August 08, 2026
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    राम मंदिर में ₹200 करोड़ के कथित चढ़ावा घोटाले की जांच तेज: दान पात्र से नकदी, आभूषण गायब होने के आरोपों पर SIT की 140 पन्नों की रिपोर्ट तैयार Featured

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    अयोध्या।

    अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य आभूषणों के कथित गबन एवं चोरी का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर के दान पात्रों से करोड़ों रुपये की नकदी तथा सोना, चांदी और हीरे के आभूषणों में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर 140 पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर ली है।

    मीडिया रिपोर्टों और शिकायतों के आधार पर इस कथित घोटाले का आकार ₹200 करोड़ से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है, हालांकि इस राशि की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    कर्मचारियों की संपत्ति पर उठे सवाल

    मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब कुछ कर्मचारियों की आय और संपत्ति के बीच भारी अंतर सामने आने के दावे किए गए। आरोप है कि 14 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों ने कुछ ही महीनों में लाखों रुपये की संपत्ति अर्जित कर ली। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने कई कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल शुरू की।

    दान में मिली चांदी और आभूषणों का रिकॉर्ड सवालों के घेरे में

    इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन समेत कुछ दानदाताओं ने आरोप लगाया है कि मंदिर निर्माण और धार्मिक उपयोग के लिए भेजी गई लगभग 60 किलो चांदी तथा कई बहुमूल्य हार, चरण पादुकाएं और अन्य आभूषणों का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई दान वस्तुओं की रसीद और आधिकारिक अभिलेख भी नहीं मिल रहे हैं।

    SIT की कार्रवाई, कर्मचारी हिरासत में

    उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। जांच के दौरान दान राशि की गिनती से जुड़े कर्मचारी लवकुश मिश्रा को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार उसके घर से अलमारी और उपलों के ढेर के नीचे छिपाकर रखी गई लगभग 10 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई है। मामले में कुछ अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ और कार्रवाई की गई है।

    ट्रस्ट पदाधिकारियों से लंबी पूछताछ

    जांच के दौरान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव, रामशंकर यादव (टिन्नू) सहित कई पुजारियों और बैंक अधिकारियों से बंद कमरे में विस्तृत पूछताछ की गई। SIT ने अयोध्या के ग्रीन हाउस में छह दिनों तक डेरा डालकर दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और दान प्रबंधन प्रणाली की जांच की।

    CCTV फुटेज बनी बड़ी चुनौती

    जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी बाधा मंदिर परिसर के CCTV सिस्टम को लेकर सामने आई है। परिसर में लगभग 1,000 हाई-डेफिनिशन कैमरे लगे होने के बावजूद फुटेज का बैकअप केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रखा जाता है, जिसके बाद डेटा स्वतः नष्ट हो जाता है। जांच एजेंसियों को कुछ डिजिटल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं। डेटा रिकवरी और फोरेंसिक विश्लेषण के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

    मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

    SIT अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर लखनऊ रवाना हो चुकी है। रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई, संभावित अभियोजन और विस्तृत वित्तीय ऑडिट पर निर्णय लिया जा सकता है।

    महत्वपूर्ण तथ्य

    यह ध्यान रखना आवश्यक है कि मामले की जांच अभी जारी है। ₹200 करोड़ की कथित हेराफेरी, आभूषणों की चोरी और अन्य आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने तथा आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और किसी भी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी न्यायिक एवं जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही तय होगी।

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