉर्दर्न हो या वेस्टर्न हो, हर जगह ऐसी चीजें मिलेंगी जो अनायास नही हो रही है. यह एक प्रक्रिया के तहत हो रहा है. देखिए न ट्रैक ,रेल सब कुछ औने-पौने दाम में निजी हाथों में बेचा जा रहा है जिसको संचित करने में सैकड़ों वर्ष लगे, आप उसको बेच रहे हैं.
CMIEE के आंकड़े कहते हैं कि सितंबर-दिसंबर 2021 के दौरान देश में कुल बेरोजगारों की संख्या 3.18 करोड़ रही.2020 के लॉकडाउन में देश में कुल 2.93 करोड़ बेरोजगार थे. वैसे फिलहाल 1.24 लाख बेरोजगार ऐसे भी हैं जो थककर काम की तलाश छोड़ चुके हैं यानी उन्हें भी जोड़ दें तो बेरोजगारों का आंकड़ा 4.27 करोड़ हो जाता है. जब पद पूरे भरे नहीं है तो अंजाम भी आपको भुगतना है क्योंकि क्षमता प्रभावित होना तो तय है. अप्रैल-दिसंबर 2021 तक 41,483 मेल एक्सप्रेस ट्रेनें देरी से चलीं, मेंटेनेंस के नाम पर 35,000 ट्रेनें रद्द हुईं.
एक बात और, भले ही सरकार ने 3 सालों में 2 वंदेभारत ट्रेनें चलाई हों लेकिन अब लक्ष्य है, 400 वंदेभारत ट्रेनों का. बेशक विचार अच्छा है लेकिन काश मंत्रीजी गरीब जनता के लिये ट्रेनों का एक और आंकड़ा देख लेतीं. पिछले 9 माह में रिकॉर्ड 7612427 पीएनआर जिसमें कुल 119373630 यानी एक करोड़ से ज्यादा मुसाफिरों के टिकट ऑटो कैंसिल हो गये क्योंकि चार्ट बनते समय सीट कंफर्म नहीं हुई. ये आंकड़ा बताता है कि व्यस्त मार्गों पर ट्रेन की कितनी कमी है.
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
