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क्वारेंटाईन सेंटरों में मनोरंजन के लिए टी.व्ही,. रेडियो और मनोवैज्ञानिकों की ली जाएंगी सेवाएं
प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार की व्यवस्था होगी सर्वोच्च प्राथमिकता: बनाए जाएंगे राशनकार्ड और मनरेगा के जॉब कार्ड
कुशल और अर्धकुशल श्रमिकों की सूची उपलब्ध करायी जाएगी उद्योगों को रेड जोन और कंटेंनमेंट एरिया में नहीं मिलेगी कोई छूट
वैवाहिक कार्यक्रम की अनुमति अब तहसीलदार देंगे
माल, सिनेमा घर, राजनैतिक सभाएं, सामाजिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध पूर्व की तरह ही जारी रहेगा
विभिन्न प्रदेशों से लौटे प्रवासी मजदूरों को रोजगार और समाज के सभी वर्गों को राहत देने के उपायों पर भी हुई चर्चा
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में प्रदेश में कोविड-19 के नियंत्रण और लॉक-डाउन के बाद ठप्प पड़ी आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने आज उच्च स्तरीय बैठक में विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सभी मंत्रीगण और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित बैठक में विभिन्न राज्यों से लौटे प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने और समाज के सभी वर्गों को राहत देने के उपायों पर चर्चा की गई। लोगों की दिक्कतों का देखते हुए अब वैवाहिक कार्यक्रम की अनुमति तहसीलदार देंगे। अनुमति देने की प्रक्रिया को सरल और आसान बनाया जा रहा है। रेड जोन और कंटेंनमेंट एरिया में कोई छूट नहीं मिलेगी। भारत सरकार द्वारा जारी गाईड लाईन के अनुसार माल, सिनेमा घर, राजनैतिक सभाएं, सामाजिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध पूर्व की तरह ही जारी रहेगा।
बैठक में दुकानों को अब सप्ताह में छह दिन खोलने का निर्णय लिया गया। सभी दुकानों और बाजारों में शारीरिक दूरी की बंदिशें पूर्व की तरह लागू रहेंगी। सप्ताह में छह दिन दुकान खुलने से वहां एक साथ होने वाली भीड़ से राहत मिलेगी। व्यवसायिक-व्यापारिक गतिविधियां शुरू होने से रोजगार के साथ अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। बैठक में ज्यादा से ज्यादा उद्योगों को भी शुरू करने के उपायों पर विचार किया गया। लॉक-डाउन के बाद प्रदेश के 1371 कारखानों में दोबारा काम शुरू हो गए हैं। इन कारखानों में एक लाख तीन हजार श्रमिक काम पर लौट चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने बैठक में क्वारेंटाइन सेंटर्स में रह रहे प्रवासी मजदूरों के मनोरंजन के लिए टेलीविजन, रेडियो आदि की व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने श्रमिकों को मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराने के लिए मनोवैज्ञानिकों की सेवाएं भी लेने को कहा है। मुख्यमंत्री ने गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से क्वारेंटाइन सेंटर्स में योग या अन्य प्रेरक गतिविधियां संचालित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने तनाव कम करने पूरे दिन की व्यवस्थित दिनचर्या तैयार कर इसका पालन सुनिश्चित करने का भी सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि प्रदेश वापस आने वाले श्रमिकों को राशन और रोजगार की चिंता से मुक्त करने की जरूरत है। इसके लिए तत्काल उनके राशन कॉर्ड और मनरेगा जॉब-कार्ड बनवाए जाएं। कुशल और अर्धकुशल श्रमिकों की सूची तैयार कर स्थानीय उद्योगों को उपलब्ध कराया जाए। इससे उद्योगों को जरूरत का मानव संसाधन मिलने के साथ ही श्रमिकों को नियमित रोजगार मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के नियंत्रण और लॉक-डाउन की परिस्थितियों में जन-जीवन को राहत पहुंचाने छत्तीसगढ़ में अच्छा काम हुआ है। सभी विभागों ने बेहतर समन्वय के साथ काम करते हुए जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाई है। शहरी क्षेत्रों में कोविड-19 के बेहतर प्रबंधन के साथ गांव-गांव में लोगों को जागरूक करने के लिए शासन-प्रशासन ने मुस्तैदी से काम किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस की जांच, इलाज और रोकथाम के लिए जितनी भी राशि की जरूरत होगी, स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिकता से उपलब्ध करायी जाएगी।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक दो लाख 12 हजार प्रवासी श्रमिकों को वापस लाया गया है। अब तक 53 श्रमिक स्पेशल ट्रेन आ चुकी हैं और 68 प्रस्तावित हैं। जिला कलेक्टरों को राज्य आपदा निधि से 18 करोड़ 20 लाख रूपए और मुसीबत में फंसे मजदूरों की सहायता के लिए करीब चार करोड़ रूपए राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं। विभिन्न राज्यों में रह रहे प्रवासी श्रमिकों के बैंक खातों में 66 लाख 73 हजार रूपए का भुगतान भी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग को भी राज्य आपदा निधि से 75 करोड़ रूपए दिए गए हैं।
बैठक में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, सहकारिता मंत्री श्री प्रेमसाय सिंह टेकाम, खाद्य मंत्री अमरजीत सिंह भगत, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, श्रम मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, मुख्य सचिव श्री आर.पी. मण्डल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री सुब्रत साहू, स्वास्थ्य सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, खाद्य सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री प्रसन्ना आर., मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव सुश्री सौम्या चौरसिया सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / लॉकडाउन के दौरान सभी का शेड्यूल बदल गया है और हम में से ऐसे कई लोग हैं, जो अब आराम से अपने काम करना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि अब जाना ही कहां है तो आराम से सारा काम किया जा सकता है। चलिए यह बात हो गई काम की, लेकिन यदि आप रात में खाना भी आराम से कर रहे हैं मतलब कि देर रात भोजन कर रहे हैं तो यह आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
अगर आप भी यही दिनचर्या अपना रहे है तो
एक बार इससे होने वाले नुकसान पर नजर जरूर डालें ।
1 बढ़ता है वजन -
रात में शरीर का मेटाबौलिज्म दिन की अपेक्षा धीमा व कमजोर रहता है, जिस वजह से देर रात में खाया गया खाना पचने में परेशानी आती है। इस वजह से रात में अधिक मात्रा में कैलोरी बर्न नहीं हो पाती और वजन बढ़ता है।
2 बढ़ता है ब्लड प्रेशर -
कई जानकारों के अनुसार देर रात खाना खाने से ब्लड प्रेशर के साथ ही खून में शुगर का स्तर भी अधिक हो जाता है, जोकि सेहत को नुकसान पहुंचाता है।
3 सोने में होती है परेशानी -
एक रिपोर्ट के अनुसार देर रात स्नैक्स या खाना खाने से से स्लीप साइकल भी डिस्टर्ब होती है, जिससे गहरी नींद आने में समस्या हो सकती है। साथ ही गैस्ट्रिक समस्या भी हो सकती है, सो अलग।
4 चिड़चिड़ापन -
अगर आप पर्याप्त मात्रा में सुकून की नींद नहीं ले पाते, तो इसका असर आपकी मानसिक सेहत पर भी पड़ता है। दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, नतीजतन चिड़चिड़ापन पैदा होता है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / लॉकडाउन के कारण कई लोग वजन बढ़ने जैसी समस्या से परेशान हैं। यदि आपकी भी यही शिकायत है और आप अपने आकार में अपने शेप में वापस आने की कोशिश कर रहे हैं तो यह लेख सिर्फ आपके लिए हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भोजन स्वस्थ जीवनशैली में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए हम आपको अपने इस लेख में बता रहे हैं एक ऐसे डिटॉक्स ड्रिंक के बारे में जिसके सेवन से यह आपके लिए स्वस्थ और फिट रहने में कारगर साबित होगा। यह ड्रिंक है जीरा, धनिया और सौंफ से तैयार डिटॉक्स ड्रिंक जिसके सेवन से यह शरीर से विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करता है, साथ ही त्वचा को कोमल और स्वस्थ चमकदार बनाने में भी सहायक है, आइए जानते हैं।
वजन घटाने और चमकती त्वचा के लिए
जीरा
यह भारतीय मसाला अपने विभिन्न स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है। जीरा पाचन संबधी समस्या को खत्म करता है और पाचन तंत्र मजबूत करता है। साथ ही वजन कम करने में भी यह बहुत काम आता है। गर्मियों के समय पाचन संबधी समस्या आम हो जाती है, वहीं जीरा उन सभी समस्याओं से निजात दिलाने में मदद कर सकता है। यह पोटेशियम, कैल्शियम व कॉपर जैसे पोषक तत्वों से भी समृद्ध है, जो आपकी त्वचा को कोमल रखने में मदद कर सकता है।
वजन घटाने और चमकदार त्वचा के लिए धनिया
धनिया विभिन्न प्रकार के खनिजों और विटामिनों का एक अच्छा स्रोत है, जो शरीर के अतिरिक्त वजन को कम करने में मदद करता है। धनिये के बीजों में एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा संबंधी कई समस्याओं के इलाज के लिए प्रभावी हो सकते हैं। इसलिए धनिये का सेवन गर्मियों के दौरान महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि गर्मी और पसीने के कारण त्वचा पर अतिरिक्त तेल त्वचा की विभिन्न समस्याओं को जन्म देता है।
वजन घटाने और चमकती त्वचा के लिए सौंफ
गर्मियों के मौसम में मुंहासे त्वचा से जुड़ी एक आम समस्या है और सौंफ को त्वचा को ठंडा करने के लिए जाना जाता है। इसमें जस्ता, कैल्शियम और सेलेनियम जैसे गुण होते हैं, जो शरीर में हार्मोन और ऑक्सीजन के स्तर को संतुलित करने के लिए अच्छे होते हैं, जो त्वचा पर एक स्वस्थ चमक लाते हैं। साथ ही इससे वजन कम होता है।
कैसे तैयार करें जीरा-धनिया-सौंफ का पानी?
आधा चम्मच जीरा, धनिया और सौंफ को 1 गिलास पानी में रातभर भिगो दें।
अगली सुबह इस पानी को अच्छी तरह उबाल लें और पानी छान लें।
काला नमक, शहद और आधा नींबू का रस इसमें मिला लें।
धर्म संसार / शौर्यपथ /पुराणों अनुसार कश्यप ऋषि की पत्नी कद्रू से उन्हें कई नागों की उत्पत्ति हुई है। जैसे अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पिंगला, पद्म, महापद्म, शंख, कुलिक, चूड़, धनंजय आदि। अग्निपुराण में 80 प्रकार के नाग कुलों का वर्णन है। कहते हैं कि कालिया नाग भी कद्रू का पुत्र और वह पन्नग जाति का नागराज था।
कालिया नाग पहले रमण नामक द्वीप में निवास करता था। कहते हैं कि पक्षीराज गरुड़ से जब उसकी शत्रुता बढ़ गई तो वह अपनी पत्नियों सहित यमुना नदी के कुण्ड में आकर रहने लगा था। कालिया जानता था कि यही स्थान सुरक्षित है और यहां गरुड़ भगवान नहीं आ सकते हैं, क्योंकि यहीं पर गरुड़ ने तपस्वी सौभरि के मना करने पर भी कुंड से मछलियों को बलपूर्वक पकड़कर खा लिया था। इससे क्रोधित होकर महर्षि सौभरि ने गरुड़ को शाप दे दिया था कि अब यदि तुमने यहां आकर फिर कभी मछलियों को खाया तो उसी क्षण मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे। यही कारण था कि कालिया नाग यहीं छुपकर रहता था।
उसके विष के कारण यमुना का जल एक स्थान से जहरिला हो चला था जिसके चलते गोकुलवासी उस पानी का उपयोग नहीं कर सकते थे। कालिया देह या कुंड के स्थान पर जो भी जाता था कालिया नाग उसे खा जाता था। इसीलिए उसे कालिया दाह कहने लगे थे।
कहा जाता है कि एक बार श्रीकृष्ण की गेंद उस यमुना कुंड में गिर गई थी। गेंद लेने के लिए श्रीकृष्ण यमुना के उस स्थान पर कूद जाते हैं और जल के अंदर जाकर वे कालिया नाग से युद्ध कर उसको सपर्मण करने के लिए मजबूर कर देते हैं। तब कालिया नाग दया की भीख मांगता है तो भगवान कहते हैं कि तुम वहीं जाओ जहां तुम पहले रहते थे। कालिया नाग कहता है प्रभु वहां तो आपका सेवक गरुड़ मेरी जान का दुश्मन है। तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि तुम्हारे शीश पर मेरे चरणों के निशान देखकर गरुड़ तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ेंगे। तब कालियान नाग अपनी पत्नियों सहित पुन: रमण द्वीप पर चला जाता है।
भारत में निम्न नागवंशी रहे हैं- नल, कवर्धा, फणि-नाग, भोगिन, सदाचंद्र, धनधर्मा, भूतनंदि, शिशुनंदि या यशनंदि तनक, तुश्त, ऐरावत, धृतराष्ट्र, अहि, मणिभद्र, अलापत्र, कम्बल, अंशतर, धनंजय, कालिया, सौंफू, दौद्धिया, काली, तखतू, धूमल, फाहल, काना, गुलिका, सरकोटा इत्यादी नाम के नाग वंश हैं।
एक्टर सोनू सूद भले ही स्क्रीन पर विलेन का किरदार निभाते नजर आते हों लेकिन वो इन दिनों ऐसा काम कर रहे हैं, जिसने उन्हें रियल लाइफ हीरो बना दिया है। सोनू सूद लॉकडाउन के बीच कई प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचा रहे हैं। जरूरतमंद लोग ट्विटर के जरिए सोनू से घर जाने के लिए मदद मांग रहे हैं, जिसके बाद एक्टर खुद उन्हें जवाब देकर उनकी डिटेल ले रहे हैं, जिससे मदद की जा सके।
अब एक यूजर ने मजाक करते हुए सोनू से ठेके पर पहुंचाने के लिए मदद मांगी है। यूजर ने ट्वीट कर लिखा, ‘सोनू भाई मैं अपने घर में फंसा हूं। मुझे ठेके तक पहुंचा दो।’ इस पर सोनू ने भी जवाब दिया, ‘भाई मैं ठेके से घर पहुंचा सकता हूं।
जरूरत पड़े तो बोल देना।’
बता दें, 46 वर्षीय एक्टर ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों के मजदूरों को उनके घर पहुंचाने में मदद की है। सोनू ने इन प्रवासियों के लिए व्यक्तिगत रूप से व्यवस्था की और उन्हें भोजन किट भी प्रदान की।
इससे पहले उन्होंने पंजाब के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 1,500 पीपीई किट भी दान किया था। उन्होंने मुंबई का अपना होटल स्वास्थ्यकर्मियों को रहने के लिए भी दिया है।
सोनू सूद इस वक्त प्रवासी मजदूरों के लिए रीयल लाइफ हीरो बने हुए हैं। घरों से दूर लॉकडाउन में फंसे हुए लोगों को उनके घर पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चेनल में उनकी तारीफ हो रही है।
शौर्यपथ / टीवी एक्ट्रेस प्रेक्षा मेहता ने इंदौर स्थित अपने घर में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली। वे महज 25 वर्ष की थीं।
दो साल पहले वे इंदौर से मुंबई गई थीं। उन्होंने क्राइम पेट्रोल के कुछ एपिसोड में काम भी किया था।
प्रेक्षा 'मेरी दुर्गा' और 'नाल इश्क' जैसे टीवी धारावाहिकों में भी नजर आईं। लॉकडाउन के कारण वे मुंबई से इंदौर अपने घर लौट आईं।
प्रेक्षा के पिता के मुताबिक वे तनाव में थीं और परेशान चल रही थीं। कल रात उन्होंने फांसी लगाकर अपनी जान ले ली। सुबह पिता जब प्रेक्षा को उठाने के लिए गए तो उन्होंने उसे फंदे पर लटका पाया।
वे तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक प्रेक्षा की मृत्यु हो चुकी थी। फिलहाल सुसाइड नोट नहीं मिला है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
प्रेक्षा उभरती हुई कलाकार थीं। उन्होंने कई नाटकों में अभिनय किया और पुरस्कार भी हासिल किए। उनका वीडियो अलबम भी जारी हुआ। अक्षय कुमार की फिल्म 'पैडमैन' में भी उन्हें अभिनय करने का अवसर मिला। कुछ शॉर्ट्स फिल्में भी की।
खेल / शौर्यपथ / बलबीर सिंह सीनियर के नाम के साथ हॉकी अभिन्न रूप से जुड़ा है लेकिन यह महान खिलाड़ी भी भारत के सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट की चमक से अछूता नहीं रहा और एक बार उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को कहा था कि आपकी जीत से मेरी सेहत बेहतर होती है। ओलंपिक में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे 96 साल के बलबीर सीनियर का सोमवार को मोहाली में निधन हो गया।
धोनी के साथ उनकी मुलाकात चार साल पहले हुई थी जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने विश्व टी20 मुकाबले से पहले मोहाली के पीसीए स्टेडियम में थी। बलबीर सीनियर मैच से पहले भारतीय टीम को शुभकामनाएं देना चाहते थे। धोनी ने उन्हें धन्यवाद दिया और उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा जिस पर इस दिग्गज ने हंसते हुए जवाब दिया था, ‘आपकी जीत से मेरी सेहत बेहतर होती है।’
उस समय 92 बरस के बलबीर सीनियर ने कहा था, ‘मैं टीम को तीसरा विश्व खिताब जीतने और स्वर्णिम हैट्रिक पूरी करने की शुभकामना देने आया हूं।’ भारत ने तब ऑस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी लेकिन इसके बाद सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज से हार गई थी। भारत ने धोनी की अगुआई में 2007 में विश्व टी20 और 2011 में 50 ओवर का विश्व कप जीता था।
बलबीर सीनियर स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं से जूझ रहे थे और दो हफ्तों से अधिक समय तक उन्हें जीवन रक्षा प्रणाली पर रखा गया था। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईसीसी) ने आधुनिक ओलंपिक इतिहास के जिन 16 महान खिलाड़ियों का चयन किया था उसमें बलबीर सीनियर एकमात्र भारतीय थे।
ओलंपिक के पुरुष हॉकी फाइनल में किसी खिलाड़ी द्वारा सर्वाधिक गोल दागने का रिकॉर्ड अब भी उनके नाम दर्ज है। उन्होंने 1952 हेलसिंकी ओलंपिक खेलों के पुरुष हॉकी फाइनल में नीदरलैंड पर भारत की 6-1 की जीत में पांच गोल किए थे। बलबीर सीनियर को 1957 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया और वह 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के मैनेजर भी रहे।
नजरिया / शौर्यपथ / कोरोना वैश्विक महामारी ने जिन मुद्दों और समस्याओं की तरफ सरकारों और लोगों का सर्वाधिक ध्यान आकर्षित किया है, उनमें से प्रवासी कामगारों की समस्या सबसे गंभीर है। नेशनल सैंपल सर्वे एवं भारतीय मानव विकास सर्वेक्षण के अनुसार, प्रवासी मजदूरों की अधिकांश जनसंख्या पिछड़े क्षेत्रों, राज्यों, आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों, विशेष तौर पर एसटी, एससी एवं ओबीसी से संबंधित है। उदाहरण के लिए, जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार अंतर-राज्यीय प्रवास की 50 प्रतिशत जनसंख्या उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से संबंधित है। इसमें उत्तर प्रदेश एवं बिहार का हिस्सा 37 प्रतिशत है। प्रवास निम्न आय वाले परिवारों की आजीविका का मुख्य स्रोत बन गया है, इसीलिए प्रतिवर्ष 4.5 प्रतिशत की दर से अंतर-राज्यीय प्रवास में वृद्धि हो रही है।
कोरोना वायरस संकट ने हमारा ध्यान उन समस्याओं की ओर आकर्षित किया है, जिनका सामना इन प्रवासी श्रमिकों को आए दिन करना पड़ता है। क्या अपने ही देश में संविधान प्रदत्त अधिकारों के बावजूद कामगारों को प्रवासी कहना, उनके साथ परायों जैसा व्यवहार करना उचित है? प्रवासी शब्द मात्र ही उन्हें बेघर, मेजबान राज्य पर निर्भर और आत्म स्वाभिमान से वंचित करता है। अब्राहम लिंकन ने कहा था, ‘श्रम पूंजी से पहले और स्वतंत्र है। पूंजी केवल श्रम का फल है और पूंजी कभी भी अस्तित्व में नहीं आ सकती थी, यदि श्रम का अस्तित्व नहीं होता। अत: श्रम पूंजी से श्रेष्ठ है और यह अधिक महत्व का हकदार है।’ श्रम भारत का एक आकर्षण है, लेकिन तब भी श्रमिक को उचित स्थान और अधिकार प्राप्त नहीं हैं। जहां एक ओर, कामगारों की समस्या को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। काम और श्रम को उचित महत्व व सम्मान देने की जरूरत है। वहीं दूसरी ओर, मजदूरों की समस्याओं के दूरगामी समाधान के लिए सरकारी प्रयासों को और व्यवस्थित करने की जरूरत है। इस प्रयास में कुछ बिंदुओं पर ध्यान दिया जा सकता है। पहला, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय द्वारा 2015 में पार्थ मुखोपाध्याय की अध्यक्षता में 18 सदस्यीय कार्यकारी समूह बनाया गया था, जिसने प्रवासी कामगारों की समस्या पर जो सिफारिशें की थीं, उन्हें लागू करने की जरूरत है। दूसरा, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए एक व्यापक नीति बननी चाहिए, ताकि उन्हें काम करने की उचित परिस्थितियां, समय पर मजदूरी, उचित वेतन, अवकाश एवं कार्यस्थल पर सुरक्षा मिले। तीसरा, सभी प्रवासी मजदूरों की कार्यस्थल पर ही खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड स्कीम’ को प्रभावी बनाया जाए, ताकि कोई मजदूर किसी भी राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का लाभ उठा सके।
चौथा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं जन वितरण प्रणाली के अंतर्गत मोटा अनाज, दाल, तेल जैसी जरूरी सामग्रियों को शामिल किया जा सकता है। इससे श्रमिकों को पोषण भी सही मिलेगा। पांचवां, श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए कार्यस्थल पर ही श्रमिक स्कूल खोले जा सकते हैं, जो दूसरे कार्यस्थलों पर चल रहे ऐसे ही श्रमिक स्कूलों से जुडे़ हों, ताकि जब मजदूर एक जगह से दूसरी जगह जाएं, तो उनके बच्चों की शिक्षा बाधित या प्रभावित न हो। छठा, मनरेगा के अंतर्गत कार्य दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 की जा सकती है। सातवीं, अत्यधिक गरीब लोगों की न्यूनतम आय सुनिश्चित करने के लिए यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसी किसी योजना पर विचार किया जा सकता है। सरकारें सुनिश्चित करें कि उनके पास प्रवासी श्रमिकों का पर्याप्त डाटा रहे, ताकि कोई फैसला लेने में आसानी हो। योजनाओं के जरिए मजदूरों को रजिस्ट्रेशन के लिए प्रेरित करना चाहिए।
हमें प्रवासियों की समस्या को संपूर्णता में देखना होगा। तात्कालिक के साथ-साथ दीर्घकालिक रणनीति बनाने की जरूरत है। शहरों के साथ-साथ गांवों में भी लाभदायक रोजगार सृजित करने होंगे। इसके लिए ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान देना होगा। हम अपनी विशाल आबादी का फायदा तभी उठा सकेंगे, जब हम अपने युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार देंगे। इस दिशा में सामूहिक प्रयासों की जरूरत है, ताकि मेहनतकश समाज को गरिमामय जीवन दिया जा सके।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
सत्यपाल सिंह मीना, राजस्व अधिकारी
सम्पादकीय / शौर्यपथ / यह सचमुच कडे़ इम्तिहान की घड़ी है। प्रकृति जैसे हमारे समूचे धैर्य और संघर्ष-शक्ति को आजमाने पर उतर आई है। एक तरफ, दुनिया कोविड-19 के कहर से हलकान है, तो वहीं दूसरी ओर चक्रवाती तूफान कई देशों के लिए विनाशकारी बनकर आया, और अब लू के थपेड़ों ने धरती के जीवों को झुलसाना शुरू कर दिया है। भारत के कुछ हिस्सों में तो पारा सोमवार को 47 डिग्री के पार चला गया और मौसम विभाग का आकलन है कि इस बार मानसून देरी से केरल पहुंच रहा है यानी सूरज देव का कोपभाजन लंबे समय तक बनना पडे़गा, खासकर उत्तर भारत के लोगों को। चढ़ते पारे के कारण मौसम विभाग ने कल दिल्ली में ‘ऑरेंज अलर्ट’ तक जारी किया था। ऐसी सूचनाएं लोगों को आगाह करती हैं कि वे बेवजह धूप में न निकलें।
जब कोरोना महामारी के कारण देश-दुनिया में पूर्ण लॉकडाउन हुआ, और कारों-कारखानों के पहिए थमे, तब पर्यावरण में कई तरह के सुखद बदलाव दर्ज किए गए थे। शहरों की हवा, नदी-जल के प्रदूषण में कमी के अलावा सुदूर आर्कटिक क्षेत्र में ओजोन छिद्रों के भरने तक की खबरें आईं। लेकिन तब भी मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने किसी तात्कालिक राहत की उम्मीद नहीं बांधी थी, और अब जिस तरह से तापमान नए रिकॉर्ड दर्ज कराता जा रहा है, उसे देखते हुए शासन-प्रशासन के आगे एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि पिछले एक दशक में 6,000 से भी अधिक लोग लू के शिकार बन चुके हैं। और यह आंकड़ा सिर्फ उन लोगों का है, जिनके नाम सरकारी दस्तावेजों में इस खाते में दर्ज हुए। ऐसे में, शासन-प्रशासन के ऊपर अब दो-दो मोर्चों पर जूझने की जिम्मेदारी होगी। एक तरफ, उन्हें कोविड-19 के संक्रमितों के क्वारंटीन और इलाज की व्यवस्था करनी है, तो वहीं लू के लिहाज से बेहद संवेदनशील लोगों की मदद के लिए भी तत्पर रहना है। चिंता की बात बस यह है कि पिछले दो महीने से भी अधिक समय से अनिवार्य सेवाओं से जुडे़ लोग अनथक अपने कर्तव्य के निर्वाह में जुटे हुए हैं, तापमान के इस तीखे तेवर से उन पर काम का बोझ और बढ़ जाएगा।
देश के कई महानगर पहले ही भारी जल संकट झेल रहे हैं। खासकर गरमी के तीन-चार महीनों में तो उनकी हालत सबसे दयनीय होती है। पिछले साल मुंबई, बेंगलुरु में पानी की किल्लत का आलम यह रहा कि कई बडे़ आयोजन तक टाल देने पडे़ थे। आज जब मुंबई और चेन्नई जैसे महानगर कोरोना महामारी से सर्वाधिक त्रस्त हैं, तब किसी प्रकार का जल संकट उनके लिए परेशानी का एक नया सबब बन सकता है। लोगों की दैनिक जरूरतों के लिए पानी की कमी होगी, जबकि बेहतर सैनेटाइजेशन के लिए उन्हें अधिक पानी की जरूरत होगी। यह ठीक है कि बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय कामगारों के वहां से पलायन के कारण नगर प्रशासन का दबाव कुछ घटा होगा, लेकिन विडंबना यह है कि हमारे नागरिक जीवन की जितनी जमीनी सेवाएं हैं, उनका दारोमदार काफी कुछ बाहर से आए मजदूरों के कंधों पर ही रहा है। इसके लिए किसी बड़े समाजशास्त्रीय अध्ययन की जरूरत भी नहीं। एक बात और। न तो कोरोना शहर-गांव, अमीर-गरीब में कोई फर्क कर रह रहा है और न ही लू के थपेडे़ करेंगे, इसलिए यहां भी एहतियात ही इलाज है।
मेलबॉक्स / शौर्यपथ / भले ही राजनीति में राहुल गांधी कम अनुभवी माने जाते हों और आए दिन अन्य राजनीतिक दल उनके बयान का अनर्थ निकालकर उनका मजाक उड़ाते हों, मगर कोरोना के खतरे को लेकर उनका कहना काफी हद तक सही साबित हुआ है। जब देश में महामारी के मामले बढ़ रहे थे, तभी राहुल गांधी ने प्रतिदिन जांच का दायरा एक लाख किए जाने की बात कही थी, जबकि उस समय चालीस हजार के आसपास जांच हो रही थी। इसके अलावा, उन्होंने मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए व्यवस्था किए जाने का भी सुझाव दिया, लेकिन राजनीतिक दांव-पेच के चलते उनकी दलीलों को अनसुना कर दिया गया। मगर आज सरकार खुद मजदूरों को गंतव्य तक पहुंचाने का काम कर रही है। यह देखकर लगता है कि यदि उनकी बातों पर गौर किया जाता, तो परिस्थितियां आज कुछ और होतीं।
अमृतलाल मारू ‘रवि’
ऐसा हो लोकतंत्र
स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ऐसी सरकार की अपेक्षा होती है, जो सशक्त होकर राष्ट्रहित में कठोर निर्णय ले सके। इसके साथ ही एक मजबूत विपक्ष भी होना चाहिए, जो सत्तारूढ़ दल के अच्छे कार्यों का समर्थन और उसके जन-विरोधी कामों का विरोध करके सरकार की निरंकुशता को रोक सके। लिहाजा अपने देश का यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि यहां नेता प्रतिपक्ष का पद इसलिए खाली है, क्योंकि कोई विपक्षी दल इतनी सीटें नहीं जीत सका कि इस पद पर अपने नेता को बैठा सके। इसलिए स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सभी विपक्षी दलों को चाहिए कि वे एकजुट होकर खुद को एक राष्ट्रीय दल के रूप में विकसित करें और देशहित में अपनी पृथक अस्मिता समाप्त करके एक नए युग की शुरुआत करें।
सत्य प्रकाश, लखीमपुर
विद्यार्थियों की दुविधा
कोरोना संकट काल में जहां एक ओर देश भर में डिजिटल शिक्षा का चलन बढ़ा है, तो वहीं दूसरी ओर सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे उन विद्यार्थियों के लिए दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है, जिनके पास तकनीकी साधनों का अभाव है। भले ही सरकारी विद्यालयों में भी अब ऑनलाइन शिक्षा शुरू हो गई है, लेकिन यहां ऐसे विद्यार्थी बड़ी संख्या में पढ़ते हैं, जिनके परिजन अभी दो जून की रोटी के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। इसीलिए कुछ विद्यार्थी अपने गांव की ओर लौट चुके हैं। जाहिर है, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हर बच्चे के पास स्मार्टफोन और नियमित डाटा पैक का होना व्यावहारिक सोच नहीं है। इस कारण वे पढ़ाई से दूर हो रहे हैं, जिससे उनके मानसिक विकास में रुकावट पैदा हो रही है। इससे बच्चे गैर-उत्पादक कामों में भी शामिल हो रहे हैं, जो उन्हें भटकाव और दिशाहीनता की ओर ले जाएगा। इन बच्चों के लिए जल्द से जल्द जरूरी व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए।
शंकर वर्मा, शाहदरा, दिल्ली
एक मुश्किल डगर
कहने और सुनने में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता बहुत अच्छे शब्द लगते हैं, मगर इनकी डगर बहुत कठिन है। वर्तमान पूंजीवादी व्यवस्था में तो यह शायद ही संभव है। यह सही है कि स्वदेशी उत्पादों के इस्तेमाल से ही आत्मनिर्भर बना जा सकता है, क्योंकि ये एक-दूसरे के पूरक हैं, लेकिन इसके लिए अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। सर्वप्रथम जनसंख्या नियंत्रण का प्रयास करना होगा। उसके बाद प्राकृतिक संसाधनों के विकास और संरक्षण की व्यवस्था करनी होगी। निजीकरण को भी समाप्त करना होगा। जाहिर है, इसके लिए जरूरी नीयत और नीति का अपने यहां अभाव है। जनवादी नीतियां और ठोस प्रोग्राम न होने से ही सरकार शानदार काम करने वाले सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में बेचने पर आमादा है। ऐसे में, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता कतई नहीं आ सकतीं।
वेद मामूरपुर ,नरेला
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
