August 04, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    कभी नहीं सोचा था ‘दूध’ से ज्यादा आय ‘गोबर’ से होगी

    • rounak group

    -‘धमधा के किसान श्री विश्राम सिंह पटेल की कहानी’, जिन्हें दूध से ज्यादा आय गोबर बेचकर हुई
    - दो किस्तों को मिलाकर अब तक करीब 16 हजार रुपए कमाए, वहीं इस दौरान दूध बेचकर हुई करीब 11 हजार 300 रुपए की आमदनी
    -सोच रहे थे अपने मवेशी बेच दें मगर ‘गोधन न्याय योजना’ ने बदल दिया इरादा
    -गौपालन को मिला सहारा और जैविक खेती को मिल रहा बढ़ावा पशुपालकों और किसानों के लिए फायदे की योजना है गोधन न्याय योजना

    दुर्ग / शौर्यपथ / जनहित में लिया गया एक सही निर्णय किस तरह कारगर साबित होता है इसका साक्षात उदाहरण है धमधा के किसान श्री विश्राम सिंह पटेल। वे बताते हैं कि कुछ महीनों पहले रखरखाव में हो रहे खर्च के कारण उन्होंने इरादा कर लिया था कि वह अपने सारे मवेशी बेच बेच देंगे लेकिन उनका इरादा बदल दिया राज्य शासन की गोधन न्याय योजना ने। जब उनको पता चला कि सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों और पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने से गोबर खरीदने की योजना शुरू की है तो उन्होंने भी सोचा क्यों न वो भी इस योजना का फायदा उठाएं।
    40 मवेशियों से मिलता है करीब ढाई से तीन क्विंटल गोबर, दो किस्तों को मिलाकर अब तक करीब 16 हजार रुपए कमाए, वहीं इस दौरान दूध बेचकर हुई करीब 11 हजार 300 रुपए की आमदनी - श्री विश्राम सिंह पटेल बताते हैं शुरुआत में तो केवल आजमाने के लिए उन्होंने गोबर इकट्ठा किया तो देखा 40 मवेशियों से करीब ढाई से 3 क्विंटल गोबर इकट्ठा हो जाता है। उनके पास 10 गायें गिर नस्ल की, 15 देसी नस्ल की हैं और 15 बछड़े और बछिया है। उन्होंने बताया कि एक गाय साल भर दूध नहीं देती जब उसके बछड़े होते तभी दूध देती है। इस लिहाज से एक समय मे 25 में 8 से 10 गायें ही दूध देती हैं । उनके यहाँ देसी गाय एक दिन में डेढ़ से दो लीटर दूध देती है और गिर गाय 7 से 8 लीटर। वर्तमान में 4 देसी और 3 गिर गायें दूध दे रही हैं। जिनसे प्राकृतिक रूप से एक दिन में करीब 15 से 20 लीटर दूध मिलता है। वहीं 40 मवेशियों से करीब ढाई से तीन क्विंटल गोबर मिला जिसे बेचकर पहली किस्त में 6470 और दूसरी किस्त 9450 दोनों को मिलाकर करीब 16 हजार रुपए मिले। वहीं दूध बेचकर इसी अवधि में उनको 11 हजार 300 रुपए की आमदनी हुई। श्री विश्राम सिंह पटेल बताते हैं कि एक दिन उन्होंने करीब 700 रुपए का गोबर बेचा और उसी दिन 500 रुपए का दूध। ये देखकर उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि गोबर से भी उनको इतनी आय हो सकती।
    गौपालन को मिला सहारा और जैविक खेती को मिल रहा बढ़ावा पशुपालकों के लिए फायदे की योजना है गोधन न्याय योजना - श्री पटेल ने बताया कि 40 मवेशियों के पालन पोषण रख-रखाव बहुत महंगा पड़ रहा था। हरा चारा तो अपने खेतों से मिल जाता था मगर बाजार से चारा, मवेशियों के टीकाकरण, श्रमिकों की मजदूरी मिलाकर काफी खर्च हो जाता था। एक समय ऐसा आया कि उन्होंने तो गौपालन बंद करने का सोच लिया था लेकिन, ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत हो रही गोबर खरीदी से उनके गौपालन को सहारा मिला और उन्होंने अपना इरादा बदल दिया। अतिरिक्त आमदनी होने से उनको मवेशियों के रख-रखाव में मदद मिलेगी।

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision