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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले—दूरस्थ अंचलों तक पहुंच रही शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं, सेवा डेरों से खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय शिविर का शुभारंभ, 768 दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण
रायपुर । केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार नक्सली हिंसा के पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है। अब बस्तर को भय और हिंसा की पहचान से बाहर निकालकर खुशहाल एवं समृद्ध क्षेत्र बनाना है।
श्री शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित शिविर में दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 सहित कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।
पांच दशकों की पीड़ा दूर करना सरकार की जिम्मेदारी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी। आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष नागरिकों ने अपने हाथ-पैर गंवाए। नक्सलवाद समाप्त करना पहला लक्ष्य था, लेकिन अब प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना और उनके जीवन में आत्मविश्वास लौटाना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने बताया कि 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे, जिनमें 1,570 से अधिक बस्तर के थे। श्री शाह ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में स्थानीय जनजातीय समाज, सुरक्षा बलों और प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्लानार और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी भय का वातावरण था, वहां अब खेल, संस्कृति और विकास गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।
आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
श्री शाह ने बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। इनमें 7,328 लोगों के बैंक खाते खोलना, 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि देना शामिल है। इसके अलावा 455 लोगों को नौकरी, 129 लोगों को भूमि आवंटन, 4,014 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास तथा 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए, 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली दी गई तथा सड़क संपर्क बढ़ाने के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं। साथ ही 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके जीवन में स्थायी बदलाव लाना है।
200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’
केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों से स्थानीय लोगों को सरकारी सेवाएं, कौशल प्रशिक्षण और आजीविका संबंधी अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ नक्सलवाद की दशकों पुरानी चुनौती से मुक्त हुआ है। यह उपलब्धि सुरक्षा बलों के साहस, बलिदान और बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है। उन्होंने नक्सल हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों और संघर्ष में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में शामिल करना सरकार का लक्ष्य है। ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं तथा इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं। गांवों में राशन दुकानों की व्यवस्था से लोगों को खाद्यान्न प्राप्त करने में भी सुविधा हो रही है।
सेवा डेरों से रोजगार और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देने के साथ जंगलों में उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियां शुरू की गई हैं। आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों के अनुरूप प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बस्तर में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग दो हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इनके पूरा होने पर लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
दिव्यांगजनों को मिला आत्मविश्वास, पुनर्वास अभियान जारी रहेगा
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने अंग और आंखों की रोशनी गंवाई। राज्य सरकार का प्रयास है कि नक्सली हिंसा से प्रभावित कोई भी व्यक्ति पुनर्वास और आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने लाभार्थियों से संवाद भी किया। सुकमा के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे फिर चलने लगे हैं। बीजापुर के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में मछली पकड़ने जाते समय आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। कृत्रिम पैर मिलने से उन्हें दोबारा चलने का सहारा मिला है। वहीं दंतेवाड़ा के अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर प्रसन्नता जताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, पर्यटन, संस्कृति और अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का संकल्प है कि बस्तर का प्रत्येक गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें और हिंसा से प्रभावित परिवार सम्मान एवं आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जी सकें।
कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
