August 07, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 5000 पदों पर
    भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा

      रायपुर / शौर्यपथ / स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता एवं सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के कुल 5000 पदों पर भर्ती का विज्ञापन शीघ्र ही जारी किया जा रहा है। शासन ने परीक्षा आयोजन के लिये छत्तीसगढ़ व्यापम को अधिकृत किया है एवं विभाग द्वारा विज्ञापन जारी करने संबंधी सभी प्रक्रियाओं को पूर्ण कर आवश्यक प्रपत्र व्यापम को उपलब्ध करा दिया गया है। इसके साथ ही सीधी भर्ती 2023 की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है।
    छत्तीसगढ़ सरकार स्कूल शिक्षा विभाग में 5,000 से अधिक पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया फरवरी 2026 में शुरू करने जा रही है। इन पदों के लिए चयन व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, यह भर्ती राज्य के विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए की जा रही है। शिक्षा विभाग के इस फैसले से राज्य भर के सरकारी स्कूलों में टीचरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी । भर्ती प्रक्रिया के बारे में डिटेल्ड गाइडलाइंस आने वाले दिनों में जारी की जाएगी।
    छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के माध्यम से न केवल हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी। खास बात यह है कि इसमें व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक और प्रयोगशाला सहायक जैसे कई पद शामिल किए जा रहे हैं, जिससे अलग-अलग योग्यता वाले उम्मीदवारों को अवसर मिलेगा।
    ज्ञातव्य है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक सीधी भर्ती 2023 अंतर्गत सहायक शिक्षक पद के पांचवें चरण की भर्ती प्रक्रिया में माननीय न्यायालय के निर्देशानुसार सेवा समाप्त किये गये 2621 बी.एड. अर्हताधारियों के स्थापन पर डी.एड. अर्हताधारियों अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर प्रदान किया गया है।

      रिसाली / महापौर शशि सिन्हा विकास कार्य और व्यवस्थाओं का फीडबैक लेने वार्डो तक पहुंच रही है। वे अल सुबह वार्ड 15 मौहारी मरोदा पहुंची। रिसाली महापौर नागरिकों से बातचीत करते नाली पर हुए अतिक्रमण को हटाने निर्देश दिए।
    मौहारी मरोदा क्षेत्र का भ्रमण करते महापौर और एमआईसी सद्स्यों ने साफ सफाई समेत व्यवस्थाओं पर नागरिकों से चर्चा की। उनका कहना था कि फीडबैक के आधार पर ही वे कार्य योजना तैयार कर विकास को गति देंगे। नागरिकों से मिले सुझाव को वे प्राथमिकता भी देंगे। इस दौरान उनकी नजर प्रजापति किराना स्टोर्स के पास नाली पर हुए अतिक्रमण पर टीकी। उन्होंने निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए। निरीक्षण के दौरान महापौर परिषद के सद्स्य अनिल देशमुख, संजू नेताम समेत प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी अमित चंद्राकर, राजस्व विभाग के प्रभारी अधिकारी योगेश सुरे, जलकार्य विभाग के गोपाल सिन्हा आदि मौजूद थे।
    सफाई व्यवस्था पर दे ध्यान
    निरीक्षण के दौरान महापौर शशि सिन्हा सफाई व्यवस्था को भी देखी। उन्होंने प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि जाम नाली की सफाई सबसे पहले काराएं। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कहीं गंदा पानी का जमावड़ा तो नहीं हो रहा है।
    नागरिकों ने की मांग

    इस दौरान नागरिकों ने कुछ खंभों में लाइट नहीं जलने की शिकायत की। नागरिकों का कहना था कि गली में अंधेरा रहता है। महापौर ने नागरिकों को खंभे पर लाइट लगवाए जाने का आश्वासन दिया। इस दौरान उन्होंने रास्ते के बीच लगे बिजली खंभा को हटाकर अन्य स्थान पर शिफ्ट कराने के निर्देश भी दिए।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं

      रायपुर / शौर्यपथ / नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित प्रतिष्ठित "्रAI इंपैक्ट समिट" में छत्तीसगढ़ के युवाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम राष्ट्रीय स्तर पर लहराया है।
    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायपुर के प्रतिभाशाली सिबलिंग अनुराग मानिक और आस्था मानिक को इंडिया AI इंपैक्ट बिल्डथॉन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश को गौरवान्वित करने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि 40,000 से अधिक प्रतिभागियों के बीच तीन कठिन चरणों को सफलतापूर्वक पार करते हुए शीर्ष स्थान हासिल करना उनकी असाधारण प्रतिभा, परिश्रम और नवाचार क्षमता का प्रमाण है।
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह सफलता छत्तीसगढ़ के युवाओं की क्षमता, आत्मविश्वास और उभरती तकनीकी शक्ति का प्रतीक है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगिता में प्रस्तुत उनका "कर्तव्य" AI ऐप विशेष रूप से सराहना का केंद्र रहा। यह एप्लिकेशन AI-जनित आवाज और वास्तविक आवाज में अंतर पहचानकर लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित रखने में सहायक होगा। तकनीक को सामाजिक सरोकारों से जोडऩे का यह प्रयास आज के डिजिटल युग में अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक है।
    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा अपनी परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए आधुनिक तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। यह उपलब्धि प्रदेश में शिक्षा, नवाचार और अवसरों के विस्तार की दिशा में हो रहे समग्र विकास का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य के युवा इसी प्रकार नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करते हुए छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाएंगे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रोत्साहन और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

       दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग शहर के समग्र और योजनाबद्ध विकास को गति देने के उद्देश्य से सर्किट हाउस दुर्ग में कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में नगर निगम के सभी पार्षदों एवं अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में महापौर श्रीमती अल्का बाघमार, सभापति श्याम शर्मा, आयुक्त सुमित अग्रवाल सहित एमआईसी सदस्य, पार्षदगण एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

    बैठक में शहर के 60 वार्डों में बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री गजेंद्र यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक वार्ड में संबंधित पार्षदों से समन्वय कर प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएं और दो दिनों के भीतर विस्तृत प्लान प्रस्तुत किया जाए।

    कैबिनेट मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य शासन द्वारा अधोसंरचना मद में 22 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। इस राशि से सभी वार्डों में आवश्यक विकास कार्य कराए जाएंगे। विशेष रूप से प्रत्येक वार्ड में नाली निर्माण के लिए 10–10 लाख रुपये तक के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

    बैठक में शहर के प्रमुख तालाबों के सौंदर्यीकरण, उनके आसपास गार्डन विकसित करने तथा मुक्तिधामों के जीर्णोद्धार को भी प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पाइपलाइन विस्तार और नई पाइपलाइन बिछाने जैसे कार्यों पर भी सुझाव आमंत्रित किए गए।

    मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि दुर्ग शहर में विकास कार्य तीव्र गति से चल रहे हैं। सड़क चौड़ीकरण, खेल मैदान, सर्वसुविधायुक्त मांगलिक भवन और महाराजा चौक से पुलगांव तक फोरलेन सड़क जैसे कार्य आने वाले समय में शहर के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।

    महापौर श्रीमती अल्का बाघमार ने बताया कि पहले ही अधोसंरचना मद से 16 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है और अब अतिरिक्त 6 करोड़ रुपये मिलने से कुल राशि 22 करोड़ से अधिक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस राशि से शहर में मूलभूत सुविधाओं को और बेहतर ढंग से विकसित किया जाएगा। महापौर ने स्पष्ट कहा कि दुर्ग के विकास में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी और सभी आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा।

    बैठक में बड़ी संख्या में पार्षदगण, एमआईसी सदस्य और निगम के अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने-अपने वार्डों से संबंधित आवश्यकताओं और सुझावों को सामने रखा।

    **एआई नहीं, एरोगेंस ऑफ इग्नोरेंस!

    गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने ‘मेड इन इंडिया’ को बनाया ‘मेड इन इल्यूजन’**

    नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

    जिस मंच से भारत को विश्व को यह संदेश देना था कि वह अब एआई का उपभोक्ता नहीं, निर्माता बन चुका है, उसी मंच को गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे कृत्य से शर्मसार कर दिया, जिसे भ्रम, अज्ञान और अकादमिक लापरवाही का संयुक्त प्रदर्शन कहना गलत नहीं होगा।

    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026, भारत मंडपम—जहाँ नीति, नवाचार और राष्ट्रीय गौरव का संगम होना था—वहाँ गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीनी रोबोट को भारतीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताकर पेश कर दिया


    जब ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बना ‘सेंटर ऑफ एक्सक्यूज़’

    जिस रोबोटिक डॉग को मंच से ‘ओरियन’ कहकर स्वदेशी नवाचार बताया गया, वह असल में चीन की यूनिट्री कंपनी का ‘Unitree Go2’ मॉडल निकला—जो न तो गुप्त है, न दुर्लभ, और न ही शोध का चमत्कार।
    विडंबना यह रही कि 2–3 लाख रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध इस उत्पाद को यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने कैम्पस में विकसित शोध का नाम दे दिया।


    वीडियो ने किया वह काम, जो विवेक नहीं कर सका

    यदि सोशल मीडिया पर प्रोफेसर का दावा करता हुआ वीडियो वायरल न हुआ होता, तो शायद यह ‘स्वदेशी झूठ’ सरकारी मंच पर यूँ ही तालियाँ बटोरता रहता।
    विडंबना यह है कि जिस विश्वविद्यालय से ज्ञान और सत्यनिष्ठा की अपेक्षा होती है, वहीं से गलत जानकारी आत्मविश्वास के साथ परोसी गई


    सरकारी मंच, निजी लापरवाही

    सरकार ने स्पष्ट कहा—दूसरे देश की तकनीक को अपनी बताने की अनुमति नहीं दी जा सकती
    पर सवाल यह है कि—

    • क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक बार भी तकनीकी सत्यापन की ज़रूरत समझी?

    • क्या ‘आत्मनिर्भर भारत’ सिर्फ़ स्टॉल सजाने का नारा बनकर रह गया?


    माफी नहीं, जिम्मेदारी चाहिए

    घटना के बाद आई माफी और सफाई यह बताने के लिए पर्याप्त है कि—

    “प्रतिनिधि को जानकारी नहीं थी, उत्साह में गलत कहा गया।”

    लेकिन यह वही उत्साह है, जिसने—

    • राष्ट्रीय मंच की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचाई

    • और भारत के एआई प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति में डाल दिया


    गलगोटिया इफेक्ट: मेहनत दूसरों की, श्रेय हमारा?

    यह घटना केवल एक विश्वविद्यालय की भूल नहीं, बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है, जहाँ
    खरीदी गई मशीन को ‘खोज’ और
    ब्रांडिंग को ‘ब्रेकथ्रू’
    समझ लिया गया।


    एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मौजूदगी नवाचार की नहीं, बल्कि नासमझी की पहचान बन गई।
    यदि भारत को सच में एआई महाशक्ति बनना है, तो उसे ऐसे ‘स्वदेशी दिखावे’ से नहीं, बल्कि ईमानदार शोध से आगे बढ़ना होगा।

    दुर्ग। शौर्यपथ।

    शहर की राजनीति में कई बार छोटी दिखने वाली घटनाएँ भी बड़े सवाल खड़े कर जाती हैं। गंजपारा चौक के नामकरण को लेकर हालिया घटनाक्रम ने यही साबित किया है। चौक का नाम “महेश चौक” घोषित होते ही शहर की फिजा में चर्चा का दौर तेज हो गया—क्या यह महज़ एक नामकरण है, या फिर शहरी सरकार की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं का आईना?

    लंबित आवेदन और अचानक निर्णय

    पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल के कार्यकाल में साहू समाज द्वारा “कर्मा माता चौक” और राजस्थानी ब्राह्मण समाज द्वारा “परशुराम चौक” नामकरण के लिए आवेदन दिए गए थे। दोनों प्रस्ताव एमआईसी में लंबित रहे। इसके अतिरिक्त, समीप निर्माणाधीन जगन्नाथ मंदिर को देखते हुए “जगन्नाथ चौक” नाम की भी चर्चा थी।

    लेकिन परिषद के औपचारिक निर्णय से पहले ही गंजपारा चौक को “महेश चौक” के रूप में संबोधित किए जाने की खबर सामने आई। कार्यक्रम में राम रसोई के संरक्षक चतुर्भुज राठी की उपस्थिति ने इस पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक रंग दे दिया।

    सवालों के घेरे में शहरी सरकार

    वर्तमान महापौर अलका बाघमार ने पूर्व सरकार की त्रुटियों को सुधारने का संकल्प लेकर पदभार संभाला था। शपथ ग्रहण के समय निष्पक्षता और पारदर्शिता की जो बात कही गई थी, वह अब गंजपारा चौक के नामकरण प्रकरण में सवालों के घेरे में है।

    यदि परिषद द्वारा अब तक औपचारिक निर्णय नहीं हुआ, तो “महेश चौक” नाम की घोषणा किस अधिकार से और किस प्रक्रिया के तहत हुई?

    क्या यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरकर लिया गया, या फिर प्रभावशाली वर्गों के दबाव में जल्दबाजी में?

    राम रसोई और दोहरे मापदंड का आरोप

    बस स्टैंड स्थित राम रसोई के अनुबंध को लेकर भी पूर्व में अनियमितताओं की चर्चा रही है। स्वयं महापौर ने पूर्व सरकार की गलतियों का उल्लेख करते हुए दूरी बनाई थी। किंतु वर्तमान कार्यकाल में भी अनुबंध की शर्तों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। इसके बावजूद संचालन जारी है और निगम की प्रेस विज्ञप्ति में संचालक को “समाजसेवी” के रूप में प्रस्तुत किया जाना विरोधाभास पैदा करता है।

    यही कारण है कि गंजपारा चौक के नामकरण को लेकर यह धारणा बल पकड़ रही है कि कहीं न कहीं प्रभावशाली और संपन्न वर्ग की आवाज़ अन्य समाजों की अपेक्षा अधिक प्रभावी रही।

    भावनाएँ बनाम राजनीति

    साहू समाज, राजस्थानी ब्राह्मण समाज और उड़िया समाज की ओर से लंबे समय से चली आ रही मांगों पर विचार न करते हुए अचानक एक नाम को आगे बढ़ाना सामाजिक संतुलन पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। शहर की विविध सामाजिक संरचना में संतुलन बनाए रखना शहरी सरकार की जिम्मेदारी है।

    नामकरण मात्र औपचारिकता नहीं—यह भावनाओं, पहचान और सम्मान का विषय होता है। ऐसे में यदि प्रक्रिया पारदर्शी न हो, तो अविश्वास जन्म लेता है।

    निष्पक्षता की कसौटी पर बाघमार सरकार

    पिछले एक वर्ष में कई ऐसे प्रसंग सामने आए हैं, जिनमें शहरी सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर आलोचना हुई है। गंजपारा चौक प्रकरण ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

    क्या यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता के तहत हुआ?

    क्या परिषद की सहमति ली गई?

    क्या सभी समाजों की भावनाओं का सम्मान किया गया?

    इन सवालों के जवाब अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।

    गंजपारा चौक का नाम चाहे जो भी हो, शहर की जनता निष्पक्ष और पारदर्शी शासन की अपेक्षा रखती है। यदि निर्णय प्रक्रिया स्पष्ट और सर्वसम्मति से हो, तो विवाद की गुंजाइश कम होती है। लेकिन यदि जल्दबाजी और प्रभाव का आरोप लगे, तो चर्चा का बाजार गर्म होना स्वाभाविक है।

    अब देखना होगा कि शहरी सरकार इन उठते सवालों का जवाब कैसे देती है—और क्या निष्पक्षता की कसौटी पर स्वयं को सिद्ध कर पाती है, या यह प्रकरण भी राजनीतिक गलियारों में एक और बहस बनकर रह जाएगा।

      दुर्ग, / छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा उपभोक्ताओं को अत्याधुनिक सुविधाओं से अवगत कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे स्मार्ट मीटर जागरूकता पखवाड़ा के तहत दुर्ग शहर वृत्त के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नगर संभाग पश्चिम भिलाई के वैशाली नगर जोन में एकता चौक, लोहिया रोड और कोहका जोन के तहत मंगल बाजार, पुरानी बस्ती में संपन्न हुए। कार्यक्रम के दौरान बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर की उपयोगिता, सटीक बिलिंग प्रक्रिया और बिजली खपत में पारदर्शिता के बारे में विस्तार से बताया गया। दोनों ही स्थानों पर आकर्षक नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया गया, जिसके माध्यम से स्मार्ट मीटर के लाभों को सरल और मनोरंजक तरीके से आम जनता तक पहुँचाया गया। शिविर में उपभोक्ताओं को मोर बिजली ऐप डाउनलोड करवाया गया, ताकि वे अपने मोबाइल पर ही हर आधे घंटे की वास्तविक समय में बिजली खपत की निगरानी कर सकें। कार्यक्रम में उपभोक्ताओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। वैशाली नगर जोन से 32 और कोहका जोन से 35 उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर को लेकर अपना सकारात्मक फीडबैक दर्ज कराया।
    इस अवसर पर नगर संभाग पश्चिम भिलाई के कार्यपालन अभियंता श्री नवीन राठी, कार्यपालन अभियंता स्काडा/डीएमएस सुश्री गीता ठाकुर, सहायक अभियंता श्रीमती सीमा बघेल, सुश्री माया भारती एवं अजय कुमार सिंह, कनिष्ठ अभियंता श्री सुरेश सोनी, श्री प्रकाश रामटेके, श्रीमती सोनम प्रजापति एवं श्री ललित पटेल के साथ जीनस पावर की टीम और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
    इस अभियान के तहत उपभोक्ताओं के अत्याधुनिक तकनीक से सशक्त बनाना और स्मार्ट मीटर के अद्वितीय लाभों से परिचित कराकर एवं स्मार्ट मीटर को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर करते हुए, उन्हें निर्बाध बिजली सेवाओं और सटीक बिलिंग के नए दौर की ओर ले जाना है।

    दुर्ग। थाना पाटन क्षेत्र में राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) से जुड़ी 1 करोड़ 19 लाख रुपये की बड़ी बीमा धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। एचडीएफसी लाइफ कंपनी लिमिटेड, बोकारो (झारखंड) के प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है।

    जांच में सामने आया कि आरोपीगणों ने जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, नकली आधार व अन्य केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर मृत्यु दावा प्रस्तुत किया और करोड़ों रुपये की निकासी कर ली। एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के नाम पर भी मृत्यु दावा लगाया गया, जबकि वह जीवित पाया गया।

    मामले में राजेश कनोजिया (44 वर्ष), निवासी पंचशील सेक्टर-01, बोरसी, दुर्ग को गिरफ्तार किया गया है। वह दुर्ग में ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालित करता था और एनपीएस निकासी के नाम पर लोगों से आधार, पैन और बैंक डिटेल लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। जांच में अमान्य क्यूआर कोड, समान पते और संदिग्ध बैंक खातों से लेन-देन जैसी कई अनियमितताएं सामने आई हैं।

    प्रकरण में एचडीएफसी लाइफ के पूर्व कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिसने कथित रूप से जाली दस्तावेज अपलोड कर सत्यापन प्रक्रिया को दरकिनार किया।

    पुलिस ने आरोपी से ₹10,000 नगद एवं डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। एक आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

      दुर्ग। देव बलौदा मेला स्थल पर कपड़ा बेच रहे एक व्यापारी से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के मामले में थाना पुरानी भिलाई पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार प्रार्थी मोहम्मद इस्माइल (44 वर्ष), निवासी कैम्प-02 पावर हाउस भिलाई, थाना छावनी, जिला दुर्ग, घूम-घूमकर कपड़ा बेचने का कार्य करता है। 16 फरवरी को दोपहर करीब 2:30 बजे वह देव बलौदा मेला स्थल पर कपड़ों की दुकान लगाकर बिक्री कर रहा था।
    इसी दौरान बजरंग दल के नेता प्रदीप सिन्हा एवं उनके साथियों ने कथित तौर पर मंदिर परिसर का हवाला देते हुए दुकान हटाने को कहा। इस बात को लेकर विवाद बढ़ गया। प्रार्थी का आरोप है कि आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।
    व्यापारी ने पुलिस को बताया कि वह विवाद से दूर रहने वाला व्यक्ति है, लेकिन धमकी के बाद वह भयभीत हो गया। उसने घटना का वीडियो रिकॉर्ड होने की बात भी कही है, जिसे जांच के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।
    थाना पुरानी भिलाई पुलिस ने प्रार्थी की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 351(3) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच जारी

    छत्तीसगढ़ के अद्यतन सर्कुलरों संग ‘भू-अभिलेख नियमावली’ का विमोचन

      रायपुर / राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने आज निवास कार्यालय में भू-अभिलेख नियमावली भाग 1 से 4 पुस्तक का विमोचन किया।श्री उमेश पटेल और श्री श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग के सर्कुलर और आदेशों का संकलन है। अभी तक मार्केट में जो पुस्तक थी, उसके लेखक और प्रकाशक मध्य प्रदेश के हैं। इसके कारण मध्यप्रदेश के सर्कुलर और आदेश उस पुस्तक में मिलते हैं, परंतु छत्तीसगढ़ के नहीं।
    अब इस पुस्तक में, वर्ष 2000 के बाद मध्य प्रदेश शासन द्वारा जारी सर्कुलर जो छत्तीसगढ़ राज्य में लागू नहीं है, उन्हें नहीं दिया गया है। छत्तीसगढ़ द्वारा जारी अद्यतन सर्कुलर को अध्याय-वार दिया गया है। परिशिष्ट के रूप में सर्वे, राजस्व वन भूमि के अभिलेख, गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे आदि महत्वपूर्ण विषयों पर जारी लेटेस्ट सर्कुलर शामिल किए गए हैं। विषय से संबंधित प्रश्न, इकाई परिवर्तन, शब्दार्थ आदि का भी समावेश किया गया है।
    छत्तीसगढ़ विशेष के लिए नियमावली की यह पुस्तक बाजार के साथ-साथ अमेजन और जेम पोर्टल पर उपलब्ध होगा

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