August 08, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    राजनांदगांव।शौर्यपथ / साहित्य समिति, भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) द्वारा वार्षिक साहित्यिक महोत्सव “आईरिस 2026” का आयोजन 2 फरवरी से 6 फरवरी 2026 तक किया गया। इस महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच, ज्ञान और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    पांच दिनों तक चले इस आयोजन के अंतर्गत विभिन्न साहित्यिक और शैक्षणिक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें मिथोलॉजिकल क्विज, स्लोगन लेखन, कविता पाठ, गेस द डिज़ीज, मेडिकल एटलस, मेडिकल क्विज, एक्सटेम्पोर और वाद-विवाद प्रमुख रहे। सभी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने पूरे जोश, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने विचारों, ज्ञान और रचनात्मकता का अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी प्रतिभा को सामने लाने का अवसर पाया।

    सभी प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन महाविद्यालय के अनुभवी और सम्मानित संकाय सदस्यों द्वारा निष्पक्ष रूप से किया गया। उनकी उपस्थिति और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा और कार्यक्रम की गुणवत्ता बनी रही। महोत्सव के समापन पर पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जो  अधिष्ठाता (डीन) डॉ. पी. एम. लुका की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. लुका ने साहित्य समिति और आयोजक दल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    यह संपूर्ण आयोजन संकाय समन्वयकों डॉ. दिव्या साहू, डॉ. अनिल बरन चौधरी, डॉ. इंदु पद्मेय एवं डॉ. रूबी साहू के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। वहीं छात्र समन्वयकों आशुतोष चंद्र कुमार एवं जी. सृष्टि ने कार्यक्रमों के सुचारु संचालन में अहम भूमिका निभाई और सभी व्यवस्थाओं को अच्छे ढंग से संभाला। आईरिस 2026 का समापन अत्यंत सफल और यादगार रहा। इस महोत्सव ने विद्यार्थियों को सीखने, अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अच्छा अवसर प्रदान किया, जिससे महाविद्यालय का शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण और भी समृद्ध हुआ।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। महामहिम राष्ट्रपति महोदय के 7 फरवरी को बस्तर जिले के प्रवास के दौरान लालबाग मैदान जगदलपुर में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर यातायात पुलिस द्वारा ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई है। आम जनता को आवागमन में असुविधा न हो, इसके लिए 7 फरवरी को प्रातः 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक यातायात व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है।

    जारी एडवाइजरी के अनुसार, आमागुड़ा चौक से लालबाग की ओर एवं वीवीआईपी मार्ग पर आम जनता के वाहनों का आवागमन प्रातः 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक यातायात एवं सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित रहेगा। वहीं, भारी वाहनों का जगदलपुर शहर में प्रवेश प्रातः 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक वर्जित रहेगा। हालांकि, आपातकालीन सेवा से संबंधित वाहनों को प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है।

    आम जनता के लिए निर्धारित पार्किंग स्थल

    यातायात पुलिस द्वारा आम नागरिकों के वाहनों की पार्किंग के लिए कुम्हड़ाकोट, गणपति रिसॉर्ट के सामने मैदान तथा रिलायंस पेट्रोल पंप के बाजू स्थित खाली मैदान को चिन्हित किया गया है।

    परिवर्तित मार्ग

    चांदनी चौक से नयामुंडा होते हुए हाटकचोरा मार्ग से राष्ट्रीय राजमार्ग 30 की ओर आवागमन किया जा सकेगा।

    कार्यक्रम स्थल पहुंचने के मार्ग

    मुख्य मंच पर बैठने वाले अतिथियों के लिए आईजीपी बंगला तिराहा से होकर गणतंत्र द्वार के सामने पहुंचने के पश्चात लालबाग पीटीएस ग्राउंड में पार्किंग की व्यवस्था रहेगी।

    मीडिया एवं मंच के सामने बैठने वाले अतिथियों को जेल तिराहा, आईजीपी बंगला तिराहा होते हुए लालबाग सनसिटी मार्ग से क्योरों स्कूल के पीछे खाली मैदान में पार्किंग कर प्रवेश द्वार से कार्यक्रम स्थल में प्रवेश दिया जाएगा।

    आम जनता के पहुंच मार्ग

    कोडागांव, नगरनार एवं बकावंड से आने वाले आमागुड़ा चौक, गीदम एवं सुकमा रोड से आने वाले तेली मारेंगा बाईपास आड़ावाल से आमागुड़ा चौक, लोहंडीगुड़ा एवं जगदलपुर शहर के लिए चांदनी चौक नयामुंडा बोधघाट थाना के पीछे हाटकचोरा मार्ग से आमागुड़ा चौक पहुंच सकेंगे।

    यातायात पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें, वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तथा यातायात कर्मियों के निर्देशों का सहयोग करें ताकि कार्यक्रम के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में कुम्हड़ाकोट में निर्मित ‘जनजातीय गौरव वाटिका’ का लोकार्पण आज किया जाएगा। इस भव्य वाटिका का उद्घाटन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज शुक्रवार 6 फरवरी को शाम 5 बजे अपने कर-कमलों से करेंगे।

    बस्तर वन मंडल द्वारा निर्मित इस वाटिका का उद्देश्य बस्तर की अनमोल जनजातीय विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ आमजन और पर्यटकों को जनजातीय जीवनशैली, कला और परंपराओं से परिचित कराना है। यह वाटिका आने वाले समय में बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य करेगी।

    लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं अरुण साव अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, वहीं वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।

    इस अवसर पर बस्तर सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण देव, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप तथा महापौर संजय पांडेय सहित अनेक जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहेंगे।

    जनजातीय गौरव वाटिका के उद्घाटन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। यह पहल बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

    स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत जशपुर को मिली पर्यटन विकास की बड़ी सौगात
    होम-स्टे, रिसोर्ट, पाथवे, लैंडस्केपिंग सहित आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का होगा विकास

        रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 की उप-योजना सीबीडीडी के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना का मयाली नेचर कैंप में विधिवत भूमिपूजन किया। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित इस परियोजना के तहत मयाली, विश्व प्रसिद्ध मधेश्वर पर्वत (विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग) तथा बगीचा स्थित कैलाश गुफा क्षेत्र में विभिन्न पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
    यह परियोजना क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत के संरक्षण के साथ-साथ समुदाय आधारित पर्यटन को सशक्त बनाएगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और जशपुर जिले को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलेगी।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि मयाली-बगीचा विकास परियोजना जशपुर जिले के पर्यटन विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। आज मयाली के विकास की मजबूत नींव रखी गई है। मयाली अब पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में यह एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि मयाली की पहचान सदियों से मधेश्वर महादेव से जुड़ी रही है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है। इस विकास परियोजना के माध्यम से मधेश्वर पर्वत के धार्मिक एवं पर्यटन महत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। परियोजना के अंतर्गत मयाली डेम के समीप पर्यटक रिसोर्ट एवं स्किल डेवलपमेंट सेंटर का निर्माण किया जाएगा।
    उन्होंने कहा कि मयाली को एक समग्र इको-टूरिज्म और एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां के जंगल, झरने, पहाड़ और समृद्ध आदिवासी संस्कृति को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाया जाएगा। पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा। श्री साय ने कहा इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा होम-स्टे नीति लागू की गई है, जिससे ग्रामीण परिवार पर्यटन गतिविधियों से सीधे जुड़कर आय अर्जित कर सकेंगे और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आई है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर में टूर गाइड, होटल सेवा, एडवेंचर स्पोर्ट्स, हस्तशिल्प एवं डिजिटल बुकिंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे न केवल पर्यटन बल्कि जशपुर की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं को भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

    विकास कार्यों से बदलेगी मयाली की तस्वीर, उभरेगा नया पर्यटन केंद्र
    मयाली क्षेत्र को प्राकृतिक, धार्मिक एवं ग्रामीण पर्यटन के समग्र गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत 5 पर्यटक कॉटेज, कॉन्फ्रेंस एवं कन्वेंशन हॉल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, भव्य प्रवेश द्वार, बाउंड्री वॉल, आधुनिक टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का निर्माण किया जाएगा। इन सुविधाओं से पर्यटकों के ठहराव एवं विभिन्न आयोजनों की बेहतर व्यवस्था होगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
    धार्मिक पर्यटन को सशक्त करने के लिए शिव मंदिर क्षेत्र में प्रवेश द्वार, टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का विकास किया जाएगा। वहीं बगीचा स्थित कैलाश गुफा परिसर में प्रवेश द्वार, पिकनिक स्पॉट, रेस्टिंग शेड, घाट विकास, पाथवे तथा सीढ़ियों एवं रेलिंग का जीर्णाेद्धार किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक अनुभव मिलेगा।
    यह समस्त कार्य भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना के माध्यम से किए जाएंगे। परियोजना के पूर्ण होने से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक-प्राकृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना है।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, विभिन्न बोर्ड-निगमों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

     

    रायपुर | शौर्यपथ

    राज्य सरकार ने आम नागरिकों को रजिस्ट्री एवं पंजीयन से जुड़ी सेवाएं सरल, सुलभ और समयबद्ध ढंग से उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम निर्णय लेते हुए प्रदेश में चार नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की है। यह निर्णय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम–1908 के प्रावधानों के अंतर्गत लिया गया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, धमतरी जिले के भखारा, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के तहसील मुख्यालय लवन, तथा बिलासपुर जिले के सकरी और राजकिशोर नगर में नवीन उप पंजीयक कार्यालय खोले जाएंगे। इन कार्यालयों की स्थापना से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को रजिस्ट्री कार्यों के लिए जिला मुख्यालयों की लंबी दूरी तय करने से राहत मिलेगी।

    नागरिकों को सीधा लाभ, समय और धन की बचत

    नए उप पंजीयक कार्यालय खुलने से पंजीयन कार्यों में भीड़ कम होगी, प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और समय व धन दोनों की बचत होगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।

    मुख्यमंत्री का संदेश: सुशासन की ओर सशक्त कदम

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि शासन की सेवाएं नागरिकों तक उनके निकटतम स्तर पर उपलब्ध हों। नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति से आम लोगों को पंजीयन संबंधी कार्यों में बड़ी राहत मिलेगी। यह निर्णय सुशासन, पारदर्शिता और जन-सुविधा की दिशा में एक मजबूत पहल है।

    ओ.पी. चौधरी: पंजीयन प्रणाली को बनाया जा रहा आधुनिक

    वित्त एवं वाणिज्य कर पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि सरकार नागरिक सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। चार नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति इसी सोच का परिणाम है। इससे पंजीयन व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा लोगों को उनके क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकेंगी।

    उन्होंने बताया कि पंजीयन विभाग द्वारा 10 क्रांतिकारी सुधार लागू किए गए हैं, जिनका लाभ अब इन क्षेत्रों के नागरिकों को भी मिलेगा। इनमें प्रमुख रूप से—

    • ऑटो डीड जनरेशन

    • आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन

    • घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा

    • स्वतः नामांतरण

    • ऑनलाइन भारमुक्त प्रमाणपत्र

    • एकीकृत कैशलेस भुगतान प्रणाली

    • व्हाट्सएप आधारित सेवाएं

    • डिजीलॉकर एकीकरण

    • डिजी-डॉक सेवा

    • खसरा नंबर के माध्यम से ऑनलाइन सर्च एवं रजिस्ट्री डाउनलोड

    जनहित में बड़ा निर्णय

    राज्य सरकार का यह फैसला पंजीयन व्यवस्था को विकेंद्रीकृत, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल आम नागरिकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता भी सुदृढ़ होगी।

      रायपुर / शौर्यपथ /
    विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज), रायपुर के बाल रोग विभाग द्वारा एक गरिमामय एवं भावनात्मक समारोह का आयोजन कर कैंसर से सफलतापूर्वक उपचार प्राप्त कर चुके बच्चों एवं किशोरों के साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प को सम्मानित किया गया। “आशा और संकल्प की कहानियाँ” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में मरीजों, उनके परिजनों, चिकित्सकों तथा सामाजिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम के माध्यम से यह सशक्त संदेश दिया गया कि समय पर पहचान और निरंतर उपचार से कैंसर पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

       कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त), कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायपुर द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान उपचार के प्रभावी साधन उपलब्ध कराता है, किंतु वास्तविक विजय उन मरीजों की होती है जो पूरे उपचार काल में असाधारण साहस, धैर्य और आत्मविश्वास का परिचय देते हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों पर केंद्रित अनुसंधान को प्रोत्साहित करने तथा उच्च गुणवत्ता वाली ऑन्कोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।

      डॉ. एली महापात्रा, डीन (शैक्षणिक), ने कहा कि कैंसर से उबर चुके बच्चों और उनके परिजनों की उपस्थिति इस बात का सशक्त प्रमाण है कि कैंसर अब अजेय रोग नहीं रहा। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गोयल ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य वर्तमान में उपचाररत बच्चों और उनके परिवारों को यह विश्वास दिलाना है कि कठिन उपचार यात्रा के बाद एक स्वस्थ, सकारात्मक और उज्ज्वल भविष्य संभव है।

      कार्यक्रम में निरामयाह कैंसर फाउंडेशन की सक्रिय सहभागिता भी रही। संस्था की प्रतिनिधि सुश्री सुदेशना रुहहान ने वंचित परिवारों को उपचार के दौरान लॉजिस्टिक सहायता एवं पोषण संबंधी सहयोग उपलब्ध कराने में गैर-सरकारी संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

       डॉ. सुनील जोंधले ने बाल चिकित्सा ऑन्कोलॉजी में हुई हालिया प्रगति पर प्रकाश डालते हुए शीघ्र निदान, समयबद्ध उपचार तथा उपचार को बीच में छोड़ने की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, डॉ. सरोज बाला और डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, एसोसिएट प्रोफेसर, ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायपुर में उपलब्ध कैंसर उपचार सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी तथा दीर्घकालिक देखभाल के लिए संरचित उपचारोपरांत देखभाल (सर्वाइवर्शिप) कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया।

      कार्यक्रम का विशेष आकर्षण “आशा की आवाज़” सत्र रहा, जिसमें कैंसर से उबर चुके बच्चों एवं किशोरों ने अपने उपचार, संघर्ष और नई आशा से भरी जीवन यात्राएं साझा कीं। इस अवसर पर लगभग 50 बच्चों और किशोरों को शैक्षणिक उपहार एवं खिलौने प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपचार के प्रति निरंतरता के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए परिवारों से अपील की गई कि वे उपचार को बीच में न छोड़ें, क्योंकि पूर्ण और नियमित उपचार ही सफल स्वास्थ्य परिणाम की कुंजी है।

      रायपुर / शौर्यपथ / केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह 07 से 09 फ़रवरी, 2026 तक तीन दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ प्रवास पर रहेंगे। अपने दौरे के दौरान श्री शाह राज्य में आंतरिक सुरक्षा, वामपंथी उग्रवाद की समीक्षा, विकासात्मक विमर्श तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
    दौरे के पहले दिन 07 फ़रवरी, 2026 को केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आगमन के पश्चात होटल मेफेयर, रायपुर में रात्रि 08:00 बजे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे, जिसमें राज्य से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक एवं सुरक्षा विषयों पर चर्चा की जाएगी।
    08 फ़रवरी, 2026 को श्री अमित शाह प्रातः होटल मेफेयर, रायपुर में वामपंथी उग्रवाद (LWE) पर एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसी दिन सायं 04:30 बजे केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री साप्ताहिक पत्रिका ‘ऑर्गेनाइज़र’ के ‘भारत प्रकाशन’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कॉनक्लेव ‘छत्तीसगढ़ @ 25 : शिफ्टिंग द लेंस’ में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता करेंगे।
    अपने दौरे के अंतिम दिन 09 फ़रवरी, 2026 को श्री अमित शाह जगदलपुर, बस्तर में आयोजित बस्तर पंडूम महोत्सव – 2026 के समापन समारोह में शामिल होंगे। यह महोत्सव बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का प्रतीक है।
    केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री का यह दौरा छत्तीसगढ़ में सुरक्षा सुदृढ़ीकरण, विकासात्मक दृष्टिकोण तथा जनजातीय संस्कृति के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

    साभार - लेखक सौरभ गर्ग

    महंगाई देश के सबसे अहम आर्थिक संकेतकों में से एक है, जिसे आम लोग रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सीधे महसूस करते हैं, जैसे घर का राशन, किराया और पेट्रोल-डीज़ल के खर्च में बढ़ोतरी से।
    उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) इसी महंगाई को मापता है। यह उन चीज़ों और सेवाओं के दाम देखता है, जिनका इस्तेमाल आम परिवार रोज़ करता है। सरल शब्दों में, सीपीआई आम आदमी की ज़िंदगी का आईना है। यह बताता है कि थाली में खाने का खर्च कितना बढ़ा, घर का किराया कितना हुआ, और काम पर जाने के लिए ईंधन कितना महंगा हुआ।

    सीपीआई भले ही एक आंकड़ा लगता हो, लेकिन यह सरकार को यह समझने में मदद करता है कि लोगों पर महंगाई का असली असर क्या है। इसी आधार पर वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े फैसले किए जाते हैं, ताकि ज़रूरी चीज़ें आम लोगों की पहुंच में बनी रहें।

    भारतीय रिज़र्व बैंक भी ब्याज दर और महंगाई को नियंत्रित करने जैसे फैसलों के लिए सीपीआई आधारित महंगाई को ही सबसे मुख्य पैमाना मानता है। इसलिए जब सीपीआई ज़मीन की हकीकत सही तरीके से दिखाता है, तब सरकार और आरबीआई की नीतियाँ भी लोगों की असली परेशानियों के अनुसार बेहतर बन पाती हैं।

    महंगाई सिर्फ दाम बढ़ने का नाम नहीं है, बल्कि यह भी है कि दामों में बदलाव से घर के बजट पर कितना असर पड़ता है। इसलिए जितना ज़रूरी दामों को मापना है, उतना ही ज़रूरी यह भी है कि महंगाई का सूचकांक लोगों की आज की खर्च करने की आदतों को सही तरीके से दिखाए। इसी संदर्भ में भारत में सीपीआई के आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 किया जा रहा है।

    पिछली बार आधार बदले जाने के बाद देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बदलाव आया है। शहरों की आबादी बढ़ी है, सेवाओं का क्षेत्र बढ़ा है, डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण खरीदारी का तरीका बदला है और घरों का खर्च अब कई नई चीजों पर होने लगा है।

    इसीलिए नया सीपीआई 2024 तैयार करने में 2023-24 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है।
    समय के साथ लोगों की ज़रूरतें और खर्च बदलते हैं, इसलिए सीपीआई में अलग-अलग वस्तुओं और सेवाओं को दी जाने वाली अहमियत भी बदली गई है। जिन चीजों पर अब परिवार ज़्यादा खर्च करते हैं, उन्हें सीपीआई में ज़्यादा महत्व दिया गया है,
    और जिन पर खर्च कम हो गया है, उन्हें कम महत्व दिया गया है।

    इससे सीपीआई वही महंगाई दिखाता है, जो सच में आम परिवार के बजट को प्रभावित करती है। साथ ही, उपभोग की टोकरी (कंजम्पशन बास्केट) को भी बदला गया है, ताकि सेवाओं पर बढ़ते खर्च जैसे नए रुझान दिखाई दे सकें, जो बढ़ती आय और बदलती जीवनशैली की वजह से बढ़ रहे हैं। सीपीआई को मापने का तरीका अपडेट करना भी उतना ही ज़रूरी है, जितना यह तय करना कि उसमें क्या-क्या शामिल किया जाए।

    नया संशोधित सीपीआई अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के ज्यादा करीब है, लेकिन इसमें भारत से जुड़ी खास बातें भी बनी हुई हैं। इससे भारत की महंगाई की तुलना दूसरे देशों से करना आसान हो जाता है।

    आम परिवार के लिए इसका मतलब यह है कि सरकार और नीति बनाने वाले लोग यह बेहतर समझ पाते हैं कि भारत में दामों में होने वाला बदलाव दुनिया के हालात से कैसे जुड़ा है, और साथ ही यह भी ध्यान रहता है कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर क्या असर पड़ रहा है।

    सीपीआई के लिए आंकड़े जुटाने का तरीका भी अब लोगों की बदलती खरीदारी और खर्च की आदतों के अनुसार बेहतर बनाया गया है। जहां पहले की तरह बाजारों से दाम इकट्ठा किए जाते रहेंगे, खासकर खाने-पीने और ज़रूरी चीज़ों के, वहीं 2024 के नए ढांचे में अब कुछ सेवाओं के ऑनलाइन दाम भी शामिल किए जा रहे हैं। जैसे मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं, हवाई टिकट और कुछ अन्य सेवाओं के दाम अब ऑनलाइन स्रोतों से भी लिए जाएंगे।

    नई सीपीआई श्रृंखला में अब कंप्यूटर की मदद से दाम इकट्ठा किए जा रहे हैं। इससे हाथ से होने वाली गलतियाँ कम हुई हैं और तुरंत जाँच भी हो जाती है। इससे दामों से जुड़े आंकड़ों की गुणवत्ता और समय पर उपलब्धता दोनों बेहतर हुई हैं। सीपीआई के आंकड़े सही और समय पर मिलना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इसी के आधार पर ऐसे फैसले होते हैं, जो सीधे आम आदमी की ज़िंदगी को प्रभावित करते हैं, जैसे कर्ज कितना महंगा होगा, बचत पर कितना ब्याज मिलेगा, और बढ़ती महंगाई से घर का बजट कैसे प्रभावित होगा।

    नए आधार वर्ष की सीपीआई में अब कई मामलों में सरकारी स्रोतों से मिलने वाले आधिकारिक आंकड़ों का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। जैसे रेल किराया, डाक शुल्क, ईंधन के दाम और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बिकने वाली चीजें। इससे इन दामों को पहले से ज्यादा सही तरीके से दर्ज किया जा रहा है और बाजार सर्वे में होने वाली गलती या पक्षपात की संभावना भी कम हो जाती है।

    अब सर्वे के आंकड़े, सरकारी रिकॉर्ड और डिजिटल माध्यमों से मिलने वाले दाम, तीनों को मिलाकर सीपीआई तैयार की जा रही है। यह पुरानी व्यवस्था की तुलना में बड़ा सुधार है और इससे दामों में होने वाले बदलाव की ज्यादा भरोसेमंद तस्वीर मिलती है।

    इतने बड़े स्तर पर सीपीआई के आधार वर्ष में बदलाव करना एक बहुत बड़ा संस्थागत प्रयास होता है। इसमें देश भर के फील्ड दफ्तरों, सांख्यिकी विभागों और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ संस्थाओं के बीच तालमेल जरूरी होता है। इस पूरी प्रक्रिया में मेथडोलॉजी की गहराई से जाँच की जाती है, अलग-अलग विकल्पों को परखा जाता है और अर्थशास्त्रियों व विषय-विशेषज्ञों से सलाह ली जाती है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने विशेषज्ञ समूहों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत की है, ताकि किए गए बदलाव साफ, समझने में आसान और वैज्ञानिक रूप से सही हों।

    टोकरी, वेटेज और आंकड़ों के स्रोत बदलने के बाद भी सीपीआई का मूल उद्देश्य वही रहता है-यानी एक परिवार की नज़र से दामों में होने वाले बदलाव को दिखाना। यह निरंतरता इसलिए ज़रूरी है, ताकि हम समय के साथ महंगाई की तुलना कर सकें।

    सीधे शब्दों में, सीपीआई को बेहतर बनाया जा रहा है, लेकिन उसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जोड़कर ही रखा गया है, ताकि वह नीति बनाने वालों के लिए एक भरोसेमंद मार्गदर्शक बना रहे।सीपीआई हमें यह याद दिलाता है कि हर आंकड़े के पीछे करोड़ों लोगों की असली ज़िंदगी छिपी होती है। आखिरकार, आंकड़े लोगों के लिए ही होते हैं। यह चुपचाप यह दिखाता है कि दामों में बदलाव हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को कैसे प्रभावित करता है और सरकार की नीतियों को दिशा देता है।

    आधार वर्ष में चल रहे संशोधन के ज़रिये सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने यह सुनिश्चित किया है कि सीपीआई सही, समय के अनुसार अपडेट और लंबे समय तक एक-जैसे तरीके से मापा गया रहे। ताकि सीपीआई सिर्फ एक संख्या न होकर, पूरे देश के लोगों की असली ज़िंदगी की सच्चाई दिखाने वाला आईना बना रहे।


    (लेखक सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव हैं, यह उनके निजी विचार हैं)

     बिलासपुर / शौर्यपथ /
    राष्ट्र निर्माण की दिशा में कौशल विकास को एक सशक्त माध्यम के रूप में स्थापित करते हुए एनटीपीसी लारा, जिला रायगढ़ ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) पहल के अंतर्गत स्थानीय बेरोजगार युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस क्रम में एनटीपीसी लारा द्वारा गुरुवार को युवाओं के पहले बैच को रोजगारोन्मुख व्यावसायिक प्रशिक्षण हेतु सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी), कोरबा के लिए रवाना किया गया।
    प्रशासनिक परिसर में आयोजित कार्यक्रम में इस पहल को औपचारिक रूप से श्री सुभाष ठाकुर, परियोजना प्रमुख, एनटीपीसी लारा द्वारा हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर श्री केशव चंद्र सिंघा रॉय, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण), श्री हेमंत पावगी, महाप्रबंधक (परियोजना), श्री जाकिर खान, अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन), श्री मनीष कुमार, अपर महाप्रबंधक (तकनीकी सेवाएं) सहित एनटीपीसी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षुओं के अभिभावक एवं चयनित युवा उपस्थित रहे।
    तीन माह की अवधि का यह गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कोरबा में “असिस्टेंट मशीन ऑपरेटर – इंजेक्शन मोल्डिंग” ट्रेड में संचालित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक एवं रोजगारपरक कौशल प्रदान करना है, जिससे वे शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटते हुए आत्मनिर्भर बन सकें तथा औद्योगिक क्षेत्र में प्रभावी योगदान दे सकें।
    प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए श्री सुभाष ठाकुर, परियोजना प्रमुख, एनटीपीसी लारा ने कहा कि कौशल विकास आज के समय में केवल रोजगार प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और दीर्घकालीन रोजगार क्षमता का मजबूत आधार है। उन्होंने युवाओं से अनुशासन, समर्पण और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रशिक्षण का पूर्ण लाभ उठाने का आह्वान किया।
    एनटीपीसी लारा की यह पहल कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के माध्यम से स्थानीय समुदायों के सतत एवं समावेशी विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ऐसे प्रयासों से न केवल युवाओं को कौशल और अवसर प्राप्त हो रहे हैं, बल्कि क्षेत्रीय विकास को गति देते हुए राष्ट्र की प्रगति को भी सुदृढ़ आधार मिल रहा है।

     

    वन विभाग की ‘नैतिक दबाव’ रणनीति पर संवैधानिक बहस, कांग्रेस ने बताया तानाशाही फरमान

    रायपुर, 05 फरवरी 2026।
    छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के अवैध शिकार को रोकने के लिए वन विभाग द्वारा प्रस्तावित ‘सामाजिक बहिष्कार’ की रणनीति अब एक बड़े राजनीतिक और संवैधानिक विवाद का रूप ले चुकी है। जहां वन विभाग इसे समुदाय आधारित संरक्षण मॉडल बता रहा है, वहीं कांग्रेस ने इसे संविधान विरोधी, जंगलराज और भीड़तंत्र को बढ़ावा देने वाला फैसला करार दिया है।


    वन विभाग का पक्ष: कानून के साथ नैतिक दबाव की नीति

    प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के अनुसार, केवल जेल और जुर्माने के डर से शिकार पूरी तरह नहीं रुक पा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में विभाग ने Community for Conservation मॉडल के तहत सामाजिक दबाव की अवधारणा सामने रखी है।

    वन विभाग की रणनीति के प्रमुख उद्देश्य:

    • नैतिक दबाव: गांव-समाज में शिकारी की पहचान उजागर होने से लोक-लाज का डर पैदा करना

    • सामुदायिक निगरानी: ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण में भागीदार बनाना

    • युवाओं में संदेश: शिकार को ‘वीरता’ नहीं, बल्कि ‘सामाजिक अपराध’ के रूप में स्थापित करना

    प्रस्तावित कदमों में शामिल हैं:

    • सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिकारियों की भागीदारी सीमित करना

    • शिकार में पकड़े गए व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक करना

    • शिकार बढ़ने पर संबंधित गांव की संयुक्त वन प्रबंधन समिति (JFMC) को मिलने वाले लाभों में कटौती

    वन विभाग स्पष्ट कर रहा है कि यह कोई आधिकारिक दंडात्मक आदेश नहीं, बल्कि सामुदायिक संकल्प के रूप में लागू किया जाएगा।


    कांग्रेस का हमला: ‘संविधान का अपमान और तानाशाही सोच’

    प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने इस फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए वन मंत्री केदार कश्यप से सवाल किया—
    “क्या छत्तीसगढ़ में अब कानून नहीं, जंगलराज चलेगा? क्या शिकारियों को अदालत नहीं, गांव की भीड़ सजा देगी?”

    कांग्रेस का आरोप है कि:

    • सामाजिक बहिष्कार संविधान के मूल अधिकारों के खिलाफ है

    • यह व्यवस्था घृणा, तिरस्कार, जातिगत भेदभाव और हिंसा को जन्म दे सकती है

    • बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान में सामाजिक बहिष्कार जैसी कुरीतियों को खत्म करने का संकल्प था, ऐसे में यह फैसला संविधान का अपमान है

    धनंजय ठाकुर ने कहा कि वन विभाग अपनी प्रशासनिक विफलता छुपाने के लिए सामाजिक दंड जैसी व्यवस्था थोपना चाहता है। दिसंबर 2025 की विभागीय बैठक में धर्मगुरुओं, गांव के मुखिया और समाजसेवियों के जरिए बहिष्कार कराने का निर्णय वैमनस्य फैलाने वाला है।


    कानूनी बनाम सामाजिक दंड: मूल टकराव

    यह पूरा विवाद दो विचारधाराओं के बीच टकराव को उजागर करता है—

    वन विभाग का दृष्टिकोण कांग्रेस का दृष्टिकोण
    समुदाय आधारित संरक्षण संविधान आधारित दंड
    नैतिक व सामाजिक दबाव न्यायालय द्वारा सजा
    सामूहिक जिम्मेदारी व्यक्तिगत अधिकार
    रोकथाम पर जोर कानून के सख्त पालन पर जोर

    कांग्रेस की मांग

    कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि:

    • सामाजिक बहिष्कार जैसे फैसले पर तत्काल रोक लगाई जाए

    • शिकारियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी सजा दी जाए

    • ऐसे निर्णय लेने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए

    • वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस और संवैधानिक उपाय किए जाएं


    वन विभाग का उद्देश्य भले ही वन्यजीव संरक्षण हो, लेकिन अपनाया गया तरीका अब संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक सौहार्द पर सवाल खड़े कर रहा है।
    अब यह देखना अहम होगा कि सरकार समुदाय आधारित संरक्षण और संविधान आधारित शासन के बीच किस संतुलन का रास्ता चुनती है।

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