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जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ /राजस्व अनुविभाग चाम्पा अंतर्गत आने वाले नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों में कोरोना संक्रमण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने, आम नागरिकों तथा ब्यवसायियों को लॉक डाउन का परिपालन सुनिश्चित कराने, पृथक वास केंद्रों (क्वारंटीन सेंटर ) में ठहरे हुए प्रवासी मजदूरों को उत्कृष्ट मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने हेतु सक्रिय रूप कार्य करने के लिए एस डी एम बजरंग दुबे का सम्मान शिक्षा समृद्धि अभियान छत्तीसगढ़ द्वारा किया गया।
ज्ञातव्य है कि मार्च माह से केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा लगाये गये लॉक डाउन में फँसे श्रमिकों तथा यात्रियों के लिए विशेष वाहनों की व्यवस्था कर उन्होंने मजदूरों तथा यात्रियों को सुरक्षित घर पहुंचाया था। आश्रय स्थलों में भोजन तथा ठहरने हेतु बहुत अच्छी व्यवस्था की गई थी। एस डी एम श्री दुबे ने अन्य राज्यों से विशेष ट्रेनों से आने वाले मजदूरों को होम आइसोलेशन हेतु 100 से अधिक क्वारेंटाइन सेंटर स्थापित कर उन्हें उत्कृष्ट मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाया गयी। कोरोना काल में उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्य हेतु शिक्षा समृद्धि अभियान द्वारा उनका सम्मान किया गया है।
इस अवसर पर नायब तहसीलदार श्रीमती प्रियंका चंद्रा, राजस्व निरीक्षक श्रीमती वर्षा गोस्वामी, शिक्षा समृद्धि अभियान के प्रदेश संयोजक परमेश्वर स्वर्णकार, शिक्षक गण धन्य कुमार पाण्डेय, छोटे लाल देवांगन, भुवनेश्वर प्रसाद देवांगन, मोती राम अंचल,विष्णु यादव, चुन्नी सिंह मरकाम,दिनेश कुमार देवांगन ,शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला भोजपुर के प्राचार्य आर के राठौर उपस्थित थे।
सम्पादकीय / शौर्यपथ / पीएम केयर्स फंड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल महत्वपूर्ण, बल्कि अनुकरणीय है। इस फंड को लेकर शुरू से ही जो विवाद रहे हैं, उन पर अलग से विचार-विमर्श की जरूरत भले हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जाने का कोई विशेष औचित्य नहीं था। इस मामले में अदालत की भावनाएं कमोबेश पहले ही सामने आ गई थीं। अप्रैल के महीने में ही जब अलग से पीएम केयर्स फंड बनाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, तभी उस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने बिना समय गंवाए खारिज कर दिया था। कोर्ट ने चुनौती देने को खड़े हुए वकील से तब कहा था, ‘आपके पास दो ही विकल्प हैं, या तो आप याचिका वापस ले लीजिए या आप पर हम भारी जुर्माना लगाएंगे।’ जाहिर है, इस फंड को दोबारा चुनौती नहीं दी जा सकती थी, इसलिए इसके फंड को एनडीआरएफ अर्थात राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में जमा कराने के लिए याचिका लगाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने अपने रुख को बरकरार रखा है। इससे निश्चित रूप से उन लोगों को निराशा होगी, जिनको यह आशंका है कि इस फंड में गड़बड़ी हुई है या की जाएगी। कहना न होगा, केवल आशंका के आधार पर कोई शिकायत करने से बचना चाहिए। सरकार की किसी भी बड़ी पहल को मजबूत आधार पर ही चुनौती देनी चाहिए। कोर्ट ने अप्रैल में ही फंड के गठन को चुनौती देने वाली याचिका के बारे में कहा था कि इससे राजनीति की बू आ रही है। अब इस मामले का यहीं पटाक्षेप हो जाना चाहिए।
यह हमारे समय का सच है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार ने एक पीएम केयर्स फंड बना रखा है, जिसमें 3,100 करोड़ रुपये से ज्यादा देश और विदेश के लोगों ने स्वेच्छा से जमा किए हैं। इस धन का उपयोग चिकित्सकीय साजो-सामान से लेकर वैक्सीन की खोज तक में हो रहा है। तमाम राज्यों को भी इस फंड के तहत मदद नसीब हो रही है। सरकार के अनुसार, पीएम केयर्स फंड के 3,100 करोड़ में से 2,100 करोड़ रुपये से वेंटिलेटर खरीदने; 1,000 करोड़ रुपये प्रवासी मजदूरों पर; और 100 करोड़ रुपये वैक्सीन बनाने पर खर्च होने हैं।
आज जरूरत यह नहीं कि पीएम केयर्स फंड पर बहस की जाए, जरूरी है कि इस फंड का देश को सेहतमंद बनाने के लिए बेहतर से बेहतर सदुपयोग हो। केंद्र सरकार पहले ही यह इशारा कर चुकी है कि इस फंड का ऑडिट किया जाएगा। जहां तक विपक्षी दलों का प्रश्न है, तो यह उनका दायित्व है कि वे सरकारी व्यवस्था में खामी खोजें और उसका राजनीतिक इस्तेमाल भी करें। कोरोना के लिए जो धन लोगों ने दिया है, उसकी एक-एक पाई सही जरूरतमंदों तक पहुंचनी चाहिए। पीएम केयर्स फंड में धन दान करने वाले सभी लोग यही चाहेंगे कि उनके धन का देशहित में ईमानदारी से सदुपयोग हो जाए। यह हमारी सरकारों के लिए भी चुनौती है कि वे ऐसे किसी विशेष कोष को पूरी ईमानदारी से निचले स्तर तक पारदर्शिता के साथ खर्च करके देश के सामने पूरा खाता रख दें। ऐसे कोषों पर शंका-आशंका नई बात नहीं है, अपने देश में राहत कोषों पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन महाविपत्ति के समय के इस विशेष फंड को एक आदर्श स्थापित करना चाहिए। पुरानी आशंकाओं को झुठला देना चाहिए। हमारे विशाल विकासशील देश में ऐसे विशेष कोष की सफलता से दान और सेवा का भविष्य भी तय होगा।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित प्रदेश के समस्त शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं एवं विशेष (आदिवासी) औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में सत्र अगस्त 2020-21 एवं 2020-22 में प्रवेश के लिए इच्छुक आवेदक 25 अगस्त तक ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन (आवेदन) करा सकते हैं। संचालक रोजगार एवं प्रशिक्षण, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा इस संबंध में सूचना जारी कर दी गई है।
जारी सूचना के अनुसार छत्तीसगढ़ स्थित शासकीय आईटीआई में संचालित एनसीव्हीटी/एससीव्हीटी के पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए इच्छुक छत्तीसगढ़ के मूल निवासी आवेदक, स्वयं अथवा छत्तीसगढ़ स्थित किसी भी लोक सेवा केन्द्र (च्वाइस सेंटर) के माध्यम से संचालनालय रोजगार एवं प्रशिक्षण की वेबसाईटcgiti.cgstate.gov.in के ’ऑनलाईन एप्लिकेशन 2020’ पर क्लिक कर अपना पंजीयन एवं प्रवेश हेतु व्यवसाय का चयन कर सकते हैं। आवेदकों के पंजीयन के लिए वेबसाईट पर यूजर मैन्यूवल दिया गया है, जिसका अवलोकन किया जा सकता है।
पंजीयन के पूर्व, प्रवेश विवरणिका जो कि cgiti.cgstate.gov.in पर उपलब्ध है, जिसमें छत्तीसगढ़ शासन कौशल विकास विभाग के अधीन संचालनालय रोजगार एवं प्रशिक्षण के अंतर्गत शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में संचालित विभिन्न व्यवसायों में सत्र अगस्त 2020-21 एवं 2020-22 में प्रवेश हेतु निर्धारित संस्थावार/व्यवसायवार सीटों एवं आवश्यक शैक्षणिक अर्हता एवं अन्य समस्त जानकारी दर्शित है, उसे डाउनलोड कर आवेदक उसका सावधानी पूर्वक अध्ययन कर लें।
छत्तीसगढ़ शासन के विद्यमान नियमों एवं नीति के अंतर्गत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन करने की अंतिम तिथि 25 अगस्त 2020 तक निर्धारित है। आवेदक को ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन (पंजीयन) के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति के आवेदक को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन शुल्क 40 रूपए तथा पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के आवेदक को 50 रूपए देना होगा। वेबसाईट पर पंजीयन के दौरान रजिस्ट्रेशन शुल्क लोक सेवा केन्द्र (च्वाइस सेंटर) में नगद अथवा स्वयं ऑनलाईन पेमेंट द्वारा शुल्क का भुगतान किया जा सकता है। ऑनलाईन भुगतान हेतु निम्न सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं। इंटरनेट बैंकिंग, एटीएम सह डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या अन्य किसी ऑनलाईन पेमेंट माध्यम से शुल्क का भुगतान किया जा सकता है। एक बार आवेदन रजिस्ट्रेशन होने के पश्चात अपने आवेदन में मोबाइल नम्बर को छोड़कर आवेदन भरने की अंतिम तिथि तक सुधार कर सकते हैं। यदि आवेदक ने अनुसूचित जाति या जनजाति के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा किया है और सुधार के पश्चात अनारक्षित (सामान्य) या अन्य पिछड़ा वर्ग करना चाहता है तो उसे आवेदन शुल्क के अंतर की राशि जमा करनी होगी। व्यवसाय ड्रायवर कम मैकेनिक में प्रवेश के लिए आवेदक की न्यूनतम आयु 1 अगस्त 2020 को 18 वर्ष एवं शेष व्यवसायों के लिए 14 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। उच्चतम आयु सीमा का बंधन नही है। प्रवेश हेतु स्थानों की संख्या परिवर्तनीय है। चूंकि चयन संबंधी जानकारी एसएमएस के माध्यम से भेजी जाती है, अतः ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन के समय आवेदक अपना मोबाइल नम्बर एवं ई-मेल आईडी की जानकारी अवश्य दें, ताकि प्रवेश हेतु चयन संबंधी जानकारी एस.एम.एस. के माध्यम से प्राप्त हो सके। आवेदक का चयन होने पर आवेदक को संबंधित संस्था में आवश्यक समस्त अभिलेखों, प्रमाण पत्रों एवं निर्धारित शुल्क सहित स्वयं उपस्थित होकर प्रवेश लेना होगा। आवेदन हेतु वेबसाईट का लिंक इस प्रकार है-
ओपिनियन / शौर्यपथ / हमारे राष्ट्रीय मानस में पंडित मार्तंड जसराज गहरे बसे रहे। वह हमारे सांस्कृतिक लोकाचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। उनके गुजर जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसको कभी भरा नहीं जा सकता। यह शून्य मेरे निजी जीवन के लिए कहीं अधिक गहरा है। ऐसा कोई शुभ अवसर मुझे याद नहीं आता, जब उन्होंने अपनी जादुई आवाज में मुझे शुभकामना न दी हो, फिर चाहे वह मौका मेरे गृह प्रवेश का हो या मेरे बेटे की शादी का।
पंडित जसराज हमारी शास्त्रीय गायन परंपरा के महान चटुष्टय के आखिरी स्तंभ थे। ये चार महान गायक थे- किराना घराने से ताल्लुक रखने वाले पंडित भीमसेन जोशी; जयपुर घराने की किशोरी अमोनकर; सेनिया और बनारस घराने की गिरिजा देवी, और मेवाती घराने के खुद पंडित जसराज। भारतीय संगीत के प्रति अपने गहरे लगाव के कारण मुझे इन चारों के साथ निजी ताल्लुकात बनाने का सौभाग्य मिला। हालांकि, कुछ खासियत सिर्फ पंडित जसराज में थीं।
सदाशयता, दुलार और समभाव उनके स्वभाव के खास गुण थे। किसी भी मौके पर मैंने उन्हें नाराज होते नहीं देखा। न तो उनको बेअदब श्रोताओं से कोई शिकायत रही और न ही किसी बीमारी से वह खीझते हुए देखे गए। एक बार उन्हें वायरल बुखार हुआ, तो जब मैंने उनसे अपना ख्याल रखने को कहा, तो मजाकिया अंदाज में उन्होंने जवाब मिला, ‘प्रतिष्ठित संगीत प्रेमियों की उपस्थिति और उनका उत्साह मेरी पीड़ा खत्म कर देती है’।
हिसार में जन्मे पंडित जसराज ने विभिन्न शैलियों के गायन को अपनाते हुए एक लंबी यात्रा तय की। मैंने उनके बड़े भाई पंडित मणिराम द्वारा सिखाए जा रहे कुछ बोलों को भी उनसे सुना है, और वाकई सर्वश्रेष्ठ गुरु-शिष्य परंपरा को एक साथ सुनना मेरे लिए एक अनमोल अनुभव है। मेवाती घराने से संबंध रखने की वजह से उन्होंने विभिन्न संगीत शैलियों का मिश्रण बनाने की कोशिश की। इस अर्थ में उनके पास एक दूरदर्शी नजरिया था। उनका मानना था कि अपनी निर्मलता और मूल को खोए बिना शास्त्रीय परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए। यही कारण है कि मेवाती घराने से सीखने के दौरान उन्होंने अपनी संगीत-शैली, खासतौर से कीर्तन को काफी निखारा। देश-दुनिया में चर्चित ‘जसरंगी’ के वह प्रणेता हैं, जिसमें महिला गायिका के साथ मिलकर वह साथ-साथ गायन किया करते थे। कई अवसरों पर वह ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: गाया करते, जो श्रोताओं को अध्यात्म के चरम भाव पर में पहुंचा देता था। उनकी एक बड़ी खूबी यह थी कि शास्त्रीय परंपरा को आत्मसात करते हुए वह लगातार उसे सुधारते रहे।
मुझे याद है। 8 मई, 1998 को एक उमस भरी दोपहर में उन्होंने राग धुलिया मल्हार गाने का फैसला किया था। इस राग के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा था कि यह बारिश का अग्रदूत है और इसमें बारिश की बूंदें अक्सर धूल कणों से मिलती हैं, ताकि तेज बरसात से पहले धूल का तूफान पैदा हो सके। जब उन्होंने अपना गायन शुरू किया, तब बादल का नामो-निशान नहीं था। मगर गायन के साथ ही दूर बादल दिखने लगे और बूंदाबांदी भी शुरू हो गई, जिससे वातावरण काफी ठंडा हो गया। बादलों की जादुई उपस्थिति और सुदूर हो रही बारिश से वहां मौजूद सभी लोगों को तानसेन की याद हो आई। कहते हैं कि जब तानसेन राग मल्हार गाया करते थे, तो बारिश होने लगती थी और दीपक राग से दीपक जल उठते थे। निश्चय ही, वैसा कि हम सभी ने उस शाम अनुभव किया। पंडित जसराज 21वीं सदी के तानसेन थे।
एक अर्थ में यह विडंबना ही है कि एक व्यक्ति, जिसका जन्म हिसार में हुआ और जो भारत की संगीत परंपराओं को संपूर्णता में जीता रहा, उसने अपनी अंतिम सांस न्यू जर्सी में ली। दुख की इस घड़ी में सांत्वना की बात बस यही है कि वह एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिससे वह बेपनाह प्यार करते थे, यानी छात्रों को शास्त्रीय संगीत की महान भारतीय परंपरा को सिखाने का काम, जिसके वह सर्वश्रेष्ठ वाहक थे। भारतीय शास्त्रीय संगीत परंपरा को वैश्विक बनाने के अपने आह्वान के बाद पंडितजी ने अटलांटा, टम्पा, वैंकूवर, टोरंटो, न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, पिट्सबर्ग, मुंबई और केरल में स्कूलों की स्थापना की।
उनकी बेटी दुर्गा जसराज आखिरी पल तक पंडित जी की देखभाल करती रहीं। वह उनकी प्यारी बेटी हैं और उनसे प्रशिक्षित भी हैं। पंडित जसराज ने उन्हें तिरंगा कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए खासा प्रोत्साहित किया था, इससे जाने-माने कवि व गीतकार जावेद अख्तर भी जुड़े थे। पंडित जी का यूं जाना मुझे इसलिए और ज्यादा गमगीन कर रहा है, क्योंकि न्यू जर्सी के इस प्रवास में मैं उनसे अक्सर बातें किया करता था और बातचीत में वह अक्सर उत्सुक होकर कहते कि भारत लौटने पर वह संगीत प्रेमियों के लिए अपने गायन का एक कार्यक्रम करेंगे। मेरा यह सपना अब अधूरा ही रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर कहा है, ‘पंडित जसराज जी के निधन से भारतीय सांस्कृतिक क्षेत्र में एक गहरा शून्य पैदा हुआ है। न केवल उनकी प्रस्तुतियां उत्कृष्ट थीं, बल्कि उन्होंने कई अन्य गायकों के एक असाधारण गुरु के रूप में अपनी पहचान भी बनाई’। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी, जिनके साथ भी मैंने काम किया है, उन्हें खूब पसंद किया करते थे। वह उन्हें ‘रसराज’ कहकर संबोधित करते थे, जिसका अर्थ होता है रसों का राजा। अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने 2019 में मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच परिक्रमा करने वाले एक लघु ग्रह का नाम ‘जसराज’ रखा था। अब वह उसी ग्रह-नक्षत्र का हिस्सा बन गए हैं।
भारतीय शास्त्रीय संगीत जिस आध्यात्मिकता की महान विरासत का प्रतिनिधित्व करता है, वह हमेशा आगे बढ़नी चाहिए। पंडित जसराज हम सभी को यह जिम्मेदारी सौंप गए हैं कि सुरीली परंपराएं आम भारतीयों के जीवन में प्रासंगिक बनी रहें। भारतीय शास्त्रीय संगीत में आम लोगों की भागीदारी के लिहाज से उनका अतुलनीय योगदान है। उनका तिरंगा और ऊंची उड़ान भरता रहे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) एन के सिंह, अध्यक्ष, वित्त आयोग
रायपुर / शौर्यपथ / गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने असंगठित कर्मकार मृत्यु सहायता योजना के तहत दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के तीन श्रमिकों के परिवार जनों को एक-एक लाख रूपए का चेक प्रदान किया। चेक प्राप्त हितग्राहियों में स्नेहलता हाडके, कमला बाई एवं शीला सेन शामिल हैं। इस अवसर पर श्रम विभाग दुर्ग के सहायक श्रमायुक्त एवं श्रम निरीक्षक उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने और लेागों को आय का जरिया उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए राज्य शासन की गोधन न्याय योजना का लाभ आमजन तक पहुंचने लगा है। दो रूपए प्रति किलो की दर से निर्धारित गोबर बेचकर पशुपालक आय अर्जित कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाकर स्वसहायता समूहों की महिलाए को भी इसका फायदा मिल रहा है। वर्मी कम्पोस्ट खाद निर्माण से जैविक कृषि को भी बढ़ावा मिलेगा। सुराजी ग्राम योजना अंतर्गत नरवा,गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजना से बने आदर्श गौठानों में पहले से ही गोबर इकठ्ठा कर वर्मी कम्पोस्ट बनाया जा रहा था, जिसे गोधन न्याय योजना से और अधिक गति मिल रही है।
जिला गरियाबंद के फिंगेश्वर विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोरसी के राजीव लोचन स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा वर्मी कम्पोस्ट पूर्व से ही बनाया जा रहा है। इसे गोधन न्याय योजना से जोड़ने से आसानी से गोबर उपलब्ध होने के कारण ज्यादा मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट बनाने में सहायता मिली है। वर्मी कम्पोस्ट को उद्यानिकी और वन विभाग द्वारा 8.50 रूपये प्रतिकिलो ग्राम की दर से खरीदा भी जा रहा है। इससे महिलाओं को अतिरिक्त लाभ हुआ है। इस दौरान फिंगेश्वर विकासखंड के ग्राम बोरसी, जेंजरा, रोहिना, सुरसाबांधा, भेंड्री की बिहान की महिला ग्राम संगठनों द्वारा 125 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट विक्रय किया जा चुका है।
उल्लेखनीय है कि गोधन न्याय योजना अंतर्गत गरियाबंद जिले के 100 गौठानों में पशुपालकों से 17 अगस्त तक कुल 6 हजार एक सौ 37 क्विंटल गोबर की खरीदी की जा चुकी है। 100 गौठानो की समितियों को 62 लाख 10 हजार 114 रूपये भुगतान हेतु गौठान समिति के खातों में जारी भी कर दिया गया है। जिसका अंतरण पशुपालकों के खाते में किया जा रहा है। अभी तक 3 लाख 81 हजार 433 रूपये का भुगतान पशुपालकों के खाते में किया जा चुका है। जबकि शेष का भुगतान प्रक्रिया जारी है।

रायपुर / शौर्यपथ / कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच राहत की भी खबर है। प्रदेश के विभिन्न कोविड अस्पतालों और आइसोलेशन सेंटर्स (कोविड केयर सेंटर्स) से पिछले एक सप्ताह में 1581 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज किया गया है। वहीं प्रदेश में अब तक कुल दस हजार 598 मरीज कोरोना को मात दे चुके हैं। इनमें से 3296 मरीज रायपुर जिले के हैं। पिछले एक हफ्ते में रायपुर जिले से 620, राजनांदगांव से 153, बिलासपुर से 127, दुर्ग से 95 और जांजगीर-चांपा जिले से 53 मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। अस्पताल से घर लौटने वाले मरीजों को सावधानीपूर्वक दस दिनों के होम आइसोलेशन में रहने कहा गया है।
राज्य शासन द्वारा कोविड-19 पर नियंत्रण के लिए लगातार जांच और इलाज की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सरकार द्वारा तत्परता से उठाए जा रहे कदमों की वजह से रोज बड़ी संख्या में मरीज स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। कोरोना संक्रमितों की पहचान के लिए सभी जिलों में सैंपल जांच की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। रोजाना दस हजार से अधिक सैंपलों की जांच की जा रही है। राज्य में अब तक दस हजार 598 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। इनमें रायपुर जिले के 3296, राजनांदगांव के 888, दुर्ग के 865, बिलासपुर के 788, जांजगीर-चांपा के 526, बलौदाबाजार-भाटापार के 428, कोरबा के 421, रायगढ़ के 291, जशपुर के 266, कांकेर के 260, सरगुजा के 252, बलरामपुर-रामानुजगंज के 245 तथा बस्तर के 231 मरीज शामिल हैं।
कोविड अस्पतालों और कोविड केयर सेंटर्स में इलाज के बाद कबीरधाम जिले के 192, मुंगेली के 174, नारायणपुर के 172, महासमुंद के 171, दंतेवाड़ा के 144, बेमेतरा और कोरिया के 138-138, गरियाबंद के 118, कोंडागांव के 109, बालोद के 108, सूरजपुर के 101, सुकमा के 91, बीजापुर के 86, धमतरी के 62 और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के 31 मरीज पूर्णतः स्वस्थ हो चुके हैं। प्रदेश में वर्तमान में कोविड-19 की मृत्यु दर 0.94 प्रतिशत एवं रिकवरी दर 66.14 प्रतिशत है, जबकि इनका राष्ट्रीय औसत क्रमशः 1.93 प्रतिशत और 72.51 प्रतिशत है।
रायपुर / शौर्यपथ / शासन की गोधन न्याय योजना से पशुपालकों को अब सीधा लाभ मिलने लगा है और यह उनकी अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन गई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में गोधन न्याय योजना एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई है। इससे जहां एक ओर पशुपालकों को गोबर विक्रय से आमदनी होने लगी है। वहीं दूसरी ओर इसी गोबर से स्वसहायता समूह वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर आर्थिक लाभ अर्जित करने लगे है। इससे स्व-सहायता समूह की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार मिला है। किसानों को जैविक खेती के लिए अच्छी गुणवत्ता की वर्मी कम्पोस्ट भी सहजता से उपलब्ध होने लगी है। गोधन न्याय योजना से राज्य में जैविक खेती को प्रोत्साहन मिला है।
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के ग्राम चारभाठा के पशुपालक श्री प्रमोद यदु ने 5 हजार 758 किलो गोबर विक्रय किया है, जिससे उन्हें 11 हजार 516 रूपए की राशि प्राप्त होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को धन्यवाद ज्ञापित किया है। इसी गांव के पशुपालक श्री अरूण कुमार यदु ने बताया कि गोधन न्याय योजना से उन्हें अतिरिक्त आमदनी हो रही है। उन्होंने बताया कि 3 हजार 908 किलो गोबर विक्रय कर चुके हैं और 7 हजार 816 रूपए की राशि उनके खाते में आ गई है। अब उन्हें दूध के अलावा गोबर बचने से भी लाभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि शासन की गोधन न्याय योजना पशुपालकों के लिए हितकारी है। छुरिया विकासखंड के ग्राम महराजपुर के पशुपालक श्री सतनाम सिंह ने बताया कि गोधन न्याय योजना में गोबर बेचने से तत्काल राशि मिल जाती है। जिससे इस राशि का उपयोग पशुओं के लिए अच्छा चारा और घरेलू कार्य में करेंगे। उन्होंने बताया कि 2 हजार 820 किलो गोबर बेच चुके हैं, जिससे 5 हजार 640 रूपए की राशि मिली है। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना से आर्थिक स्थिति में मदद मिली है। श्री सिंह ने प्रदेश के मुखिया के प्रति आभार व्यक्त किया है।

गोधन न्याय योजना से डोंगरगांव विकासखंड के झीका निवासी श्री दिनेश यादव ने 3 हजार 92 किलो गोबर विक्रय कर 6 हजार 184 रूपए प्राप्त कर गोधन योजना से लाभान्वित हुआ है। इसी तरह खैरागढ़ विकासखंड के कोटरीछापर निवासी श्री नेहरू ने 2 हजार 700 किलो गोबर विक्रय कर 5 हजार 400 रूपए, डोंगरगढ़ विकासखंड के मुरमुंदा निवासी श्री किसुन यादव ने 2 हजार 524 किलो गोबर बेचकर 5 हजार 48 रूपए तथा ग्राम खुर्सीपार निवासी श्रीमती सुमरिनबाई ने 1 हजार 804 किलो गोबर विक्रय कर 3 हजार 608 रूपए, छुईखदान विकासखंड के हनईबन निवासी श्री श्रीमती शकुन ने 2 हजार 182 किलो गोबर विक्रय कर 4 हजार 364 रूपए तथा ग्राम पथर्रा निवासी श्री सुजनदास ने 1 हजार 740 किलो गोबर विक्रय कर 3 हजार 480 रूपए, छुरिया विकासखंड के पांगरीखुर्द निवासी श्री माखनलाल ने एक हजार 48 किलो गोबर बेचकर 2 हजार 96 रूपए, मोहला विकासखंड के मोहला निवासी श्री भूषण प्रसाद ने 891 किलो गोबर बेचकर एक हजार 782 रूपए तथा ग्राम पलान्दुर निवासी श्रीमती यशोदाबाई ने 339 किलो गोबर विक्रय कर 678 रूपए प्राप्त कर गोधन न्याय योजना से लाभान्वित हुई है।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना गोधन न्याय योजना के लाभ को देखते हुए गांवों में उत्साह का वातावरण बना है। इसके जरिए ग्रामीणों, पशुपालकों और महिला समूहों को होने वाली अतिरिक्त आमदनी के चलते पशुओं के संरक्षण और संवर्धन का एक अच्छा वातावरण तैयार होने लगा है। पशुओं के चारापानी और उनके देखभाल का बेहतर प्रबंध पशुपालक करने लगे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी से गोधन न्याय योजना को जोड़ देने से यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत कड़ी बन गई है। गौठानों के संचालन में जुड़े समूह अब गोधन न्याय योजना के माध्यम से गोबर खरीद कर बड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करने लगे हैं, जिससे उन्हें रोजगार मिलने के साथ ही अतिरिक्त आमदनी भी होने लगी है। ऐसे गौठान जहां वर्मी खाद का निर्माण नहीं हो रहा था, गोधन न्याय योजना शुरू होते ही वहां भी वर्मी खाद तैयार करने में महिला समूह पूरे उत्साह से जुट गए हैं।
गोधन न्याय योजना का लाभ उठाते हुए जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड के ग्राम पंचायत रेमने के गेड़ई गौठान की गांधी स्वसहायता समूह की महिलाएं अब जैविक खाद तैयार करने में जुट गई हैं। गोधन न्याय योजना शुरू होते हुए गांधी महिला समूह की महिलाओं ने गौठान में वर्मी कम्पोस्ट बनाने की तैयारी शुरू कर दी। गेड़ई गौठान में 32.86 क्ंिवटल गोबर की खरीदी पशुपालको से की गई है, जिसका भुगतान जिला प्रशासन के द्वारा किया जा रहा है। पहले गांव के पशुपालक गोबर को अपने बाड़ी में फेंक दिया करते थे, परंतु इस योजना का लाभ उठाकर हर पशुपालक गोबर को गौठान में बेचने लगे हैं। गांधी स्वसहायता समूह की महिलाओं को कृषि विभाग द्वारा जैविक खाद निर्माण के संबंध में प्रशिक्षण भी दिया गया है। गोबर से जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया समूह द्वारा शुरू कर दी गई है।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सुख-समृद्धि के प्रतीक का त्यौहार तीजा-पोरा आज मुख्यमंत्री निवास में परम्परागत रूप से मनाया गया। मुख्यमंत्री ने विशाल शिवलिंग की पूजा कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने नांदिया-बैला, चुकिया, पोरा, जांता की पूजा की और छत्तीसगढ़ के विशिष्ट व्यंजन चीला का भोग लगाया। उन्होंने कहा कि हमें कोरोना संक्रमण से बचते हुए तीजा मनाना है। गांवों में ग्रामीण व्यवस्था के तहत कोरोना से सुरक्षा के लिए मुनादी कराया गया होगा। हम ग्रामीण व्यवस्था का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शासन द्वारा कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ के प्रचार-प्रसार के लिए आज तीजा-पोरा के शुभ अवसर पर पांचों संभागों के लिए प्रचार रथ रवाना किए हैं। ये रथ सभी जिलों, विकासखण्ड़ों और गांवों में जाकर राम वन गमन पर्यटन परिपथ के बारे में एलईडी प्रर्दशनी के माध्यम से लोगों को बताएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनभागीदारी के लिए राम वन गमन पर्यटन परिपथ विकास कोष का गठन किया गया है। इस कोष में एकत्रित राशि को देवालयों-देवगुडी के विकास में भी लगाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत की जा रही गोबर खरीदी की चर्चा दुनिया में हो रही हैं। यह योजना ग्रामीण समृद्धि के लिए है। अब गोबर कीमती हो गया है। लोग सायकल, मोटर-सायकल और कार में गोबर लेकर बेचने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की जयंती पर आगामी 20 अगस्त को किसान न्याय योजना के तहत दूसरे किश्त की राशि के साथ ही गोबर खरीदी के भुगतान राशि और तेन्दूपत्ता बोनस की राशि एक साथ हितग्राहियों के खाते में डालेंगे। मुख्यमंत्री ने तीजा-पोरा मनाने प्रदेश भर से आयी महिलाओं को बधाई दी। उन्होंने कोरोना संक्रमण से बढ़ते आंकड़े पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि बचाव ही सुरक्षा है इसलिए सभी मास्क लगाएं और बार-बार सेनेटाईजर का उपयोग करें।
कार्यक्रम में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ के परम्परिक तीज त्यौहारों और यहां के रहन-सहन, आचार-विचार को जागृत करने का काम मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया है। मुख्यमंत्री ने 150 साल पहले से मनाए जा रहे राजिम माघी पुन्नी मेला को फिर से शुरू किया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति की रक्षा के लिए विधानसभा में विधेयक भी पास कराया है। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया में कहा कि हम सभी तीजा-पोरा मनाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव का पालन करते हुए परम्परा के अनुरूप तीजा तिहार मनाना है। विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल हमारे पुरखों का सपना पूरा कर रहे हैं और छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
