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नई दिल्ली |
भारतीय राजनीति के गलियारों में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के किले में अब तक की सबसे बड़ी सेंध लगी। राज्यसभा में पार्टी के 10 सांसदों में से 7 ने बागी रुख अख्तियार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर का नेतृत्व पार्टी के कद्दावर नेता राघव चड्ढा कर रहे हैं।
दो-तिहाई का जादू: दलबदल कानून से बचाव
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि यह केवल कुछ सांसदों का जाना नहीं, बल्कि विधिवत 'विलय' है।
संवैधानिक ढाल: चूंकि अलग होने वाले सांसदों की संख्या कुल संख्या (10) की दो-तिहाई (70%) है, इसलिए संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत इन सांसदों की सदस्यता पर खतरा कम रहने की संभावना है।
शक्ति प्रदर्शन: इस कदम से राज्यसभा में AAP की ताकत अब सिमट कर केवल 3 सांसदों तक रह गई है।
भाजपा का दामन थामने वाले दिग्गज चेहरे
भाजपा में शामिल होने वाले सात सांसदों की सूची ने राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है:
राघव चड्ढा (नेतृत्वकर्ता)
संदीप पाठक (संगठन के रणनीतिकार)
अशोक मित्तल
स्वाति मालीवाल
हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)
विक्रमजीत सिंह साहनी
राजेंद्र गुप्ता
बगावत की पटकथा: आखिर क्यों टूटी पार्टी?
सूत्रों की मानें तो इस बड़े विद्रोह की नींव कुछ दिन पहले ही रखी गई थी। राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त करना इस पूरे घटनाक्रम का तात्कालिक कारण माना जा रहा है। पार्टी के भीतर पद और प्रतिष्ठा को लेकर पनपा यह असंतोष आज एक बड़े विभाजन के रूप में सामने आया।
AAP का पलटवार: 'पंजाब के साथ गद्दारी'
इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी ने हमलावर रुख अपना लिया है। पार्टी नेतृत्व ने इसे लोकतंत्र की हत्या और जनादेश का अपमान बताया है:
"यह पंजाब की जनता के पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। जो लोग छोड़कर गए हैं, वे पंजाब के हितों के लिए 'गद्दार' साबित हुए हैं।" > — संजय सिंह, सांसद (AAP)
भगवंत मान: पंजाब के मुख्यमंत्री ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अनैतिक बताया है।
अरविंद केजरीवाल: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ "धक्का" (अन्याय) किया है।
निष्कर्ष
2026 का यह घटनाक्रम न केवल आम आदमी पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि राज्यसभा के समीकरणों को भी पूरी तरह बदलने वाला है। अब देखना यह होगा कि क्या सदन में इन सांसदों की सदस्यता बरकरार रहती है या कानूनी पेचीदगियां नया मोड़ लेकर आएंगी।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
