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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 17 जनवरी 2025 को एक ऐतिहासिक और सर्वसम्मत (9-0) निर्णय में TikTok पर प्रतिबंध लगाने वाले संघीय कानून को संवैधानिक ठहराते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से ऊपर माना। यह फैसला न केवल अमेरिका की डिजिटल नीति में निर्णायक मोड़ साबित हुआ, बल्कि वैश्विक तकनीकी राजनीति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा।
यह मामला ‘प्रोटेक्टिंग अमेरिकन्स फ्रॉम फॉरेन एडवर्सरी कंट्रोल्ड एप्लीकेशन्स एक्ट’ से जुड़ा था, जिसके तहत TikTok की मूल कंपनी ByteDance (चीन) को निर्देश दिया गया था कि वह 19 जनवरी 2025 तक TikTok का अमेरिकी कारोबार किसी गैर-चीनी इकाई को बेचे, अन्यथा ऐप को अमेरिका में प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। सरकार का तर्क था कि विदेशी नियंत्रण में मौजूद यह प्लेटफॉर्म अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यद्यपि TikTok एक संचार और अभिव्यक्ति का माध्यम है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आशंकाएं First Amendment के दायरे में असीमित संरक्षण प्राप्त नहीं कर सकतीं।
न्यायालय ने माना कि:
चीनी सरकार द्वारा यूज़र डेटा तक संभावित पहुंच,
तथा एल्गोरिदम के माध्यम से जनमत को प्रभावित करने की आशंका,
अमेरिका के लिए एक गंभीर और वास्तविक सुरक्षा जोखिम है।
फैसले की सबसे अहम विशेषता यह रही कि सभी नौ न्यायाधीशों ने एकमत होकर कानून के पक्ष में मतदान किया। इससे TikTok की वह कानूनी दलील पूरी तरह खारिज हो गई, जिसमें उसने कानून को असंवैधानिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया था।
आज, एक वर्ष बाद, यह स्पष्ट है कि इस निर्णय ने अमेरिका में TikTok के भविष्य की दिशा ही बदल दी है।
हालांकि 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुनः कार्यभार संभालने के बाद प्रवर्तन और राजनीतिक स्तर पर कुछ चर्चाएं अवश्य हुईं, लेकिन कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट और अंतिम है—
TikTok पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून सुप्रीम कोर्ट द्वारा वैध ठहराया जा चुका है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
