September 01, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    महिला आयोग अध्यक्ष किरणमयी नायक ने की दुर्ग में 25 प्रकरणों की सुनवाई

    • doing of business

    बच्ची की परवरिश का हवाला देकर एक साथ रहने राजी करवाया पति पत्नी को
    एफआईआर होने के 11 माह बाद भी गिरफ्तारी नही होने पर बेहद नाराज हुई महिला आयेाग अध्यक्ष
    कहा 15 दिन मे कार्यवाही नहीं होने पर थाना प्रभारी के विरुद्ध होगी कार्यवाही
    आयोग की समझाइश पर परिवार हुए एक, आपसी विवाद पर आपसी सुलह का सकारात्मक संदेश

        दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक ने आज जिला पंचायत के सभा कक्ष में दुर्ग जिले से प्राप्त प्रकरणों की सुनवाई की। आज की सुनवाई में 25 प्रकरण आयोग के समक्ष रखे गए थे जिसमे 15 प्रकरणों में पक्षकार उपस्थित रहे जिसमे से 12 प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया। डॉण् नायक ने पक्षकारों की मौजूदगी में प्रकरणों के तथ्य और दोनों पक्षकारों के बयानों व अभिमत को सुनाए। उन्होंने समझौता योग्य प्रकरणों में दोनों पक्षकारों की सहमति पर नस्तीबद्ध किया। दुर्ग में यह विशेष रूप से देखने में आई है कि महिला आयोग की पहली नोटिस मिलने से ही अनावेदक गणों ने शिकायतकर्ता महिलाओं से तत्काल से समझौता किया।
        एक प्रकरण में आयोग ने दोनो पक्षों को विस्तार से सुनाए जिसमें यह बात पता चला की अनावेदकगण  आवेदिका के घर पहुंचे थे जिसकी शिकायत आवेदिका पक्ष के द्वारा थाने में दर्ज करायी गई थी। इसी विवाद के कारण अनावेदकगण की ओर से आवेदिका पक्ष के ऊपर भी एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें आवेदिका पक्ष ने जमानत ले रखी है। लेकिन आवेदिका पक्ष की ओर से अनावेदक पक्ष के विरुद्ध थाना मोहन नगर में एफआईआर जनवरी 2021 में अनावेदकगण के विरुद्ध हो गई है पर अभी तक उन्हें गिरफ्तारी नहीं किया गया है। ऐसी स्तिथि में थाना प्रभारी मोहन नगर द्वारा 10 माह बीतने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं किया जाना और ऐसे गम्भीर अपराध के सम्बंध में आयोग की अध्यक्ष ने सुनवाई के दौरान आई जी से टेलीफोनिक बात किया गया और एफआईआर की कॉपी भी भेजा गया जिसमे कार्यवाही किया जाना अपेक्षित है। तब तक थाना मोहन नगर थाना प्रभारी के लिए एक पत्र आयोग द्वारा प्रेषित किया गया है जिसमे इस एफआईआर के मामले पर 15 दिनों के अंदर अपना रिपोर्ट महिला आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने कहा गया। कार्यवाही नही किये जाने की स्थिति में डीजीपी एवं आई जी के माध्यम से थाना प्रभारी के ऊपर कार्यवाही करने की प्रक्रिया आयोग द्वारा किया जाएगा।
        कामधेनु विश्विद्यालय अंजोरा के प्रकरण में पिछले सुनवाई में आयोग द्वारा आवेदिका को कहा गया था कि कुल सचिव को पक्षकार बनाकर प्रकरण स्पष्ट रूप से अपनी शिकायत आयोग के समक्ष रखे जिस पर आवेदिका ने एक विवरण को टाईप कर आज सुनवाई में प्रस्तुत कियाए जिसके अनुसार आवेदिका ने पूर्व संरक्षण सेवा के लाभ के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष पिछले वर्ष इस अनावेदक को भी पक्षकार बनाया गया था। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आयोग के क्षेत्राधिकारी से बाहर हो जाने से इस प्रकार इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया।
       एक अन्य प्रकरण में पति-पत्नी और दोनो के पिता उपस्थित हुए दोनो पक्षों को आयोग ने विस्तार से सुना जिसमे लगभग 3-4 साल से आवेदिका अपने मायके में रह रही है। आवेदिका की  3 साल 5 महिने साल की बच्ची भी हैं। आयोग की समझाईश पर उभय पक्ष ने राजीनामा कर साथ में रहना मंजूर किया है। पुरानी बातों के लिए एक-दूसरे से माफी मांगी और बच्ची की भविष्य के लिए पति-पत्नि के साथ रहने के निर्णय में लगातार एक साथ रहने के लिए निगरानी भी आयोग द्वारा रखी गई इस प्रकरण की निगरानी श्रीमती रामकली यादव सदस्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण करेंगी। दोनो पक्ष किसी भी तरह के समस्या होने पर उन्हें फोन करके बतायेगे। आगामी दिनांक को आवेदिका के पिता अनावेदकगण पति के साथ मान सम्मान के साथ आवेदिका पत्नी को विदा करेंगे। इस प्रकरण को निगरानी रखने के साथ नस्तीबद्ध किया गया।
      एक अन्य प्रकरण में अनावेदक ने दूसरी शादी कर लिया है, पिछले 2 वर्ष से आवेदिका व उनकी बच्ची को छोड़ रखा है और आवेदिका अनावेदक के खिलाफ  को आपराधिक प्रकरण नहीं चलाना चाहती है। अनावेदक ने यह स्वीकार किया है कि उसने दूसरी विवाह की है। आवेदिका से न्यायालय से तालाक नहीं लिया गया है। जो कि धारा 494 के तहत कानूनी अपराध है और इसमें सजा व जुर्माने का प्रावधान है। बच्चे की पढाई और घर खर्च के लिए अनावेदक द्वारा आयोग के समक्ष बताया कि 10,000 रूपये प्रतिमाह देते है। अनावेदक ने अपने नया घर बनाया है जिसमें जनवरी 2022 में आवेदिका व उनकी बच्ची साथ रहेगी और उक्त मकान को अपने बच्ची के नाम पर करेंगे। इस स्तर पर प्रकरण को आयोग द्वारा निगरानी में रखा गया जिसमे आवेदिका को उक्त मकान में कब्जा मिल जाता है या नहीं मिलता है तो आवेदिका महिला आयोग में आकर सूचित करें ताकि अग्रिम कार्यवाही किया जा सकें। प्रकरण निगरानी में रखा गया।
      एक अन्य प्रकरण में आयोग की समझाईश पर पति-पत्नी अपने समस्त प्रकरणों में समझौते की ओर बढना चाहते है। अनावेदक पक्ष आवेदिका का समस्त सामान व स्त्रीधन के साथ एक मुश्त अंतिम भरण पोषण देगा और आवेदिका व अनावेदक आपसी समझौते से न्यायालय से तलाक ले सकेंगे। पति.पत्नी आपसी समझौते नामा लेकर आयोग के समक्ष उपस्थित होने कहा गया है।

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision