August 02, 2026
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    भारत बना वैश्विक एआई नैतिकता का पथप्रदर्शक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में पीएम मोदी का ‘MANAV विज़न’, नई दिल्ली डिक्लेरेशन से दुनिया को मिला मानव-केंद्रित एआई का रोडमैप

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    नई दिल्ली।
    फरवरी 2026 में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वैश्विक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक समिट में एआई को लेकर भारत का स्पष्ट, नैतिक और मानव-केंद्रित विज़न दुनिया के सामने रखा। 22 फरवरी को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उन्होंने समिट की उपलब्धियों और इसके वैश्विक प्रभाव का उल्लेख किया।

    ‘MANAV’ विज़न: एआई गवर्नेंस का भारतीय मॉडल

    प्रधानमंत्री मोदी ने एआई गवर्नेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया, जो तकनीक को मानवता से जोड़ने का भारतीय दृष्टिकोण है—

    M – Moral (नैतिक मूल्य)
    A – Accountable (जवाबदेही)
    N – National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता)
    A – Accessible (सभी के लिए सुलभ)
    V – Valid (वैध और सुरक्षित)

    पीएम ने स्पष्ट किया कि एआई केवल एल्गोरिद्म और डेटा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मानव गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक न्याय की वाहक बने।

    एआई का लोकतंत्रीकरण: ‘ग्लोबल कॉमन गुड’ की अवधारणा
    प्रधानमंत्री ने एआई को ‘Global Common Good’ के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का लाभ कुछ चुनिंदा विकसित देशों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्लोबल साउथ सहित पूरी दुनिया तक पहुंचे। भारत का अनुभव बताता है कि कम लागत, बड़े पैमाने और जनहित के साथ तकनीक कैसे परिवर्तन ला सकती है।

    दैनिक जीवन में एआई: भारत के व्यावहारिक उदाहरण
    पीएम मोदी ने भारत में एआई के वास्तविक उपयोगों को रेखांकित किया—अमूल के एआई असिस्टेंट द्वारा पशुओं के इलाज और डेयरी संचालन में 24x7 सहायता। किसानों को चौबीसों घंटे मार्गदर्शन देने वाले एआई समाधान। प्राचीन ग्रंथों, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में एआई की भूमिका, जिससे इतिहास और ज्ञान अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंच सके।

    समावेशी तकनीक की मिसाल
    समिट के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का एआई-पावर्ड रियल-टाइम साइन लैंग्वेज अनुवाद किया गया। यह कदम दिव्यांगजनों के प्रति भारत की तकनीक-आधारित समावेशी सोच का सशक्त उदाहरण बना और वैश्विक मंच पर सराहा गया।

    नैतिक और सुरक्षित एआई के लिए तीन वैश्विक सुझाव
    प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए तीन अहम सुझाव दिए—
    विश्वसनीय वैश्विक डेटा फ्रेमवर्क
    पारदर्शी ‘ग्लास बॉक्स’ सुरक्षा नियम
    एआई में मानवीय मूल्यों का अनिवार्य समावेश
    नई दिल्ली डिक्लेरेशन: वैश्विक सहमति की ऐतिहासिक पहल
    समिट के अंतिम दिन 21 फरवरी 2026 को 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ को अपनाया। इसके प्रमुख बिंदु रहे—एआई का लोकतंत्रीकरण और समान वैश्विक पहुंच।मानव-केंद्रित एआई, जो मानवीय गरिमा और अधिकारों की रक्षा करे।एआई इम्पैक्ट एक्सपो: नवाचार का भव्य प्रदर्शन .
    समिट के साथ आयोजित एआई इम्पैक्ट एक्सपो (70,000 वर्ग मीटर) में भारत की तकनीकी क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ .अमूल का एआई समाधान, जिसने वैश्विक नेताओं का ध्यान खींचा।सांस्कृतिक विरासत के डिजिटलीकरण की पहल।जिओ द्वारा विकसित किफायती स्मार्ट ग्लासेस जैसे हार्डवेयर, जो भारतीय जरूरतों के अनुरूप हैं।

    भारत का तकनीकी आत्मविश्वास
    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और मजबूत तकनीकी इकोसिस्टम है। इंडिया एआई मिशन के तहत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा लैब और स्किल डेवलपमेंट के लिए 10,300 करोड़ रुपये का प्रावधान।
    मंत्र: “डिज़ाइन इन इंडिया, डेवलप फॉर द वर्ल्ड”, जिससे भारत एआई के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नियम-निर्धारक (Rule-maker) बने।

    राजनीतिक संदेश
    मेरठ में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री ने समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल भारत की वैश्विक सफलता को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और देश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 केवल एक तकनीकी सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व और नैतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरा। MANAV विज़न और नई दिल्ली डिक्लेरेशन के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य की एआई मानवता के साथ, मानवता के लिए और मानवता के नेतृत्व में विकसित होगी—यही भारत का संदेश है, और यही देश का बढ़ता हुआ डिजिटल गौरव।

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