January 09, 2026
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ॐ श्री हनुमते नमः! दिव्य हनुमंत कथा में उमड़ी भक्तों की भारी भक्तिमय धारा

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श्रीरामजी के बिना हनुमानजी अधूरे, चौपाई वार महत्व बताया पंडित धीरेंद्र शास्त्रीजी ने... आज दोपहर 1 बजे लगेगा दिव्य दरबार

भिलाई / शौर्यपथ / औद्योगिक नगरी भिलाई में सेवा समर्पण संस्था के संयोजक राकेश पाण्डेयजी के नेतृत्व में चल रही **दिव्य हनुमंत कथा** के द्वितीय दिवस पंडित धीरेंद्र शास्त्रीजी (बागेश्वर धाम) ने हनुमान चालीसा के षष्ठ चौपाई **"हाथ बज्र व ध्वजा विराजे"** का दिव्य भाष्य करते हुए कहा—जैसे बांग्लादेश में निर्दोष हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं, वैसे ही आज के काल में सनातन धर्म की रक्षा एवं हिंदू भक्तों की सुरक्षा हेतु **ध्वज, माला एवं भाला** तीनों सदा धारण करना अत्यावश्यक है। हे भक्तगण! अधर्म के विरुद्ध यह त्रिशूल हनुमानजी का प्रतीक है।
कथा स्थल पर भक्तों की भारी वर्षा हुई। दुर्ग-भिलाई, रायपुर, राजनांदगांव सहित छत्तीसगढ़ एवं अन्य प्रांतों से सैकड़ों भक्तगण पधारे। इनमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव सायजी की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय , भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पाण्डेय , सांसद विजय बघेल एवं धर्मपत्नी श्रीमती रजनी बघेल , अहिवारा विधायक डोमन लाल कोसेवाड़ा, प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष सुष्री विभा अवस्थी, दुर्ग-महापौर श्रीमती अल्का बाघमार, जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव की माता पुष्पा देवी यादव, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर, सांवला राम डाहरे, बस्तर राजा कमल सिंह भंजदेव सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने कथा श्रवण कर पंडित शास्त्रीजी के चरणों में आशीर्वाद ग्रहण किया।

हनुमान चालीसा का दसवां भाग: श्रीराम भक्ति का सार
पंडित धीरेंद्र शास्त्रीजी ने हनुमान चालीसा के दसवें भाग तक के प्रत्येक चौपाई का निहितार्थ प्रकट करते हुए कहा—**"श्रीरामजी के बिना हनुमानजी अधूरे हैं, हनुमानजी के बिना श्रीरामजी अधूरे!"** यह भक्ति का परम सत्य है। गोस्वामी तुलसीदासजी ने चालीसा में लिखा प्रत्येक शब्द भक्त-भगवान की महिमा ही नहीं, मानव जीवन का सार है। बुरी शक्तियों एवं अधर्मियों के विरुद्ध हनुमान चालीसा **वज्र बाण** है। इसे आचरण में आत्मसात कर धर्ममार्ग पर चलो, तो कल्याण निश्चित। श्रीराम-हनुमान भक्ति के पावन भजनों में समस्त भक्तगण झूम उठे।

आज का दिव्य कार्यक्रम:
शनिवार को तृतीय दिवस दोपहर 1 से 3 बजे तक दिव्य दरबार —पर्ची के माध्यम से दुख-समस्याओं का निवारण। तत्पश्चात 3 से 6 बजे तक पुनः कथा वाचन । हे भक्तो! आइये, हनुमानजी की कृपा पाइये। जय बजरंगबली!

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