August 09, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

     रायपुर / शौर्यपथ / सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षित यातायात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा माह 2026 के अंतर्गत व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तथा मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन में अंतर्विभागीय लीड एजेंसी सड़क सुरक्षा द्वारा प्रदेशभर में प्रतिदिन विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

    प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में लीड एजेंसी द्वारा सड़क सुरक्षा से संबंधित पोस्टर एवं फ्लैक्स जारी किए गए हैं। वहीं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने प्रदेश के समस्त सरपंचों एवं पंचगणों से पंचायत स्तर पर सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सक्रिय पहल करने की अपील की है।

    सड़क सुरक्षा माह का शुभारंभ 01 जनवरी 2026 को बेमेतरा में माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री अभय मनोहर सप्रे द्वारा हेलमेट रैली को हरी झंडी दिखाकर किया गया। इसके पश्चात 03 जनवरी को दुर्ग में संभाग स्तरीय अधिकारियों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, सात जिलों के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सहित परिवहन, लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन, शिक्षा, आबकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

    इसी क्रम में 05 जनवरी 2026 को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की उपस्थिति में संबंधित विभागीय सचिवों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए समन्वित कार्ययोजना के तहत कार्य करने के निर्देश दिए गए। विशेष रूप से सर्वाधिक दुर्घटनाओं वाले जिलों रायपुर, बिलासपुर एवं दुर्ग के लिए वर्ष 2026 में दुर्घटनाओं में कमी लाने हेतु विशेष रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान गत वर्ष की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। यातायात नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध लगभग 45 प्रतिशत अधिक कार्रवाई करते हुए करीब 9 लाख प्रकरण दर्ज किए गए तथा लगभग 39 करोड़ रुपये का परिशमन शुल्क संकलित किया गया। जन-जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप लगभग 3 प्रतिशत मृत्यु दर में कमी परिलक्षित हुई है। प्रदेश के 20 जिलों में मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि रायपुर सहित 13 अन्य जिलों में इसे कम करने के लिए सतत प्रयास जारी हैं।

    सड़क सुरक्षा माह 2026 के दौरान यातायात पुलिस द्वारा प्रतिदिन विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, मोबाइल पर बात करते हुए, नशे की हालत में अथवा तेज गति से वाहन चलाने वालों को समझाइश दी जा रही है। साथ ही यातायात नियमों का पालन करने वाले नागरिकों को सम्मानित कर सकारात्मक संदेश भी दिया जा रहा है।

    राज्य सरकार ने वर्ष 2026 में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु दर में न्यूनतम 10 प्रतिशत की कमी लाने, दुर्घटनाजन्य सड़कों में त्वरित सुधार तथा आपातकालीन उपचार के लिए त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को सुदृढ़ करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

      रायपुर / शौर्यपथ। बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक सफलता दर्ज की गई है। सुकमा जिले में ₹64 लाख के इनामी 26 हार्डकोर माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में लौटकर आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 7 महिलाएं भी शामिल हैं, जो इस बदलाव को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस घटनाक्रम को केवल सुरक्षा बलों की सफलता नहीं, बल्कि मानवीय विश्वास, संवाद और संवेदनशील शासन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि “बस्तर अब बदल रहा है। यहां अब डर नहीं, बल्कि भरोसे की आवाज़ गूंज रही है। यह नया बस्तर शांति, विश्वास और विकास की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।”

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के स्पष्ट संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में अपनाई गई संतुलित सुरक्षा रणनीति और संवेदनशील पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणाम अब ज़मीन पर दिखाई दे रहे हैं। “पूना मार्गेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान ने उन युवाओं के जीवन में नई उम्मीद जगाई है, जो कभी नक्सलवाद के भ्रमजाल में फंस गए थे।

    उन्होंने कहा कि बस्तर में लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविर, सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तथा सुदूर अंचलों तक शासन की सीधी पहुँच ने क्षेत्र की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। आज बस्तर में भय का स्थान विश्वास ने ले लिया है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंसा का मार्ग त्यागने वालों के लिए सरकार के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। उन्हें सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के सभी अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने दोहराया कि नक्सल समस्या का स्थायी समाधान सुरक्षा, विकास और विश्वास की त्रयी में ही निहित है। उन्होंने शेष माओवादी साथियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए कहा कि वे शांति, परिवार और प्रगति का मार्ग चुनें। राज्य सरकार उनके पुनर्वास और पुनर्स्थापन में हर संभव सहयोग करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर आज शांति की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है और हर आत्मसमर्पण के साथ नक्सल-मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प और अधिक सशक्त होता जा रहा है।

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत पदोन्नत प्राध्यापकों की अंतिम संशोधित वरिष्ठता सूची जारी कर दी है। यह सूची उच्च न्यायालय बिलासपुर के निर्णयों तथा शासन द्वारा जारी पदोन्नति आदेशों के परिपालन में प्रकाशित की गई है।

    उच्च शिक्षा संचालनालय, इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार पदोन्नत प्राध्यापकों की वरिष्ठता का निर्धारण 01 अप्रैल 2017 एवं 01 अप्रैल 2023 की स्थिति के आधार पर किया गया है। वरिष्ठता निर्धारण के लिए लोक सेवा आयोग से चयन, विषयवार नियुक्ति, कार्यभार ग्रहण की तिथि, संविलियन तथा नियमितीकरण की तिथि जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों को शामिल किया गया है।

    विभाग ने स्पष्ट किया है कि समान आदेश तिथि की स्थिति में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि को वरिष्ठता का आधार माना गया है। वहीं संविलियन अथवा नियमित नियुक्ति वाले प्राध्यापकों की वरिष्ठता शासन द्वारा निर्धारित नियमानुसार तिथि के आधार पर तय की गई है।

    जारी आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि किसी पदोन्नत प्राध्यापक को अंतिम वरिष्ठता सूची पर आपत्ति हो, तो वे 20 जनवरी 2026 तक निर्धारित प्रारूप में अपनी आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं। निर्धारित समय-सीमा के बाद प्राप्त आपत्तियों पर किसी प्रकार का विचार नहीं किया जाएगा।

    उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे वर्ष 2017 एवं 2023 की अंतिम वरिष्ठता सूची का विधिवत प्रकाशन सुनिश्चित करें तथा संबंधित प्राध्यापकों को इसकी जानकारी अवगत कराएं।

    साहू समाज का सामूहिक विवाह कार्यक्रम सामाजिक उत्थान की मिसाल — मुख्यमंत्री साय
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव में हुए शामिल

    रायपुर / शौर्यपथ / राजिम भक्तिन माता एवं माता कर्मा के बताए संदेश मानव समाज के लिए कल्याणकारी है, हमें उनके संदेशों का अनुसरण करना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजिम के त्रिवेणी संगम में आयोजित भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव को सम्बोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने भगवान श्री राजीव लोचन एवं भक्त माता राजिम की पूजा अर्चना कर प्रदेश और समाज की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने साहू सृजन पत्रिका का विमोचन किया। साहू समाज द्वारा मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर स्वागत किया।
    मुख्यमंत्री श्री साय ने राजिम माता भक्ति जयंती की बधाई देते हुए कहा कि साहू समाज समृद्ध और शिक्षित समाज है जो हर दृष्टिकोण से समृद्ध रहा है। साहू समाज का इतिहास भी समृद्ध रहा है। हम सबको दानवीर भामाशाह,बाबा सत्यनारायण जी का आशीर्वाद मिल रहा है। यह समाज निरंतर विकास करें। यही कामना है। जब समाज एक जुट होगा तो केवल समाज ही नहीं प्रदेश और देश भी शक्तिशाली और समृद्ध बनता है।
    मुख्यमंत्री श्री साय ने साहू समाज के सामूहिक विवाह को अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि राजिम माता ने जिस साहू समाज को अपनी मेहनत और त्याग से संगठित किया, आज वह समाज शिक्षा, कृषि व व्यवसाय सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हम राजिम माता के आशीर्वाद से हर गारंटी को पूरा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ खनिज, वन, उर्वरा से भरपूर है। अब नक्सलवाद से जवान पूरी ताकत से लड़ रहे हैं। हम सबका संकल्प है कि 31 मार्च तक बस्तर को नक्सल मुक्त कर देंगे। राज्य के विकास में बाधक नक्सलवाद अब खत्मा की ओर है। राज्य को हम सब समृद्धि की दिशा में लेकर जाएंगे।
    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज सिरकट्टी आश्रम में भव्य राम जानकी मंदिर में धर्म ध्वजा की स्थापना की गई। इस पुण्य अवसर पर हमें शामिल होने का सौभाग्य मिला। जैसे अयोध्या धाम में धर्म ध्वजा स्थापना किए हैं, उसी तर्ज पर यहां कुटेना में भी धर्म ध्वजा स्थापित किया गया है। मेरा सौभाग्य है कि एक साल पहले भी इस अवसर पर शामिल होने का अवसर मिला था।
    उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव ने कहा कि साहू समाज एक संगठित समाज के रूप में जाना जाता है। आज हम सभी राजिम माता की जयंती मनाने आये हैं। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी संगम के इस पावन धरती से प्रेरणा लेकर जाएंगे और मिलकर समाज के विकास के लिए काम करेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि माता राजिम भक्तीन की महिमा का बखान करते हुए कहा कि राजिम त्याग, भूमि तपस्या, साधना और श्रम की भूमि है। भगवान को खिचड़ी खिलाने वाले समाज से हमारा समाज का नाता है। हम अपने पुरखों के योगदान को याद करके समाज को आगे ले जा सकते हैं। शिक्षा और संस्कार भी जरूरी है।
    इस अवसर पर साहू समाज के प्रतिनिधिगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

    अपार आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों को मिल रही स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान

    रायपुर / shouryapath / भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहचान को सुदृढ़ करने हेतु लागू की गई APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) व्यवस्था के अंतर्गत राज्य में अपार-आईडी निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
    दिनांक 7 जनवरी 2026 तक उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, राज्य के 57,045 विद्यालयों में अध्ययनरत 57,10,207 विद्यार्थियों में से 50,60,941 विद्यार्थियों की अपार-आईडी सफलतापूर्वक जनरेट की जा चुकी है, जो कि 88.63 प्रतिशत है तथा बड़े राज्यों में प्रतिशत के आधार पर सर्वाधिक है। यह डिजिटल शैक्षणिक संरचना की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
    छत्तीसगढ़ में बेमेतरा (96.40 प्रतिशत) तथा राजनांदगांव (96.38 प्रतिशत) जिले में सर्वाधिक विद्यार्थियों के अपार-आईडी तैयार किए गए हैं, जबकि रायगढ़, कोरिया, रायपुर, कोरबा, धमतरी, दुर्ग तथा बलौदाबाजार जिलों में 93 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के अपार-आईडी तैयार किए जा चुके हैं। 5 जिले—नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, बलरामपुर तथा दंतेवाड़ा—को छोड़कर शेष जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के अपार-आईडी तैयार किए जा चुके हैं। सभी जिलों में शेष विद्यार्थियों के अपार-आईडी निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
    भारत सरकार ने 31 जनवरी 2026 तक सभी विद्यार्थियों के अपार-आईडी तैयार करने के लिए निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि अपार-आईडी प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी को एक स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान प्रदान की जा रही है, जिससे उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों, प्रमाण-पत्रों एवं क्रेडिट्स का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। यह व्यवस्था विद्यार्थियों की शैक्षणिक निरंतरता, पारदर्शिता तथा राष्ट्रीय स्तर पर मोबिलिटी को सशक्त बनाएगी। राज्य शासन के निर्देश पर शिक्षकों के द्वारा शेष विद्यार्थियों की अपार-आईडी निर्माण हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि सभी छात्रों को इस राष्ट्रीय डिजिटल शैक्षणिक पहल का लाभ मिल सके।

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज पूरे दिन प्रशासनिक, जनसंपर्क एवं आधिकारिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगे। उनका दिन सुबह रायपुर में शासकीय कार्यक्रमों से शुरू होकर शाम को गोवा प्रवास के साथ संपन्न होगा।

    मुख्यमंत्री श्री साय सुबह 8.45 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर से प्रस्थान करेंगे। इसके पश्चात वे पुलिस ग्राउंड हेलीपैड रायपुर पहुंचेंगे और विभिन्न शासकीय व प्रशिक्षण संबंधी कार्यक्रमों में शामिल होंगे। सुबह के दौरान वे पी.टी.एस. ग्राउंड जोरा तथा एफ.टी.एस. प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री अम्बिकापुर प्रवास पर रहेंगे, जहां पुलिस एवं प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के उपरांत वे पुनः रायपुर लौटेंगे। पूर्वाह्न 11.45 बजे मुख्यमंत्री निवास पहुंचने के बाद उनका दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक जनदर्शन कार्यक्रम निर्धारित है, जिसमें वे आम नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे।

    शाम को मुख्यमंत्री श्री साय रायपुर से गोवा के लिए रवाना होंगे। वे स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर से इंडिगो की उड़ान द्वारा प्रस्थान कर डाबोलिम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, दक्षिण गोवा पहुंचेंगे। वहां से वे होटल द ललित रिजॉर्ट, राज बागा, पलोलेम (कनाकाना) के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां उनका रात्रि विश्राम रहेगा।

    उल्लेखनीय है कि 9 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय गोवा के कनाकाना क्षेत्र में आयोजित “आदि लोकोत्सव 2025” कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रशासनिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दुर्ग / शौर्यपथ समाचार नगर पालिका निगम दुर्ग के अधीन संचालित एक शासकीय विद्यालय परिसर में बिना अनुमति अवैध रूप से चल रही शासकीय राशन दुकान अब केवल नियमों का…

    शौर्यपथ लेख।

    प्यार को अक्सर उम्र के तराजू पर तौला जाता है—जैसे भावनाएँ केवल जवानी की जागीर हों। लेकिन सच इससे कहीं ज़्यादा गहरा है। बड़ी उम्र की औरत का प्यार कोई क्षणिक आकर्षण नहीं, बल्कि अनुभव, समझ और आत्मिक स्थिरता से उपजा हुआ भाव होता है। यह प्यार दिखावे से दूर, भीतर तक उतरने वाला होता है—जो न सिर्फ़ रिश्ते को, बल्कि इंसान को भी संवार देता है।

    अनुभव से उपजा भरोसा

    ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव देख चुकी औरत जानती है कि रिश्ते शब्दों से नहीं, व्यवहार से टिकते हैं। वह जल्दबाज़ी नहीं करती, न ही हर बात पर शक का बोझ डालती है। उसका भरोसा आँख मूँदकर नहीं, बल्कि समझदारी से दिया गया होता है—और इसी वजह से वह भरोसा मज़बूत भी होता है।

    देखभाल जो दिखती नहीं, महसूस होती है

    उसका प्यार बड़े-बड़े वादों में नहीं, रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों में दिखता है—समय पर पूछा गया हाल, थकान में दिया गया सुकून, और मुश्किल वक्त में बिना शोर किए खड़ा रहना। वह जानती है कि साथ निभाना क्या होता है, इसलिए उसका सहारा दिखावे का नहीं, स्थायी होता है।

    भावनात्मक समझ की गहराई

    बड़ी उम्र की औरत को हर बात कहने की ज़रूरत नहीं पड़ती। वह आँखों की भाषा, खामोशी की आवाज़ और व्यवहार के उतार-चढ़ाव को पढ़ लेती है। बिना टोके, बिना जज किए—सिर्फ़ समझना और साथ देना—यही उसकी सबसे बड़ी खूबी है।

    सम्मान और स्वीकृति

    वह सामने वाले को बदलने की कोशिश नहीं करती। न उसे अपने साँचे में ढालना चाहती है, न ही तुलना के बोझ तले दबाती है। जैसा है, वैसा स्वीकार करना—यह उसकी परिपक्वता का सबसे सुंदर रूप है। ऐसे रिश्ते में इंसान को खुद होने की आज़ादी मिलती है।

    स्थिरता जो समय के साथ बढ़ती है

    उसका प्यार तेज़ हवा का झोंका नहीं, बल्कि धीमी बहती नदी की तरह होता है—जो समय के साथ और गहरी, और शांत होती जाती है। उसमें ड्रामा नहीं, भरोसा होता है; दिखावा नहीं, अपनापन होता है; और डर नहीं, सुरक्षा होती है।

    कुल मिलाकर, बड़ी उम्र की औरत का प्यार शोरगुल वाला नहीं होता—वह सुकून देता है। यह ऐसा प्यार है जो रिश्ते को नहीं, इंसान को मज़बूत बनाता है। जो समय के साथ कम नहीं, बल्कि और निखरता जाता है।

    ऐसा प्यार मिल जाए, तो उम्र मायने नहीं रखती—क्योंकि वहाँ दिल पूरी ईमानदारी से जुड़ता है।

    बिलासपुर नगर निगम एवं आसपास के क्षेत्रों के विकास को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित
    न्यायधानी बिलासपुर के समग्र विकास और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को लेकर हुई व्यापक चर्चा

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बिलासपुर नगर निगम एवं आसपास के क्षेत्रों के विकास को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में बिलासपुर शहर तथा बाह्य क्षेत्रों में संचालित एवं प्रस्तावित विकास कार्यों, मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायधानी बिलासपुर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और बढ़ते शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए यहां संतुलित, समावेशी और योजनाबद्ध विकास आवश्यक है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और इसी के अनुरूप शहरी अधोसंरचना को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रगतिरत योजनाओं को तय समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से स्वच्छ एवं नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और इससे जुड़ी परियोजनाओं पर गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलासपुर को उद्योग एवं पर्यटन की दृष्टि से प्राथमिकता में रखते हुए विकास की योजनाएं तैयार की जाएं। श्री साय ने बताया कि पिछले दो वर्षों में सरकार द्वारा निरंतर नए विकास कार्यों को स्वीकृति दी गई है। साथ ही आने वाला बजट भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगा और इसके माध्यम से “विकसित छत्तीसगढ़” की संकल्पना भी साकार होगी। उन्होंने कहा कि विभागों के आपसी समन्वय से ही बेहतर परिणाम सामने आएंगे और गांवों के साथ-साथ शहरों के विकास में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
    बैठक में सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, ड्रेनेज, प्रदूषण मुक्त शहर, यातायात व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल एवं युवा कल्याण, आवास, ई-बस सेवा, हवाई यातायात, ट्रांसपोर्ट नगर, उद्योग एवं व्यापार, पर्यटन तथा अरपा विशेष क्षेत्र विकास परियोजना (अरपा साडा) से जुड़े विषयों पर बिंदुवार मंथन किया गया और विभिन्न विषयों पर सहमति भी बनी। इसमें सिम्स के नए अस्पताल भवन के लिए एएस जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को पीपीपी मोड पर संचालित करने का निर्णय लिया गया। बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार हेतु डिफेंस को राशि हस्तांतरित किए जाने की जानकारी दी गई, जिस पर जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। साथ ही एयरपोर्ट के अन्य विकास कार्यों एवं नाइट लैंडिंग सुविधा को शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए गए। ट्रांसपोर्ट नगर सिलपहरी के विकास का कार्य सीएसआईडीसी द्वारा किए जाने तथा भूमि हेतु आवेदन प्रस्तुत करने पर सहमति बनी। उसलापुर रेलवे ओवरब्रिज के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने और इसे आगामी बजट में शामिल करने का निर्णय लिया गया।
    इसके अतिरिक्त बिलासपुर के राजीव गांधी चौक, नेहरू चौक, महामाया चौक (वाय आकार) - रतनपुर मार्ग तक 305 करोड़ की लागत से फ्लाई ओवर ब्रिज निर्माण, पुराना बस स्टैंड चौक पर सीएमडी चौक-इमलीपारा रोड-टैगोर चौक-जगमल चौक तक 115 करोड़ की लागत से फ्लाई ओवर का निर्माण, एफसीआई गोडाउन व्यापार विहार क्षेत्र को सिरगिट्टी-महमंद बायपास से जोड़ने हेतु 320 करोड़ की लागत से तारबहार फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार शहर के यातायात दबाव को कम करने हेतु 950 करोड़ की लागत से फोरलेन बिलासपुर रिंग रोड निर्माण के लिए एनएचएआई की सहमति के आधार पर लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्ताव भेजने पर सहमति बनी। खारंग जलाशय में पाराघाट व्यपवर्तन योजना के लिए 328 करोड़ रुपये, नगर निगम क्षेत्र में अरपा नदी के एसटीपी एवं ड्रेनेज कार्यों के लिए 252 करोड़ रुपये तथा बिलासपुर शहर की जलभराव समस्या के समाधान हेतु आपदा प्रबंधन निधि से 150 करोड़ रुपये दिए जाने की सहमति बनी। बिलासपुर में कैंसर अस्पताल के लिए टाटा मेमोरियल अस्पताल से चर्चा करने, कानन पेंडारी के सामने अंडरपास निर्माण, कोनी से बिरकोना–खमतराई–बहतराई मार्ग के निर्माण, 24×7 जल आपूर्ति योजना हेतु डीपीआर तैयार करने तथा अरपा साडा क्षेत्र के विकास के लिए टीएनसीपी एवं जिला अधिकारियों की बैठक कर पूर्व योजनाओं पर चर्चा तथा इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
    बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, विधायक अमर अग्रवाल, विधायक सुशांत शुक्ला, विधायक धरमलाल कौशिक, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह तथा विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

      नई दिल्ली / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंगलवार को कई अहम गतिविधियाँ और बयान चर्चा में रहे। उन्होंने आंध्र प्रदेश स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की विशाख रिफाइनरी में ‘रेसिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी’ (RUF) के सफल कमीशनिंग की सराहना करते हुए इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी आधुनिक परियोजनाएँ देश की ईंधन जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने में सहायक होंगी।
    इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक जीवन में संवाद की मर्यादा पर बल देते हुए एक सुभाषितम साझा किया और ‘मधुर वाणी’ यानी सौम्य एवं संयमित भाषा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने संकेत दिया कि सकारात्मक और शालीन संवाद न केवल व्यक्तिगत संबंधों को सुदृढ़ करता है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी मजबूती प्रदान करता है।
    इस बीच सरकारी गलियारों में आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर भी हलचल तेज रही। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे संबंधित फाइलों पर चर्चा आगे बढ़ी है, जिससे केंद्र सरकार के एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भविष्य में लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
    प्रधानमंत्री के आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री जनवरी के अंत में पश्चिम बंगाल का दौरा कर सकते हैं, वहीं इसी माह असम में काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर की आधारशिला रखने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जिसे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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