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May 30, 2026
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क्या दब जायेंगे अजीत पवार के ऊपर लगे भ्रष्टाचार के मामले .... Featured

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   नई दिल्ली / शौर्यपथ / पिछले 2 जुलाई को महाराष्ट्र में हुए राजनीतिक घटनाक्रम में शरद पवार गुट  के कद्दावर नेता अजित पवार ने पाला बदलते हुए महाराष्ट्र सरकार के साथ हाथ मिला लिया और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ भी ले ली ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि अजित पवार ने अपना पाला बदला हो पिछले विधानसभा चुनाव के बाद भी अजीत पवार ने पाला बदलते हुए महाराष्ट्र में भाजपा के साथ हाथ मिला लिया था किंतु फिर अलग हो गए थे तब यह चर्चा जोरों पर थी कि अजित पवार के ऊपर केन्द्रीय जाँच एजेंसियों की जाँच का दबाव था और वह इन आरोपों से बचने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए थे किंतु उसके बाद बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में शिवसेना ,राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई महाराष्ट्र में सरकार बनते ही लगातार सरकार को अस्थिर करने की कोशिश जारी रही आखिरकार शिवसेना से अलग होकर एकनाथ शिंदे ने शिवसेना शिंदे गुट बनाकर भाजपा में शामिल हुए और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उप मुख्यमंत्री की भूमिका में आ गए अब एक बार फिर अजीत पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से अलग होकर शिवसेना एवं भाजपा के द्वारा सरकार में शामिल होकर उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली जोरों पर है कि एक समय भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के द्वारा अजित पवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जा रहे थे अब वही प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बन गया .
  अजित पवार पर कई मामले जांच के घेरे में है अजीत पवार पर पूर्व में उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राजनीतिक वार करते हुए अजित दादा चक्की पीसिंग वाला ब्यान भी दे चुके हैं वहीं पिछले साल मार्च के महीने में आयकर विभाग ने रिश्तेदारों के घर पर छापा मारा था . मामला चीनी मिल से संबंधित था इस मामले पर बीजेपी नेता ने आरोप लगाए थे कि उनके खाते में 100 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति है राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सिंचाई मामले में अजीत परिवार को क्लीन चिट दे दी थी लेकिन मई 2020 में प्रवर्तन निदेशालय ने विदर्भ सिंचाई घोटाले मामले की नए सिरे से जांच शुरू की थी ऐसा नहीं है कि अजित पवार ही जांच के घेरे में है उनके साथ उनके बेटे पार्थ पवार की कंपनी पर भी आयकर विभाग ने छापा मारा था तब आयकर विभाग ने यह दावा किया था कि अजित पवार के रिश्तेदारों पर हुई इस छापेमारी में ₹184 करोड़ का बेनामी लेनदेन का पता चला .
  अप्रैल 2023 में टाइम्स ऑफ इंडिया के राज्य सहकारी बैंक कंपनी के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया लेकिन उसकी चर्चा शुरू हो गई थी अब देखना यह है कि अजित पवार और उनके रिश्तेदारों के ऊपर केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जो जांच की जा रही थी उस पर विराम लग जाएगा या फिर केंद्रीय अब इस मामले पर अपनी जांच जारी रखेंगे. अजीत पवार के बगावत के बाद अब यह राजनितिक चर्चा भी जोरो पर है कि केंद्र की सरकार सत्ता पाने के लिए खुले आम केन्द्रीय जाँच एजेंसियों के जरियों नेताओं पर दबाव बनाने का कार्य कर रही है और सत्ता मिलने के बाद ऐसी जाँच ठन्डे  बसते में जा रही है . क्या भारत में अब सत्ता के लिए केन्द्रीय जाँच एजेंसियों का सहारा लेकर भाजपा राज करना चाहती है ....

   ये शायद भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ही होगा जो भ्रष्टाचारी के आरोपों से घिरे है वह प्रदेश के मुखिया बने बैठे है . नैतिकता और सुशासन की बात कर सत्ता में काबिज होने वाली भाजपा महंगाई , विकास के मुद्दों को छोड़ कर क्या सिर्फ सत्ता के लिए केन्द्रीय एजेंसियों का उपयोग कर लोकतंत्र की निष्पक्षता पर वार नहीं कर रही है . आखिर अब भाजपा के नेता किस बिना पर कह सकेंगे की सुशासन आ रहा है विकास हो रहा है क्या जनता इन बातो का कभी आंकलन करेगी . आज देश का एक हिस्सा मणिपुर पिश्ले दो महीनो से जल रहा है जिस पर देश के पीएम दो शब्द भी नहीं कह सके . क्या यही लोकतंत्र है जिसे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का दर्ज़ा मिला है क्या इसी स्वतंत्र भारत के  लिए शहीदों ने अपनी कुर्बानी दी थी .

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