July 24, 2026
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    धूम्रपान व शराब के अधिक सेवन से खतरा बढ़ रहा अल्जाइमर का

    • rounak group

    सेहत / शौर्यपथ / गुस्सा, चिड़चिड़ापन और धीरे-धीरे रोजमर्या की छोटी-छोटी चीजें भूलने लगना, ये सभी अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। अल्जाइमर एक तरह का मानसिक विकार है। इस बीमारी में दीमाग की कोशिकाओं पर असर पड़ता है।
    चिकित्सकों के मुताबिक शराब और धूम्रपान करने वालों में इसके होने का खतरा ज्यादा रहता है। यही कारण है कि अब युवा वर्ग में भी ये बीमारी पाई जाने लगी है। जीवन शैली में बदलाव के कारण केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी इससे ग्रस्त पाई जाती हैं।
    पारस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. रजनीश कुमार का कहना है कि लोगों को खुलकर इस बीमारी के बारे में जागरूक करना जरूरी हो गया है। तनाव, श्रवण दोष, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, डायबिटीज और सामजिक रूप से अलग रहना इसके मुख्य कारणों में शामिल है। इसके अलावा धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन भी इस बीमारी का खतरा बढ़ाता है।
    शराब पीने से एमिलॉयड प्लेक को खत्म करने की दिमाग की कोशिकाओं की क्षमता प्रभावित होती है और ऐसे लोगों में अल्जाइमर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। तनावपूर्ण जीवन और कई कामों के बोझ की वजह से यह बीमारी होने पर याददाश्त की कमी होने लगी है।
    लॉकडाउन ने मरीजों की परेशानी बढ़ाई-
    कोलंबिया अस्ताल के सहालकार चिकित्सक डॉ. अपूर्वा शर्मा का कहना है कि अल्जाइमर की बीमारी एक प्रोग्रेसिव कंडीशन होती है, जिसमे मस्तिष्क की कोशिकाओं को याददाश्त, रास्ते, भाषा, ध्यान और योजना बनाने की क्षमता में कमी करता है। देखभाल करने वालों को अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को क्वालिटी लाइफ प्रदान करने में मुश्किल आती है और यह तनावपूर्ण भी होता है।
    उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। लॉकडाउन ने अल्जाइमर के मरीजों के लिए थोड़ी मुश्किल बढ़ा दी है। ऐसे मरीज कहीं जा नहीं सकते, किसी से मिल नहीं सकते, इस तरह से उन पर साइकोलॉजिकल दबाव बढ़ गया है।
    हमें जरुरत है की हम इन मरीजों को ज्यादा से ज्यादा समय दें ताकि वो अच्छे से रिकवरी कर सकें। उन्होंने बताया कि कोविड-19 का समय खासकर वृद्ध मरीजों के लिए बहुत ही मुश्किल भरा रहा है और उनको डायगनोसिस करने में बहुत ही कमी आई है।
    65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ये दिक्कत ज्यादा-
    आर्टेमिस अस्पताल के6 न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. सुमित सिंह का कहना है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, याददाश्त प्रभावित होती जाती है, लेकिन विस्मृति किसी भी उम्र में हो सकती है। अधिकांश लोगों में भूलने की समस्या उम्र के साथ-साथ बढ़ती जाती है।
    65 वर्ष से अधिक उम्र के कम से कम आधे से अधिक लोगों का कहना है कि अपनी युवावस्था की तुलना में अब वे चीजें ज्यादा भूलने लगे हैं। उन्हें वृद्धावस्था का अनुभव होने लगता है, भूलने की यह समस्या उम्र बढऩे के कारण हो रही हो, यह जरूरी नहीं, क्योंकि वृद्धावस्था के दौरान पर्याप्त दिमागी कसरत नहीं होती है। इसलिए, दिमाग और शरीर दोनों को सक्रिय बनाए रखने वाली गतिविधियों में हिस्सा लेने से विस्मृति को कम किया जा सकता है।
    उनके अनुसार यदि आपको या किसी और को याददाश्त से जुड़ी कोई गंभीर समस्या महसूस होती है तो अपने डॉक्टर से बात करें। जो लोग इससे पीड़ित हैं उन्हें समस्या को आगे बढऩे से रोकने के लिए पहले से ही कदम उठाने चाहिए। रक्तचाप को नियंत्रित करना, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के उच्च स्तर को नियंत्रित करना और उसका इलाज करना और धूम्रपान से परहेज करने जैसे उपाय करके इससे बचा जा सकता है।
    अल्जाइमर के लक्षण-
    -चिड़चिड़ापन
    -सोचने की क्षमता कम होना
    -याददाश्त कम हो जाना
    -उदासीनता
    -भटकाव
    -व्यवहार में परिवर्तन

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