August 07, 2026
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    शौर्यपथ

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    बिलासपुर / शौर्यपथ।
    देश की ऊर्जा सुरक्षा, संस्थागत सुधार और दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा को मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए कोल इंडिया लिमिटेड की प्रमुख सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने बिलासपुर स्थित अपने मुख्यालय में पहली बार ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया। यह शिविर आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप एसईसीएल के भविष्य को आकार देने के लिए एक संरचित, सहभागी और नेतृत्व-केंद्रित मंथन मंच के रूप में सामने आया।

    यह चिंतन शिविर हाल ही में नई दिल्ली में कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित चिंतन शिविर की पृष्ठभूमि में परिकल्पित किया गया था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं के अनुरूप एसईसीएल की रणनीतिक दिशा को और अधिक सुदृढ़ करना रहा। इस प्रक्रिया की शुरुआत एसईसीएल के परिचालन क्षेत्रों में आंतरिक चिंतन शिविरों से हुई, जिन्हें समेकित करते हुए मुख्यालय स्तर पर व्यापक मंथन किया गया, ताकि संगठन के हर स्तर की सहभागिता और समग्र समीक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरिश दुहन के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में कार्यात्मक निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी सहित मुख्यालय एवं सभी परिचालन क्षेत्रों के लगभग 200 अधिकारी शामिल हुए। इनमें क्षेत्रीय महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष तथा कार्यकारी ग्रेड–5 (ई-5) स्तर तक के बड़ी संख्या में युवा अधिकारी सम्मिलित रहे, जो संगठन की भावी नेतृत्व क्षमता पर विशेष फोकस को दर्शाता है।

    अपने संबोधन में अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री दुहन ने कहा कि एसईसीएल को एक बार फिर देश की अग्रणी कोयला कंपनी के रूप में स्थापित करने के लिए संगठित और परिणामोन्मुख प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि दैनिक कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनें। दीर्घकालिक दृष्टि को रेखांकित करते हुए उन्होंने विविधीकरण, औद्योगिक सहभागिता और नेट-जीरो रोडमैप में अग्रणी भूमिका निभाने की आवश्यकता बताई तथा विज़न 2030 और विज़न 2047 को संगठन के मार्गदर्शक ढांचे के रूप में अपनाने का आह्वान किया। युवा अधिकारियों को संगठन की भविष्य की रीढ़ बताते हुए उन्होंने एसईसीएल को भविष्य के लिए तैयार संस्था में रूपांतरित करने में उनकी अग्रणी भूमिका पर विश्वास व्यक्त किया।

    चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा, कमियों की पहचान तथा कोयला उत्पादन, डिस्पैच व्यवस्था, खान सुरक्षा, लागत दक्षता, सतत विकास और डिजिटलीकरण को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट एवं समयबद्ध कार्य योजनाओं पर मंथन करना रहा। इसके साथ ही विविधीकरण, उद्योग से जुड़ाव और नेट-जीरो लक्ष्य जैसे दीर्घकालिक विषयों पर भी गहन चर्चा की गई।

    कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा 15 विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें भूमिगत उत्पादन योजना, गुणवत्ता नियंत्रण, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी संचालन, भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास, पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियां, सौर एवं नवीन ऊर्जा, डिजिटलीकरण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग, मानव संसाधन विकास, वित्त और संविदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

    प्रत्येक प्रस्तुति के पश्चात संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, कार्यात्मक निदेशक और मुख्य सतर्कता अधिकारी की सक्रिय भागीदारी रही। इस खुले और सहभागी मंच ने नवाचारी विचारों, रचनात्मक सुझावों और जमीनी फीडबैक को प्रोत्साहित किया, जिससे शीर्ष-स्तरीय मार्गदर्शन और क्षेत्रीय अनुभवों के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित हुआ।

    एसईसीएल का यह पहला ‘चिंतन शिविर’ नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को मजबूती देने की दिशा में एक ठोस आधार प्रदान करेगा। साथ ही यह संगठन की परिचालन उत्कृष्टता, सतत विकास और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।

    रायपुर / शौर्यपथ।
    छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव श्री विकास शील ने राज्य के 5 जिलों में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (Rural Self Employment Training Institutes–RSETIs) की स्थापना की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे ग्रामीण युवाओं को कौशल-आधारित, रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्राप्त होगा और वे स्वरोजगार के माध्यम से विकास की मुख्यधारा से प्रभावी रूप से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बैंकों से प्राथमिकता क्षेत्र ऋण एवं शासकीय प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत ऋण प्रवाह बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर एवं पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

    मुख्य सचिव नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (State-Level Bankers’ Committee–SLBC) की त्रैमासिक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में राज्य में बैंकों के कार्य निष्पादन की विस्तृत समीक्षा की गई तथा वित्तीय समावेशन को मजबूत करने, ऋण वितरण प्रणाली में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच बढ़ाने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई।

    बैठक में श्री मनोज कुमार (महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक), श्रीमती निहारिका बारीक सिंह (प्रमुख सचिव), श्रीमती रीनी अजीथ (क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक), श्री शीतांशु शेखर (महाप्रबंधक, नाबार्ड), श्री अंकित आनंद (सचिव), श्री रजत कुमार (सचिव), श्री प्रभात मल्लिक (सचिव), श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा (निदेशक, संस्थागत वित्त), श्री चंदन कुमार (विशेष सचिव), श्री राकेश कुमार सिन्हा (उपमहाप्रबंधक, एसबीआई) सहित छत्तीसगढ़ शासन के अन्य वरिष्ठ सचिव, विभागाध्यक्ष, विभिन्न बैंकों के शीर्ष अधिकारी तथा राज्य के 33 जिलों के अग्रणी बैंक प्रबंधक उपस्थित रहे।

    मुख्य सचिव ने कहा कि बैंक देश के आर्थिक विकास की रीढ़ हैं और भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। ऐसे में बैंकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे समग्र वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से सुदूर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकिंग पहुंच, ऋण वितरण और वित्तीय अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए राज्य शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

    मुख्य सचिव ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, भारतीय स्टेट बैंक एवं अन्य बैंकों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शासकीय प्रायोजित ऋण योजनाओं का परिणामोन्मुख और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ ज़मीनी स्तर तक पहुँचे।

    बैठक का समापन निदेशक (संस्थागत वित्त) श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य सचिव सहित सभी उपस्थित अधिकारियों, बैंकों के प्रतिनिधियों तथा बैठक के सफल आयोजन के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति एवं इसके संयोजक भारतीय स्टेट बैंक के प्रति आभार व्यक्त किया।

     

      रायपुर / राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा छत्तीसगढ़ के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जन-जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसके तहत वाहन चालकों को हेलमेट वितरित किए गए एवं यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया गया।
    इस अवसर पर एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप कुमार लाल ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन भर नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट का उपयोग करना तथा निर्धारित गति सीमा का पालन जैसे छोटे-छोटे उपाय बहुमूल्य जीवन को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बिलासपुर के परियोजना निदेशक मुकेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए आधुनिक तकनीकी उपायों के साथ-साथ जन-जागरूकता अभियानों का निरंतर संचालन किया जा रहा है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं की दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।

    अभियान के दौरान सड़क दुर्घटना की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी बचाव कार्यों के लिए लाइव एक्सीडेंट डेमोस्ट्रेशन (मॉक ड्रिल) का आयोजन किया गया। इस दौरान एम्बुलेंस की पहुँच, क्रेन द्वारा मार्ग से बाधा हटाने तथा घायलों को प्राथमिक उपचार देने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। साथ ही, सुरक्षित यात्रा के लिए हेलमेट, सीट बेल्ट के महत्व को बताया गया।

    सड़क सुरक्षा अभियान के साथ-साथ एनएचआईटी के सहयोग से रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें 50 से अधिक लोगों ने रक्त दान किया। इस शिविर में अधिकारियों-कर्मचारियों और सड़क उपयोगकर्ताओं ने स्वेच्छा से रक्तदान किया।

    एनएचएआई द्वारा प्रदेश के सभी टोल प्लाजा, राष्ट्रीय राजमार्गों एवं प्रमुख जंक्शनों पर लगातार सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत वाहन चालकों एवं यात्रियों से यातायात नियमों का पालन करने, हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने तथा निर्धारित गति सीमा का पालन करने की अपील की जा रही है।

    शरद पंसारी - संपादक शौर्यपथ दैनिक समाचार
    भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर हाल के दिनों में एक अजीब-सी बहस सार्वजनिक विमर्श में छा गई है — “भारत में एक डॉलर में छह समोसे मिल जाते हैं, जबकि अमेरिका में एक डॉलर में केवल एक पेन।” यह तुलना सुनने में भले ही चुटीली लगे, लेकिन यह आर्थिक यथार्थ को समझने के बजाय उसे सरलीकरण और भावनात्मक तर्कों में उलझाने का प्रयास अधिक प्रतीत होती है। असल सवाल समोसे या पेन का नहीं, बल्कि आय, गरीबी, क्रय शक्ति और जीवन स्तर का है।

    भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा 7 जनवरी 2026 को जारी प्रथम अग्रिम अनुमान इस वास्तविकता को स्पष्ट रूप से सामने रखते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में स्थिर मूल्यों पर भारत की प्रति व्यक्ति वास्तविक जीडीपी ₹1,42,119 रहने का अनुमान है, जो बीते वर्ष की तुलना में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि अवश्य दर्शाता है। यह वृद्धि स्वागतयोग्य है, किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय (NNI) ₹1,14,710 रही — एक ऐसा आंकड़ा जो भारत की विशाल आबादी के जीवन स्तर की सीमाओं को उजागर करता है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना और भी अधिक स्पष्ट हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार 2026 में भारत की नॉमिनल प्रति व्यक्ति आय लगभग $3,051 रहने का अनुमान है। क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर यह आंकड़ा $12,964 तक पहुँचता है, किंतु इसके बावजूद नॉमिनल प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत का वैश्विक स्थान 144वां है। यह रैंकिंग इस तथ्य की ओर संकेत करती है कि भारत की आर्थिक वृद्धि अभी भी औसत नागरिक की आय में पर्याप्त रूप से परिलक्षित नहीं हो पा रही है।

    देश के भीतर आय की असमानता और भी गहरी है। गोवा, सिक्किम और महाराष्ट्र जैसे राज्य प्रति व्यक्ति आय में आगे हैं, जहाँ महाराष्ट्र की अनुमानित प्रति व्यक्ति आय ₹2.89 लाख तक पहुँचने वाली है। इसके विपरीत बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य आज भी राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे हैं। यह क्षेत्रीय असंतुलन भारत की आर्थिक संरचना की एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

    अब यदि तुलना अमेरिका से की जाए, तो अंतर लगभग खाई का रूप ले लेता है। IMF के अनुसार 2026 में अमेरिका की प्रति व्यक्ति नॉमिनल आय लगभग $92,880 (करीब ₹77.5 लाख) रहने का अनुमान है। अमेरिका दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है, जहाँ औसत मासिक आय $5,000 और औसत घरेलू आय $78,538 के आसपास है। वहीं 2026 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कुल जीडीपी $30.50 ट्रिलियन को पार करने की संभावना है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत और अमेरिका की तुलना केवल वस्तुओं की कीमत से नहीं, बल्कि आय और अवसरों की संरचना से होनी चाहिए।

    सबसे चिंताजनक पहलू गरीबी का अंतर है। भारत में आज भी अनुमानतः लगभग 80 करोड़ लोग गरीबी रेखा के आसपास या नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। अत्यधिक गरीबी — जहाँ प्रतिदिन की आय कुछ ही रुपयों तक सीमित है — में जीवन बिताने वाली आबादी करीब 12 प्रतिशत बताई जाती है। इसके विपरीत अमेरिका में गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की संख्या 10–12 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन वहाँ गरीबी की परिभाषा ही $15,000 वार्षिक आय जैसे स्तर से जुड़ी है। यह तुलना बताती है कि प्रतिशत के आंकड़े समान दिख सकते हैं, पर जीवन की वास्तविक परिस्थितियाँ पूरी तरह अलग हैं।

    अर्थशास्त्रियों की राय में भारत की समस्या केवल विकास दर नहीं, बल्कि आय असमानता, रोजगार की गुणवत्ता और वास्तविक क्रय शक्ति है। जब तक आर्थिक वृद्धि का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक नहीं पहुँचेगा, तब तक समोसे और पेन जैसी तुलना केवल हकीकत से ध्यान भटकाने वाला शोर बनी रहेगी।

    आज जरूरत इस बात की है कि भारत अपनी आर्थिक बहस को प्रतीकों और जुमलों से निकालकर आम आदमी की आय, रोजगार और जीवन स्तर पर केंद्रित करे। सवाल यह नहीं कि एक डॉलर में क्या मिलता है, सवाल यह है कि एक भारतीय की मेहनत की कीमत क्या है — और क्या वह उसे सम्मानजनक जीवन दे पा रही है या नहीं। यही बहस भारत को आगे ले जाएगी, बाकी सब केवल दिखावटी तर्क हैं।

    दुर्ग।
    छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदामों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान के कथित रूप से “मुसवा (चूहा)” द्वारा नष्ट किए जाने की घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे किसानों की मेहनत और अन्नदाता के सम्मान के साथ खुला मज़ाक करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अपनी विफलताओं और भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने के लिए जिम्मेदारी चूहों पर डाल रही है, जबकि असल दोषी सत्ता में बैठे लोग और संरक्षण प्राप्त अधिकारी हैं।

    जिला कांग्रेस कमेटी, दुर्ग (ग्रामीण) के जिलाध्यक्ष श्री राकेश ठाकुर ने कहा कि धान किसानों के पसीने, खून और वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उसे “चूहा खा गया” कहना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह भाजपा सरकार, उसके मंत्रियों और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही, भ्रष्टाचार और मिलीभगत को उजागर करता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश की जनता मानती है कि धान मुसवा ने नहीं, बल्कि भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों ने हजम किया है।

    इसी के विरोध में 20 जनवरी 2026, मंगलवार को कांग्रेस पार्टी द्वारा दुर्ग कलेक्टर कार्यालय के समक्ष एक लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण एवं प्रतीकात्मक प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान भाजपा सरकार के खिलाफ अनोखे और तीखे प्रतीकों के माध्यम से जनाक्रोश व्यक्त किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों की प्रतीकात्मक “बारात” ढोल-नगाड़ों के साथ निकाली जाएगी, वहीं कार्यकर्ता मुसवा (चूहों) के मुखौटे पहनकर धान खिलाते हुए प्रतीकात्मक दृश्य प्रस्तुत करेंगे। इसका उद्देश्य जनता को यह संदेश देना है कि धान चूहों ने नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों ने निगल लिया है।

    कांग्रेस की मांग है कि इस पूरे धान घोटाले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा किसानों के साथ हुए अन्याय का जवाब सरकार दे। प्रदर्शन के पश्चात दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम प्रतीकात्मक रूप से “चूहा” सौंपकर ज्ञापन प्रस्तुत किया जाएगा।

    इस संबंध में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा कलेक्टर दुर्ग को पूर्व में ज्ञापन सौंपकर कार्यक्रम की सूचना दी जा चुकी है। ज्ञापन सौंपते समय धीरज बाकलीवाल, नीता लोधी, देवेंद्र देशमुख, रिवेंद्र यादव, नंद कुमार सेन, आनंद ताम्रकार, गुरदीप भाटिया, मनीष बघेल, देवश्री साहू, धर्मेंद्र साहू, जीतू पटेल, हीरेन्द्र साहू, मोहित वालदे, सुनीत घोष, सौरभ ताम्रकार, भीमसेन, प्रीतम देशमुख सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

    कांग्रेस संगठन के भीतर भी नई सक्रियता साफ दिखाई दे रही है। धीरज बाकलीवाल को अध्यक्ष बनाए जाने और युवाओं व नए चेहरों को ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने से संगठन में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। परिवारवाद से दूरी बनाते हुए कांग्रेस अब ज़मीनी मुद्दों पर आक्रामक रूप से सामने आ रही है। दुर्ग में कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता को देखकर जनता भी अब उससे जनहित से जुड़े मुद्दों पर मुखर आवाज़ की उम्मीद कर रही है।

    यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान, जवाबदेही और पारदर्शिता की लड़ाई का प्रतीक बनने जा रहा है।

    नई दिल्ली | 

    पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही ड्रोन घुसपैठ की कोशिशों को भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए पूरी तरह विफल कर दिया है। जनवरी 2026 के हालिया घटनाक्रमों से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की सीमाओं पर निगरानी और जवाबी क्षमता पहले से कहीं अधिक सशक्त हो चुकी है।

    जम्मू-कश्मीर में ड्रोन गतिविधि, सेना सतर्क

    11 से 15 जनवरी 2026 के बीच जम्मू-कश्मीर के राजौरी (नौशेरा, मंजकोट), पुंछ और सांबा (रामगढ़ सेक्टर) में कई संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए। भारतीय जवानों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए मशीनगनों से फायरिंग की और एंटी-ड्रोन (Anti-UAS) सिस्टम सक्रिय किया, जिसके बाद सभी ड्रोन पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र (PoK) की ओर वापस भागने पर मजबूर हो गए।

    हथियारों की खेप बरामद

    सुरक्षा बलों ने सांबा जिले में ड्रोन के जरिए गिराई गई हथियारों की खेप बरामद की। इसमें:

    • दो पिस्तौल

    • तीन मैगजीन

    • 16 राउंड गोलियां

    • एक हैंड ग्रेनेड
      शामिल हैं। इसे आतंकियों तक हथियार पहुँचाने की साजिश माना जा रहा है।

    सेना प्रमुख का सख्त संदेश

    थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 13 जनवरी 2026 को बताया कि 9 जनवरी से अब तक 10 से 12 ड्रोन घुसपैठ की कोशिशें नाकाम की जा चुकी हैं। भारत ने इस गंभीर मुद्दे को पाकिस्तान के DGMO स्तर पर उठाते हुए इसे स्पष्ट रूप से ‘अस्वीकार्य’ करार दिया है।

    पंजाब बॉर्डर पर BSF की निर्णायक कार्रवाई

    दिसंबर 2025 में BSF ने अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर में तीन पाकिस्तानी ड्रोन मार गिराए थे, जिनके जरिए लगभग 2 किलोग्राम हेरोइन की तस्करी की जा रही थी। यह ड्रोन नेटवर्क के जरिए आतंक और नशे के गठजोड़ को उजागर करता है।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद बौखलाया पाकिस्तान

    सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ये गतिविधियाँ मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान की हताश प्रतिक्रिया हैं। उस ऑपरेशन में भारत ने सीमा पार स्थित आतंकी ठिकानों और रडार केंद्रों को ध्वस्त कर दिया था।

    ड्रोन घुसपैठ के पीछे की मंशा

    सेना और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से:

    • आतंकियों तक हथियार और ड्रग्स पहुँचाने,

    • भारतीय सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और कमजोरियाँ तलाशने,

    • तथा 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) से पहले अशांति फैलाने
      के लिए कर रहा है।

    हाई अलर्ट पर सीमाएँ

    वर्तमान में जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब तक सभी सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और रियल-टाइम सर्विलांस के जरिए हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

    ड्रोन युद्ध के इस नए दौर में भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है—सीमा पर हर साजिश का जवाब तुरंत, सटीक और निर्णायक होगा।

    वॉशिंगटन | 

    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 17 जनवरी 2025 को एक ऐतिहासिक और सर्वसम्मत (9-0) निर्णय में TikTok पर प्रतिबंध लगाने वाले संघीय कानून को संवैधानिक ठहराते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से ऊपर माना। यह फैसला न केवल अमेरिका की डिजिटल नीति में निर्णायक मोड़ साबित हुआ, बल्कि वैश्विक तकनीकी राजनीति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा।

    कानून का उद्देश्य

    यह मामला ‘प्रोटेक्टिंग अमेरिकन्स फ्रॉम फॉरेन एडवर्सरी कंट्रोल्ड एप्लीकेशन्स एक्ट’ से जुड़ा था, जिसके तहत TikTok की मूल कंपनी ByteDance (चीन) को निर्देश दिया गया था कि वह 19 जनवरी 2025 तक TikTok का अमेरिकी कारोबार किसी गैर-चीनी इकाई को बेचे, अन्यथा ऐप को अमेरिका में प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। सरकार का तर्क था कि विदेशी नियंत्रण में मौजूद यह प्लेटफॉर्म अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट तर्क

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यद्यपि TikTok एक संचार और अभिव्यक्ति का माध्यम है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आशंकाएं First Amendment के दायरे में असीमित संरक्षण प्राप्त नहीं कर सकतीं
    न्यायालय ने माना कि:

    • चीनी सरकार द्वारा यूज़र डेटा तक संभावित पहुंच,

    • तथा एल्गोरिदम के माध्यम से जनमत को प्रभावित करने की आशंका,
      अमेरिका के लिए एक गंभीर और वास्तविक सुरक्षा जोखिम है।

    सर्वसम्मति का महत्व

    फैसले की सबसे अहम विशेषता यह रही कि सभी नौ न्यायाधीशों ने एकमत होकर कानून के पक्ष में मतदान किया। इससे TikTok की वह कानूनी दलील पूरी तरह खारिज हो गई, जिसमें उसने कानून को असंवैधानिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया था।

    17 जनवरी 2026: एक बदला हुआ परिदृश्य

    आज, एक वर्ष बाद, यह स्पष्ट है कि इस निर्णय ने अमेरिका में TikTok के भविष्य की दिशा ही बदल दी है।
    हालांकि 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुनः कार्यभार संभालने के बाद प्रवर्तन और राजनीतिक स्तर पर कुछ चर्चाएं अवश्य हुईं, लेकिन कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट और अंतिम है
    TikTok पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून सुप्रीम कोर्ट द्वारा वैध ठहराया जा चुका है

    यह फैसला संकेत देता है कि आने वाले समय में अमेरिका डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सख्त रुख अपनाता रहेगा, चाहे वह निर्णय कितनी ही बड़ी तकनीकी कंपनियों को प्रभावित क्यों न करे।

    दुर्ग।

    प्रदेश में मुख्यमंत्री द्वारा सुशासन के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दुर्ग नगर पालिका निगम की ज़मीनी हकीकत इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही है। निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल का कार्यकाल अब प्रशासनिक अनुशासन से अधिक विवादों, आरोपों और कथित संरक्षण के आरोपों से जुड़ता जा रहा है।

    निगम के ही कर्मचारी शुभम गोईर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप—कि उनसे निजी घरेलू कार्य कराए गए और आदेश न मानने पर नौकरी से बाहर करने की तैयारी की गई—अब माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हैं। मामला न्यायालय में लंबित है, किंतु इस प्रकरण ने निगम आयुक्त की कार्यप्रणाली पर पहले से उठ रहे सवालों को और गहरा कर दिया है।

    सड़क पर अवैध कब्जा, निगम की रहस्यमयी चुप्पी

    शहर में अवैध अतिक्रमण अब छिपा नहीं, बल्कि खुलेआम और बेखौफ दिखाई दे रहा है। गणेश मंदिर के सामने मुख्य मार्ग पर स्थित राम रसोई द्वारा किए गए कथित अवैध कब्जे ने पूरे शहर में चर्चाओं को जन्म दिया है।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जानकारी होने के बावजूद निगम प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

    शहर में यह चर्चा आम है कि यह अतिक्रमण यूं ही नहीं पनप रहा, बल्कि इसे कथित संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि व्यंग्य में इसे अब “आदर्श अतिक्रमण मॉडल” कहा जाने लगा है—जहां सड़क पर कब्जा भी सुरक्षित है और कार्रवाई भी नदारद।

    चुनिंदा कार्रवाई, बाकी शहर में मौन

    आरोप यह भी है कि निगम आयुक्त द्वारा कपड़ा लाइन जैसे चुनिंदा इलाकों में तो नियमित कार्रवाई की जाती है, लेकिन चर्च मार्ग, घुमंतियों की फौज और अन्य व्यस्त क्षेत्रों में चल रहे अवैध बाजारों पर निगम की सख्ती अचानक गायब हो जाती है।

    यह स्थिति महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि भेदभावपूर्ण नीति की ओर इशारा करती है।

    कर्मचारी का आरोप: विवाद में आयुक्त बने बिचौलिया

    निगम कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि एक कथित पत्रकार और निगम कर्मचारी के बीच हुए विवाद में आयुक्त सुमित अग्रवाल ने बिचौलिये की भूमिका निभाई।

    आरोप है कि इस कथित मध्यस्थता के जरिए मामले को कानूनी प्रक्रिया तक पहुँचने से पहले ही दबाने का प्रयास किया गया।

    सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों के पारिवारिक फोटो और निजी जानकारियों के माध्यम से दबाव बनाने और शिकायतों को कमजोर करने की कोशिशों की बातें भी सामने आ रही हैं। यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन होगा, बल्कि संवैधानिक पद की गरिमा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा।

    कथित चैटिंग से बढ़ा विवाद, जांच की मांग तेज

    निगम कर्मचारियों और आयुक्त से जुड़ी कथित चैटिंग अब निगम परिसर से बाहर निकलकर शहर भर में चर्चा का विषय बन चुकी है।

    कर्मचारियों का कहना है कि कुछ मामलों को “अर्जेंट” बताकर उठाना और अन्य गंभीर शिकायतों को नजरअंदाज करना, शासकीय पद के दुरुपयोग की ओर संकेत करता है।

    इसी वजह से अब आम नागरिकों के साथ-साथ निगम कर्मचारी भी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।

    स्थानांतरण होगा, लेकिन शहर भुगतेगा परिणाम

    सूत्रों के अनुसार आयुक्त सुमित अग्रवाल का भविष्य में किसी अन्य जिले में स्थानांतरण संभव है, लेकिन उनके कार्यकाल में जिस तरह अवैध अतिक्रमण को मौन स्वीकृति मिलती दिखाई दे रही है, वह दुर्ग शहर के लिए दीर्घकालिक समस्या बन सकती है।

    आज की निष्क्रियता, कल के बड़े विवाद का कारण बन सकती है।

    सबसे बड़ा सवाल

    अब सवाल केवल अदालत के निर्णय का नहीं है, सवाल यह है कि—

    क्या दुर्ग नगर निगम में कानून सबके लिए समान है?

    क्या सुशासन के दावे ज़मीनी हकीकत से मेल खाते हैं?

    और क्या संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारी जवाबदेही से ऊपर हैं?

    फिलहाल निगाहें माननीय उच्च न्यायालय पर टिकी हैं। लेकिन तब तक दुर्ग नगर निगम से जुड़ा यह पूरा घटनाक्रम, प्रदेश सरकार के सुशासन के दावों को लगातार आईना दिखाता रहेगा।

    मुंबई / शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट

    महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ गठबंधन ने अपनी निर्णायक ताकत साबित कर दी है। 15 जनवरी 2026 को संपन्न हुए 29 नगर निगम (महानगर पालिका) चुनावों के नतीजे 16 और 17 जनवरी को सामने आए और परिणामों ने साफ कर दिया कि शहरी महाराष्ट्र पर अब निर्णायक रूप से भगवा छाया हुआ है।

    इन चुनावों में महायुति (BJP + एकनाथ शिंदे की शिवसेना + अजित पवार की NCP) ने राज्य के 29 में से 25 नगर निगमों में जीत का दावा करते हुए विपक्षी महाविकास आघाड़ी (MVA) को करारी शिकस्त दी है।

    मुंबई: 30 साल बाद ठाकरे युग का अंत

    देश के सबसे बड़े नगर निगम बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में यह चुनाव ऐतिहासिक साबित हुआ।

    227 सीटों वाले BMC में

    भाजपा–शिंदे शिवसेना गठबंधन: 118 सीटें

    भाजपा: 89

    शिवसेना (शिंदे): 29

    शिवसेना (उद्धव ठाकरे – UBT): 65 सीटें

    कांग्रेस: 24 सीटें

    इस परिणाम के साथ ही ठाकरे परिवार का करीब तीन दशक पुराना वर्चस्व समाप्त हो गया, जिसे राजनीतिक गलियारों में शहरी महाराष्ट्र की सबसे बड़ी सत्ता परिवर्तन की घटना माना जा रहा है।

    पुणे–ठाणे–नागपुर: भाजपा और शिंदे का दबदबा

    पुणे महानगर पालिका (PMC):

    165 में से 123 सीटें जीतकर भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया।

    ठाणे महानगर पालिका (TMC):

    मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गढ़ में महायुति ने 103 सीटें जीतीं, जिनमें से 75 सीटें अकेले शिवसेना (शिंदे) ने हासिल कीं।

    नागपुर महानगर पालिका (NMC):

    भाजपा ने 151 में से 97 सीटें जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी।

    अन्य प्रमुख नगर निगमों में भी महायुति की बढ़त

    नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, पनवेल जैसे महत्वपूर्ण शहरी निकायों में भी महायुति ने विपक्ष को पीछे छोड़ते हुए मजबूत बढ़त दर्ज की।

    पार्टी-वार कुल सीटें (29 नगर निगम)

    भारतीय जनता पार्टी (BJP): ~1,370–1,400 सीटें

    शिवसेना (एकनाथ शिंदे): 397 सीटें

    कांग्रेस: 324 सीटें

    NCP (अजित पवार): 160 सीटें

    शिवसेना (UBT): 153 सीटें

    AIMIM (असदुद्दीन ओवैसी): 126 सीटें (विशेषकर छत्रपति संभाजीनगर में प्रभावी प्रदर्शन)

    राजनीतिक संदेश साफ

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ये नतीजे केवल नगर निगम चुनाव नहीं हैं, बल्कि

    BJP की शहरी राजनीति पर मजबूत पकड़,

    मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की वैधता,

    और अजित पवार के साथ बने नए सत्ता समीकरण पर जनता की मुहर माने जा रहे हैं।

    वहीं दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे (SS-UBT) और शरद पवार गुट (NCP-SP) के लिए ये नतीजे गंभीर आत्ममंथन का संकेत हैं।

    महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि

    “शहरी महाराष्ट्र में सत्ता का केंद्र अब पूरी तरह महायुति के हाथों में है।”

    ये परिणाम न केवल राज्य की नगर सरकारों की दिशा तय करेंगे, बल्कि 2029 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों की राजनीतिक पटकथा भी यहीं से लिखी जाती दिख रही है।

    शौर्यपथ /

    धन लाभ, करियर उन्नति और व्यापार में सफलता के प्रबल योग

    शनिवार का दिन न्यायप्रिय शनिदेव को समर्पित होता है। आज शनि की विशेष दृष्टि के कारण कई राशियों के लिए धन लाभ, करियर में तरक्की और सामाजिक मान-सम्मान के योग बन रहे हैं। विशेष रूप से सिंह राशि के जातकों के लिए आर्थिक मजबूती और व्यापारिक लाभ के संकेत स्पष्ट हैं। वहीं कुछ राशियों को स्वास्थ्य, खर्च और रिश्तों के मामलों में संयम और समझदारी से आगे बढ़ने की आवश्यकता है।


    ? भाग्यशाली राशियाँ – जिनकी किस्मत आज चमकेगी

    मेष (Aries)

    ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। सामाजिक मेलजोल बढ़ेगा। रिश्तों में सुधार और करियर में सकारात्मक प्रगति संभव।

    वृषभ (Taurus)

    कला, कौशल और मेहनत का पूरा फल मिलेगा। धन लाभ का उत्तम योग बन रहा है। निवेश से लाभ संभव।

    मिथुन (Gemini)

    अप्रत्याशित संपर्क भविष्य के नए रास्ते खोल सकते हैं। सकारात्मक सोच आज आपकी सबसे बड़ी ताकत रहेगी।

    सिंह (Leo)

    आज का दिन विशेष फलदायी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, व्यापार में लाभ, परिवार में सुख-शांति और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि।

    कर्क (Cancer)

    भाग्य का साथ मिलेगा। घर-परिवार में सामंजस्य रहेगा। चौतरफा लाभ के संकेत।

    कन्या (Virgo)

    लंबे समय से चली आ रही उलझनें दूर होंगी। निर्णय क्षमता मजबूत होगी और भाग्य लाभ के योग बनेंगे।

    तुला (Libra)

    करियर और कारोबार में उन्नति। लक्ष्मी-नारायण योग का प्रभाव रहेगा। निर्णय लेते समय स्पष्टता बनाए रखें।

    मकर (Capricorn)

    एकाग्रता और स्थिरता से सफलता मिलेगी। अटके हुए कार्य पूरे होंगे और दीर्घकालिक अवसर लाभ देंगे।

    कुंभ (Aquarius)

    नए विचार और रचनात्मकता उभरकर आएगी। रिश्तों में मजबूती आएगी। आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें।


    ⚠️ सावधान रहने वाली राशियाँ

    वृश्चिक (Scorpio)

    किसी बड़े बदलाव के संकेत मिल सकते हैं। जल्दबाज़ी से बचें, सतर्क निर्णय लाभकारी रहेंगे।

    धनु (Sagittarius)

    जिज्ञासा नए अनुभव दे सकती है, लेकिन रिश्तों में गलतफहमी संभव। सेहत पर ध्यान दें।

    मीन (Pisces)

    सूक्ष्म संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें। अनावश्यक भागदौड़ से बचें। पाचन और हड्डियों से जुड़ी समस्या हो सकती है।


    ? आज के विशेष उपाय और सामान्य सलाह

    • शनिवार को शनि मंत्र का जाप करें –
      “ॐ शं शनैश्चराय नमः”

    • हनुमान चालीसा का पाठ करें या मंत्र जपें –
      “ॐ हंग हनुमते नमः”

    • धैर्य रखें, वाणी पर नियंत्रण रखें।

    • वित्तीय निर्णय सोच-समझकर लें, विशेषकर दीर्घकालिक योजनाओं में।

    • सामाजिक मेलजोल और रचनात्मक गतिविधियों से मन प्रसन्न रहेगा, लेकिन सेहत की अनदेखी न करें।


    ? शुभ अंक: 6, 5

    ? शुभ रंग: आसमानी

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