July 28, 2026
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    शिव कथा के अंतिम दो दिन भक्ति में डूबे श्रद्धालु सब हो गए शिवमय

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       दुर्ग / शौर्यपथ / ग्राम चिंगरी में शिव महापुराण कथा का षष्ठ एवं सप्तम दिवस (अंतिम दो दिवस) अत्यंत भव्य, भावपूर्ण और समापन की दिव्यता से परिपूर्ण रहा। मां अंबे दुर्गा उत्सव नवयुवक मंडल एवं सर्व समाज द्वारा आयोजित इस पावन श्रृंखला का समापन शिव-पार्वती विवाह, गणेश जन्म, कार्तिकेय जन्म एवं विवाह, पार्थिव शिवलिंग पूजन, तर्पण, हवन तथा महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिससे पूरा ग्राम शिव-पार्वती की कृपा से आलोकित हो उठा।
    कथा व्यास पं. महेंद्र पांडेय जी ने अंतिम दो दिवसों में शिव-पार्वती विवाह की महान लीला का रसपूर्ण वर्णन किया। सती के आत्मदाह के बाद माता पार्वती ने हिमालय के घर जन्म लिया और कठोर तप से भगवान शिव को पुनः प्रसन्न किया। विवाह अत्यंत भव्य रूप से संपन्न हुआ, जहां हिमालय ने कन्यादान किया, देवताओं ने उपस्थित होकर आशीर्वाद दिया और शिव ने पार्वती को अपनी अर्धांगिनी बनाया। यह कथा प्रेम, तपस्या और दिव्य मिलन की अमर गाथा है।
    इसके पश्चात भगवान गणेश के जन्म की कथा सुनाई गई। माता पार्वती ने स्नान के समय अपने उबटन से एक बालक की रचना की और उसे अपना पुत्र घोषित किया। जब भगवान शिव आए तो गणेश ने माता की आज्ञा से द्वार रक्षक बने, जिससे क्रोधित होकर शिव ने उनका सिर काट दिया। बाद में हाथी का सिर लगाकर गणेश को पुनर्जीवित किया गया, और वे विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य बने। यह कथा माता की ममता और शिव की करुणा का प्रतीक है।
    तत्पश्चात कार्तिकेय (स्कंद) के जन्म एवं विवाह की दिव्य कथा का वर्णन हुआ। तारकासुर के अत्याचार से व्यथित देवताओं की प्रार्थना पर शिव-पार्वती के मिलन से कार्तिकेय का जन्म हुआ। वे छह मुखों वाले, वीर योद्धा के रूप में प्रकट हुए और तारकासुर का संहार कर देवताओं की रक्षा की। बाद में उनका विवाह भी संपन्न हुआ, जो शक्ति और विजय का प्रतीक है।
    समापन पर पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष आदि से लिंग पूजा की। इसके बाद तर्पण एवं हवन संपन्न हुआ, जिसमें पूर्वजों और पुण्यात्माओं की शांति के लिए आहुतियां दी गईं। पूजन पश्चात महाप्रसाद वितरित किया गया, जिसे ग्रामवासियों ने भक्ति-भाव से ग्रहण किया।
    यह समस्त कार्यक्रम देवी इशर गौरा गौरी (माता पार्वती) की कृपा से संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य ग्रामवासियों की आत्मोन्नति, सुख-शांति तथा पूर्वजों एवं पुण्यात्माओं की शांति प्राप्ति था। अंतिम दो दिवसों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई, और पूरा ग्राम 'हर हर महादेव' तथा 'जय माता दी' के जयकारों से गूंज उठा।
    यह शिव महापुराण कथा श्रृंखला ग्राम चिंगरी के लिए एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन सिद्ध हुई, जिससे सभी के हृदय में शिव-पार्वती की भक्ति स्थायी रूप से बस गई।

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