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भिलाई/शौर्यपथ।
भिलाई इस्पात संयंत्र की टाउनशिप में व्याप्त अव्यवस्थाओं, भ्रष्टाचार, अवैध कब्जों और मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर भिलाई इस्पात मज़दूर संघ यूनियन ने प्रबंधन के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है। यूनियन की महत्वपूर्ण बैठक इस्पात भवन स्थित कॉफी हाउस में संघ के महामंत्री चन्ना केशवलू के नेतृत्व में आयोजित हुई, जिसमें टाउनशिप की विभिन्न समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में यूनियन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि नगर सेवाएं विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं लगातार बढ़ रही हैं तथा लंबे समय से जमे अधिकारियों के कारण व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। यूनियन ने प्रबंधन के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो कर्मचारियों और नागरिकों के साथ मिलकर आंदोलन और प्रदर्शन किया जाएगा।
यूनियन ने प्रबंधन का ध्यान टाउनशिप की गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि नियमित कर्मचारियों को रिक्त आवास आवंटन की प्रक्रिया सरल और तेज की जाए। पुराने क्वार्टर्स में खराब हो चुकी बिजली वायरिंग और स्विच बोर्डों को सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल बदला जाए। आवासीय क्षेत्रों में संचालित अवैध खटालों को हटाकर सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं, कुत्तों और सुअरों पर नियंत्रण किया जाए, क्योंकि इनके कारण दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ रही हैं।
बैठक में फॉरेस्ट एवेन्यू रोड और गैरेज रोड को बढ़ते यातायात दबाव के मद्देनजर वन-वे घोषित करने, मानसून पूर्व सभी बीएसपी आवासों की छतों पर टारपेल्टिंग कार्य पूर्ण कराने और टाउनशिप में अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई गई। यूनियन ने कहा कि अवैध कब्जों के कारण असामाजिक गतिविधियों और अपराधों को बढ़ावा मिल रहा है।
मार्केट क्षेत्रों में अवैध ठेलों और अतिक्रमण के कारण लगातार जाम की स्थिति निर्मित होने तथा कबाड़ी दुकानों से गंदगी और बदबू फैलने पर भी चिंता जताई गई। भीषण गर्मी को देखते हुए टाउनशिप में दिन में दो बार नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग रखी गई।
यूनियन ने मकानों के बैकलेन और नालियों की सफाई, गटर लाइन पर ढक्कन लगाने, झाड़ियों की कटाई और दूषित पेयजल समस्या के समाधान हेतु पाइपलाइन बदलने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। कई स्कूलों और सामाजिक भवनों द्वारा मैदानों पर किए गए कथित अवैध कब्जों को हटाने की मांग भी बैठक में की गई।
इसके अलावा सेक्टर-4 में पेयजल आपूर्ति समय में सुधार, सेक्टर-6 ई मछली मार्केट से एमजीएम तक अवैध अतिक्रमण हटाने, सभी पोलों पर स्ट्रीट लाइट लगाने, लगातार हो रही बिजली कटौती रोकने तथा मुर्गा चौक से खुर्सीपार फाटक तक सड़क मार्ग पर खड़े ट्रकों एवं ट्रेलरों को हटाकर प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की गई।
यूनियन ने आरोप लगाया कि टाउनशिप में नए महाप्रबंधक इंचार्ज की नियुक्ति के बाद अवैध कब्जों और भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई है। साथ ही संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों को मोबाइल फोन एवं सिम कार्ड उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।
यूनियन पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि बारिश से पहले इन सभी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो नागरिकों और कर्मचारियों का आक्रोश उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
बैठक में उपाध्यक्ष सुधीर गडेवाल, संयुक्त महामंत्री प्रदीप कुमार पाल, मृगेंद्र कुमार, भूपेंद्र बंजारे, सचिव ए. वेंकट रमैया, अखिलेश उपाध्याय, संजय कुमार साकुरे, पूरन लाल साहू, संतोष सिंह, कोषाध्यक्ष रवि चौधरी, नारायण प्रसाद बाजपेयी सहित यूनियन के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
भिलाईनगर/शौर्यपथ।
नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा शहर में अवैध रूप से वाहन खड़े कर सड़क और आवागमन बाधित करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार जोन-1 नेहरू नगर क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर सुपेला एवं आकाश गंगा परिसर में सड़क बाधा उत्पन्न करने वालों पर चालानी कार्रवाई की गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वार्ड क्रमांक 17 आकाश गंगा परिसर में प्रतिष्ठानों के सामने अवैध रूप से वाहन खड़े पाए जाने पर संबंधित वाहन चालकों पर जुर्माना लगाया। कार्रवाई के दौरान गौरी शंकर, मनोज कुमार, सौरभ, प्रकाश हालधर, भोले बाबा, देवनाथ, पवन कुमार गुप्ता एवं रमेश गुप्ता सहित विभिन्न लोगों से कुल 1400 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
इसी प्रकार राखी फर्नीचर रोड के सामने अवैध रूप से सब्जी ट्रक पार्किंग कर सड़क एवं यातायात बाधित करने पर संबंधित वाहन संचालकों पर 1800 रुपये की चालानी कार्रवाई की गई।
निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सड़क पर अवैध पार्किंग, अतिक्रमण एवं आवागमन बाधित करने वालों के खिलाफ आगे भी लगातार अभियान जारी रहेगा। नागरिकों से यातायात व्यवस्था बनाए रखने एवं निर्धारित स्थानों पर ही वाहन पार्क करने की अपील की गई है।
दुर्ग/शौर्यपथ।
सुशासन तिहार-2026 के अंतर्गत जनपद पंचायत धमधा के ग्राम मलपुरीकला में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। शासन की योजनाओं को आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने और समस्याओं के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर में विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 485 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 165 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया। शेष प्रकरणों के निराकरण के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है।
शिविर में मलपुरीकला, अकोला, कपसदा, ओटेबंद, गोढ़ी, अछोटी, ढौर (हि), बोरसी, खपरी, पंचदेवरी, ढाबा, मुर्रा, सांकरा एवं कंडरका सहित 14 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत सैकड़ों हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया।
खाद्य विभाग द्वारा 10 हितग्राहियों को नवीन राशन कार्ड वितरित किए गए। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत व्यक्तिगत शौचालय निर्माण, स्वच्छाग्राही कार्य और बर्तन बैंक संचालन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले हितग्राहियों एवं समूहों को सम्मानित किया गया। जनपद पंचायत धमधा द्वारा सामाजिक सहायता पेंशन योजना के तहत वृद्धा एवं मुख्यमंत्री पेंशन स्वीकृति प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास निर्माण पूर्ण करने वाले हितग्राहियों को पीएम आवास की चाबियां सौंपी गईं। मत्स्य विभाग द्वारा विभिन्न मछुआ सहकारी समितियों को आइस बॉक्स एवं जाल वितरित किए गए, वहीं कृषि विभाग ने किसानों को केसीसी कार्ड प्रदान किए।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा एचपीवी वैक्सीन लगवाने वाली बालिकाओं को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया। साथ ही कक्षा 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने पर समाजसेवी यशवंत वर्मा का भी सम्मान किया गया।
शिविर में अधिकारियों ने विभिन्न विभागीय योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को विस्तारपूर्वक दी तथा योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में अनुविभागीय दण्डाधिकारी महेश सिंह राजपूत, जनपद पंचायत धमधा के सीईओ किरण कौशिक, विधायक प्रतिनिधि सतीश साहू, जनपद सदस्य हेमा साहू, सरपंच दशमत साहू सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
रायपुर/सुकमा/शौर्यपथ।
बस्तर के दुर्गम जंगलों में, जहाँ आज भी कई गाँव विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं, वहाँ मानवता और प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने “सरकार अंतिम व्यक्ति तक” की परिभाषा को जीवंत कर दिया।
सुकमा जिले के दूरस्थ और पहुँचविहीन ग्राम दुरभा में ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत पहुँची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो मासूम बच्चियों — 5 वर्षीय माड़वी नन्दे और 4 वर्षीय माड़वी सुमड़ी — को मौत के मुहाने से वापस खींच लाया।
मलेरिया, गंभीर कुपोषण और शरीर में मात्र 2 से 3 ग्राम हीमोग्लोबिन जैसी बेहद गंभीर स्थिति में जी रहीं इन बच्चियों के लिए यह अभियान किसी जीवनदायिनी आशा से कम नहीं था।
कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के “स्वस्थ बस्तर” संकल्प को जमीन पर उतारते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया।
स्वास्थ्य कर्मियों ने घने जंगलों, पथरीले रास्तों और नदी-नालों को पार कर दुरभा गाँव तक पहुँच बनाई। जब टीम ने बच्चियों की गंभीर हालत देखी, तो तत्काल उन्हें अस्पताल पहुँचाने का निर्णय लिया गया।
मीलों तक पैदल सफर कर बच्चियों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक लाया गया, जहाँ से एम्बुलेंस के जरिए लगभग 96 किलोमीटर दूर जिला चिकित्सालय सुकमा पहुँचाया गया।
यह सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं था, बल्कि प्रशासन और स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की जीवंत तस्वीर थी।
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने युद्ध स्तर पर उपचार शुरू किया।
एनीमिया और मलेरिया से जूझ रही बच्चियों को तत्काल रक्त चढ़ाया गया, मलेरिया का संपूर्ण उपचार दिया गया तथा पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में विशेष निगरानी में रखा गया।
कुछ ही दिनों में बच्चियों का हीमोग्लोबिन स्तर बढ़कर 9 ग्राम से अधिक हो गया और उनके चेहरों पर फिर से मुस्कान लौट आई।
इलाज के दौरान परिजनों को पोषण, स्वच्छता और बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके।
कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार यह मिशन केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं था।
बच्चियों और उनके परिवार को शासन की अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने हेतु आवश्यक दस्तावेज भी तैयार किए गए।
इलाज के बाद दोनों बच्चियों को सुरक्षित उनके गाँव वापस पहुँचाया गया, जहाँ अब उनकी खिलखिलाहट पूरे दुरभा गाँव में उम्मीद और विश्वास की नई कहानी लिख रही है।
सुकमा जिले में इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत अब तक स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है।
दुरभा गाँव की यह कहानी केवल दो बच्चियों के उपचार की नहीं, बल्कि उस भरोसे की कहानी है जिसमें प्रशासन, स्वास्थ्य कर्मी और सरकार मिलकर यह संदेश दे रहे हैं कि —
धान सहित 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि से किसानों को मिलेगा लाभ
रायपुर /शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा विपणन वर्ष 2026-27 हेतु 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि धान सहित विभिन्न खरीफ फसलों के एमएसपी में की गई उल्लेखनीय वृद्धि यह स्पष्ट करती है कि केंद्र सरकार किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में धान के एमएसपी में हुई ऐतिहासिक बढ़ोतरी किसानों के सम्मान, आत्मविश्वास और समृद्धि को नई मजबूती प्रदान कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देश में सर्वाधिक 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर रही है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि प्रदेश में रिकॉर्ड धान खरीदी के साथ किसानों का विश्वास सरकार की किसान हितैषी नीतियों पर लगातार बढ़ा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार किसान कल्याण, कृषि उन्नति और ग्रामीण समृद्धि के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा कृषि क्षेत्र को नई मजबूती देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किसानों के हित में लिए गए इस महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी तथा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त किया है।
लोक सेवा आयोग ने जारी किया अंतिम चयन परिणाम
वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा – युवा प्रतिभाओं को मिलेगा प्रदेश के नियोजित विकास में योगदान का अवसर
रायपुर, / छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आवास एवं पर्यावरण विभाग अंतर्गत सहायक संचालक (योजना) के 21 पदों पर भर्ती के लिए अंतिम चयन परिणाम जारी कर दिया गया है। राज्य गठन के बाद यह पहला अवसर है जब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में सहायक संचालक (योजना) के पदों पर नियमित भर्ती की गई है।
वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह भर्ती केवल रिक्त पदों की पूर्ति नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के सुव्यवस्थित, वैज्ञानिक और दूरदर्शी शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने कहा कि नियोजित विकास, आधुनिक शहरों के निर्माण और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। नई नियुक्तियों से विभाग को युवा, प्रशिक्षित और ऊर्जावान अधिकारियों का सहयोग मिलेगा, जो प्रदेश के शहरों और कस्बों के विकास को नई गति देंगे।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को अधिकतम रोजगार अवसर उपलब्ध कराने और शासन-प्रशासन में योग्य प्रतिभाओं को स्थान देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। यह चयन प्रक्रिया उसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
छत्तीसगढ लोक सेवा आयोग द्वारा जारी परिणाम के अनुसार लिखित परीक्षा 5 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई थी तथा साक्षात्कार 12 मई 2026 को संपन्न हुआ। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर अंतिम चयन सूची जारी की गई है।
वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने चयनित सभी अभ्यर्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें प्रदेश के नियोजित और संतुलित विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि चयनित अधिकारी अपने ज्ञान, कौशल और समर्पण से छत्तीसगढ़ के विकास में उल्लेखनीय योगदान देंगे।
ऊर्जा संरक्षण की दिशा में उठाया गया हर कदम राष्ट्रनिर्माण में योगदान है - मुख्यमंत्री साय
सरकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से ईवी में बदलने की दिशा में होगी कार्रवाई
राष्ट्रहित में ईंधन बचत को जन-आंदोलन बनाने की अपील
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रहित में ईंधन संरक्षण एवं संसाधनों के संयमित उपयोग को लेकर किए गए आह्वान का समर्थन करते हुए कहा है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों के इस दौर में पेट्रोल-डीजल जैसे मूल्यवान संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करना हम सभी का राष्ट्रीय दायित्व है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इसी भावना से प्रेरित होकर राज्य शासन द्वारा शासकीय स्तर पर ईंधन की खपत कम करने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में ठोस पहल की जा रही है।
उन्होंने कहा की कि उनके आधिकारिक भ्रमणों के दौरान अब केवल अत्यावश्यक वाहनों को ही कारकेड में शामिल किया जाएगा। साथ ही मंत्रीगणों तथा विभिन्न निगम-मंडलों के पदाधिकारियों से भी वाहनों एवं अन्य सरकारी संसाधनों के संयमित उपयोग का आग्रह किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शासकीय परिवहन व्यवस्था को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी कार्य करेगी। इसके तहत समस्त शासकीय वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में परिवर्तित करने की दिशा में ठोस कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल ईंधन की बचत करेगा, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से सार्वजनिक परिवहन का अधिकाधिक उपयोग करने, कारपूलिंग अपनाने तथा अनावश्यक निजी वाहनों के उपयोग से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर हम बड़े सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। यदि प्रत्येक नागरिक ईंधन बचत को अपनी जिम्मेदारी माने, तो यह अभियान एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'नेशन फर्स्ट' की भावना के साथ ईंधन संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से राष्ट्रहित में जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक जागरूक कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
चेन्नई/शौर्यपथ।
तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) के नेतृत्व वाली नवगठित तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार ने विधानसभा में भारी बहुमत के साथ विश्वास मत हासिल कर लिया।
13 मई 2026 को आयोजित फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार के पक्ष में 144 विधायकों ने मतदान किया, जबकि विरोध में केवल 22 वोट पड़े। इस परिणाम ने न केवल नई सरकार की स्थिरता पर मुहर लगा दी, बल्कि राज्य की पारंपरिक राजनीतिक धुरी को भी पूरी तरह बदल दिया।
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बचाने के लिए साधारण बहुमत का आंकड़ा 118 था, जिसे विजय सरकार ने बेहद सहजता और प्रभावशाली राजनीतिक प्रबंधन के साथ पार कर लिया।
TVK के पास अपने 107 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, वीसीके, आईयूएमएल और एएमएमके जैसे सहयोगी दलों ने सरकार को खुला समर्थन देकर सत्ता पक्ष को और मजबूती प्रदान की।
विश्वास मत के दौरान सबसे बड़ा राजनीतिक झटका विपक्षी दल AIADMK को लगा।
सूत्रों और सदन की स्थिति के अनुसार, पार्टी के लगभग 25 बागी विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर विजय सरकार के पक्ष में मतदान किया।
इस बगावत के चलते विपक्ष के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी का खेमाअसहज स्थिति में दिखाई दिया और उनके समर्थन में केवल 22 विधायक ही सरकार के खिलाफ मतदान कर सके।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम AIADMK के भीतर गहरे नेतृत्व संकट और असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
हालांकि मतदान की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले मुख्य विपक्षी दल DMK के 59 विधायकों ने पूरी प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
DMK के इस कदम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे “जनादेश से पलायन” करार दिया।
विश्वास मत के दौरान भाजपा के एकमात्र विधायक तथा पीएमके के 4 विधायकों ने मतदान से दूरी बनाते हुए तटस्थ रुख अपनाया।
इस रणनीति को भविष्य की संभावित राजनीतिक संभावनाओं और गठबंधन समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए थलापति विजय ने बेहद कम समय में जिस प्रकार राज्य की सत्ता तक पहुंच बनाई, वह दक्षिण भारतीय राजनीति के इतिहास में एक असाधारण राजनीतिक उभार माना जा रहा है।
फ्लोर टेस्ट में मिली प्रचंड सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि TVK अब केवल एक उभरता हुआ दल नहीं, बल्कि तमिलनाडु की सत्ता का नया केंद्र बन चुका है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस शक्ति परीक्षण के बाद विजय सरकार अब प्रशासनिक फैसलों और जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ा सकेगी।
तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को हुए इस विश्वास मत ने एक संदेश साफ कर दिया —
राज्य की राजनीति अब नए नेतृत्व, नए गठबंधन और नए सत्ता समीकरणों के दौर में प्रवेश कर चुकी है।
जिले के सबसे बड़े अस्पताल पर उठे गंभीर सवाल, रेफर संस्कृति और अव्यवस्था से मरीज बेहाल
दुर्ग। जिले का सबसे बड़ा शासकीय स्वास्थ्य संस्थान कहलाने वाला जिला अस्पताल दुर्ग आज स्वयं गंभीर सवालों के घेरे में खड़ा नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की शासकीय सुविधाओं, संसाधनों और योजनाओं के बावजूद मरीजों को राहत मिलने की बजाय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि यदि किसी मरीज को सामान्य आंख का उपचार भी कराना हो और उसे शुगर अथवा बीपी जैसी सामान्य बीमारी हो, तो जिला अस्पताल के कई चिकित्सक तत्काल “हायर सेंटर रेफर” का रास्ता दिखाने लगते हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि जब प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है, तब जिला मुख्यालय के सबसे बड़े अस्पताल में आखिर मरीजों को उपचार देने की इच्छाशक्ति क्यों दिखाई नहीं दे रही?
क्या सिर्फ “सामान्य मरीजों” का अस्पताल बनकर रह गया जिला अस्पताल?
सूत्रों और मरीजों की शिकायतों के अनुसार अस्पताल में ऐसी स्थिति बन चुकी है मानो यहां केवल वही मरीज स्वीकार्य हों जो “पर्ची से ठीक हो जाएं।” शुगर और बीपी जैसी बीमारियां आज लगभग हर तीसरे-चौथे व्यक्ति में सामान्य रूप से पाई जाती हैं, जिन्हें नियंत्रित कर उपचार देना चिकित्सा प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा माना जाता है। निजी चिकित्सकों का भी मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में मरीजों का इलाज संभव है।
लेकिन आरोप यह है कि जिला अस्पताल के कई चिकित्सक मरीजों को संभालने और जोखिम लेकर उपचार करने की बजाय तत्काल रायपुर रेफर करना अधिक आसान समझते हैं।
टेस्ट कराओ, मेडिकल फिटनेस लो… फिर भी इलाज नहीं!
सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर सामने आ रही है कि मरीजों से पहले अनेक प्रकार की जांचें करवाई जाती हैं, मेडिकल फिटनेस दस्तावेज भी लिए जाते हैं, लेकिन अंत में इलाज से मना कर दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि उपचार करना ही नहीं था, तो मरीजों को दिनों तक जांच और कागजी प्रक्रिया में क्यों उलझाया गया?
ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी उम्मीद लेकर आने वाले मरीज आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रूप से टूटते नजर आ रहे हैं।
सिविल सर्जन की भूमिका पर भी सवाल
वर्तमान में डॉ. मिंज जिला अस्पताल में सिविल सर्जन के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन अस्पताल परिसर की व्यवस्थाओं, मरीजों की परेशानियों और चिकित्सकीय मनमानी पर उनकी प्रशासनिक पकड़ को लेकर भी अब गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।
जब इस विषय पर चर्चा की गई तो जवाब “मामले को देखते हैं” तक सीमित बताया गया। इससे यह धारणा और मजबूत हो रही है कि अस्पताल प्रशासन या तो समस्याओं से अनभिज्ञ है या फिर कार्रवाई की इच्छाशक्ति नहीं दिखा रहा।
जच्चा-बच्चा केंद्र में भी रेफर संस्कृति?
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जिले के सबसे बड़े जच्चा-बच्चा केंद्र में भी बीपी और शुगर का हवाला देकर गर्भवती महिलाओं को बाहर रेफर किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। जबकि कई मामलों में वही मरीज बाद में दुर्ग शहर के छोटे निजी नर्सिंग होम में उपचार लेकर स्वस्थ हो जाते हैं।
यदि यह स्थिति सही है तो यह केवल चिकित्सा व्यवस्था पर नहीं, बल्कि शासन द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे करोड़ों रुपये के खर्च पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
अस्पताल परिसर में अव्यवस्था का अंबार
जिला अस्पताल परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
अस्पताल परिसर में बाहरी एजेंटों की सक्रियता
मरीजों को निजी नर्सिंग होम की ओर मोड़ने की चर्चाएं
दवाइयों के लिए बाहर भटकते मरीज
परिसर के भीतर अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियां
इन सबके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता लोगों को हैरान कर रही है।
लिफ्ट तक नहीं, मरीज सीढ़ियों के सहारे
इतने बड़े अस्पताल में आज भी समुचित लिफ्ट सुविधा का अभाव मरीजों की परेशानी बढ़ा रहा है। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज बार-बार जांच एवं उपचार के लिए सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर हैं।
विडंबना यह है कि निजी नर्सिंग होम के लिए जहां लिफ्ट जैसी सुविधाएं आवश्यक मानी जाती हैं, वहीं जिले के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल में यह मूलभूत सुविधा तक प्रभावी रूप में नजर नहीं आती।
सुशासन तिहार बनाम जमीनी हकीकत
एक ओर प्रदेश में सुशासन और जनकल्याण के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुर्ग जिला अस्पताल की स्थिति उन दावों को खुली चुनौती देती दिखाई दे रही है। जिले में कैबिनेट मंत्री, दर्जा प्राप्त मंत्री और राष्ट्रीय स्तर के जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद यदि जिला अस्पताल की स्थिति ऐसी है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे अस्पतालों की हालत क्या होगी, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
सबसे बड़ा सवाल… जवाबदेह कौन?
जिला अस्पताल आखिर मरीजों के उपचार के लिए है या सिर्फ रेफर करने के लिए?
क्या सरकारी अस्पतालों में जिम्मेदारी से ज्यादा “औपचारिकता” हावी हो चुकी है?
क्या करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मरीजों को भरोसेमंद इलाज नहीं मिल पाएगा?
और सबसे बड़ा प्रश्न — क्या जिला अस्पताल प्रशासन एवं सिविल सर्जन इस पूरी व्यवस्था की नैतिक जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं?
दुर्ग की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि व्यवस्था में ठोस सुधार और जिम्मेदारों पर कार्रवाई चाहती है।
बालोद संवाददाता की ख़ास रिपोर्ट
बालोद/शौर्यपथ।
जिले में अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन पर रोक लगाने प्रशासन लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी क्रम में विकासखंड डोंडी के ग्राम पंचायत घोठिया से प्राप्त शिकायत के आधार पर पुलिस एवं खनिज विभाग ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रेत परिवहन कर रहे दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त किए हैं। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध रेत कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार डोंडी थाना प्रभारी उमा ठाकुर के निर्देश पर आज सुबह पुलिस टीम द्वारा औचक एवं सघन जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान दो ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना किसी वैध अनुमति के रेत परिवहन करते पाए गए। पुलिस ने तत्काल दोनों वाहनों को मौके पर ही जब्त कर अभिरक्षा में सुरक्षित रखा। मामले में नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय की खनिज शाखा को प्रेषित किया जा रहा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनन एवं परिवहन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लगातार की जा रही ऐसी कार्रवाइयों का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना तथा शासन को होने वाली राजस्व हानि को रोकना है।
खनिज अधिकारी प्रवीण चंद्राकर ने कहा कि जिला प्रशासन अवैध खनिज परिवहन के मामलों में “शून्य सहिष्णुता” की नीति पर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित विभागों को सतत निगरानी एवं कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
ग्राम पंचायत घोठिया की सरपंच ममता मंडावी ने बताया कि गांव में लंबे समय से मना करने के बावजूद कुछ लोग लगातार रेत निकाल रहे थे। ग्रामीणों द्वारा कई बार विरोध जताने के बाद अब प्रशासन ने कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि आगे भी अवैध खनन के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
इस संबंध में विधायक प्रतिनिधि कैलाश राजपूत ने कहा कि बालोद जिले में लंबे समय से अवैध रेत परिवहन एवं उत्खनन के कई मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से लगातार निगरानी और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक वाहन अवैध खनन एवं परिवहन में लगे हुए थे, लेकिन कार्रवाई के समय केवल दो वाहन ही मौके पर मिले। ऐसे में क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं से कार्रवाई की सूचना पहले ही लीक हो गई, जिसके चलते अन्य वाहन मौके से फरार हो गए।
हालांकि विभागीय तत्परता से दो वाहनों पर कार्रवाई होने के बाद प्रशासन की सख्ती साफ दिखाई दी, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठने लगे हैं कि कहीं अंदरखाने “विभीषण” की भूमिका निभाने वाले लोग अवैध कारोबारियों को संरक्षण तो नहीं दे रहे।
फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले में अवैध खनन और परिवहन पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
