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May 30, 2026
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सुप्रीम कोर्ट की केंद्र सरकार को फटकार:अपनी ही पार्टी की राज्य सरकारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं ,अन्य राज्य सरकारों के खिलाफ तो कड़ा रुख Featured

सुप्रीम कोर्ट की केंद्र सरकार को फटकार:अपनी ही पार्टी की राज्य सरकारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं ,अन्य राज्य सरकारों के खिलाफ तो कड़ा रुख सुप्रीम कोर्ट की केंद्र सरकार को फटकार:अपनी ही पार्टी की राज्य सरकारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं ,अन्य राज्य सरकारों के खिलाफ तो कड़ा रुख
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नई दिल्ली / शौर्यपथ / केन्द्र सरकार द्वारा भाजपा शासित राज्यों और गैर भाजपा शासित राज्यों में भेदभाव की निति की हमेशा आलोचना होती रही ए अलग बात है कि चाटुकारिता की आगोश में कई मिडिया चेनल देश की जनता को सच्चाई दिखाने की जगह गुमराह करते नजर आते है किन्तु कुछ बाते ऐसी सामने आ ही जाती है जिसे चाहकर भी दबाया या छुपाया नहीं जा सकता . ऐसे ही एक मामले में देश के सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को महिला आरक्षण के मामले में फटकार लगाई और केन्द्र सरकार की नीतियों कि आलोचना की सुनवाई के दौरान मणिपुर का सन्दर्भ भी सामने आया .
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि राज्य में महिलाओं के लिए आरक्षण क्यों लागू नहीं किया गया? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, आप अपनी ही पार्टी की राज्य सरकारों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करते? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा- आप अन्य राज्य सरकारों के खिलाफ तो कड़ा रुख अपनाते हैं जो आपके प्रति उत्तरदायी नहीं हैं, लेकिन जिस राज्य में आपकी पार्टी की सरकार होती है, वहां आप कुछ नहीं करते.
जज ने पूछे सवाल ...
जस्टिस कौल ने पूछा कि क्या महिलाओं के लिए आरक्षण के खिलाफ कोई प्रावधान है? महिलाओं की भागीदारी का विरोध क्यों जबकि जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाएं समान रूप से शामिल हैं. इसके जवाब में एटॉर्नी जनरल नागालैंड ने कहा कि ऐसे महिला संगठन हैं जो कहते हैं कि उन्हें आरक्षण नहीं चाहिए और ये कोई छोटी संख्या नहीं है. ये पढ़ी-लिखी महिलाएं हैं.
क्या है मामला ..
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट एक अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें नागालैंड सरकार और नागालैंड राज्य चुनाव आयोग पर महिलाओं के लिए 33% आरक्षण के साथ स्थानीय निकाय चुनाव कराने के अपने आदेश का पालन न करने का आरोप लगाया गया है. इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस कौल ने कहा, आरक्षण यह सुनिश्चित करता है कि न्यूनतम स्तर का प्रतिनिधित्व हो. आरक्षण सकारात्मक कार्रवाई की अवधारणा है. उसी पर महिला आरक्षण आधारित है. आप संवैधानिक प्रावधान से कैसे बाहर निकलते हैं? मुझे यह समझ में नहीं आता.

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