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सेहत / शौर्यपथ / गुस्सा, चिड़चिड़ापन और धीरे-धीरे रोजमर्या की छोटी-छोटी चीजें भूलने लगना, ये सभी अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। अल्जाइमर एक तरह का मानसिक विकार है। इस बीमारी में दीमाग की कोशिकाओं पर असर पड़ता है।
चिकित्सकों के मुताबिक शराब और धूम्रपान करने वालों में इसके होने का खतरा ज्यादा रहता है। यही कारण है कि अब युवा वर्ग में भी ये बीमारी पाई जाने लगी है। जीवन शैली में बदलाव के कारण केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी इससे ग्रस्त पाई जाती हैं।
पारस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. रजनीश कुमार का कहना है कि लोगों को खुलकर इस बीमारी के बारे में जागरूक करना जरूरी हो गया है। तनाव, श्रवण दोष, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, डायबिटीज और सामजिक रूप से अलग रहना इसके मुख्य कारणों में शामिल है। इसके अलावा धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन भी इस बीमारी का खतरा बढ़ाता है।
शराब पीने से एमिलॉयड प्लेक को खत्म करने की दिमाग की कोशिकाओं की क्षमता प्रभावित होती है और ऐसे लोगों में अल्जाइमर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। तनावपूर्ण जीवन और कई कामों के बोझ की वजह से यह बीमारी होने पर याददाश्त की कमी होने लगी है।
लॉकडाउन ने मरीजों की परेशानी बढ़ाई-
कोलंबिया अस्ताल के सहालकार चिकित्सक डॉ. अपूर्वा शर्मा का कहना है कि अल्जाइमर की बीमारी एक प्रोग्रेसिव कंडीशन होती है, जिसमे मस्तिष्क की कोशिकाओं को याददाश्त, रास्ते, भाषा, ध्यान और योजना बनाने की क्षमता में कमी करता है। देखभाल करने वालों को अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को क्वालिटी लाइफ प्रदान करने में मुश्किल आती है और यह तनावपूर्ण भी होता है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। लॉकडाउन ने अल्जाइमर के मरीजों के लिए थोड़ी मुश्किल बढ़ा दी है। ऐसे मरीज कहीं जा नहीं सकते, किसी से मिल नहीं सकते, इस तरह से उन पर साइकोलॉजिकल दबाव बढ़ गया है।
हमें जरुरत है की हम इन मरीजों को ज्यादा से ज्यादा समय दें ताकि वो अच्छे से रिकवरी कर सकें। उन्होंने बताया कि कोविड-19 का समय खासकर वृद्ध मरीजों के लिए बहुत ही मुश्किल भरा रहा है और उनको डायगनोसिस करने में बहुत ही कमी आई है।
65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ये दिक्कत ज्यादा-
आर्टेमिस अस्पताल के6 न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. सुमित सिंह का कहना है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, याददाश्त प्रभावित होती जाती है, लेकिन विस्मृति किसी भी उम्र में हो सकती है। अधिकांश लोगों में भूलने की समस्या उम्र के साथ-साथ बढ़ती जाती है।
65 वर्ष से अधिक उम्र के कम से कम आधे से अधिक लोगों का कहना है कि अपनी युवावस्था की तुलना में अब वे चीजें ज्यादा भूलने लगे हैं। उन्हें वृद्धावस्था का अनुभव होने लगता है, भूलने की यह समस्या उम्र बढऩे के कारण हो रही हो, यह जरूरी नहीं, क्योंकि वृद्धावस्था के दौरान पर्याप्त दिमागी कसरत नहीं होती है। इसलिए, दिमाग और शरीर दोनों को सक्रिय बनाए रखने वाली गतिविधियों में हिस्सा लेने से विस्मृति को कम किया जा सकता है।
उनके अनुसार यदि आपको या किसी और को याददाश्त से जुड़ी कोई गंभीर समस्या महसूस होती है तो अपने डॉक्टर से बात करें। जो लोग इससे पीड़ित हैं उन्हें समस्या को आगे बढऩे से रोकने के लिए पहले से ही कदम उठाने चाहिए। रक्तचाप को नियंत्रित करना, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के उच्च स्तर को नियंत्रित करना और उसका इलाज करना और धूम्रपान से परहेज करने जैसे उपाय करके इससे बचा जा सकता है।
अल्जाइमर के लक्षण-
-चिड़चिड़ापन
-सोचने की क्षमता कम होना
-याददाश्त कम हो जाना
-उदासीनता
-भटकाव
-व्यवहार में परिवर्तन
खेल / शौर्यपथ / मार्कस स्टोइनिस (53 रन और दो विकेट) के जबरदस्त ऑलराउंड खेल और तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा के सटीक सुपर ओवर (दो विकेट) की बदौलत दिल्ली कैपिटल्स ने किंग्स इलेवन पंजाब को रविवार को सांसों को रोक देने वाले आईपीएल-13 के बेहद रोमांचक मुकाबले में सुपर ओवर में पराजित कर दिया। पंजाब की टीम रबाडा के सुपर ओवर में दो रन ही बना सकी और उसने कप्तान लोकेश राहुल तथा ग्लेन मैक्सवेल के विकेट गंवा दिए। दिल्ली को जीत के लिए तीन रन बनाने थे और उसने बिना कोई विकेट खोए ये रन बना लिए। मोहम्मद शमी के पास सुपर ओवर में बचाने के लिए कुछ नहीं था और पंजाब को निराश होना पड़ा। हार के साथ ही इस मैच में किंग्स इलेवन पंजाब के नाम एक शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हो गया है।
इस मैच में सुपर ओवर में पहले बल्लेबाजी करते हुए किंग्स इलेवन पंजाब ने दिल्ली कैपिटल्स को जीत के लिए मात्र तीन रन का लक्ष्य दिया। इसी के साथ किंग्स इलेवन पंजाब सुपर ओवर में दूसरी टीम को सबसे कम रनों का लक्ष्य देने वाली टीम बन गई है। इससे पहले मिशेल जॉनसन ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ और जसप्रीत बुमराह ने गुजरात लॉइंस के खिलाफ सुपर ओवर में 6 रन दिए थे जिससे टीम को सात रनों का लक्ष्य मिला था।
इस मैच में दिल्ली ने मार्कस स्टोइनिस की मात्र 21 गेंदों पर सात चौकों और तीन छक्कों की मदद से बनी 53 रन की विस्फोटक अर्धशतकीय पारी के दम पर 20 ओवर में आठ विकेट पर 157 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया जबकि पंजाब ने 20 ओवर में आठ विकेट पर 157 रन बनाए और मैच टाई हो गया। मैच अब फैसले के लिए सुपर ओवर में चला गया जिसमें दिल्ली ने आसानी से जीत हासिल कर ली। स्टोइनिस ने आखिरी ओवर को पांचवीं गेंद पर मयंक अग्रवाल को आउट किया और अंतिम गेंद पर क्रिस जॉर्डन को आउट कर स्कोर टाई करा दिया। अग्रवाल ने 60 गेंदों पर सात चौकों और चार छक्कों की मदद से 89 रन बनाए लेकिन उनका पांचवीं गेंद पर आउट होना निणार्यक रहा। स्टायरिस ने यहीं से मैच का पासा पलट दिया।
मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान आज अपना 40वां जन्मदिन मना रही हैं। ऐसे मौके पर उन्होंने छोटी-सी पार्टी रखी थी, जिसमें परिवार के लोग शामिल रहे। ग्लैमर और स्टाइल क्वीन करीना कपूर खान इस पार्टी में बिना मेकअप के नजर आईं। बहन करिश्मा कपूर ने पार्टी की कुछ फोटोज शेयर करते हुए करीना कपूर खान को बर्थडे विश किया है। उन्होंने कैप्शन में लिखा, ‘बर्थडे गर्ल, हम सभी तुमसे बहुत प्यार करते हैं। हैप्पी बर्थडे।’
करिश्मा कपूर ने जो फोटोज शेयर की हैं उसमें सैफ अली खान, पिता रणधीर कपूर, मां बबीता कपूर और कुछ नजदीकी रिश्तेदार और दोस्त नजर आ रहे हैं। इसके अलावा करीना कपूर खान केक के साथ पोज देती भी नजर आ रही हैं।
करीना कपूर खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। वह अपनी पर्सनल लाइफ से लेकर प्रोफेशनल लाइफ के अपडेट्स फैन्स संग शेयर करती रहती हैं। बर्थडे से एक दिन पहले करीना कपूर ने अपनी एक ब्लैक एंड व्हाइट फोटो शेयर करते हुए लिखा था, ‘जैसे ही मैं अपना 40वें साल में एंटर कर रही हूं। मैं बैठना चाहती हूं और प्यार करना, हंसना, माफ करना, भूलना और सबसे महत्वपूर्ण बात प्रार्थना करना और मुझे ताकत देने के लिए धन्यवाद कहना चाहती हूं। हाय! बिग 40, इसे बड़ा बनाना।’
बताते चलें कि करीना कपूर खान और सैफ अली खान दोबारा पैरेंट्स बनने वाले हैं। करीना इस समय अपना प्रेग्नेंसी पीरियड एंजॉय कर रही हैं। खुद को फिट रख रही हैं। करीना कपूर खान फिल्म लाल सिंह चढ्डा में नजर आने वाली हैं। हाल ही में खबर आई थी कि फिल्म में करीना के बेबी बंप को छिपाने के लिए वीएफएक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। करीना को 'लाल सिंह चड्ढा' के लिए अभी 100 दिन की शूटिंग करनी है। ऐसे में उम्मीद है कि वह सितंबर या फिर अक्टूबर में फिल्म की टीम को जॉइन करेंगी और अपने हिस्से का शूट पूरा करेंगी।
24 घंटे में ही निरस्त हो गई नगर पंचायत उतई के एल्डरमैन कि सूची...रिसाली निगम के नियुक्ती से भी कार्यकर्ता नाराज...
रिसाली निगम की सूचि पर भी उठ रहे सवाल
दुर्ग ग्रामीण / शौर्यपथ / प्रदेश के गृह मंत्री साहू के विधानसभा के अंतर्गत एक नगर पंचायत और एक नगर निगम आते है जिसमे उतई पंचायत में एल्डरमैन के नाम की घोषणा होते ही जबरदस्त विरोध के कारण मात्र 24 घंटे के अन्दर ही जारी सूचि को शासन को निरस्त करना पड़ा . सूचि के निरस्त होते ही ये तो साफ़ हो गया कि स्थानीय विधायक के द्वारा किये गए नामो की अनुशंषा से कार्यकर्ता नाराज है . नामो की अनुशंषा तो स्थानीय विधायक और प्रदेश के गृह मंत्री ने ही की होगी किन्तु इन नामो को सरकाने वाले को क्या ये नहीं मालूम था कि इन नामो का विरोध होगा . जब से कांग्रेस सत्ता में आयी है तब से ही कई जमीनी कार्यकर्ता नाराज चल रहे है और लगातार उपेक्षा होने की बात कर रहे है पुराने कार्यकर्ताओ के अंदर का गुस्सा सूचि जारी होने के बाद आखिरकार फुट ही पडा और जबरदस्त विरोध के चलते सूचि जारी हो गयी . सूचि में नाम परिवर्तन तो हो जाएगा और हो सकता है इस बार जमीनी कार्यकर्ताओ को पुराने कार्यकर्ताओ को मौका मिल जाए किन्तु जो हुआ उसे वापस नहीं बदला जा सकता . जो ग़ुस्सा कार्यकर्ताओ के अंदर था और जिस प्रकार विरोध हुआ उससे इस तरफ इशारा है कि स्थानीय विधायक जमीनी हकीकत को नहीं देख पा रहे है और चाटुकारों से घिरे हुए है . वर्तमान की घटना को देखने के बाद एक बात याद आयी जब स्थानीय विधायक को प्रदेश में गृह मंत्री की खुर्सी मिली तब एक कार्यकर्ता सम्मलेन में ये बात कही गयी थी गृहमंत्री साहू के द्वारा कि कोई भी कार्यकर्ता जब चाहे तब मिल सकता है क्योकि कार्यकत्र्ता की मेहनत से ही चुनाव में विजय प्राप्त हुई है इस लिए हर कार्यकर्ता की बात का सम्मान किया जाएगा तब सभा में खूब जयजयकार हुई थी किन्तु धीरे धीरे कार्यकर्ता दूर होते गए और चाटुकार नजदीक शायद इन्ही कारणों से जमीनी कार्यकर्ताओ के मन मे धीरे धीरे बगावत के सुर थे जो आज बुलंद हो गए और एक विवाद का जन्म हो गया .
ऐसी ही हालत से नवनिर्मित रिसाली निगम भी गुजर रहा है . रिसाली निगम के निर्माण का वादा गृह मंत्री साहू ने चुनाव के पूर्व किया था और वादा निभाया भी किन्तु इस वादा निभाने का ये मतलब नहीं हुआ कि अब जमीनी कार्यकर्ताओ की मर्जी का कोई ख्याल नहीं रखा जायेगा . जैसा कि देखने को मिला है सोशल मिडिया में कि किस तरह कार्यकत्र्ता तो क्या पदाधिकारी भी अपने आप को आहात महसूस कर रहे है और मंत्री जी से सवाल पुच रहे है कि कौन है ये एल्डरमैन और कब कांग्रेस में आया गए क्या जमीनी कार्यकर्ताओ का उपयोग सिर्फ चुनाव में झंडा उठाने तक के लिए किया जाता रहेगा ऐसे कई सवाल होंगे जो अभी कार्यकर्ताओ और पुराने कांग्रेसी के मन में विचरण कर रहे होंगे . आज मंत्री जीई प्रदेश के कद्द्वर मंत्री है किन्तु शायद ये भूल गए कि दुर्ग ग्रामीण विधानसभा के ये वही कार्यकत्र्ता है जो उनके लिए दिन रात मेहनत किये और चुनाव में जीत दिलाई .
इसमें कोई दो राय नहीं कि रिसाली निगम बनाने में मंत्री साहू की अहम् भूमिका रही है किन्तु कार्यकर्ताओ के बिना न पार्टी है और पार्टी के बिना कोई पद .वर्तमान में ऐसे कार्यकर्ता आहात है जो सालो से कांग्रेस के लिए मैदान में जमे रहे है इस उम्मीद में कि जब सत्ता आएगी तो सत्ता का लाभ भी मिलेगा किन्तु जैसा सोशल मिडिया में चर्चा हो रही है उससे जमीनी और पुराने कार्यकत्र्ता नाराज तो है ही आहत भी है . अब तो मंत्री जी के उपर ही निर्भर करता है कि कि रिसाली निगम के लिए ज़ारी सूचि में फेर बदल की पहल करे या रूठे कार्यकर्ताओ को मनाये जो भी हो किन्तु दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस को जो भी करना होगा जल्द ही करना होगा चार महीने बाद रिसाली निगम में चुनाव होने वाले है ऐसे में अगर स्थिति को नहीं संभाला गया तो रिसाली निगम की सत्ता से हाँथ धोना पड़ सकता है कांग्रेस को क्योकि रिसाली क्षेत्र में भाजपा महासचिव राज्यसभा सांसद जो उनका गृह क्षेत्र भी है सक्रीय है ऐसे में वर्तमान विरोध का समाधान नहीं निकला तो निकाय चुनाव में इसके दुष्परिणाम भी सामने आ सकते है .
सोशल मिडिया पर किस तरह हो रही बात जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह उपेक्षित महसूस कर रहे कांग्रेसी कार्यकर्त्ता ...






दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग शहर में आज से फिर से जिला प्रशासन के आदेश अनुसार लॉक डाउन लगाया गया,किंतु जिलाधीश महोदय ने तर्क दिया कि महापौर सहित अन्य जनप्रतिनिधि मंडल व कुछ व्यवपारी संगठन के सलाह पर हम शहर को लॉक डाउन करने जा रहे हैं,ऐसे में मोदी आर्मी संगठन का मानना है दुर्ग शहर के महापौर स्वयं अस्वस्थ्य हैं जिन्हें फ़ूल भेंट कर हम उनके उत्तम स्वस्थ की कामना करते हैं,वरना वो ना ही उदासीन होते ना ही ऐसी सलाह जिलाधीश महोदय को देते,ज्ञात हो कि जिला प्रशासन दो सप्ताह के लिए पूर्व में भी लॉक डाउन घोषित कर चुका है,प्रदेश अध्यक्ष वरुण जोशी ने कहा शहर खुलने के बाद से महापौर जी का मुख्य काम था शहर के इन्दिरा मार्केट सहित मुख्य बाजारों व वार्डो को दिनचर्या आरम्भ होने से पूर्व और बाज़ार बन्द होने के बाद सेनेटाइज करवाते,मगर यह उनसे नहीं हुआ,शहर में बने सामाजिक भवनों को कोविड सेंटर बनाने के लिए सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों से चर्चा करते यह भी उनसे नहीं हुआ,अपनी सरकार से ही चर्चा कर शराब दुकानों को संचालन नहीं करने की मांग करते यह भी उनसे नहीं हुआ,यदपी सरकार नहीं सुनती तो जिला प्रशासन से अनुरोध करके शराब दुकानों में मास्क और सेनेटाइज अनिवार्य करवाते मगर यह भी उनसे नहीं हुआ,मगर बिना सोचे समझे उन्होंने लॉक डाउन की मांग प्रशासन से कर दी,एक परिवार का सदस्य मार्केट के दुकानों और उद्योगों में कार्य करना जाता है तो उसे मुश्किल उतना ही वेतन मिलता है जिससे उसका घर चल सके,अब लॉक डाउन लगने से क्या उन्हें उनका वेतन मिलेगा,क्या इस लॉक डाउन से कोरोना पर हम अंकुश लगा पाएंगे,जबसे यह आदेश लागू करने की घोषणा की गई बाजारों में दौगुनी भीड़ लग गई,लोगों में इस बात की भी शंका रही की दस दिनों का लॉक डाउन कहीं लंबा न हो,इसलिए शहर के हर निवासियों ने अधिक राशन लेने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को आवश्यक नहीं समझा और प्रशासन भी बाजार में मंहगे दामों पर मिल रहे वस्तुओं पर नियंत्रण नहीं कर सका,आज छोटे व्यापारी और शहर वासी तो घर में बैठ गए मगर जब यह लॉक डाउन हटेगा तो क्या शराब दुकानों में होने वाली भीड़ पर अंकुश लगेगा शायद नहीं,हम कोरोना से लड़ने के लिए न ही सही नियत ला पाए और न ही कोई नीति बना पाए,जबकि केंद्र सरकार के गाइड लाइन के अनुसार सिर्फ हमें कंटेंटमेंट जॉन ही घोषित करना था,मगर शहर के विभिन्न वार्डो में पीड़ित मिलते गए और कोई भी वार्ड कंटेंटमेट में तब्दील नहीं किया गया,इसलिए हमें लगता है शहर के प्रथम नागरिक ही अस्वस्थ हैं तो शहर कैसे स्वस्थ होगा,इस दौरान मोदी आर्मी के वरुण जोशी, मितेश पटेल,शुभम यादव,दुर्गेश रामटेके, धीरज,यज्ञकांत यादव उपस्थित रहे!
दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के भिलाई में स्थित सुधीर सीटी स्कैन एंड रिसर्च सेंटर द्वारा आपदा में अवसर की भरपूर तलाश जारी है . यहाँ कोविद के मरीज से सीटी स्कैन ( चेस्ट ) के शासन द्वारा तय दर से कही ज्यादा की रकम की मांग की जा रही है . ऐसा ही मामला वर्तमान में सामने आया जब कोविद संक्रमित मरीज जो कुछ दिनों पहले पोजिटिव था एवं वर्तमान में रिपोर्ट निगेटिव है फिर से चेस्ट पेन होने से भिलाई स्थित सुधीर सीटी स्कैन एंड रिसर्च सेंटर में जब जाँच कराने पहुंचा तो जांच के लिए 4000 की मांग की गयी मरीज के विरोध करने व शासन के तय दर बताने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन नहीं माना एवं साफ कह दिया कि शासन द्वारा ऐसी किसी बात की जानकारी नहीं है जबकि प्रशासन द्वारा सभी निजी अस्पतालों को तय दर में ही जाँच करने का आदेश तीन चार दिन पहले ही दे दिया गया था .
ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि शासन ऐसे निजी अस्पताल जो आपदा में भी जेब भरने में लगे हुए है जिला प्रसासन किस तरह की कार्यवाही करता है .
बता दे कि राज्य सरकार ने कोरोना मरीजों के उपचार के दौरान हाई रिजाल्यूशन एचआरसीटी इंवेस्टिगेशन की आवश्यकता होने पर निजी चिकित्सालयों और डायग्नोस्टिक केंद्रों के लिए दरें निर्धारित की हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार सीटी चेस्ट विदाउट कान्ट्रास्ट फार लंग्स के लिए 1,870 रुपये, सी टी चेस्ट विद कान्ट्रास्ट फार लंग्स के लिए 2,354 रुपये निर्धारित शुल्क रखा गया है। आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के सभी निजी चिकित्सालयों द्वारा कोविड -19 मरीजों के इलाज के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा निर्धारित शुल्क ही लिया जाए तथा आइसीएमआर एवं राज्य शासन द्वारा तय किए गए ट्रीटमेंट प्रोटोकाल का पालन करते हुए केवल आवश्यक जांच ही कराई जाए। कोविड 19 मरीजों का आरटीपीसीआर, ट्रूनाट या फिर एंटीजेन टेस्ट केवल आइसीएमआर एवं राज्य शासन द्वारा अधिकृत पैथालॉजी केन्द्रों अथवा अस्पतालों में ही किया जाए। उपरोक्त आदेश का उल्लंघन एपिडेमिक डिसीज एक्ट 1897, छत्तीसगढ़ पब्लिक ऐक्ट1949 तथा छत्तीसगढ़, एपिडेमिक डिसीज कोविड 19 रेगुलेशन एक्ट 2020 के तहत दंडनीय होगा।
पटना / शौर्यपथ / कृषि बिल पर जब से भाजपा की सबसे पुराने सहयोगियों में से एक शिरोमणि अकाली दल की एकमात्र केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दिया है, इसका प्रभाव बिहार विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ NDA में खासकर सीटों के बंटवारे पर देखा जा रहा है. एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस्तीफे की अगली सुबह शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री और NDA के मुख्यमंत्री का चेहरा नीतीश कुमार के बारे में यहां तक कह डाला कि नीतीश बाबू जैसा सहयोगी हो तो कुछ भी संभव है. वहीं माना जा रहा है कि नीतीश और बिहार भाजपा के नेताओं के एक गुट के दबाव में अब केंद्रीय नेतृत्व लोक जनशक्ति पार्टी के चिराग पासवान को गठबंधन से अलग करने के बजाय किसी भी शर्त पर अब साथ रखेगी.
अकालियों के सरकार से निकलने के बाद बिहार भाजपा के नेता मान रहे हैं कि सीटों के समझौते में नीतीश कुमार की चलेगी, क्योंकि फिलहाल उन्हें नाराज करने की स्थिति में भाजपा अब नहीं रही. भले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कहें कि बिहार में मंडियों को खत्म करने वाले नीतीश बाबू पहले मुख्यमंत्री थे लेकिन यह भी सच है कि धान की खरीद का NDA शासन में कभी लक्ष्य नहीं पूरा किया जा सका हैं, जबकि कृषि और सहकारिता दोनों विभाग भाजपा के पास वर्षों से हैं. भले बिहार में यह मुद्दा नहीं बनता है लेकिन फिलहाल शिवसेना और अकाली दल की नाराजगी के बाद भाजपा जनता दल यूनाइटेड की नाराजगी नहीं झेल सकती. हालांकि उनका मानना है कि भाजपा अपने सहयोगियों को कैसे नीचा दिखाती है, इस कटु सच को जनता दल यूनाइटेड और नीतीश कुमार से बेहतर कौन जानता है.
जनता दल यूनाइटेड के नेताओं का कहना है कि BJP के साथ 2017 में सरकार बनाने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पटना विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में जैसे ही केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की नीतीश कुमार की मांग को खारिज किया, उसी दिन लग गया था कि नरेंद्र मोदी अपने सहयोगियों को कुछ ज्यादा भाव नहीं देते हैं. दूसरा प्रकरण लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद हुआ, जब नीतीश कुमार ने 40 सीटें बिहार से लोकसभा चुनाव में दिलाने के वादे के बाद 39 सीटों पर विजय के बाद संख्या के आधार पर जब मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी की मांग की तो पीएम मोदी ने उनकी इस मांग को भी खारिज कर दिया और नीतीश कुमार ने भी सांकेतिक रूप से मंत्रिमंडल में शामिल होने के न्योता को ठुकरा दिया था, लेकिन अब अकालियों के इस्तीफे के बाद भाजपा के पास सीटों के तालमेल में नीतीश कुमार की बातें मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
भाजपा के पास नीतीश के अलावा अब चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी की शर्तों को मानने के अलावा कोई और चारा नहीं है. चिराग पासवान ने पांच दिनों पहले तक सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि सीटों के समझौते पर फिलहाल BJP के किसी भी नेता ने उनसे कोई बातचीत नहीं की है लेकिन अब BJP के नेता मानते हैं कि पहले से जो चिराग को अलग-थलग रखने की नीतीश कुमार की योजना पर बिहार भाजपा की एक प्रभावशाली नेताओं का गुट काम कर रहा था, इसको बदली परिस्थिति में प्राप्त करने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है. इन नेताओं का कहना है कि अगर चिराग बागी हो गए तो भले ही नीतीश कुमार और BJP मिलकर चुनाव जीत लें लेकिन कई राज्यों में दलितों के सेंटीमेंट पर उसका काफी प्रतिकूल असर पड़ेगा. इन नेताओं का कहना है कि पहले ही बिहार के दलित नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह बात कही थी कि कैसे BJP के 6 वर्षों के शासनकाल में दलित छात्र हो या सरकारी नौकरी में काम करने वाले दलित कर्मचारी, उनके हितों के खिलाफ फैसले आए हैं और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रह गई. इस पृष्ठभूमि में अब BJP के नेता कह रहे हैं कि उनको भी साथ लेकर चलना अब हमारी मजबूरी है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सदस्य फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को केंद्र शासित प्रदेश की मौजूदा स्थिति का मुद्दा शनिवार को सदन में उठाया और कहा कि चीन की तरह दूसरे पड़ोसी देश से भी बातचीत होनी चाहिए. उन्होंने सदन में शून्यकाल के दौरान कहा कि वे उन सभी लोगों का आभार प्रकट करना चाहते हैं जिन्होंने उनके हिरासत में रहने के दौरान समर्थन जताया. हिरासत से रिहा होने के बाद पहली बार लोकसभा में आपनी बात रखते हुए नेशनल कांफ्रेंस के नेता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में प्रगति होनी चाहिए थी लेकिन वहां कोई प्रगति नहीं हुई है.
उन्होंने कहा, "आज हमारे बच्चों और दुकानदारों के पास 4जी इंटरनेट की सुविधा नहीं है, जबकि पूरे देश में है." उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कुछ लोगों के कथित मुठभेड़ में मारे जाने का उल्लेख किया और कहा कि मुझे खुशी है कि सेना ने माना कि शोपियां में गलती से तीन आदमी मारे गए. अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि संबंधित परिवारों को उचित मुआवजा मिलेगा.
उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि हम जिस तरह से चीन से बात कर रहे हैं उसी तरह पड़ोसी से बात करनी पड़ेगी, रास्ता निकालना पड़ेगा. अब्दुल्ला ने कहा कि अगर हिंदुस्तान तरक्की कर रहा है तो क्या जम्मू-कश्मीर को तरक्की नहीं करनी चाहिए. पिछले साल जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के बाद सरकार ने फारुक अब्दुल्ला, उनके बेटे उमर अब्दुल्ला, पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं के नजरबंद कर दिया था.
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू कैलेंडर में अनुसार हर तीसरे साल में अतिरिक्त मास यानी अधिक मास जुड़ता है। इसका कारण सूर्य और चंद्रमा की वार्षिक चाल में 11 दिनों का अंतर होता है, जिसे पाटने के लिए हर तीसरे वर्ष अधिक को जोड़ दिया जता है। इससे वर्ष में संतुलन हो जाता है जबकि उसे वर्ष चंद्रमास 13 माह का हो जाता है। इस बार अधिकमास 18 सितंबर से प्रारंभ होकर 16 अक्टूबर 2020 तक रहेगा।
अधिकमास के अधिपति देवता भगवान विष्णु है। इस मास की कथा भगवान विष्णु के अवतार नृःसिंह भगवान और श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है। इस मास में श्रीकृष्ण, श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन और श्रीविष्णु भगवान के श्री नृःसिंह स्वरूप की उपासना विशेष रूप से की जाती है। इस माह उपासना करने का अपना अलग ही महत्व है।
इस माह में अधिक मास के 33 देवताओं की पूजा का महत्व है- विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, भधोक्षज, केशव, माधव, राम, अच्युत, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, श्रीश, श्रीकांत, नारायण, मधुरिपु, अनिरुद्ध, त्रीविक्रम, वासुदेव, यगत्योनि, अनन्त, विश्वाक्षिभूणम्, शेषशायिन, संकर्षण, प्रद्युम्न, दैत्यारि, विश्वतोमुख, जनार्दन, धरावास, दामोदर, मघार्दन एवं श्रीपति जी की पूजा से बड़ा लाभ होता है।
धर्म ग्रंथों के अनुसार श्री नृःसिंह भगवान ने इस मास को अपना नाम देकर कहा है कि अब मैं इस मास का स्वामी हो गया हूं और इसके नाम से सारा जगत पवित्र होगा। इस महीने में जो भी मुझे प्रसन्न करेगा, वह कभी गरीब नहीं होगा और उसकी हर मनोकामना पूरी होगी। इसलिए इस मास के दौरान जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / अपने लक्ष्य के अनुसार ही आपको अपनी प्राथमिकताएं चुननी होती है। ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि हम अस्थायी चीजों को अपनी प्राथमिकता समझकर उनपर अपना पूरा ध्यान देने लगते हैं, जबकि ऐसा करने से हमारे हाथ अंत में निराशा ही लगती है। आज हम आपको ऐसे टिप्स के बारे में बताएंगे, जिन्हेंं अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने से आप कभी भी निराश नहीं होंगे और आपको सफलता जरूर मिलेगी-
टाइम टेबल बनाना
आप कॉलेज, कोचिंग या ऑफिस कहीं भी जाते हैं, अगर आपने कोई लक्ष्य रखा है, तो सबसे पहले अपना टाइम टेबल बनाएं। आप अपने 24 घंटे को किस हिसाब से मैनेज करते हैं, यह बेहद जरुरी है। आप पेपर या मोबाइल चेक लिस्ट में टाइम टेबल सेव कर सकते हैं।
नींद पूरी करें
आप अपनी प्राथमिकताओं में नींद को भी जोड़ लें। आपके पास काम निपटाने के अलावा जितना भी टाइम बचता है, उसमें अपनी नींद पूरी कर लें। नींद न लेने की वजह से आपका दिमाग सही से काम नहीं कर पाएगा।
आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति
जीवन में कई बार ऐसे मौके आएंगे, जब आपका विश्वास डगमगाने लग जाएगा और आपको लगेगा कि आपका लक्ष्य व्यर्थ है, लेकिन उस वक्त आपको इन नकरात्मकताओं से दूर रहकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना है।
पेपर पर अपने लक्ष्य को लिखें
इसके लिए आपको थोड़ी दिमागी कसरत भी करनी पड़ेगी। बेहतर होगा कि आप अपना लक्ष्य पेपर पर लिखकर उससे जुड़ी चुनौतियां भी लिख लें, इससे आपको उन चुनौतियों से कैसे लड़ना है, यह भी अंदाजा हो जाएगा।
समय व्यर्थ करने वाले और नकरात्मक लोगों से दूरी
आपको समय व्यर्थ करने वाले लोगों और नकरात्मक स्वभाव वाले लोगों से दूरी बनाकर रखनी है। इससे आप अपने लक्ष्य पर ध्यान दे पाएंगे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
