August 04, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायपुर निवास में आज लगातार दूसरे साल परंपरागत पोरा-तीजा का तिहार छत्तीसगढ़ी संगीतमय वातावरण में हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री बघेल ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती मुक्तेश्वरी बघेल के साथ कार्यक्रम में शामिल होकर भगवान शिव, नांदिया बैला और चुकियां-पोरा की पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने इस अवसर पर सभी माताओं और बहनों को त्यौहार की बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री निवास में पोरा-तीजा तिहार के लिए विशेष इंतजाम किये गये। मुख्यमंत्री निवास परिसर को छत्तीसगढ़ की परम्परा और रीति-रिवाज के अनुसार सजाया गया था। निवास पूरी तरह छत्तीसगढ़िया रंग में रंगा नजर आया। छत्तीसगढ़ी लोक संगीत, नृत्य, ठेठरी, खुरमी, चीला, मालपूआ जैसे पारंपरिक पकवान के इंतजाम किए गए थे। जिसे लेकर महिलाओं में बहुत उत्साह देखा गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने राम वन गमन पथ पर आधारित रथ को भी रवाना किया। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, संसदीय सचिव श्रीमती रश्मि आशीष सिंह और सुश्री शकंुतला साहू, राज्य सभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा, श्रीमती फूलोदेवी नेताम, विधायक मोहन मरकाम, श्रीमती अनिता योगेन्द्र शर्मा, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक, पूर्व सांसद श्रीमती करूणा शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि और माताएं-बहनें उपस्थित थीं। कोविड -19 के प्रकोप को देखते हुए आयोजन में सीमित संख्या में लोगों को आमंत्रित किया गया था।
    मुख्यमंत्री बघेल ने सभी माताओं-बहनों और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से मुख्यमंत्री निवास पहुंची महिलाओं को तीजा-पोरा की बधाई देते हुए कहा कि पिछले साल रस्सा-खीच, जलेबी दौड़, मटका फोड़ जैसे कई आयोजन किये गए थे लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए आयोजन को सीमित रखा गया है। उन्होंने कहा कि त्योहार हमारी संस्कृति से जुड़े होते हैं, इसे मनाते हुए ‘जान है तो जहान है‘ इस बात का ध्यान भी रखना होगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि तीजा में बहू-बेटियों को मायके न जाने संबंधी कोई संदेश शासन से जारी नहीं किया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से गांवों में ग्रामीणों ने इस तरह की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए गांवों में जिस तरह की व्यवस्था पहले देखी गई है, वैसी शहरों में भी नहीं हुई। संक्रमण से बचाव के लिए ग्रामीण अपनी परिस्थतियों के अनुरूप व्यवस्था कर सकते हैं। हम उनकी व्यवस्था का सम्मान करते हैं।


    मुख्यमंत्री ने तीजा-पोरा के अवसर पर राम वन गमन पथ पर आधारित रथ को भी रवाना किया। यह रथ प्रदेश के सभी संभागों में गांव-गांव जाकर लोगों को डिजिटल वीडियो के माध्यम से प्राचीन धरोहर, मंदिरों और रामवनगमन पथ से संबंधित जानकारी देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवालयों के विकास के लिए ‘राम वन गमन कोष‘ बनाया जाएगा। यह कोष जनभागीदारी समिति के माध्यम से संचालित होगा, जिसमें अशासकीय लोग होंगे। कोष की धनराशि से प्रदेश में राम वन गमन पथ में आने वाले मंदिर, देवालय, आदिवासियों के गुड़ी का विकास और पुनरोद्धार किया जाएगा और खाने-रहने की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने लोगों से कोष में दान देने की भी अपील की।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दुनिया भर में छत्तीसगढ़ सरकार की गोबर खरीदी की चर्चा है। इससे गोबर कीमती हो गया है। हमारी योजनाएं गांव, गरीब, किसानों के लिए हैं। हमने गोबर की ही व्यवस्था नहीं की है बल्कि गौठानों में महिलाएं आटा मिल, तीखुर के छोटे प्लान्ट जैसे कई रोजगार का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि तीजा के एक दिन पहले करू-भात के दिन 20 अगस्त को हम किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत राशि, तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रोत्साहन पारिश्रमिक और गोधन योजना के तहत ग्रामीणों को गोबर विक्रय का भुगतान करेंगे, जिससे बहनों को किसी तरह की कमी न हो। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के प्रकोप को दखते हुए लोगों से कहा कि बचाव में ही सुरक्षा है इसलिए कड़ाई से नियमों का पालन करें।
    महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया ने बहु-बेटियों हेतु इस आयोजन के लिए मुख्यमंत्री को बधाई दी। उन्होंने कहा कि तीजा में बहू-बेटियों को मायके जाने की मनाही नहीं है,लेकिन संक्रमण को देखते हुए बहुओं को भी बेटियोें की तरह तीजा मनवाएं। इस अवसर पर गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री की विशेषता है कि आज मुख्यमंत्री निवास में भी हमें घर-परिवार सा माहौल लगता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का काम शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी बोली को सहेजने के लिए भी प्रतियोगिता होनी चाहिए।


    कार्यक्रम स्थल में पारंपरिक वेशभूषा और गहनों से सजी महिलाओं के कटआउट और नांदियां बैला के सेल्फी जोन बनाए गए थे। महिलाएं भी इन पारंपरिक कटआउट के साथ सेल्फी लेने के लिए खासी उत्साहित दिखीं। इसके साथ ही नांदिया बैला और चुकी-पोरा से सजाए स्टॉल के साथ भी महिलाओं ने सेल्फी ली। कार्यक्रम स्थल में लगे रइचुली झूला और चकरी झूला का भी महिलाओं ने आनंद लिया। पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोक गीतों और नृत्यों ने मुख्यमंत्री निवास में लोगों का उत्साह और बढ़ा दिया।

     रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पद्म विभूषण पण्डित जसराज के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। राज्यपाल ने अपने शोक संदेश में कहा है कि पंडित जसराज के निधन से कला जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। उन्होंने अपनी वाणी के माध्यम से शास्त्रीय संगीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राज्यपाल ने उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है और उनके शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग, मंत्रालय द्वारा बिलासपुर जिले में अरपा नदी पर दो बैराजों के निर्माण के लिए 98 करोड़ 10 लाख 77 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति मुख्य अभियंता हसदेव कछार बिलासपुर को प्रदान की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अरपा नदी पर शिव घाट के पास बैराज निर्माण के लिए 49 करोड़ 13 लाख 24 हजार रूपए तथा पचरीघाट के पास बैराज निर्माण के लिए 48 करोड़ 97 लाख 53 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। 

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज तीजा-पोरा तिहार पर छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों के साथ थिरके और छत्तीसगढ़ी जसगीत की लय पर ढोलक पर थाप भी दी।
    मुख्यमंत्री निवास में आज तीजा-पोरा त्यौहार पर आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी गीतों की आकर्षक प्रस्तुति दिलीप षडं़ग़ी और साथियों ने दी। कार्यक्रम में महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। मुख्यमंत्री भी अपने आपको इस खुशी के मौके पर रोक नहीं पाए। उन्होंने कलाकारों का हौसला बढ़ाने के लिए उनके साथ जसगीत की लय पर ढोलक पर थाप दी और गीत की लय पर कलाकारों के साथ थिरके। इस अवसर पर उनका साथ महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिय़ा, विधायक मोहन मरकाम, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक, रायपुर नगर निगम के महापौर ऐजाज ढेबर ने भी दिया।
    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री निवास में विगत वर्ष से छत्तीसगढ़ी पर्वों को मनाने की शुरूआत की गई है। मुख्यमंत्री निवास में प्रदेश के विभिन्न स्थानों से बहनों को तीजा-पोरा पर्व के लिए आमंत्रित किया गया था। उनके लिए मुख्यमंत्री निवास में विशेष व्यवस्था की गई थी। महिलाओं को मुख्यमंत्री की ओर से लुगरा और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का उपहार दिया गया।

    छत्तीसगढ़ी को 8वी अनुसूची में शामिल किए जाने की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मांग का रमन विरोध कर रहे रायपुर / शौर्यपथ/ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के लिए प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र का रमन सिंह द्वारा विरोध किये जाने को कांग्रेस ने रमन का छत्तीसगढ़ी विरोधी चरित्र बताया है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि रमन सिंह छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति से इतनी नफरत क्यो करते हैं ? इसी छत्तीसगढ़ के वे पन्द्रह साल मुख्यमंत्री रहे है। छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए उन्होंने कभी कोई सार्थक और ठोस पहल नही किया। रमन चाहते तो तो अपने शासन के पन्द्रह सालो में केंद्र सरकार पर इस हेतु दबाव बना सकते थे लेकिन कुछ नही किया। यह रमन और भाजपा की छत्तीसगढ़ की भाषा और संस्कृति के प्रति दुराव को जताता है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि आज जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ी भाषा को देश की अधिकृत भाषाओं के बीच प्रतिष्ठा दिलवाने प्रधानमंत्री को पत्र लिख रहे तो इसमें भी रमन सिंह को पीड़ा हो रही वे इस पत्र का विरोध कर रहे जबकि चाहिए तो यह था कि जिस छत्तीसगढ़ की जनता ने उन्हें तीन बार का मुख्यमंत्री बनाया उस छत्तीसगढ़ी भाषा को उसका सम्मान दिलाने वे भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पत्र के समर्थन में प्रधानमंत्री को पत्र लिखते। यहाँ रमन सिंह की दलीय दुर्भावना छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति के ऊपर हावी हो गयी। कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि रमन सिंह भाजपा के वरिष्ठ नेता है सम्भवतः उन्होंने अपने ही केंद्र सरकार की शिक्षा नीति का अध्ययन नही किया है। नई शिक्षा नीति में स्थानीय मातृ भाषा में अध्ययन पर जोर दिया गया है। जब छत्तीसगढ़ी भाषा देश की मान्यता प्राप्त संविधान की आठवीं अनुसूची के भाषाओं में शामिल ही नही रहेगी तब ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ी माध्यम में पढ़ाई का प्रश्न ही नही उठता। कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की भाषा संस्कृति तीज त्योहार को बढ़ावा दिया जा रहा उनका संरक्षण किया जा रहा है। रमनराज के पन्द्रह सालो में छत्तीसगढ़ की भाषा संस्कृति तीज त्योहार सब को हासिये में डाल दिया गया था। रमन सिंह को इसी बात की पीड़ा है कि जो वे दबाते रहे कांग्रेस की सरकार भूपेश बघेल उसी छत्तीसगढ़ी पहचान को प्रश्रय क्यां दे रहे?

    खाना खजाना / शौर्यपथ / आज हम आपके लिए बेसन मेथी थेपला की रेसिपी लेकर आए हैं। यह बड़ी मजेदार डिश है, क्योंकि बच्‍चे भी इसे बड़े पसंद से खाते हैं। साथ ही ब्रेकफास्ट के लिए भी यह बेस्ट ऑप्शन है।

    सामग्री :
    1 कप गेहूं का आटा
    1/4 कप दही
    1/4 कप तेल
    1/4 कप बेसन
    1/2 कप बारीक कटी हुई हरी मेथी
    1/2 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
    1/4 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
    1/4 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
    1/4 छोटा चम्मच अजवाइन
    नमक स्वादानुसार


    विधि :
    मेथी थेपला बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में गेहूं का आटा, बेसन, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, अजवायन, नमक, कटी हुई मेथी, दही और 2 छोटे चम्मच तेल डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
    इस मिश्रण को पानी की मदद से गूथ लें। गुथ हुआ आटा नरम रहना चाहिए। गूथने के बाद को आटे को ढक से और बीस मिनट के लिए रख दें। बीस मिनट के बाद हाथों में थोड़ा सा तेल लगाकर आटे को हल्‍के हाथों से एक बार और गूथ लें, जिससे आटा चिकना हो जाए।
    अब तवा को गैस पर रख कर गरम करें। तैयार आटे की लोई बनाकर गेहूं के आटे की मदद से चकले पर रखकर पतला बेल लें। तवा गरम होने पर उस पर थोड़ा सा तेल डालें और पूरे तवे पर फैला लें। इसके बाद बेले हुए थेपले को तवे पर डाल दें और मीडियम आंच पर सेकें।
    जब थेपला एक तरफ हल्का सिक जाए, तो उसे पलट दें। इसके बाद एक छोटा चम्‍मच तेल थेपला पर फैला कर डालें। फिर थेपला को पलट कर थोड़ा सा तेल डालें और उसे उलट-पलट कर सेक लें। इसी तरह से सारे थेपले सेक लें।
    लीजिए मेथी का थेपला तैयार है। इन्हें मनचाहे अचार, चटनी या दही के साथ गरमा गर्म सर्व करें।

     

    सेहत / शौर्यपथ / हर किसी को गुस्सा आता है और यह बेहद स्वाभाविक है। लेकिन, अगर आप उनमें से हैं जो अपने गुस्से का इजहार नहीं करते तो सर्तक हो जाइए। अपने गुस्से को व्यक्त करने में न सिर्फ आपकी मानसिक भलाई है बल्कि मस्तिष्काघात (ब्रेन स्ट्रोक)को रोकने में भी यह अहम भूमिका निभाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग के शोधकर्ताओं की टीम ने पाया है कि गुस्से को दबाकर रखने से महिलाओं के कारोटिड धमनियों में गंदगी (प्लाक)जमने लगती है जिससे मस्तिष्काघात का खतरा बढ़ जाता है।

    दिमाग को खून सप्लाई करती हैं धमनियां-
    यह धमनियों दिमाग तक होने वाली खून की सप्लाई को नियंत्रित करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इन धमनियों में सिकुड़न आने से मस्तिष्काघात का खतरा जानलेवा हो सकता है। पूर्व के शोधों के अनुसार लंबे समय तक तनाव में रहने से दिमाग में सूजन पैदा होती है जिससे मस्तिष्काघात, दिल के दौरे, और सीने में दर्द के खतरे बढ़ जाते हैं।

    भावनात्मक अभिव्यक्ति और दिमागी स्वास्थ्य में संबंध-
    प्रमुख शोधकर्ता कारेन जाकुबोवस्की ने कहा, हमारे शोध से पता चलता है कि महिलाओं में सामाजिक-भावनात्मक अभिव्यक्ति और दिमाग के स्वास्थ्य के बीच संबंध पाया गया है। इस तरह के शोध महत्वूपर्ण होते हैं क्योंकि यह दर्शाता है कि कैसे किसी महिला का भावनात्मक स्वभाव उसके शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इन परिणामों से प्रोत्साहित होकर स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को अपने रोगियों के सामाजिक-भावनात्मक कारकों को ध्यान में रखते हुए एक निवारक देखभाल योजना की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए।

    मस्तिष्काघात अमेरिका में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। स्ट्रोक सेंटर के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में हर साल मस्तिष्काघात से 140,000 लोगों की मौत हो जाती है। यूके में मस्तिष्काघात चौथा सबसे बड़ा मौता का कारण है। यहां साल भर में करीब 100,000 लोगों की मौत मस्तिष्काघात के कारण हो जाती है।

    एथेरोस्क्लेरोसिस ब्रेन स्ट्रोक का कारण-
    एथेरोस्क्लेरोसिस ब्रेन स्ट्रोक का एक प्रमुख कारण है। यदि पट्टिका फट जाती है, तो यह एक रक्त का थक्का बना सकता है जो आगे मस्तिष्क तक ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को अवरुद्ध करता है। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है और उनके ठीक होने की संभावना कम होती है। यह मासिक धर्म चक्र, हार्मोनल गर्भ निरोधकों और गर्भावस्था की जटिलताओं से जुड़ा हुआ है।

    शोधकर्ता इस बात की जानने के इच्छुक थे कि गुस्से को स्वयं दबा लेने से महिलाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने लिखा, कई लोगों ने तर्क से बचने या किसी रिश्ते के टूटने से बचाने के प्रयास में अपने विचारों और भावनाओं को अंदर ही छुपा या दबा लेते हैं। गुस्से को दबा लेने से महिलाएं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में गिरावट आती है।

    ऐसे किया गया अध्ययन-
    इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने 40 से 60 साल के उम्र की 304 महिलाओं पर शोध किया। यह सभी महिलाएं धूम्रपान नहीं करती थीं। इन महिलाओं से पूछा गया कि यह कितनी जल्दी-जल्दी अपने गुस्से को व्यक्त करती थीं। अल्ट्रासाउंड स्कैन की मदद से उनके कारोटिड धमनियों ने जमा गदंगी के स्तर को आंका गया।

    इन परिणामों से पता चला कि जो महिलाएं अपने गुस्से को दबा रही थीं उनमें एथेरोस्क्लेरोसिस का खतरा ज्यादा था। पूर्व के शोधों में कहा गया है कि दिमाग के तनाव का स्तर बढ़ने से दिमाग बोन मैरो को संकेत भेजता है कि वो और सफेद रक्त कोशिकाएं बनाए। यह सफेद कोशिकाएं धमनियों में सूजन पैदा कर सकती हैं।

    गुस्से का इंसानी शरीर पर असर-
    - शरीर में एड्रिनालिन और नोराड्रिनलिन हॉर्मोंस का स्तर बढ़ जाता है
    - उच्च रक्तचाप, सीने में दर्द, तेज सिर दर्द, माइग्रेन, एसिडिटी जैसी कई शारीरिक बीमारियां हो सकती हैं।
    - जो लोग जल्दी-जल्दी और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाते हैं, उन्हें स्ट्रोक, किडनी की बीमारियां और मोटापा होने का जोखिम होता है।
    - ज्यादा पसीना आना, अल्सर और अपच जैसी शिकायतें भी गुस्से की वजह से हो सकती हैं।
    - ज्यादा गुस्से की वजह से दिल के रक्त को पंप करने की क्षमता में कमी आती है और इसकी वजह से दिल की मांसपेशियों को क्षति पहुंचती है।
    - लगातार गुस्से से रैशेज, मुंहासे जैसी स्किन से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।

     

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / प्राकृतिक नियमों के अनुसार एक महिला तभी तक गर्भधारण कर सकती है जब तक उसे मासिक धर्म आता है। सामान्तय महिलाएं 50 साल की उम्र में रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) की अवस्था प्राप्त कर लेती हैं। रजोनिवृत्ति वो अवस्था होती है जब मासिक धर्म बंद हो जाते हैं और गर्भधारण करने की क्षमता समाप्त हो जाती है। लेकिन, अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रजजन संबंधी इलाज ढूंढ़ निकाला है जिसकी मदद से रजोनिवृत्ति के बाद भी महिलाएं मां बन सकेंगी।

    ग्रीस में वैज्ञानिकों ने ऐसा ही एक इलाज विकसित किया है जिसकी मदद से रजोनिवृत्ति प्राप्त कर चुकी तीन महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया है। ग्रीस के जेनेसिस एथेंस फर्टिलिटी क्लीनिक के विशेषज्ञों ने इस इलाज में एक ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया है जिसका इस्तेमाल घावों को जल्द ठीक करने के लिए किया जाता है। यह तकनीक ऊतकों और रक्त वाहिकाओं को बढ़ावा देती है। इस तकनीक को प्लेटलेट रिच प्लाजमा (पीआरपी) कहते हैं।

    ऐसे किया गया शोध-
    क्लीनिक के विशेषज्ञों ने 46 से 49 साल के उम्र की महिलाओं के अंडाशय में पीआरपी इंजेक्ट किया। यह सभी महिलाएं रजोनिवृत्ति को प्राप्त कर चुकी थीं। जब महिलाएं रजोनिवृत्ति प्राप्त कर लेती हैं तब वे गर्भधारण नहीं कर पातीं। नए इलाज की मदद से 70 फीसदी प्रतिभागियों में मासिक धर्म को दोबारा शुरू किया जा सका।

    इनमें वे महिलाएं शामिल थीं जिन्हें पांच साल से मासिक धर्म नहीं हुआ था। शोधकर्ताओं की टीम ने तीन महिलाओं से अंडे लिए और उन्हें लैब में निषेचित किया। फिर इससे उन्हें गर्भधारण कराया गया।

    ज्यादा उम्र में मां बनना होगा आसान-
    क्लीनिक के विशेषज्ञ कोंस्टानटिनोस पानटोस ने कहा कि यह इलाज ज्यादा उम्र में भी महिलाओं को मां बनने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, कई महिलाएं 40 की उम्र तक अपने करियर पर ध्यान देती हैं और फिर बच्चों के बारे में सोचती हैं। ऐसे में कई महिलाओं के रजोनिवृत्ति की उम्र आ जाती है और वे बच्चे पैदा नहीं कर पाती। पानटोस ने कहा कि इस इलाज के लिए भी महिलाओं की उम्र सीमा तय करना जरूरी है।

     

    दुर्ग।शौर्यपथ। दुर्ग निगम बाजार विभाग की टीम ने आज बाजार प्रभारी थान सिंह के मार्गदर्शन में आज सुबह समय से पूर्व व्यवसाय संचालन करते हुए पाए जाने पर हटरी बाज़ार स्थित पन्ना स्वीट्स व शर्मा स्वीट्स को सील किया गया । सील की कार्यवाही के दौरान बाजार विभाग प्रभारी व उनकी टीम के सदस्य शशिकांत यादव ,भुवन साहू ,ईश्वर वर्मा ,आदि लोग थे । बता दे कि शहर में लॉक डाउन चल रहा जिसमे व्यापारियों को दुकान खोलने व बन्द करने का समय निर्धारित किया गया है । निर्धारित समय पूर्व या पश्चात व्यवसाय करने वालो पर निगम प्रशासन बारीक नज़र रखे हुए है । लॉक डाउन के नियमो की अवहेलना करते पाए जाने वालों पर प्रशासन सख्ती से कार्यवाही को अंजाम दे रहा है । आज की कार्यवाही में नव पदस्थ बाजार प्रभारी द्वारा बिना किसी पुलिस बल के मदद के की गई कार्यवाही ये दर्शाती है कि निर्धारित समय के पूर्व या पश्चात की कार्यवाही का व्यापारियों द्वारा भी समर्थंन प्राप्त है ।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / शहद को सेहत और स्किन दोनों के लिए बेहद कारगर माना जाता है। रोजाना एक चम्मच शहद के सेवन से आपकी सेहत ठीक रहती है बल्कि इससे आपकी स्किन में भी निखार आता है लेकिन अक्सर शहद की शुद्धता को लेकर मन में सवाल उठते हैं, ऐसे में आप इन उपायों से असली-नकली शहद की पहचान कर सकते हैं-


    ऐसे करें शहद की पहचान
    विनिगर और पानी के सॉलूशन में शहद की कुछ बूंदें डालें। अगर इस मिश्रण में फोम यानी झाग बनने लगता है तो इसका मतलब है कि आपके शहद में मिलावट की हुई है और शहद शुद्ध नहीं है। जब शहद को गर्म चीज के संपर्क में लाया जाता है तो शहद जलता नहीं है। इस टेस्ट को करने के लिए शहद में कॉटन बड या माचिस की तीली को डुबोएं और फिर उसे जलाने की कोशिश करें। अगर वो जल जाता है तो इसका मतलब है कि शहद शुद्ध है। अगर शहद मिलावटी है तो वह सही तरीके से जलेगा नहीं, अगर आपका शुद्ध शुद्ध है तो वह पानी में पूरी तरह से घुलेगा नहीं और एक बार घोलने के बाद आपको काफी मेहनत करनी पड़ेगी ताकि शहद पानी में घुल जाए लेकिन अगर शहद मिलावटी है और उसमें चीनी का ग्लूकोज की मिलावट की गई है तो वह आसानी से पानी में घुल जाएगा और फिर सफेद मार्क छोड़ देगा।

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