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दुर्ग। शौर्यपथ
दुर्ग की राजनीति में एक नया ट्रेंड चल पड़ा है—नेता बनने से पहले सरोज पांडे का वर्ज़न अपडेट बनना। लेकिन अफसोस, शहर की वर्तमान महापौर अलका बाघमार इस अपडेट में कहीं सिस्टम क्रैश का शिकार हो गई लगती हैं। चुनाव में मिली भारी जीत शायद इतना भारी पड़ गई कि प्रशासन पर पकड़ हल्की पड़ती चली गई।
बीते छह महीनों में दुर्ग नगर निगम की हालत ऐसी हो गई है कि लोग धीरज बाकलीवाल के समय को “गोल्डन एरा” की तरह याद करने लगे हैं। शहर के विकास काम अपनी ही बदहाली देखकर खुद को सांत्वना देते मिल जाते हैं।
कपड़ा लाइन—वादा हाई, एक्शन डाई
अतिक्रमण हटाने का ऐलान ऐसे किया गया मानो शहर अगले ही दिन क्लीन-सिटी अवार्ड लेने वाला हो। लेकिन न हटे व्यापारी, न बना विस्थापन, और देखते ही देखते मुद्दा महापौर की फाइलों में “फॉरवर्डेड टू नेक्स्ट ईयर” मोड में चला गया।
अब “मोर शहर मा जिम्मेदारी” के लोग सड़क पर ज्यादा जिम्मेदार दिख रहे हैं, सरकार में नहीं।
धनवानों के अतिक्रमण पर ‘एयरप्लेन मोड’
समृद्धि बाजार के सामने अवैध कब्जा?
शहर के चौक-चौराहों पर मनमानी?
सभी का जवाब—महापौर की मौन साधना।
जनता को समझ नहीं आ रहा कि यह प्रशासन है या किसी बड़ी कंपनी का VIP कस्टमर सपोर्ट, जहां अमीरों की शिकायतों पर ही रिस्पॉन्स मिलता है।
सड़कों पर मवेशी—शहर का असली ‘ट्रैफिक मैनेजर’
गाय, बैल, भैंस—सभी ने शहर के यातायात पर ऐसा कब्जा किया है कि लगता है मानो यही ऑफिशियल रोड सेफ्टी एडवाइजर्स हों। महापौर कार्यालय के बगल में चल रहा अवैध बाजार देखकर तो ऐसा लगता है कि प्रशासन ने इसे “सांस्कृतिक धरोहर” घोषित कर दिया हो।
निगम में गुटबाजी: ‘टीम महापौर बनाम टीम बाकी सब’
भाजपा के पार्षदों में भी अब चर्चा यही है कि महापौर अपने ही संगठन से दूर और चंद प्रशंसकों के करीब हो गई हैं। प्रेस रिलीज़ और सोशल मीडिया रीलों से शहर को सजाने-संवारने की कोशिश में असली शहर कहीं पीछे छूट गया है।
राजनीतिक भविष्य—रेड अलर्ट
यदि दुर्ग के विधायक और मंत्री गजेंद्र यादव दोबारा टिकट की तैयारी में हैं, तो वर्तमान शहरी अव्यवस्था उनके लिए भी “बोनस” नुकसान लेकर आ सकती है। दो साल बीत गए, कुछ नहीं बदला—अब बचे दो साल शहर की किस्मत लिखेंगे या गुटबाजी का अगला अध्याय, यह देखना दिलचस्प होगा।
दुर्ग में ट्रिपल इंजन की सरकार फिलहाल तीन दिशाओं में दौड़ रही है और शहर बीच में धूल फांक रहा है।
नकल की राजनीति + निष्क्रिय प्रशासन + प्रोटोकॉल प्रेम
एक ऐसा महापौर कार्यकाल, जिसे भविष्य में लोग कह सकते हैं—
“ये रहा दुर्ग का सबसे अवसरवादी और सबसे कमज़ोर शहरी शासन।”
बालोद / शौर्यपथ /
भारत सरकार के निर्देशानुसार जिला पंचायत बालोद में 26 दिसंबर को जिला स्तरीय वीर बाल दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि दसवें सिक्ख गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह जी के वीर पुत्रों साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह एवं बाबा फतेह सिंह के अद्वितीय बलिदान की स्मृति में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके साथ ही वीर बाल दिवस 2025 का राष्ट्रीय स्तर का मुख्य कार्यक्रम 26 दिसंबर को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा बच्चों और युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका और योगदान को रेखांकित करेंगे।
- विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जिला स्तरीय बाल हृदय रोग स्वास्थ्य जांच शिविर में हुए शामिल
- शिविर में नन्हें बच्चों की जांच हो जाने से सर्जरी होने के बाद बच्चे होंगे स्वस्थ : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह
- चिन्हांकित लगभग 45 बच्चों का होगा नि:शुल्क उपचार
- श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर में 22 देशों के लगभग 21 हजार से अधिक मरीजों का किया गया नि:शुल्क इलाज
- चिकित्सा के क्षेत्र में नवीनतम अनुसंधान एवं तकनीक से गंभीर बीमारियों का उपचार हो रहा संभव
- प्रोजेक्ट निरामया नव्या के वेबसाईट से किशोरी बालिकाओं को मिलेगी स्वास्थ्य संबंधी सलाह एवं परामर्श
- जनमानस के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए मजबूती से करें कार्य
राजनांदगांव / शौर्यपथ / भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर सुशासन दिवस अंतर्गत विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबंद्ध चिकित्सालय राजनांदगांव में श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर के सहयोग से आयोजित जिला स्तरीय बाल हृदय रोग स्वास्थ्य जांच शिविर में शामिल हुए। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी जयंती पर स्मरण किया। उन्होंने कहा कि श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा शिविर में नन्हें बच्चों के हार्ट की स्क्रीनिंग की जा रही है। इको एवं ईसीजी के माध्यम से जांच करने पर यह पता चला है कि लगभग 45 बच्चों को सर्जरी करना जरूरी है। यह स्क्रीनिंग होने से यह पता चल पाया कि उन्हें जन्मजात हृदय की बीमारी है, जिससे बच्चों का विकास बाधित होता। शिविर में नन्हें बच्चों की जांच हो जाने से सर्जरी होने के बाद बच्चे स्वस्थ हो जाएंगे। प्रारंभिक स्तर पर बच्चों की बीमारी का पता चलने पर शत-प्रतिशत इलाज होगा तथा कोई दिक्कत नहीं आएगी। उन्होंने बच्चों के अभिभावकों से कहा कि बच्चों के उपचार में मदद मिलेगी तथा उनके इलाज का लगातार फॉलोअप लिया जाएगा। चिन्हांकित लगभग 45 बच्चों का नि:शुल्क उपचार होगा। उन्होंने कहा कि श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर ने 22 देशों के लगभग 21 हजार से अधिक मरीजों का नि:शुल्क इलाज किया है। यह रायपुर में एक ऐसा अस्पताल है, जो ऐसे गंभीर बीमारी से ग्रस्त बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर के लिए भूमि प्रदान की गई थी तथा एक वर्ष में यह हॉस्पिटल बनकर तैयार हो गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा ऐसे आपरेशन किए जा रहे हैं, जो दिल्ली, चेन्नई जैसे महानगरों में होते है। देश-विदेश के मरीज दूर-दूर से यहां इलाज कराने आते हंै तथा कुछ माह रहकर स्वस्थ होकर चले जाते है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रोजेक्ट निरामया नव्या का शुभारंभ किया गया है। किशोरी बालिकाओं को इस वेबसाईट के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी सलाह एवं परामर्श मिलेगा। किशोरी बालिकाएं माहवारी, हार्मोंस में आने वाले परिवर्तन, एनीमिया सहित विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को बिना किसी संकोच के विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श ले सकेंगी और उनकी काउंसलिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह एक बेहतरीन प्रोजेक्ट है, इसके लिए किशोरी बालिकाओं को अधिक से अधिक जानकारी प्रदान करें। उन्होंने श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. योगेश साठी, डीन मेडीकल कालेज डॉ. पंकज लुका एवं पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए दी। उन्होंने कहा कि सभी स्वयं सेवी संस्थाएं स्वास्थ्य के दृष्टिगत जनमानस के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए मजबूती से कार्य करें। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में नवीनतम अनुसंधान एवं तकनीक से गंभीर बीमारियों का उपचार संभव हो सका है। इस अवसर पर उन्होंने हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड वितरण किया।
सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न श्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्मदिन को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने अपना जीवन देश के लिए समर्पित किया। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी केवल राजनेता ही नहीं थे वह एक लेखक, साहित्यकार, संपादक एवं कुशल वक्ता भी थे। उन्होंने उत्कृष्ट कविताओं की रचना की है। उनके कार्यकाल मेें पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया। गांव-गांव में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों का निर्माण कराया गया तथा गांवों को शहरों से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि इस शिविर में गरीब एवं जरूरतमंद परिवार से अपने नन्हें बच्चों को लेकर जनसामान्य आए हैं। उन्होंने कहा कि हृदय रोग के ईलाज के लिए नया रायपुर में श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल स्थापित किया गया है। यहां कई देशों से ईलाज कराने के लिए लोग आते हैं। छत्तीसगढ़ में एम्स की स्थापना हुई है और स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। विकसित भारत 2047 का संकल्प सभी के सहयोग से पूरा होगा। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाएं तभी फलीभूत होगी जब हम सभी मिलकर अन्त्योदय तक पहुंचाएंगे।
उल्लेखनीय है कि शिविर में चिरायु टीम द्वारा कुल 126 संभावित बच्चों का पंजीयन किया गया। जिसमें सभी बच्चों का नि:शुल्क ईसीजी एवं ईको टेस्ट किया गया। नन्हे बच्चों का ऑपरेशन चिरायु कार्यक्रम अंतर्गत श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर में किया जाएगा। इस दौरान श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर के मुख्य ह्दय रोग विशेषज्ञ डॉ. योगेश साठे, शिशु ह्दय रोग विशेषज्ञ डॉ. दीनदयाल नागर, ट्रस्ट ऑफिसर श्री एस जगदीश राव वेंकट कोमपेला, कॉडिनेटर मेंडिकल सर्विसेस डॉ. निखिल शुक्ला सहित अन्य स्टॉफ उपस्थित थे। इस अवसर पर महापौर श्री मधुसूदन यादव, अध्यक्ष जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक श्री सचिन बघेल, उपाध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती किरण साहू, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती अनिता मंडावी, श्री खूबचंद पारख, श्री कोमल सिंह राजपूत, श्री रमेश पटेल, श्री भरत वर्मा, श्री कोमल जंघेल, श्री संतोष अग्रवाल, श्री राजेन्द्र गोलछा, श्री सौरभ कोठारी, श्री तरूण लहरवानी, श्री गोलू गुप्ता, श्री सुमित भाटिया, श्री मोनू बहादुर, श्री प्रखर श्रीवास्तव, पद्मश्री डॉ. पुखराज बाफना, कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव, पुलिस अधीक्षक श्रीमती अंकिता शर्मा, वन मंडलाधिकारी श्री आयुष जैन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, अधिष्ठाता मेडिकल कालेज डॉ. पीएम लुका, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन, संयुक्त संचालक सह अधीक्षक डॉ. अतुल देशकर, डॉ. पवन जेठानी, डॉ. मीना आरमो, श्री संदीप ताम्रकार सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
शौर्यपथ राशिफल
2025 का आखिरी सप्ताह (22-28 दिसंबर) ग्रहों के गोचर से विभिन्न राशियों के लिए मिश्रित फलदायी रहेगा, जहां सूर्य, शुक्र और बुध का प्रभाव करियर, धन और रिश्तों को प्रभावित करेगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कुछ राशियों को अप्रत्याशित लाभ मिलेगा, जबकि अन्य को सावधानी बरतनी होगी।
मेष से वृषभ: मेष राशि वालों को ऊर्जा और साहस मिलेगा, आय के नए स्रोत खुलेंगे, लेकिन जल्दबाजी में निवेश से बचें; सिरदर्द से सावधान रहें।
वृषभ में पैतृक संपत्ति से लाभ होगा, रिश्तों में मधुरता आएगी, पेट संबंधी समस्या से बचाव के लिए खान-पान नियंत्रित रखें।
मिथुन से कर्क : मिथुन राशि में खर्च नियंत्रण जरूरी है, भाई-बहनों से सहयोग मिलेगा, मानसिक तनाव कम करने हेतु योग करें।
कर्क को भावनाओं पर काबू रखना होगा, आर्थिक लाभ संभव, आंखों की जलन से बचें और दान करें।
सिंह से तुला: सिंह राशि में मान-सम्मान बढ़ेगा, पदोन्नति के योग, पीठ दर्द से सावधान; योजनाएं गुप्त रखें।
कन्या में निवेश फायदेमंद, रिश्तों में संवाद बढ़ाएं, मौसमी बीमारियों से बचाव करें।
तुला को संतुलन बनाए रखना होगा, धन लाभ पार्टनरशिप से, कानूनी मामलों में सतर्क रहें।
वृश्चिक से मीन : वृश्चिक में आकस्मिक धन लाभ, जोड़ों का दर्द संभव, शेयर बाजार से दूर रहें।
धनु को यात्रा और नए रिश्ते मिलेंगे, ओवर कॉन्फिडेंस न करें।
मकर में मेहनत का फल, हड्डी समस्या से बचाव।
कुंभ को निवेश सोच-समझकर करें, अनिद्रा से राहत के लिए मोबाइल कम इस्तेमाल करें।
मीन में आध्यात्मिक शांति, पैरों की थकान से सावधान।
सामान्य उपायसभी राशियों के लिए शिवलिंग पर जल, बेलपत्र या चंदन चढ़ाएं; शुभ रंग पहनें जैसे मेष के लिए लाल, धनु के लिए पीला।
खर्च और स्वास्थ्य पर नियंत्रण रखकर वर्ष का शुभ समापन करें।
दुर्ग । शौर्यपथ । न्यायपालिका की भाषा में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द का अपना संवैधानिक और कानूनी महत्व होता है। इनमें से दो शब्द—“आरोपी” और “दोषी”—ऐसे हैं, जो किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा, कानूनी स्थिति और पूरे जीवन की दिशा बदल सकते हैं। अक्सर सार्वजनिक विमर्श, मीडिया रिपोर्टिंग और राजनीतिक बयानबाज़ी में इन शब्दों का गलत या लापरवाह प्रयोग देखा जाता है, जो न केवल व्यक्ति के अधिकारों का हनन करता है, बल्कि संविधान की मूल भावना के भी विरुद्ध जाता है।
आरोपी कौन होता है?
किसी व्यक्ति के विरुद्ध जब पुलिस या जांच एजेंसी किसी मामले में उसका नाम दर्ज करती है, तब वह व्यक्ति आरोपी कहलाता है। इसका सीधा और स्पष्ट अर्थ है कि वह व्यक्ति जांच की प्रक्रिया में है। आरोपी होने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि उसने अपराध किया ही है।
संविधान और कानून की दृष्टि में आरोपी के संबंध में यह मान्यता सर्वोपरि है कि—जब तक माननीय न्यायालय द्वारा सभी तथ्यों, साक्ष्यों और दलीलों की जांच के बाद कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया जाता, तब तक उस व्यक्ति को दोषी नहीं कहा जा सकता। यही कारण है कि संविधान की भाषा में उसे केवल और केवल आरोपी कहा जाता है।
दोषी कब कहलाता है व्यक्ति?
दोषी शब्द का प्रयोग तब होता है, जब न्यायपालिका यह तय कर देती है कि संबंधित व्यक्ति ने भारत के संविधान और कानून व्यवस्था की अवहेलना की है और वह कानून के विरुद्ध अपराध का दोषी पाया गया है।
दोषी करार दिए जाने से पहले न्यायालय:
उपलब्ध सभी साक्ष्यों की गहन जांच करता है,अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनता है,कानून की कसौटी पर तथ्यों को परखता है। इन सभी प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद यदि न्यायालय सजा देता है, तभी व्यक्ति दोषी कहलाता है। यदि सजा नहीं दी जाती, तो वही व्यक्ति निर्दोष माना जाता है।
निर्दोषता की संवैधानिक धारणा
भारतीय संविधान और न्यायिक प्रणाली का एक मूल सिद्धांत है—निर्दोषता की धारणा (Presumption of Innocence)। इसका अर्थ है कि जब तक अपराध सिद्ध न हो जाए, तब तक प्रत्येक व्यक्ति निर्दोष माना जाता है। यह सिद्धांत नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है और किसी भी व्यक्ति को जल्दबाज़ी में अपराधी ठहराए जाने से रोकता है।
शब्दों की लापरवाही और उसके दुष्परिणाम
आरोपी को दोषी कह देना केवल शब्दों की गलती नहीं, बल्कि यह व्यक्ति की सामाजिक छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है,निष्पक्ष जांच को प्रभावित कर सकता है,न्यायालयीन प्रक्रिया पर दबाव बना सकता है और संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है।
इसीलिए मीडिया, राजनेताओं और सार्वजनिक मंचों पर बोलने वालों से अपेक्षा की जाती है कि वे न्यायपालिका की भाषा का सम्मान करें और निर्णय आने से पहले किसी को दोषी घोषित न करें।
हाल ही देखा गया है कि बलोदा बाजार आगजनी की घटना जो अभी माननीय न्यायालय में विचाराधीन है इस पर माननीय न्यायालय का कोई फैसला नहीं आया है ऐसे में मिडिया संस्था/ संस्थाओ द्वारा विधायक देवेन्द्र यादव को दोषी करार देना कही ना कही संविधान से प्राप्त अधिकारों का हनन माना जा सकता है
न्याय, भाषा और जिम्मेदारी
आरोपी और दोषी के बीच का अंतर केवल कानूनी नहीं, बल्कि संवैधानिक, नैतिक और मानवीय भी है। आरोपी वह है, जिस पर अभी निर्णय आना बाकी है; दोषी वह है, जिसे न्यायपालिका ने अपराध सिद्ध होने के बाद सजा दी है। एक जिम्मेदार समाज वही होता है, जो न्यायालय के फैसले का इंतजार करता है, कानून की प्रक्रिया में विश्वास रखता है और शब्दों के प्रयोग में संयम बरतता है। यही लोकतंत्र की मजबूती और संविधान के सम्मान की सच्ची पहचान है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने क्रिसमस पर्व की प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई दी हैं। उन्होंने कहा कि क्रिसमस का पर्व प्रेम, करुणा, त्याग और सेवा की भावना को सुदृढ़ करने का संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने कामना की कि क्रिसमस का यह पर्व प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति लेकर आए तथा सभी के प्रयासों से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।
मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री शुक्ल के पार्थिव शरीर को कंधा देकर उन्हें भावपूर्ण अंतिम विदाई दी
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के शैलेन्द्र नगर स्थित वरिष्ठ साहित्यकार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय श्री विनोद कुमार शुक्ल के निवास पहुँचे और उनके अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर नमन किया तथा ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय श्री शुक्ल के पार्थिव शरीर को कंधा देकर उन्हें भावपूर्ण अंतिम विदाई दी। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं तथा असंख्य पाठकों और साहित्य-प्रेमियों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी से उपजे महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन से हिंदी साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति पहुँची है। उनकी रचनाएँ संवेदनशीलता, मानवीय सरोकारों और सरल किंतु गहन अभिव्यक्ति की अनुपम मिसाल हैं।उन्होंने कहा कि श्री शुक्ल की लेखनी ने हिंदी साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की। उनका साहित्य न केवल पाठकों को गहराई से स्पर्श करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बना रहेगा। साहित्य जगत में उनका अवदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह एक ऐसे सृजनशील व्यक्तित्व की अंतिम यात्रा थी, जिन्होंने साहित्य जगत को ऐसी अनमोल कृतियाँ दीं, जो साहित्य संसार की थाती है। साहित्यकार और कवि के विचार सदैव जीवित रहते हैं, उनकी कलम की स्याही, शब्दों में अमर हो जाती है। विनोदजी का साहित्य हमारी सांस्कृतिक चेतना को दिशा देता रहेगा, उनकी स्मृतियाँ सदैव हमारे बीच जीवंत रहेंगी।
श्री शुक्ल को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।इस अवसर पर कवि डॉ. कुमार विश्वास, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी अलोक सिंह, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार, जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी गण उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का नया युग,आगामी वर्ष ‘महतारी गौरव वर्ष’ घोषित
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए आगामी वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार नित-नये फैसले ले रही है। विकसित छत्तीसगढ़ के लिए छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 तैयार किया गया है। विकसित छत्तीसगढ़ में महिलाओं की सशक्त भागीदारी को देखते हुए राज्य में आगामी वर्ष को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘महतारी गौरव वर्ष’ में महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक गरिमा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का सशक्त संकल्प सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह वर्ष छत्तीसगढ़ में मातृशक्ति के नेतृत्व, सहभागिता और सम्मान का एक नया अध्याय लिखेगा, जो विकसित, समरस और सशक्त छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार को सबसे बड़ा आशीर्वाद माताओं और बहनों से प्राप्त होता है। उनके विश्वास, समर्थन और आशीष से ही जनसेवा के कार्यों को नई ऊर्जा और दिशा मिलती है। इसी भावनात्मक और सामाजिक दायित्वबोध से प्रेरित होकर राज्य सरकार ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का पहला वर्ष ‘विश्वास वर्ष’ के रूप में समर्पित रहा, जिसमें शासन और जनता के बीच भरोसे की पुनर्स्थापना हुई। दूसरा वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को समर्पित ‘अटल निर्माण वर्ष’ के रूप में मनाया गया, जिसके दौरान आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण, सामाजिक विकास और जनकल्याण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्य पूरे हुए। अब सेवा का आगामी वर्ष मातृशक्ति को समर्पित ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें राज्य की सभी प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों का केंद्रबिंदु माताएँ और बहनें होंगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर किए गए कार्यों ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पटल पर एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया है। सरकार ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और निर्णय क्षमता को अपनी नीतियों का मूल आधार बनाते हुए सामाजिक-आर्थिक बदलाव की एक नई दिशा तय की है।
महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूती देने वाली महतारी वंदन योजना के अंतर्गत राज्य की लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 22 किश्तों में 14,306 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। महिला कल्याण के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य की विकास यात्रा के केंद्र में महिलाएँ हैं।
महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिलाने के उद्देश्य से रजिस्ट्री शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट, 368 महतारी सदनों का निर्माण, मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय का ऑनलाइन भुगतान जैसे निर्णयों ने सुशासन और पारदर्शिता को और सुदृढ़ किया है। स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 42,878 महिला समूहों को 12,946.65 लाख रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है। वहीं, बस्तर सहित छह जिलों में रेडी-टू-ईट का कार्य महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा गया है।
महिला आजीविका के नए अवसर सृजित करने के लिए मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, नवाबिहान योजना, डिजिटल सखी, दीदी ई-रिक्शा योजना, सिलाई मशीन सहायता, तथा मिनीमाता महतारी जतन योजना जैसी पहलें लागू की गई हैं। कन्याओं के विवाह में सहयोग हेतु मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत सहायता राशि का बड़ा हिस्सा सीधे कन्या के बैंक खाते में जमा किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता दोनों को बल मिला है।
महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ ने ऐतिहासिक पहल की है। वन-स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन और डायल 112 के एकीकृत संचालन ने संकट की घड़ी में त्वरित और प्रभावी सहायता सुनिश्चित की है। सुखद सहारा योजना के अंतर्गत 2 लाख 18 हजार से अधिक विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जा रही है।
किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए शुचिता योजना, साइकिल वितरण योजना, तथा नवा रायपुर में यूनिटी मॉल का निर्माण महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जशपुर जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित ‘जशप्योर’ ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास भी महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण तैयार करना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना, नवाबिहान, लखपति दीदी, शुचिता और महतारी सदन जैसी पहलें महिलाओं के समग्र विकास का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं।
वर्ष 2025-26 में महिला एवं बाल विकास विभाग को 8,245 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि महिला कल्याण, सुरक्षा और सशक्तिकरण उसकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई दिशा, नई उम्मीद और नए परिवर्तन का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
