August 02, 2026
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    बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा की ओर रुख, नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज

    • rounak group

       पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। उनके इस निर्णय को जहां वे अपनी व्यक्तिगत संसदीय यात्रा की अधूरी इच्छा से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और जनादेश के साथ विश्वासघात बता रहा है।

    संसदीय यात्रा पूरी करने की इच्छा

    नीतीश कुमार ने अपने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) और संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य रहें।
    वे पहले ही तीन सदनों के सदस्य रह चुके हैं, इसलिए राज्यसभा जाना उनकी इस राजनीतिक यात्रा को पूर्ण करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    बिहार में नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव संभव है। करीब 20 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद उनके पद छोड़ने से भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल सकता है
    सूत्रों के अनुसार यह कदम भाजपा और जदयू के बीच हुए बड़े राजनीतिक समझौते का हिस्सा भी माना जा रहा है।

    बेटे निशांत कुमार की राजनीति में संभावित एंट्री

    इस घटनाक्रम के बीच यह भी चर्चा तेज है कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें जदयू में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है और नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद भी मिल सकता है।

    मार्गदर्शक की भूमिका निभाने की बात

    नीतीश कुमार ने कहा है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी वे नई सरकार को अपना सहयोग और मार्गदर्शन देते रहेंगे और गठबंधन की मजबूती के लिए काम करेंगे।


    विपक्ष के आरोप: “जनादेश के साथ विश्वासघात”

    नीतीश कुमार के इस फैसले पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे बिहार में “महाराष्ट्र जैसा खेल” बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता परिवर्तन की रणनीति के तहत यह कदम उठाया है।
    वहीं आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने इसे “Kidnapping with consent” यानी “सहमति से अपहरण” की संज्ञा दी।

    विपक्ष का कहना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता से नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट मांगे गए थे, ऐसे में बीच कार्यकाल में उनका पद छोड़ना जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात है।

    भाजपा का बढ़ता दबाव भी चर्चा में

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बिहार विधानसभा में अब भाजपा के विधायक जदयू से अधिक (भाजपा 85, जदयू 77) हैं। ऐसे में भाजपा लंबे समय से राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाने की इच्छुक थी और यह घटनाक्रम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    स्वास्थ्य और पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलें

    कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से भी नीतीश कुमार सक्रिय प्रशासनिक जिम्मेदारी से पीछे हटना चाहते थे।
    वहीं उनके इस अचानक फैसले से जदयू कार्यकर्ताओं में भी असंतोष देखने को मिला और पटना में पार्टी कार्यालय के बाहर कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।


    कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?

    नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की स्थिति में बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर भाजपा खेमे में कई नाम चर्चा में हैं

    मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं —

    1. सम्राट चौधरी – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के मजबूत ओबीसी चेहरा, जिन्हें सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
    2. नित्यानंद राय – केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और अमित शाह के करीबी नेता, यादव समुदाय से आने के कारण सामाजिक समीकरण में महत्वपूर्ण।
    3. विजय कुमार सिन्हा – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष, संगठन व प्रशासनिक अनुभव के कारण मजबूत विकल्प।
    4. दिलीप कुमार जायसवाल – बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।

    सरकार का संभावित स्वरूप

    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास रह सकता है, जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्री पद दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।


    राज्यसभा चुनाव: 16 मार्च को मतदान

    बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च 2026 को होना तय है
    नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च थी और कुल 6 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है, जिससे चुनाव रोचक होने की संभावना बढ़ गई है।

    एनडीए के उम्मीदवार

    एनडीए ने अपनी ओर से 5 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं —

    • नीतीश कुमार (JD-U)

    • नितिन नबीन (BJP)

    • शिवेश कुमार राम (BJP)

    • रामनाथ ठाकुर (JD-U)

    • उपेन्द्र कुशवाहा (RLM)

    विपक्ष का उम्मीदवार

    वहीं आरजेडी ने पांचवीं सीट के लिए अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है, हालांकि संख्या बल के लिहाज से एनडीए की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

    खाली हो रही सीटें

    ये सीटें हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, प्रेमचंद गुप्ता, अमरेंद्र धारी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही हैं।

    जीत का गणित

    राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।
    एनडीए के पास चार सीटें जीतने का स्पष्ट गणित मौजूद है, जबकि पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।


    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा की ओर यह कदम केवल व्यक्तिगत संसदीय यात्रा का विस्तार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी साबित हो सकता है। अब सबकी नजर भाजपा नेतृत्व के अंतिम निर्णय और बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर टिकी हुई है।

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