August 26, 2026
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    भिलाई इस्पात संयंत्र में हिन्दी में कार्य करने का काम केवल भाषणों और कार्यक्रमों तक है सीमित लिखा पढ़ी का अधिकांश कार्य हो रहा है अंग्रेजी में

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    हिन्दी में अनुवादित प्रति देने से बीएसपी लोगों को कर रही है इनकार , परिवादी को हाईकोर्ट से मिला न्याय

    भिलाई / शौर्यपथ / राजभाषा हिंदी के इस्तेमाल का प्रचार करने वाला सार्वजनिक उपक्रम भिलाई इस्पात संयंत्र व्यवहारिक रूप से हिंदी के पालन से हमेशा बबचने का कार्य करता है, ऐसा लगता है कि हिन्दी में काम करने व हिन्दी को बढ़ावा देने का कार्य केवल समाचार पत्रों में विज्ञप्ति भेज प्रकाशित करने तक ही सीमित है, इसका जीता जागता उदाहरण अभी सामने आया है। इसी प्रकार के एक मामले में बीएसपी ने एक व्यक्ति द्वारा हिन्दी में अनुवादित प्रति की मांग की थी जिसको बीएसपी ने देने से इंकार कर दिया था, उसके बाद परिवादी हाईकोर्ट में परिवाद दायर किया तो वहां से उसको न्याय मिला। एक नही कई इस प्रकार के मामले आते हैं और लोगों को हिंदी की प्रति के लिए भटकना पड़ता है। ऐसे ही मामले में एक फरियादी ने राजभाषा हिंदी के सम्मान के लिए छत्तीसगढ उच्च न्यायालय तक गुहार लगाई और अंततरू न्याय मिला।
    उच्च न्यायालय बिलासपुर ने इस मामले में भिलाई स्टील प्लांट मैनेजमेंट को निर्देश दिया है कि वह चाही गई प्रति का हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराए। याचिकाकर्ता आरपी शर्मा ने इसे राजभाषा हिंदी के अनुपालन में एक बड़ी पहल बताते हुए कहा है कि इस फैसले से भिलाई स्टील प्लांट मैनेजमेंट की कथनी और करनी का फर्क साफ हो गया है। उन्होंने कहा है कि आए दिन राजभाषा हिंदी के नाम पर आयोजनों में लाखों रूपए फूंक देने वाला भिलाई स्टील प्लांट व्यवहारिक रूप से हिंदी का कितना इस्तेमाल कर रहा हैए इसे माननीय उच्च न्यायालय के फैसले ने प्रमाणित कर दिया है।
    उल्लेखनीय है कि जयप्रकाश नारायण स्मारक प्रतिष्ठान एचएससीएल कालोनी रूआबांधा निवासी आरपी शर्मा के विरुद्ध भिलाई स्टील प्लांट संपदा न्यायालय में बेदखली का मामला लंबित है। जिसमें आर पी शर्मा ने माननीय संपदा अधिकारी बीएसपी द्वारा अंग्रेजी में प्रस्तुत बेदखली प्रकरण की हिंदी अनुदित प्रति चाही थी। जिसके लिए आर पी शर्मा ने 24 दिसंबर 2020 को बाकायदा मैनेजमेंट को लिखित में अनुरोध किया था। लेकिन माननीय संपदा न्यायालय ने आर पी शर्मा के इस आवेदन को 14 जनवरी 2021 को खारिज कर अनर्गल टिप्पणी करते हुए हिंदी अनुवाद देने से इनकार कर दिया था।
    इस पर शर्मा ने पूरे मामले की शिकायत भारतीय इस्पात प्राधिकरण ;सेलद्ध की चेयरमैनए निदेशकए राजभाषा केंद्रीय गृह मंत्रालयए राजभाषा प्रमुख व निदेशक प्रभारी भिलाई स्टील प्लांट और संपदा अधिकारी भिलाई स्टील प्लांट से 18 जनवरी 2021 को की थी। इसके बावजूद कोई पहल नहीं होने पर आर पी शर्मा ने अपने हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉण् शैलेष आहूजा और संपदा न्यायालय का मामला देख रहे अधिवक्ता जमील अहमद के माध्यम से छत्तीसग? उच्च न्यायालय बिलासपुर में 25 जनवरी 2021 को सेल.बीएसपी के विरुद्ध वाद दाखिल किया था।
    इस मामले में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने 12 फरवरी 2021 को अपना फैसला सुनाया। जिसमें माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि.ह्यह्यउत्तरवादी को यह निर्देशित किया जाता है कि संपदा अधिकारी के समक्ष मूल वाद की हिंदी में अनुवादित प्रति और अनुलग्नकों ;एनेक्सर्सद्ध सहित आगामी पेशी तिथि पर या कोई बढाई गई पेशी तिथि पर प्रस्तुत करें। आगे यह भी बताया जाता है कि याचिकाकर्ता संपदा अधिकारी के समक्ष लंबित कार्यवाही में अनावश्यक स्थगनध्विलम्ब नहीं करेगाए यथासंभव शीघ्र निष्कर्ष निकाला जाए। इस फैसले पर संतोष जताते हुए फरियादी आर पी शर्मा ने कहा है कि उन्हें उच्च न्यायालय से न्याय मिला। अब बीएसपी मैनेजमेंट को हिंदी अनुवाद की प्रति देनी होगी। उन्होंने कहा कि यह राजभाषा हिंदी का सम्मान बनाए रखने के प्रति उनका एक छोटा सा प्रयास था।

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