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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने विलुप्ति की कगार पर खड़े ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक आदेश देते हुए राजस्थान और गुजरात के 14,753 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बड़े सोलर पार्क, पवन ऊर्जा परियोजनाओं और हाईटेंशन ओवरहेड बिजली लाइनों पर रोक लगा दी है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा—“गोडावण राजस्थान की आत्मा है, और ऊर्जा कंपनियां इस रेगिस्तान की मालिक नहीं, बल्कि मेहमान हैं।”
अदालत ने विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए राजस्थान में 14,013 किमी² और गुजरात में 740 किमी² क्षेत्र को संशोधित प्राथमिक संरक्षण क्षेत्र घोषित किया। इन इलाकों में इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण उपायों को तुरंत लागू करने तथा प्रजाति की निगरानी शुरू करने के निर्देश दिए गए।
जैसलमेर-बाड़मेर सबसे अधिक प्रभावित होंगे, क्योंकि ये जिले बड़े सौर और पवन ऊर्जा केंद्र बन चुके हैं। कोर्ट ने 33 केवी से 400 केवी तक की मौजूदा बिजली लाइनों को भूमिगत करने या स्थानांतरित करने का आदेश दिया है, क्योंकि गोडावण की मौतों का सबसे बड़ा कारण बिजली तारों से टकराव है। लगभग 250 किमी बिजली लाइनों को दो वर्षों में भूमिगत करना होगा। अब संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनें केवल निर्धारित पावर कॉरिडोर से ही गुजरेंगी।
पीठ ने बिश्नोई समुदाय और ‘गोडावण मैन’ स्व. राधेश्याम बिश्नोई को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि राजस्थान में सिर्फ 150–175 गोडावण ही बचे हैं, जो मुख्य रूप से जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में पाए जाते हैं। IUCN पहले ही इसे अति संकटग्रस्त श्रेणी में रख चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने CSR फंड को भी संरक्षण कार्यों में लगाने का निर्देश दिया, साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि प्राकृतिक आवास की सुरक्षा में कोई ढिलाई स्वीकार नहीं होगी।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
