August 01, 2026
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    पटना में ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’: महिला आरक्षण पर NDA का शक्ति प्रदर्शन, विपक्ष पर तीखे हमले

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       पटना / एजेंसी / बिहार की राजधानी पटना सोमवार को भगवा रंग और “नारी शक्ति” के नारों से गूंज उठी, जब बीजेपी और एनडीए के घटक दलों ने कारगिल चौक पर ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ का आयोजन किया। इस बड़े राजनीतिक प्रदर्शन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं और महिला नेत्रियों ने भाग लेकर महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा।

    भीड़ और दावों की राजनीति
    बीजेपी ने दावा किया कि इस सम्मेलन में पूरे बिहार से करीब 50 हजार महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने पटना की सड़कों पर मार्च कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समर्थकों ने महिला आरक्षण के समर्थन में विशेष टी-शर्ट पहन रखी थी। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है—जो अक्सर ऐसे राजनीतिक आयोजनों में देखा जाता है।

    सीएम सम्राट चौधरी का हमला
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में विपक्षी नेताओं—राहुल गांधी, लालू यादव और एम.के. स्टालिन—पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे “परिवारवाद की राजनीति” करते हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य “हर सामान्य महिला को सदन तक पहुंचाना” है।
    उन्होंने कहा कि यदि 33% आरक्षण पहले लागू हो गया होता, तो बिहार विधानसभा में 122 महिलाएं नेतृत्व कर रही होतीं।

    सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा, “बहनों के साथ अन्याय करने वालों को पाताल से भी खोजकर सजा दी जाएगी,” और राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बताने की कोशिश की।

    विपक्ष पर आरोप, महिलाओं को संदेश
    बीजेपी विधायक श्रेयसी सिंह ने विपक्ष को महिला आरक्षण में बाधा डालने का जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि विपक्ष नहीं चाहता कि साधारण पृष्ठभूमि की महिलाएं संसद और विधानसभा तक पहुंचें।
    प्रदेश उपाध्यक्ष अमृता भूषण ने भी महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

    NDA की एकजुटता का प्रदर्शन
    इस कार्यक्रम में जेडीयू, हम (HUM) और एलजेपी (रामविलास) की महिला नेताओं की मौजूदगी ने बिहार में एनडीए की एकजुटता का संकेत दिया। सभी दलों ने एक सुर में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का समर्थन करते हुए विपक्ष के रुख को “महिला विरोधी” बताया।

    चुनावी संदर्भ और आगे की रणनीति
    राजनीतिक तौर पर यह सम्मेलन आगामी चुनावों से पहले माहौल बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ‘जीविका’ समूहों और स्थानीय निकायों में 50% आरक्षण के बाद अब केंद्र के 33% महिला आरक्षण को NDA बड़े मुद्दे के तौर पर आगे बढ़ा रहा है।
    कुल मिलाकर, यह आयोजन सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में महिला मतदाताओं को साधने की रणनीतिक कवायद भी माना जा रहा है।

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