September 24, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    5 साल में सरकारी खजाने से करोड़ों बाहर, 84 हजार से ज्यादा शिकायतें फिर भी सिर्फ ₹27,218 की पेनाल्टी—अब अनुबंध खत्म होने पर खरीद की तैयारी

    रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में इस्तेमाल हो रही ई-पॉस मशीनों का रेंटल मॉडल अब सरकारी खर्च, तकनीकी व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवालों के केंद्र में है। उपलब्ध आंकड़ों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 14,085 राशन दुकानों में उपयोग की जा रही मशीनों के लिए पांच वर्ष में ₹140 करोड़ से अधिक भुगतान का अनुमान है। वहीं, मशीनों की सीधी खरीद और डेटा सुविधा सहित कुल लागत करीब ₹35 करोड़ आंकी गई थी। इस अंतर को लेकर लगभग ₹105 करोड़ के अतिरिक्त वित्तीय भार का सवाल उठ रहा है।

    यानी सवाल सिर्फ मशीनों के खराब होने का नहीं, बल्कि यह है कि सरकारी धन से खरीदी जा सकने वाली व्यवस्था को इतने वर्षों तक किराए पर चलाने का आर्थिक औचित्य क्या था?

    ₹1,214 प्रतिमाह प्रति मशीन—किराया चलता रहा, सवाल बढ़ते रहे

    रिपोर्टों के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने हैदराबाद की लिंकवेल टेलीसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ पांच वर्ष का अनुबंध किया था। अनुबंध में ई-पॉस मशीन के साथ सॉफ्टवेयर, 4G कनेक्टिविटी और तकनीकी रखरखाव जैसी सेवाएं शामिल थीं।

    प्रारंभिक व्यवस्था में प्रति मशीन ₹1,214 प्रतिमाह किराया निर्धारित होने की बात सामने आई। लगभग 14,085 मशीनों के हिसाब से पांच साल में किराए की रकम करोड़ों में पहुंचना स्वाभाविक था। उपलब्ध गणना के अनुसार चार वर्षों में ही लगभग ₹91.78 करोड़ का भुगतान किया जा चुका था।

    मशीन खराब, सर्वर डाउन और राशन लेने कतार में जनता

    ई-पॉस व्यवस्था का उद्देश्य राशन वितरण को सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना था। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2022 से अब तक 84 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं।

    शिकायतों में मशीन बंद होने, सर्वर डाउन रहने, बायोमीट्रिक अथवा आइरिस स्कैनर काम नहीं करने जैसी समस्याएं शामिल बताई गई हैं।

    सबसे ज्यादा परेशानी उस समय सामने आती है जब तकनीकी खराबी के कारण राशन वितरण प्रभावित होता है। रोज कमाने-खाने वाले मजदूर, बुजुर्ग और जरूरतमंद उपभोक्ता तकनीकी व्यवस्था की समस्या के कारण राशन के लिए इंतजार करने को मजबूर होते हैं।

    सवाल यह है कि जिस तकनीक पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, उसका सबसे जरूरी पैमाना—राशन उपभोक्ता को समय पर राशन मिलना—कितना पूरा हो रहा है?

    14 हजार से ज्यादा मशीनों के लिए करीब 80 इंजीनियर

    रखरखाव व्यवस्था का आंकड़ा भी ध्यान खींचता है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक प्रदेश की लगभग 14,085 ई-पॉस मशीनों के लिए करीब 80 इंजीनियर तैनात हैं।

    इस हिसाब से औसतन एक इंजीनियर के हिस्से में लगभग 176 मशीनों की जिम्मेदारी आती है।

    ऐसे में दूरदराज के किसी राशन केंद्र पर मशीन खराब होने के बाद तत्काल तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है—यह भी जांच का विषय है।

    84 हजार शिकायतों के बीच पेनाल्टी सिर्फ ₹27,218

    मामले का सबसे बड़ा सवाल शिकायतों और दंड के बीच दिखाई देने वाले अंतर को लेकर है।

    उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2024 में कंपनी पर लापरवाही के लिए सिर्फ ₹27,218 की पेनाल्टी लगाई गई।

    एक तरफ हजारों शिकायतों का आंकड़ा और दूसरी तरफ इतनी कम दंड राशि—यह अंतर अपने आप में अनुबंध की सर्विस लेवल शर्तों और पेनाल्टी प्रावधानों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।

    अब पांच साल बाद सरकार को ‘खरीद’ क्यों याद आई?

    पांच वर्षीय अनुबंध अब समाप्ति के चरण में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विभाग ने आगे इसी रेंटल व्यवस्था को जारी रखने के बजाय ई-पॉस मशीनों की सीधी खरीद पर विचार शुरू किया है।

    यहीं सबसे बड़ा वित्तीय सवाल सामने आता है—

    अगर खरीद मॉडल अब व्यवहारिक और बेहतर विकल्प माना जा रहा है, तो पांच वर्ष पहले इसी विकल्प पर विचार क्यों नहीं किया गया?

    क्या उस समय रेंटल मॉडल के पक्ष में कोई विस्तृत लागत-लाभ अध्ययन किया गया था?

    क्या पांच वर्षों के कुल संभावित खर्च की तुलना मशीन खरीदने की लागत से की गई थी?

    क्या अनुबंध में मशीनों की उपलब्धता, सर्वर अपटाइम और शिकायतों के निपटारे के लिए पर्याप्त दंडात्मक प्रावधान थे?

    अब जरूरी है पूरे मॉडल का ऑडिट

    यह मामला किसी एक कंपनी या किसी एक अधिकारी तक सीमित करने के बजाय पूरे निर्णय-प्रक्रिया और अनुबंध व्यवस्था की जांच का विषय है।

    सरकार को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि—

    पांच वर्षों में ई-पॉस व्यवस्था पर कुल कितना भुगतान हुआ?

    अनुबंध की मूल लागत और अब तक हुए भुगतान में कितना अंतर है?

    मशीनों की खरीद बनाम किराए की व्यवस्था का लागत-लाभ आकलन क्या था?

    84 हजार से अधिक शिकायतों में कितनी शिकायतें समयसीमा में हल हुईं?

    कंपनी पर कुल कितनी पेनाल्टी लगाई गई और कितनी वसूली हुई?

    तकनीकी कर्मचारियों की संख्या अनुबंध के अनुसार कितनी निर्धारित थी?

    4G डेटा, सर्वर और रखरखाव के लिए कंपनी की वास्तविक जिम्मेदारी क्या थी?

    और सबसे महत्वपूर्ण—लगभग ₹105 करोड़ के बताए जा रहे अतिरिक्त वित्तीय भार की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है?

    जनता का राशन, जनता का पैसा—जवाबदेही भी जनता के सामने हो

    PDS कोई सामान्य सरकारी सेवा नहीं है। यह प्रदेश के लाखों परिवारों के भोजन और खाद्य सुरक्षा से सीधे जुड़ी व्यवस्था है।

    इसलिए ई-पॉस मशीनों का मामला सिर्फ ‘किराया बनाम खरीद’ का वित्तीय विवाद नहीं है। यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि तकनीक पर खर्च होने वाले सार्वजनिक धन का लाभ जमीन पर राशन लेने वाले व्यक्ति तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है।

    अब जबकि रेंटल मॉडल समाप्ति की ओर है और सीधी खरीद की तैयारी की बात सामने आ रही है, तो नई व्यवस्था शुरू करने से पहले पिछले पांच वर्षों के खर्च, अनुबंध, शिकायतों, तकनीकी प्रदर्शन और पेनाल्टी की स्वतंत्र वित्तीय एवं प्रशासनिक समीक्षा जरूरी दिखाई देती है।

    क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं कि नई मशीनें कितने में खरीदी जाएंगी—सवाल यह भी है कि पुरानी व्यवस्था में जनता के पैसे का हिसाब आखिर कौन देगा?

    रायपुर/बेमेतरा। छत्तीसगढ़ में कैदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर 6 खुली जेलों (Open Jails) की शुरुआत करने जा रही है। इस योजना का प्रमुख केंद्र बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में विकसित खुली जेल होगी, जिसे करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।

    खुली जेल की व्यवस्था में पात्र सजायाफ्ता कैदियों को परिवार के साथ रहने और जेल परिसर से बाहर जाकर रोजगार या स्वरोजगार करने का अवसर मिलेगा। पथर्रा में 200 पुरुष सजायाफ्ता कैदी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अलग-अलग क्वार्टरों में रह सकेंगे।

    छह स्थानों पर अलग-अलग क्षमता

    बेमेतरा (पथर्रा): 200 पुरुष कैदी

    दुर्ग: 50 पुरुष कैदी

    जगदलपुर: 25 पुरुष और 25 महिला कैदी

    रायपुर: 25 महिला कैदी

    अंबिकापुर: 15 पुरुष कैदी

    बिलासपुर: उपलब्ध जानकारी के अनुसार सीमित क्षमता का परिसर

    खुली जेल में पारंपरिक जेलों जैसी ऊंची दीवारों और कठोर सुरक्षा व्यवस्था के बजाय अनुशासन आधारित व्यवस्था होगी। कैदी दिन में परिसर से बाहर जाकर खेती, पशुपालन, डेयरी, सिलाई-कढ़ाई, बुनाई, लघु वनोपज प्रसंस्करण, हस्तशिल्प या अन्य रोजगार कर सकेंगे। उन्हें सूर्यास्त से पहले वापस लौटकर अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

    नियमों का उल्लंघन या निर्धारित समय पर वापस नहीं लौटने पर कैदी को सामान्य जेल में वापस भेजे जाने का प्रावधान रहेगा।

    चयन में आचरण और पात्रता महत्वपूर्ण

    खुली जेल में स्थानांतरण के लिए कैदी को पहले जेल अधीक्षक के समक्ष आवेदन करना होगा। जेल प्रशासन उसके आचरण, स्वास्थ्य और आपराधिक रिकॉर्ड की समीक्षा करेगा, जिसके बाद निर्धारित समिति की जांच और अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया होगी।

    प्रस्तावित पात्रता में उम्र, सजा की अवधि, जेल में आचरण तथा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य जैसे मानकों को महत्व दिया गया है। वहीं गंभीर यौन अपराध, जघन्य हत्या, UAPA, POTA, TADA, NSA, छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, NDPS और जाली नोट से जुड़े मामलों में सजायाफ्ता या संबंधित श्रेणियों के बंदियों को योजना से बाहर रखने का प्रावधान बताया गया है।

    पुनर्वास के साथ आत्मनिर्भरता पर जोर

    खुली जेल की अवधारणा का उद्देश्य केवल कैदियों को अधिक स्वतंत्रता देना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में पुनर्वासित करना है। परिवार के साथ रहने, रोजगार करने और सामाजिक वातावरण में जिम्मेदारियों का निर्वहन करने से सजा पूरी होने के बाद समाज में पुनः स्थापित होने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।

    साथ ही, कैदियों के रोजगार से आत्मनिर्भर बनने की स्थिति में जेल प्रशासन पर उनके भोजन और रखरखाव का आर्थिक भार भी कम होने की संभावना है। इस तरह यह व्यवस्था दंड के साथ सुधार और पुनर्वास को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

    48.44 लाख हेक्टेयर में बोनी पूर्ण, 4.58 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण; किसानों को 8,125 करोड़ रुपये से अधिक का अल्पकालीन कृषि ऋण

        रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में खरीफ फसलों की बोनी का कार्य लगभग पूरा हो गया है। 22 सितंबर तक 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का 99 प्रतिशत है। राज्य सरकार ने इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है।
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर किसानों को उनकी मांग के अनुसार प्रमाणित खाद-बीज उपलब्ध कराने और समितियों में पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। खाद-बीज वितरण में लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

    13.14 लाख मीट्रिक टन खाद का वितरण
    कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में खरीफ सीजन के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध सहकारी और निजी क्षेत्रों में 17.64 लाख मीट्रिक टन खाद का भंडारण किया गया है। अब तक किसानों को 13.14 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरित किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का 74 प्रतिशत है।
    इसी तरह 4.80 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का भंडारण किया गया है, जबकि अब तक किसानों को 4.58 लाख क्विंटल बीज वितरित किया जा चुका है। यह निर्धारित मांग का करीब 93 प्रतिशत है।
    प्रदेश में धान के साथ मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल सहित विभिन्न फसलों की बोनी की गई है।

    अब तक 1008.1 मिमी औसत वर्षा
    22 सितंबर की सुबह तक प्रदेश में 1008.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिलीमीटर है। पिछले 10 वर्षों की इसी अवधि की औसत वर्षा 1061.6 मिलीमीटर की तुलना में इस वर्ष अब तक 53.5 मिलीमीटर कम वर्षा हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 881.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी।

    किसानों को 8,125 करोड़ रुपये से अधिक कृषि ऋण
    किसानों को खेती-किसानी में आर्थिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्पकालीन कृषि ऋण भी वितरित किया जा रहा है। 21 सितंबर तक किसानों को 8,125.51 करोड़ रुपये का ऋण दिया जा चुका है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह राशि 6,740.75 करोड़ रुपये थी।
    चालू खरीफ सीजन में किसानों को कुल 8,800 करोड़ रुपये का अल्पकालीन कृषि ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    महतारी वंदन से 68 लाख से अधिक महिलाओं को हर माह आर्थिक संबल, 13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

       रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि माताओं-बहनों का सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। वे मंगलवार को राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने माताओं-बहनों को तीज पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में मातृशक्ति का विशेष स्थान है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 31 किस्तों में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस आर्थिक संबल का उपयोग महिलाएं घरेलू जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा, बचत और स्वरोजगार के लिए भी कर रही हैं।

    13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न आर्थिक गतिविधियों और छोटे व्यवसायों के माध्यम से परिवार की आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

    650 करोड़ की फिल्म सिटी से स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककला, संस्कृति और प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाने के लिए करीब 650 करोड़ रुपये की लागत से फिल्म सिटी तैयार की जा रही है। इससे फिल्म निर्माण, पर्यटन और स्थानीय कलाकारों व तकनीशियनों के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।

    समारोह में मुख्यमंत्री ने लोक कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों का सम्मान भी किया। उन्होंने कहा कि लोकगीत, लोकनृत्य और परंपराएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान हैं और इनके संरक्षण में कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    विकास और जनकल्याण पर भी मुख्यमंत्री ने रखी बात

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए काम कर रही है। प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आवास, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर भी तेजी से काम हो रहा है।

    उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से इन क्षेत्रों में विकास के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

    राजस्व मंत्री ने लोकगीत से किया अभिनंदन

    राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने तीज मिलन समारोह को माताओं-बहनों के सम्मान का अवसर बताया और छत्तीसगढ़ी लोकगीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। उन्होंने प्रदेश में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। समारोह में विभिन्न बोर्डों के अध्यक्ष, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, कलाकार, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में माताएं-बहनें उपस्थित रहीं।

      रायपुर / शौर्यपथ / केंद्रीय कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में मंगलवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं, प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और केंद्रीय टास्क फोर्स से जुड़े विषयों की प्रगति की समीक्षा की गई।
    छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील ने नया रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से बैठक में भाग लिया। उन्होंने राज्य में संचालित प्रमुख केंद्रीय परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया।

    सड़क, रेलवे और बिजली परियोजनाओं की समीक्षा
    बैठक में राजमार्ग, रेलवे लाइनों, पावर ट्रांसमिशन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। संबंधित विभागों के अधिकारियों से परियोजनाओं की स्थिति, प्रगति और क्रियान्वयन से जुड़े विषयों की जानकारी ली गई।

    केंद्रीय योजनाओं की राशि के समयबद्ध उपयोग पर जोर
    समीक्षा के दौरान राज्यों को केंद्रीय योजनाओं के तहत प्राप्त राशि का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने तथा उपयोगिता प्रमाण-पत्र शीघ्र केंद्र सरकार को भेजने पर जोर दिया गया। साथ ही प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में योजनाओं की प्रगति की विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा करने के संबंध में भी चर्चा हुई।
    केंद्रीय टास्क फोर्स की बैठक में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी विभागीय योजनाओं की राज्यों में प्रगति की जानकारी मुख्य सचिवों के साथ साझा की और संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

    आश्रम-छात्रावासों का आकस्मिक निरीक्षण, गांवों में सीधा संवाद; महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तिकरण पर भी होगी चर्चा

        रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में समुदायों की समस्याओं और उनसे जुड़े प्रकरणों की जमीनी स्थिति जानने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम चार जिलों के दौरे पर है। 20 से 25 सितंबर तक चल रहे इस दौरे में आयोग की टीम रायपुर, सक्ती, जशपुर और कांकेर में आश्रम-छात्रावासों का आकस्मिक निरीक्षण करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर जनजातीय समुदायों से सीधे संवाद कर रही है।
    दौरे के दौरान आयोग की टीम नागवंशी, संसारी उरांव, पहाड़ी कोरवा और दिहाड़ी कोरवा समुदायों से जुड़े क्षेत्रों में पहुंचेगी। टीम समुदाय के लोगों की समस्याएं और शिकायतें सुनेगी तथा संबंधित मामलों में अभ्यावेदन भी प्राप्त करेगी। जशपुर में 22 और 23 सितंबर को विशेष रूप से जनजातीय गांवों का भ्रमण निर्धारित किया गया है।
    महिला जनप्रतिनिधियों से संवाद
    कांकेर में 24 सितंबर को जनजातीय महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तिकरण को लेकर विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें पंचायत से लेकर जिला स्तर तक की महिला जनप्रतिनिधियां शामिल होंगी। कार्यक्रम में जनजातीय क्षेत्रों में महिला नेतृत्व, उनकी भागीदारी और सामने आने वाली चुनौतियों से जुड़े विषयों पर संवाद किया जाएगा।

    लंबित प्रकरणों पर अधिकारियों के साथ बैठक
    दौरे के अंतिम दिन 25 सितंबर को रायपुर में आयोग में लंबित प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों और प्राधिकारियों के साथ बैठक होगी। आयोग ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को जांच दल को आवश्यक सहयोग देने, मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने और मौके पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
    आयोग के इस दौरे को जनजातीय समुदायों से जुड़े मामलों की मौके पर पड़ताल, शिकायतों की प्रत्यक्ष सुनवाई और प्रशासनिक स्तर पर उनकी स्थिति की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

     छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर में ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन’ पर प्रशिक्षण आयोजित

       रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में मंगलवार को ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन’ विषय पर शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गतिविधि आधारित और रचनात्मक शिक्षण विधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए गणित को सरल, रोचक और आनंददायक बनाना रहा।

    प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण में गणित को केवल सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन, अनुभव और गतिविधियों से जोड़कर पढ़ाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसी पद्धतियां विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि और जिज्ञासा बढ़ाने के साथ तार्किक सोच विकसित करने में भी सहायक हो सकती हैं।

    कार्यक्रम के विशेषज्ञ इंजीनियर, ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन, बेंगलुरु के मैथ्स कोच बी. एन. राव ने शिक्षकों को विभिन्न गतिविधि आधारित एवं नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों और गतिविधियों के जरिए कठिन गणितीय अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के तरीकों का प्रदर्शन किया।

    प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने स्वयं विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर गणितीय अवधारणाओं को समझा और इन्हें कक्षा में लागू करने के तरीकों पर चर्चा की। छोटे प्रयोग, प्रश्नोत्तर और रचनात्मक अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    कार्यक्रम में रायपुर के चार विकासखंडों के शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की, जबकि पूरे जिले के शिक्षकों के लिए ऑनलाइन प्रसारण किया गया। इससे जिले के विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े।

    कार्यक्रम में शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। 23 सितंबर को बी.एड. विद्यार्थियों के लिए भी इसी विषय पर प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

    साभार - श्री सुधांश पंत
    यह एक दृश्य अक्सर दोहराया जाता है - लगभग हर कॉलेज के छात्रावासों में, हर कार्यालय की पार्टियों में और साथ जवान हो रहे दोस्तों के हर समूह में। कुछ नशीले पदार्थ एक-दूसरे तक पहुंचाए जाते हैं। इस क्रम में एक बात काफी सहजता के साथ, लेकिन जोर देकर कही जाती है कि बाकी सब भी तो ऐसा ही कर रहे हैं। ऐसे में, मना करना कुछ ऐसा लगता है मानो आप समूह के बाकी साथियों से अलग-थलग हो रहे हों। इसके बाद एक पल की चुप्पी छाती है। और फिर एक युवा अपने साथियों के समूह को ‘ना’ कहने से पैदा होने वाली शर्मिंदगी और अलग-थलग पड़ जाने की बेचैनी के बीच जल्दी से फैसला ले लेता है। यही एक निर्णायक पल होता है, क्योंकि लत हमेशा सोच-समझकर लिए गए फैसले से नहीं लगती। अक्सर इसकी शुरुआत पीछे छूट जाने के डर से होती है।

    नशीले पदार्थों को ना, जिंदगी को हां
    यही वह मौन लेकिन अहम पल है, जिसको ध्यान में रखकर ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ (एनएमबीए) की शुरुआत की गई थी। इस अभियान का व्यापक उद्देश्य नशीले पदार्थों की लत के बारे में जागरूकता फैलाना रहा है। लेकिन इसकी असली चुनौती सामाजिक रही है: नशे से मुक्त रहने का फैसला लेने को आसान बनाना, उस फैसले की अभिव्यक्ति को सहज बनाना और कुल मिलाकर, इस पूरी कवायद को एक सामान्य बात के तौर पर देखना आसान बनाना।

    दृढ़ संकल्प
    जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को एनएमबीए की शुरुआत की, तो इस अभियान ने एक कहीं अधिक कठिन चुनौती से जूझना तय किया। यह कठिन चुनौती थी - किसी कमजोर पल में, एक अकेले व्यक्ति द्वारा अपने साथियों के समूह के सामने ‘नहीं’कहने की हिम्मत लाने की। इस दृष्टि से, इस अभियान का सबसे असरदार शब्द शायद सबसे आसान शब्द है, ‘ना!’ यह कोई नाटकीय ‘ना!’ नहीं है। यह कोई नैतिक उपदेश नहीं है। बस जब आपके आस-पास के सभी लोग जब ‘हां’ कह रहे हों, तब बिना विचलित हुए मना करने का आत्मविश्वास है।
    माननीय प्रधानमंत्री ने कहा है, “विकसित भारत संकल्प अभियान के तहत ‘नशा मुक्त युवा’ नाम ही इस संकल्प को पूरी तरह स्पष्ट करता है। अब जबकि भारत एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, तो यह जरूरी है कि हमारे युवा शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ हों, आत्मविश्वास से भरे हों और हमेशा नशे की जानलेवा लत से मुक्त रहें। यही इस अभियान का उद्देश्य है। हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हमारे युवा नशे की लत के खतरों को समझें, जागरूक रहें और इससे दूर रहें। इस संकल्प को साकार करने में ‘राष्ट्रीय नशा मुक्त युवा अभियान’ अब एक अहम भूमिका निभा रहा है।”

    एनएमबीए: साझा जिम्मेदारी का एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन
    छह वर्ष बाद, वह एक पहल अब एक बहुत बड़े अभियान का हिस्सा बन गई है। यह अभियान संकल्प लेने और लोगों को जोड़ने की गतिविधियों के जरिए 13.71 करोड़ से अधिक युवाओं तक पहुंचा है। साथ ही विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में 31 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। शैक्षिक परिसरों में विद्यार्थियों का स्वैच्छिक रूप से संकल्प लेना अब एक आम बात हो गई है और ग्राम सभाएं भी अब इस मुद्दे पर नियमित रूप से चर्चा करती हैं। जहां पहले लोग अपने परिवार के किसी सदस्य की लत को निजी शर्म की बात मानकर छिपाते थे, वहीं अब 10.65 करोड़ से अधिक महिलाओं, स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) और सामुदायिक नेटवर्कों के जरिए, इस बारे में खुलकर और अपनी भाषा में अपने पड़ोसियों से बात करने लगी हैं।
    19 सितंबर, 2026 तक, 1.70 लाख से अधिक ‘नशा मुक्ति मित्र (एनएमएम)’ सामुदायिक स्तर पर चैंपियन बनकर उभरे हैं और 34.57 करोड़ से अधिक लोगों तक यह संदेश पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। और, यह रुझान सकारात्मक दिशा में तेजी से आगे की ओर बढ़ रहा है।
    यहीं से सामाजिक व्यवहार को बदलने हेतु एक जन-अभियान की शुरुआत हुई है। एनएमबीए ने एकतरफा जागरूकता से आगे बढ़कर लगातार कई ऐसे रास्ते बनाए हैं, जिनसे लोग इस मुहिम से जुड़ सकें, जानकारी हासिल कर सकें और इसके संदेश को आगे बढ़ा सकें।
    एनएमबीए पोर्टल जानकारियों, शैक्षिक संसाधनों, सर्वोत्तम कार्यपद्धतियों और नागरिकों के लिए इस अभियान से जुड़ने के अवसरों को एक साथ लाता है।
    https://www.dosje.gov.in/organisation/nasha-mukt-bharat-abhiyaan

    नशा-मुक्त युवा, नशा-मुक्त भारत
    हाल ही में, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी में इस बड़े मिशन को आगे बढ़ाते हुए ‘नशा-मुक्त युवा, नशा-मुक्त भारत’ के लक्ष्य को फिर से दोहराया। उनकी यह अपील इसलिए भी खास थी क्योंकि इसमें केवल संस्थानों एवं सरकारी एजेंसियों को ही नहीं, बल्कि युवा संगीतकारों, विद्यार्थियों और थिएटर समूहों को भी शामिल किया गया। ऐसा यह मानते हुए किया गया कि संदेश सबसे अधिक असरदार तब होते हैं, जब वे उन लोगों की आवाज के जरिए पहुंचते हैं जिन पर युवाओं का भरोसा पहले से ही जमा होता है।
    असल में, एनएमबीए ने पिछले छह वर्षों के दौरान चुपचाप नशाबंदी की दीवार ही नहीं, बल्कि अपनापन महसूस कराने वाला एक वैकल्पिक दायरा भी बनाया है। यह दायरा अब बड़ा होकर हर राज्य और केन्द्र-शासित प्रदेश के स्कूलों, कॉलेजों, पंचायती राज संस्थाओं, आशा एवं आंगनवाड़ी नेटवर्कों तथा हजारों सामुदायिक संगठनों तक जा पहुंचा है और हर जगह लोग अपने-अपने शब्दों में यही संकल्प ले रहे हैं।

    जागरूकता से संकल्प तक
    इतने बड़े पैमाने का आंदोलन बहुत देर तक सिर्फ आंकड़ों तक ही सीमित नहीं रहता। यह घरों, कक्षाओं और समुदायों में बातचीत का हिस्सा बनने लगता है, जिससे नशीले पदार्थों के सेवन का मुद्दा खुलकर सामने आता है और इसकी रोकथाम महज संकट के समय की चर्चा न रहकर एक सामूहिक जिम्मेदारी बन जाती है।
    लेकिन ऐसी जागरूकता तो बस एक शुरुआत है। जो लोग अपने या अपने किसी करीबी के लिए मदद चाहते हैं, उनके मन में अगला सवाल यह आता है कि वे आखिर जाएं कहां? एनएमबीए ने इस कदम को भी आसान बनाने का प्रयास किया है।
    राष्ट्रीय नशा-मुक्ति हेल्पलाइन, 14446, जानकारी, मार्गदर्शन और उपयुक्त नशा-मुक्ति संबंधी सेवाओं के लिए संपर्क का जरिया प्रदान करती है। यह चिंता के पल को स्वस्थ होने की दिशा में उठाए जा सकने वाले पहले कदम में बदलने में मदद करती है।
    एक दोस्त के जोर देने और अपनी सही समझ के बीच फैसला करते समय कभी हिचकिचाहट भरे पल का अनुभव करने वाले एक व्यक्ति के लिए एनएमबीए की यात्रा यह भरोसा दिलाती है कि वे अकेले नहीं हैं।

    भारत की उम्मीद की किरण – युवाओं - की सुरक्षा में एकजुट
    अब नागरिकों के पास ‘नशा मुक्ति मित्र’ के तौर पर इस मिशन को आगे बढ़ाने का अवसर है। वे इस बातचीत को मात्र एक अभियान तक सीमित न रखकर उन जगहों तक ले जा सकते हैं, जहां रोजमर्रा के फैसले लिए जाते हैं।
    क्योंकि कोई भी स्थायी बदलाव शायद ही कभी किसी एक अभियान, एक संस्था या एक पल के जरिए आता है। यह बदलाव तभी कायम रहता है, जब जागरूकता रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन जाती है, बातचीत एक सामूहिक संकल्प में बदलती है और वह संकल्प रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है।
    यही ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ की क्षमता और उसका नतीजा है। यह नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ एक ऐसा अभियान है, जिसके साथ पूरा देश एकजुट होकर खड़ा है।
    आइए, भारत की उम्मीद की किरण-युवाओं-की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करें।
    (लेखक भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में सचिव हैं)

    जुनवानी के सूर्या रेजिडेंसी में कार्रवाई; मुनादी के बाद तहसीलदार और पुलिस की मौजूदगी में सीलिंग

       भिलाई / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला घोटाला मामले से जुड़े कारोबारी सूर्यकांत तिवारी से संबंधित संपत्ति पर आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने मंगलवार को भिलाई के जुनवानी स्थित सूर्या रेजिडेंसी में एक मकान को सील कर दिया।
    जानकारी के मुताबिक, उक्त मकान की रजिस्ट्री मनीष उपाध्याय के नाम पर होने की बात सामने आई है। हालांकि, आयकर विभाग की कार्रवाई के पीछे संपत्ति से संबंधित वास्तविक कारण और कानूनी आधार की आधिकारिक विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने आना बाकी है।
    बताया जा रहा है कि आयकर विभाग की टीम ढोल-नगाड़े के साथ सूर्या रेजिडेंसी पहुंची और वहां मुनादी कराई गई। इसके बाद तहसीलदार एवं पुलिस की मौजूदगी में मकान को सील करने की कार्रवाई की गई।
    कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है। आयकर विभाग की ओर से संपत्ति को सील किए जाने के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कार्रवाई किस प्रकरण, आदेश अथवा संपत्ति संबंधी जांच के तहत की गई है।
    फिलहाल कार्रवाई को लेकर विभागीय स्तर पर आगे की जानकारी का इंतजार है।

       इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय की एक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा की महिला पार्षद संध्या यादव को लेकर की गई टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। विवाद बढ़ने पर विजयवर्गीय ने सफाई देते हुए अपने शब्दों पर खेद व्यक्त किया है।
    मामला इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 में नर्मदा लाइन सहित विभिन्न निर्माण कार्यों के भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रम का बताया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मंच से बोलते हुए विजयवर्गीय ने संध्या यादव का उल्लेख करते हुए कहा— “संध्या दीदी की भी चौड़ाई बढ़ गई है थोड़ी सी।” वायरल वीडियो में यह टिप्पणी उस समय सुनाई देती है, जब संध्या यादव मंच पर माइक की ओर बढ़ रही थीं।

    कांग्रेस ने जताई आपत्ति
    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर बहस शुरू हो गई। कांग्रेस नेताओं ने इसे महिला जनप्रतिनिधि की शारीरिक बनावट से जोड़ते हुए आपत्ति जताई और विजयवर्गीय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। कुछ कांग्रेस नेताओं ने मंत्री के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग भी उठाई।

    विजयवर्गीय ने दी सफाई, कहा— शब्दों पर खेद है
    विवाद बढ़ने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने एक वीडियो जारी कर अपनी टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को गलत अर्थ में लिया गया और उन्होंने संध्या यादव को अपनी बेटी के समान बताया। मंत्री ने अपने शब्दों पर खेद भी व्यक्त किया।
    विजयवर्गीय के अनुसार, संध्या यादव के परिवार से उनके पुराने संबंध हैं और उन्होंने उन्हें बचपन से देखा है। इसी पारिवारिक संबंध के संदर्भ में उन्होंने संध्या यादव को बेटी जैसा बताया।

    संध्या यादव ने भी किया मंत्री का बचाव
    विवाद के बीच भाजपा पार्षद संध्या यादव ने भी विजयवर्गीय के पक्ष में प्रतिक्रिया दी। नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, यादव ने मंत्री को पिता तुल्य बताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें बचपन में गोद में खिलाया है। उन्होंने टिप्पणी को मालवा क्षेत्र की आम बोलचाल की भाषा का हिस्सा बताया और कांग्रेस पर मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।

    बयान के बाद आमने-सामने आए अलग-अलग पक्ष
    इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर वायरल वीडियो में कही गई टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने महिला सम्मान और सार्वजनिक मंचों पर जनप्रतिनिधियों के प्रति भाषा के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, कैलाश विजयवर्गीय ने अपने शब्दों पर खेद जताते हुए अपनी मंशा स्पष्ट की है, जबकि संबंधित पार्षद संध्या यादव ने भी मंत्री का बचाव किया है।
    घटना ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक बातचीत और ऐसी टिप्पणियों के सार्वजनिक प्रभाव को लेकर बहस छेड़ दी है। इस मामले में टिप्पणी के शब्दों, वक्ता की बताई गई मंशा और संबंधित महिला पार्षद की अपनी प्रतिक्रिया—तीनों अलग-अलग पहलू चर्चा में हैं।

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