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दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग, छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से ग्राम मुंहरेंगा में माता कौशल्या महोत्सव सम्पन्न हुआ । माता कौशल्या गौरव अभियान समिति द्वारा आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि कुंवरसिंह निषाद संसदीय सचिव एवं गुंडरदेही विधायक ने कहा कि भगवान श्रीराम की माता कौशल्या जी छत्तीसगढ़ की बेटी है । इसलिए छश्रीसगढ़ में भांजों का चरण स्पर्श किया जाता है । श्रीराम छश्रीसगढ़ के भांजे हैं इसलिए छत्तीसगढ़ के हर भांजे को श्रीराम मानकर चरण स्पर्श किया जाता है । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने माता कौशल्या मंदिर से वन गमन पथ की यात्रा को जन जन के लिए पावन पथ के रूप में महत्व देकर देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ का महत्व बढ़ाया है । श्रीराम ने वनवास के दस वर्ष यहां बिताये। छत्तीसगढ़ ़ पर श्रीराम की कृपा है । यहां किसानों की फसल का दाना दाना महत्व पाता है । यहां नया इतिहास बन रहा है । छत्तीसगढ़ ़ की परंपरा यहाँ के तीज त्यौहार अब अपने असल स्वरूप में मनाए जा रहे हैं । पुरखों का छत्तीसगढ़ ़ अब जगमगा रहा है । आने वाली पीढ़ी मजबूत बने । वर्तमान गौरवशाली हो हम पुरखों के सपने को पूरा कर सकें यह संकल्प लेकर काम किया जा रहा है । उन्होंने कौशल्या महोत्सव के आयोजन को महत्वपूर्ण आयोजन बताते हुए कहा कि इस समिति ने विगत दस वर्षों में लगातार संस्कृति और परंपरा पर केन्द्रित कार्यक्रम का कीर्तिमान बनाया है । अध्यक्ष डी.एस. परगनिहा मुख्य अभियंता छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क अभिकरण ने कहा कि हमारे गांव का सौभाग्य है कि माता कौशल्या महोत्सव मनाने के लिए इसे चुना गया ।
पुरखों की दी हुई सीख से हम सब सही राह पर चलें यहीं संकल्प होना चाहिए । छत्तीसगढ़ देश भर में चर्चित है । अब विदेशों में भी हमारी पहचान है । नए संकल्पों के साथ हमारा छत्तीसगढ़ आगे बढ़ रहा है ।
धनराज बंजारे सभापति जनपद पंचायत धमधा, टूमनलाल साहू विधायक प्रतिनिधि धमधा, सूर्यकान्त शर्मा विधायक प्रतिनिधि बेमेतरा विशेष अतिथि थे । संयोजक साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने संस्थापक अध्यक्ष संत पवन दीवान के त्यागी जीवन को याद किया । छत्तीसगढ़ के यश के लिए काम करने वाले पुरखों के संबंध में उन्होंने कहा कि उनके सपनों को साकार करने का जो प्रयास मुख्यमंत्री और उनके साथी कर रहे हैं उसे साहित्य एवं कला जगत से लेकर आम आदमी महसूस कर रहे है । त्यौहार, पर्व, परंपरा का मूल रूप सामने आ रहा है । श्रीराम वन गमन पथ पर यह नाटिक माघी पुन्नी मेला राजिम में मंचित हुआ । यह नाटिका श्रीराम के त्यागी जीवन और आदर्श की मंचीय प्रस्तुति है जिसे महेश वर्मा एवं राजेन्द्र साहू ने प्रभावशाली बनाया है। मैंने शोध पर आधारित नाटिका का लेखन किया है । कलाकारों ने इसे लोकरंजक बनाकर प्रभावशाली रूप दिया है । यह नाटिका श्रीराम के संकल्प संघर्ष और संस्कार पर आधारित है । छत्तीसगढ़ भाषा रचित नाटिका का प्रदर्शन शीघ्र ही अन्य आयोजनों में होगा । मंच पर लोकमया, लोकधारा, राऊत नाचा, बांसगीत की प्रस्तुति हुई । आर.डी.राव का गायन तथा रामपुर के कलाकारों का चाय पर केन्द्रित हास्य प्रहसन हुआ । देर रात्रि तक दर्शकों ने महोत्सव का आनंद लिया । रामपुर के कलाकार गंधर्व ने महेश वर्मा को अपने हाथ से बनाया पोट्रेट भेंट किया ।
विशेष स्मृति चिन्ह देकर अतिथियों एवं कलाकारों को मंच पर सम्मानित किया गया । मंच संचालन नारायण चंद्राकर ने किया तथा आभार गांव मुंहरेंगा के संरपंच वीरेन्द्र यादव ने व्यक्त किया । आसापास के गांवों के रसिक श्रोता बड़ी संख्या में मुंहरेंगा महोत्सव में उपस्थित थे
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
