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June 01, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

नई दिल्ली / शौर्यपथ / इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने गुजरात और बंगाल को लेकर गुरुवार को एक ट्वीट किया, जिसके बाद गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने जवाब में पलटवार किया है. रूपाणी ने अपने ट्वीट में लिखा कि पहले अंग्रेज भारत को बांटने की कोशिश कर रहे थे, अब कुछ एलीट लोगों का समूह है, जो भारतीयों को बांटने की कोशिश कर रहा है. गुहा ने अपने ट्वीट में एक ब्रिटिश लेखक और बुद्धिजीवी फिलिप स्प्रैट की 1939 में लिखी कुछ पक्तियों का ज़िक्र किया था, जिसपर रूपाणी का जवाब आया है.
गुहा ने अपने ट्वीट में लिखा, '1939 में फिलिप स्प्रैट लिखते हैं कि 'गुजरात हालांकि, आर्थिक रूप से मजबूत है लेकिन सांस्कृतिक रूप से पिछड़ा हुआ है, वहीं इसके उलट बंगाल आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है, लेकिन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है.'

उनके इस ट्वीट के जवाब में विजय रूपाणी ने लिखा, 'पहले अंग्रेजों ने भारत को बांटकर राज करने की कोशिश की थी. अब अभिजात्य लोगों का एक समूह है, जो भारतीयों को बांटना चाहता है. भारतीय ऐसी चालों में नहीं फंसेंगे. गुजरात महान है, बंगाल महान है....पूरा भारत एक है.'

रूपाणी ने आर्थिक और सांस्कृतिक पहलू पर भी टिप्पणी की. उन्होंने उसी ट्वीट में लिखा, 'हमारी सांस्कृतिक नींव मजबूत है और हमारी आर्थिक महत्वाकांक्षाएं ऊंची हैं.'

 

नई दिल्ली / शौर्यपथ / बहुचर्चित AGR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की. कोर्ट ने बकाया में PSU (पब्लिक सेक्‍टर अंडरटेकिंग्‍स) को जोड़ने पर DoT (डिपोर्टमेंट ऑफ टेलीकॉम) को जमकर फटकार लगाई और कहा कि DOT हमारे फैसले का दुरुपयोग कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि PSU से 4 लाख करोड़ रुपये के बकाया की मांग पूरी तरह अनुचित है और DoT अधिकारी एक हलफनामा दाखिल कर बताएं कि ऐसा क्यों किया गया. जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा, 'हमारे फैसले का गलत इस्तेमाल किया गया, हम उन्हें सजा देंगे! आप 4 लाख करोड़ से अधिक की मांग कर रहे हैं!' सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2019 के फैसले को सार्वजनिक उपक्रमों से बकाया मांगने का आधार नहीं बनाया जा सकता था. अदालत ने DOT को कहा कि वो PSU से बकाया मांगने के मुद्दे पर फिर से विचार करे. मामले में अगली सुनवाई 18 जून को होगी.
जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि उस समय सीमा में क्या गारंटी है कि टेलीकॉम कंपनियां पैसा देंगी, इसके साथ ही तय समय सीमा में पैसा जमा करने का क्या तरीका होगा. क्या होगा अगर कंपनियों में से कोई लिक्विडशन (दिवालिया) में जाता है,फिर भुगतान कौन करेगा? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि उसके फैसले के आधार पर बकाया के लिए टेलीकॉम कपंनियों के साथ- साथ PSU को भी क्यों शामिल किया गया.कोर्ट ने कहा कि PSU को इस दायरे से बाहर निकालना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या टेलीकॉम कंपनियों ने कोविड फंड में पैसा दिया है. इस पर एयरटेल की ओर से कहा गया कि उसने PM cares फंड में 100 करोड दिए हैं जबकि टाटा ने कहा कि उसने 1500 करोड रुपये दिए हैं. मामले में टेलीकॉम कंपनियों ने AGR के मुद्दे पर और समय मांगा है.

AGR बकाया के भुगतान पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से समय सीमा पूछी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि उसके फैसले के आधार पर बकाया के लिए टेलीकॉम कपंनियों के साथ-साथ PSU को भी क्यों शामिल किया गया. कोर्ट ने कहा कि PSU को इस दायरे से बाहर निकालना चाहिए. जस्टिस मिश्रा ने कहा, 'हर दिन मैं सोचता हूं कि हमारे फैसले का किस तरह से इस्तेमाल और दुरुपयोग हुआ है. केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) ने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों के पास दूरसंचार स्पेक्ट्रम हैतो अदालत ने कहा कि 30 साल से कोई मांग क्यों नहीं की गई लेकिन पिछले साल हमारे फैसले के बाद उनसे बकाया मांगा गया.इससे पहले मामले में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए SG ने कहा कि सार्वजनिक उपक्रम स्वयं में एक वर्ग बनाते हैं और सार्वजनिक कार्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर AGR बकाया को लागू करना सार्वजनिक हित नहीं हो सकता है. ऐसे कुछ सार्वजनिक उपक्रम हैं जो अपने लिए एक वर्ग बनाते हैं. वे सरकार के कार्यों का निर्वहन करते हैं.ये सार्वजनिक उपक्रम वाणिज्यिक शोषण के लिए अन्य दूरसंचार प्रदाताओं की तरह मोबाइल सेवाएं प्रदान नहीं कर रहे हैं. इन कंपनियों से निजी क्षेत्र के दूरसंचार प्रदाताओं की तुलना में अलग तरीके से व्यवहार करने की आवश्यकता है. SG तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने मामले की जांच की है. अगर एक ही बार में सारी रकम मांगी जाए तो अर्थव्यवस्था पर इससे प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. एक बार में सभी टेलीकॉम बकाया मांगे जाने पर टेलीकॉम सेवाओं को नुकसान होगा और कुछ बंद हो सकती हैं. उन्‍होंने कहा कि यदि अदालत ने इसे प्रभावित किया तो दूरसंचार क्षेत्र, प्रभाव नेटवर्क पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी और अंततः उपभोक्ताओं को नुकसान होगा.

 

भिलाई। शौर्यपथ । बहुत जल्द पब्लिक सेक्टर यूनिट के सबसे बड़े अस्पताल भिलाई के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल सेक्टर-9 की तस्वीर बदलने वाली है। भूपेश सरकार चाहती है कि सेक्टर-9 अस्पताल को फिर से प्रतिष्ठित अस्पताल बनाया जाए। लोग ये सवाल कर रहे हैं कि आखिर सरकार ने कैसे सेक्टर-9 अस्पताल की सुध ली है? इसके पीछे भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव है। देवेंद्र ने इसी महीने की 2 तारीख को भूपेश सरकार से सेक्टर-9 अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने की मांग की थी। देवेंद्र ने तब तर्क देते हुए कहा था कि छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध और भिलाई के सबसे बड़े हॉस्पिटल सेक्टर-9 हॉस्पिटल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा देना चाहिए। बीएसपी द्वारा सन 1955 से संचालित है। यहां भिलाई स्टील प्लांट के कर्मियों के अलावा प्रदेश व देशभर के लोग उपचार कराने के लिए आते हैं। मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने से काफी सुविधाएं बढ़ेंगी। देवेंद्र की इस पहल के बाद कल कलेक्टर कान्फ्रेंस मीटिंग में सीएम भूपेश ने कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे को निर्देश दिए कि सेक्टर-9 अस्पताल को पहले की तरह अपग्रेड किया जाए। इसके लिए रोडमैप बनाए। जो भी जरूरी चीजों की आवश्यकता होगी, उसके लिए सेल प्रबंधन से बात करें और सरकार भी मदद करेगी।

खेल / शौर्यपथ / टीम इंडिया के लिमिटेड ओवर्स के उपकप्तान सोशल मीडिया पर अपनी हाजिर जवाबी के लिए जाने जाते हैं। कोरोना वायरस की वजह से सभी क्रिकेट गतिविधियों पर ब्रेक लगा हुआ है। आईपीएल 2020 भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित है। देशभर में लगे लॉकडाउन के दौरान क्रिकेटरों ने भी घर में परिवार के साथ वक्त बिताया। इस दौरान ये क्रिकेटर सोशल मीडिया पर भी बराबर बने रहे। लॉकडाउन के दौरान रोहित शर्मा भी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव नजर आए। इस दौरान उन्होंने कई बार अपने साथी खिलाड़ियों को भी ट्रोल किया।

कुछ दिन पहले युजवेंद्र चहल को ट्रोल करने के बाद इस बार रोहित शर्मा ने अजिंक्य रहाणे की ट्रोलिंग की। दरअसल, अजिंक्य रहाणे लैपटॉप के सामने बैठे हुए अपनी एक तस्वीर शेयर की, जिस पर रोहित शर्मा ने उनकी खिंचाई कर दी।

अजिंक्य रहाणे ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए कैप्शन दिया- ''हर दिन मैं कुछ समय अपने लिए निकालता हूं जहां मैं कुछ चीजों के बारे में सोचता हूं, उन्हें लिखता हूं और कुछ पुरानी तस्वीरें देखता हूं। यह मेरे दिमाग को शांत रखने में मदद करता है।''

रहाणे की पोस्ट पर जवाब देते हुए रोहित शर्मा ने लिखा, ''सच में भाई। तुम्हें जितना जल्दी हो सके खेलना शुरू कर देना चाहिए।'' इस पर अजिंक्य रहाण ने कहा, ''क्रिकेट शुरू होते ही हम भी शुरू।''

बता दें कि भारत के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने कहा है कि वह चोट से उबरकर वापसी की तैयारी में थे, लेकिन कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन की वजह से ऐसा नहीं कर सके और अब उन्हें राष्ट्रीय टीम में लौटने से पहले फिटनेस टेस्ट पास करना होगा। रोहित को फरवरी में न्यूजीलैंड दौरे के बीच से ही स्वदेश लौटना पड़ा था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में भी उन्हें आराम दिया गया था। हालांकि, तीन मैचों की वनडे सीरीज पहला मैच बारिश की वजह से धुल गया था। इसके बाद कोरोना वायरस की वजह से दोनों बचे हुए मैच रद्द कर दिए गए थे।

 

मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्टर जॉन अब्राहम जल्द ही एक बार फिर गैंगस्टर के रोल में नजर आने वाले हैं। जॉन अब्राहम इनदिनों अपनी अपकमिंग मूवी 'मुंबई सागा' को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म से जॉन अब्राहम के अबतक दो पोस्टर सामने आ चुके हैं। कु​छ दिनों पहले 'मुंबई सागा' से जॉन का पहला लुक आउट हुआ था। हालांकि लॉकडाउन होने की वजह से इस फिल्म के शूटिंग बंद कर दी गई थी। हालांकि खबर है कि जॉन अब्राहम जल्द ही इस फिल्म की शूटिंग शुरू कर देंगे, जिसकी शूटिंग हैदराबाद के रामोजी राव फिल्मसिटी में से शुरू होगी। बता दें कि इस फिल्म का निर्देशन फिल्म के निर्देशक संजय गुप्ता कर रहे हैं। संजय गुप्ता इससे पहले 'शूटआउट एट लोखंडवाला', 'काबिल' और 'कांटे' जैसी कई फिल्में बना चुके हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जॉन अब्राहम की इस आगामी फिल्म की शूटिंग के लिए जॉन खुद अपने टीम के साथ अगले महीने जुलाई में हैदराबाद जाएंगे। फिल्म के टीम शूटिंग के बिल्कुल तैयार है। हालांकि सभी कोरोना लॉकडाउन के गाइडलाइन के आधार पर कोई भी सीन शूट होगा।

आपको बता दें कि अपकमिंग मूवी 'मुंबई सागा' में जॉन अब्राहम के अलावा इमरान हाशमी, प्रतीक बब्बर, जैकी श्रॉफ, सुनील शेट्टी और शरमन जोशी मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म की कहानी की बात करें तो 'मुंबई सागा' 1980-90 के दशक की है, जब बॉम्बे, मुंबई में बदल रहा था। संजय गुप्ता के डायरेक्शन में बन रही 'मुंबई सागा' को भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, अनुराधा गुप्ता और संगीता अहीर प्रोड्यूस कर रहे हैं।

 

खाना खजाना /शौर्यपथ /रोज फ्लेवर श्रीखंड
सामग्री :
फ्रेश दही एक लीटर अथवा आधा किलो चक्का (श्रीखंडा का), पिसी शक्कर डेढ़ कटोरी, 2 चम्मच गुलकंद, आधा कटोरी सूखे गुलाब की पत्तियां, पाव कटोरी मेवे की कतरन, आधा चम्मच इलायची पावडर।
विधि :
सबसे पहले दही को 3-4 घंटे के लिए मलमल के कपड़े में बांध कर लटका दीजिए। जब तक कि दही का पूरा पानी न निथर जाए। अब गुलकंद में दो चम्मच गुलाब की पत्तियों को मिला लें। गाढ़े दही या चक्का और पिसी शक्कर को बड़े बर्तन में अच्छी तरह मिलाएं।
किसी छलनी या बारीक कपड़े से छान लें, ताकि कण न रह जाएं। गुलकंद, मेवे की कतरन और इलायची डालकर अच्छी तरह मिलाएं। कटोरियों में डालकर बची गुलाब की पत्तियों से सजा कर पेश करें। इसे आप उपवास में भी उपयोग में ला सकते हैं।
फलाहारी चूरमा विथ ड्राई फ्रूट्स
सामग्री :250 ग्राम सिंघाड़ा आटा, 250 ग्राम राजगिरा आटा, 300 ग्राम गुड़, 50-50 ग्राम गोंद और बादाम बारीक कटी, 1 छोटा चम्मच इलायची पावडर, 1 खोपरे का गोला कसा हुआ, 1 बड़ा चम्मच घी (मोयन), 100 ग्राम घी तलने के लिए। सजावट के लिए- 4-5 चांदी का वर्क, किशमिश, बादाम और काजू।
विधि :
राजगिरे और सिंघाडे के आटे को मिलाकर एक बड़ा चम्मच घी का मोयन डालकर ठंडे पानी से आटा गूंथ लीजिए। ध्यान रहें आटा पूरी के आटे जैसा गूंथना है। अब एक कड़ाही में घी गर्म करें। तैयार आटे के मुठिए बनाकर घी में गुलाबी होने तक धीमी आंच पर तलें।
अब मुठिए ठंडे होने के लिए रख दें। ठंडे होने पर उसे मिक्सी में पीस लें। इसे छानें। उसी घी में गोंद के फूले तल लें। अब 100 ग्राम के करीब घी लेकर उसमें गुड़ को धीमी आंच पर गर्म कर लें।
जब गुड़ पूरी तरह घी में मिल जाए, तब उसमें पिसा हुआ मुठिए का मिश्रण मिला लें। फिर उसे परात में लेकर उसमें इलायची, गोंद के फूले, खोपरा बूरा और बादाम की कतरन मिला लें। लीजिए तैयार है फलाहारी चूरमा विथ ड्राई फ्रूट्स। इस पर चांदी का वर्क लगाएं। बादाम, काजू और किशमिश से सजा कर पेश करें।
राजगिरे का हलवा
सामग्री :
150 ग्राम राजगिरा आटा, आधा कटोरी शक्कर, पाव चम्मच इलायची पावडर, पाव कटोरी कटे मेवे, घी आवश्यकतानुसार व एक गिलास गरम पानी।
विधि :
सबसे पहले राजगिरा आटे को छान लें। एक कड़ाही में घी गरम करके आटे को धीमी आंच पर जब तक सेकें तब तक आटे में से भीनी-भीनी खुशबू न आने लगे।
राजगिरे की घी में अच्छी तरह सिकाई होने के बाद उसमें गरम पानी डालें व अच्छी तरह हिलाएं। अब शक्कर डालें व हिलाती रहें। जब हलवे का मिश्रण कड़ाही के किनारे छोड़ने लगे तब गैस बंद कर दें। इलायची और मेवे मिलाकर ढंक दें। अब तैयार राजगिरा हलवा से प्रभु को भोग लगाएं।
सिंघाड़े के लड्डू
सामग्री :
सिंघाड़े का आटा 200 ग्राम, राजगिरे का आटा 100 ग्राम, शक्कर 300 ग्राम, देशी घी 200 ग्राम, इलायची पिसी हुई, खोपरे के छोटे-छोटे टुकड़े, काजू, बादाम।
विधि :
सबसे पहले सिंघाड़े व राजगिरे के आटे को धीमी आंच पर घी डालकर सेंक लें। खुशबू आने लगे तब शक्कर पीसकर उसमें मिला दें। इलायची, खोपरा, काजू, बादाम भी मिला दें।
गरम-गरम ही लड्डू बना लें, नहीं बंधने पर थोड़ा घी और मिलाएं, फिर लड्डू बना लें। यह स्वादिष्ट होने के साथ ही पौष्टिक भी होते हैं।
राजगिरे की पंजीरी
सामग्री :
100 ग्राम राजगिरे का आटा, 150 ग्राम शक्कर बूरा, 50 ग्राम किशमिश, 100 ग्राम सभी प्रकार के मेवों की कतरन, आधा चम्मच पिसी इलायची, पाव कटोरी तला व बारीक कूटा हुआ गोंद, कुछेक किशमिश, 150 ग्राम घी।
विधि :
सर्वप्रथम घी गरम कर राजगिरे का आटा डालकर धीमी आंच पर गुलाबी होने तक सेक लें। सिका आटा थोड़ा ठंडा हो के पश्चात शक्कर बूरा और इलायची पावडर मिलाकर मिश्रण को एकसार कर लें।
अब उसमें तला गोंद व मेवों की कतरन तथा किशमिश मिक्स कर दें। लीजिए तैयार है राजगिरे की शाही पंजीरी।

 

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /+ कोरोना वायरस से बचने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग व साफ-सफाई पर जोर दिया जा रहा है। वहीं लगातार कुछ सवाल मन में आते रहते हैं, जैसे कि वायरस कितनी देर तक सतह पर बना रहता है, क्या-क्या सावधानियां बरतनी जरूरी है, क्योंकि वायरस अगर रह जाए तो संक्रमण का खतरा बना रहता है।
इसलिए हर एक चीज को साफ रखने की सलाह दी जा रही है, वहीं घर से बाहर जाने पर सावधानियां रखना और जरूरी हो जाता है। एक शोध के अनुसार कोविड-19 का स्ट्रेन कपड़ों पर 1 दिन ज़िंदा रहता है जबकि स्टेनलेस स्टील और प्लास्टिक पर 4 दिन तक रहता है।

घर पर वापस आने पर हाथों को धोना व साफ कपड़े पहनना इसलिए जरूरी है जिससे कि वायरस का प्रवेश हमारे घर में न हो सके। लेकिन बालों का क्या? क्या बालों पर वायरस जिंदा रह सकता है? इस पर अभी कुछ पुख्ता जानकारी हासिल नहीं हो पाई है लेकिन सावधान रहना और समझदारी के साथ आगे बढ़ना हमारी जिम्मेदारी है जिससे कि हम खुद भी सुरक्षित रह सकें और परिवार को भी सुरक्षित रख सकें।

बालों पर वायरस का खतरा न रह सके, इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना जरूरी है।
हम कई कामों के लिए अपने घर से बाहर जाते हैं। ऐसा संभव नहीं हो पाता कि जितनी बार घर से बाहर जाएं, उतनी बार ही बालों को धो सकें। इसलिए आप किसी कपड़े से अपने बालों को ढंक सकते हैं।

यह खतरा तब बिलकुल कम हो जाता है, जब आप सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं। उचित दूरी बनाकर रखेंगे तो बालों पर वायरस का खतरा भी कम रहेगा।

सार्वजनिक जगहों पर अपने बालों को बार-बार छूने से बचें। अपने बालों को हाथ लगाने के बाद अपने चेहरे और आंखों पर हाथों को न लगाएं।
गंदे हाथों से अपने बालों को न छुएं।

अगर आपके पीछे कोई छींक देता है, तो सबसे ज्यादा अच्छा है कि आप घर आकर सीधे नहाने जाएं और बालों को भी अच्छी तरह से साफ करें।

 

सेहत /शौर्यपथ / खाना निगलते वक्त गले में दर्द होना आम बात नहीं है, यह ग्रासनली में सूजन हो सकती है। इस स्थिति में गले में खराश, दर्द होता है। मेडि‍कल भाषा में फैरिन्जाइटिस कहते हैं, जो खास तौर से सर्दियों में आपको जकड़ सकती है। जानिए इसके कारण, लक्षण और उपाय -

 

कारण - फैरिन्जाइटिस का मुख्य कारण वायरस है, लेकिन कभी-कभी बैक्टीरियल इन्फेक्शन की वजह से भी यह समस्या हो सकती है। इसके अलावा सेकेंड-हैंड स्मोक और साइनस इन्फेक्शन के कारण भी य‍ह बीमारी हो सकती है।

लक्षण - गले में दर्द होना, खाना निगलने में दर्द, सूजन और गले में खराश होना फैरिन्जाइटिस के प्रमुख लक्षण हैं।

उपाय - 1
पानी को गुनगुना कर लें और इसमें नमक मिलाकर गरारे करें। इसे दिन में 3 बार करने से गले की सूजन कम होगी और दर्द में राहत मिलेगी।
2 अदरक का प्रयोग करें। आप चाहें तो पानी में अदरक को उबालकर पी सकते हैं या फिर अदरक के टुकड़े को चूसना भी फायदेमंद होगा। चाय में अदरक का प्रयोग जरूर करें।


3 हल्के गर्म पानी में नींबू की कुछ बूंदे निचोड़कर इस पानी को पिएं। यह काफी आराम देगा। आप चाहें तो इसमें शहद भी मिलाकर पी सकते हैं।

4 मुलहठी और दालचीनी को चूसना भी गले की इस प्रॉब्लम में आपको आराम दे सकता है। चाहें तो गर्म पानी या चाय के साथ भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
5 गुनगुने पानी में हल्दी डालकर पीने से भी लाभ मिल सकता है। इसके अलावा लहसुन का प्रयोग भी आपके गले की सूजन और दर्द को कम कर सकता है।

 

 

धर्म संसार/शौर्यपथ / वाल्मीकि रामायण में प्रभु श्रीराम के पुत्र लव और कुश की गाथा का बहुत ही मार्मिक वर्णन किया गया है। सीता जब गर्भवती थीं तभी श्रीराम के कहने पर लक्ष्मण उन्हें वाल्मीकि आश्रम छोड़ आए थे। लव और कुश का जन्म वहीं हुआ और वहीं उनका पालन पोषण, शिक्षा और दीक्षा का कार्य भी हुआ।
लव और कुश की पढ़ाई-लिखाई से लेकर विभिन्न कलाओं में निपुण होने के पीछे महर्षि वाल्मीकि का ही हाथ था। उन्होंने ही दोनों राजकुमारों को हर तरह की शिक्षा और विद्या में परंगत किया। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण लिखी और लव एवं कुश ने जब होश संभाला तब उन्होंने दोनों भाइयों को रामायण कंठस्थ करा दी। रामायण कंठस्थ करते वक्त दोनों को यह नहीं ज्ञात था कि वे उनके माता पिता की गाथा है। वे अपनी माता को वनदेवी समझते थे। रामकथा कंठस्थ करते वक्त लव और कुश के मन में कई प्रश्न थे। पहला यह कि राम ने आखिर प्रजा के कहने पर माता सीता को क्यों छोड़ दिया?
एक बार श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ किया और यज्ञ का श्वेत अश्व (घोड़ा) छोड़ दिया। यह घोड़ा भटकते हुए जंगल में वाल्मीकि आश्रम के नजदीक पहुंच गया। वहां लव और कुश ने इसे पकड़ लिया। घोड़ा पकड़ने का अर्थ है अयोध्या के राजा को चुनौती देना। तब दोनों ने भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्‍न, सुग्रीव आदि सभी से युद्ध किया और सभी को पराजित कर दिया। साथ ही उन्होंने हनुमानजी को बंधक बना लिया।
यह सुनकर राम स्वयं युद्ध करने के लिए आए और जब राम ने अपना बाण धनुष पर चढ़ाया तभी ऋषि वाल्मीकि आ गए और कहने लगे कि आप ये क्या कर रहे हैं? बालकों पर तीर चला रहे हैं। तब वाल्मीकि राम और लव कुश को समझाकर युद्ध को रोकते हैं और लव एवं कुश से कहते हैं कि ये तुम्हारे पिता के समान हैं इनसे क्षमा मांगो। दूसरी ओर वे बंधक बने हनुमानजी से कहते हैं कि आप ये अश्वमेध का घोड़ा ले जाइये।
उधर, ये बात वनदेवी (सीता) को पता चली है। तभी लव और कुश आ जाते हैं और वे कहते हैं कि हां माता आपने सही सुना। हमने शत्रुघ्‍न, भरत, लक्ष्मण सहित उनकी सेना को परास्त कर दिया। यह सुनकर माता सीता अवाक् रह जाती और दुखी भी होती है।

फिर लव और कुश कहते हैं कि हमने तो हनुमानजी को भी बंधक बना लिया था। यह सुनकर माता सीता कहती हैं कि ये तुमने क्या किया वो तो मेरे पुत्र के समान है। तुमसे पहले तो वह मेरे पुत्र है। यह कहते हुए माता सीता रोने लगती है। यह देखकर लव और कुश भी अचरज से माता को देखते हैं। फिर वो कहते हैं कि हमसे लड़ने तो स्वयं अयोध्या के राजा राम आए थे। माता सीता पूछती है क्या राम आए थे और क्या तुमने उन पर बाण उठाया?


लव और कुश कहते हैं कि नहीं माता, हमारे बाण तो पहले से ही उठे हुए थे। यह सुनकर माता सीता दुखी होकर रोने लगती है कि हे पुत्र आज तुमने घोर पाप कर दिया। इसका तो प्रायश्चित भी नहीं हो सकता। माता को रोता देखकर लव और कुश की आंखों में भी आंसू आ जाते हैं।
तब माता सीता रोती बिलखती हुई हुई बोलती हैं कि यह तो घोर पाप है प्रभु। कोई पुत्र अपने पिता पर कैसे बाण उठा सकता है। अब मैं कैसे इसका प्रायश्‍चित करूंगी? यह सुनकर लव और कुश को आघात लगता है। उनकी आंखों से झरझर आंसुओं की नदियां बहने लगती है और वो माता सीता से पूछते हैं, तो क्या अयोध्या के राजा हमारे पिता है? माता सीता रोती रहती है।

लव कुश फिर पूछते हैं तो क्या आप वो अभागी सीता हैं जिसे श्रीराम ने छोड़ दिया था? माता सीता रोते हुए कहती है कि जिसका पति भगवान हो वह कैसे अभागी हो सकती है? तभी वहां वाल्मीकि ऋषि आ पहुंचते हैं और वे रोते हुए लव और कुश को कहते हैं कि हां ये तुम्हारी मां सीता है और प्रभु श्री राम तुम्हारे पिता है।

लव और कुश फिर रोते हुए पूछते हैं तो गुरुजी आपने अब तक यह बात हमसे क्यों छिपाकर रखी? वाल्मीकि कहते हैं कि हर बात को बताने का उचित समय होता है। फिर वाल्मीकि समझाते हैं कि इसमें तुम्हारे पिता का कोई दोष नहीं यह तो अयोध्या की प्रजा का ही दोष है और अब वक्त आ गया है तो तुम राम और सीता की कथा को उन्हें सुनाओ।

वाल्मीकि ऋषि की आमा से लव और कुश संपूर्ण अयोध्या में घूम-घूम कर राम और सीता की कथा के साथ ही माता सीता की व्यथा को भी गाकर सुनाते हैं। यह सुनकर अयोध्यावासियों का रो-रोकर बुरा हाल हो जाता है।
जब यह बात श्रीराम को पता चलती है कि कोई ऋषि कुमार संपूर्ण नगर में राम कथा सुना रहे हैं तो श्रीराम उन दोनों को अपने पास बुलाते हैं और उन्हें देखकर कहते हैं कि अरे तुम तो वही हो जिन्होंने हमारे यज्ञ का घोड़ा पकड़ लिया था। लव और कुश उनके चरणों में झुककर उनसे कहते हैं कि आप हमारे पिता समान है राजा। आप हमें आज्ञा दीजिए कि क्या करना है?
तब श्रीराम उनसे कहते हैं कि हमने सुना है कि तुम राम कथा सुना रहे हो? तब लव और कुश कहते हैं कि हां हमारे गुरु ने हमें यह कथा हमें सुनाई है। फिर श्रीराम कहते हैं कि क्या तुम यह कथा हमारे राज दरबार में सुनाओंगे? लव और कुश कहते हैं- हे राजन आप आज्ञा देंगे तो अवश्य सुनाएंगे।

फिर लव और कुश प्रतिदिन दरबार में श्रीराम कथा सुनाते हैं और कथा के अं‍त में वे सीता माता के वाल्मीकि आश्रम में गुजारे कठिन समय का वर्णन करते हैं। सीता माता की कथा सुनकर सभा में उपस्थित लक्ष्मण, शत्रुघ्न, भरत, जनक, कौशल्या, सुमित्रा, कैकेयी, ऋषि वशिष्ठ और प्रजाजनों की आंखों से आंसुओं की नदियां बहने लगती है। तब अंत में इसी कथा के दौरान वे ये प्रकट कर देते हैं कि हम उसी सीता के पुत्र हैं। यह सुनकर संपूर्ण राम दरबार स्तब्ध और आवाक् रह जाता है। जय श्रीराम।

 

 

धर्म संसार /शौर्यपथ / श्री राम रक्षा स्तोत्र बुध कौशिक ऋषि द्वारा रचित श्रीराम का स्तुति गान है। इसमें प्रभु श्री राम के अनेकों नाम का गुणगान किया है। आ जानते हैं कि इसका पाठ करने के 10 रहस्य।
1. इसका पाठ करने से प्रभु श्रीराम आपकी हर तरह से रक्षा करते हैं। अपने शरणागत की रक्षा करना उनका धर्म है।

2. कहते हैं कि इसके नित्य पठन से हनुमानजी प्रसन्न होकर राम भक्तों की हर तरह से रक्षा करते हैं।

3. विधिवत रूप से राम रक्षा स्त्रोत का 11 बार पाठ करने के दौरान एक कटोरी में सरसों के कुछ दानें लेकर उन्हें अंगुलियों से घुमाते रहने से वह सिद्ध हो जाते हैं। उक्त दानों को घर में उचित और पवित्र स्थान पर रख दें। यह दानें कोर्ट-कचहरी जाने के दौरान, यात्रा पर जाने के दौरान या किसी एकांत में सोने के दौरान यह दानें आपकी रक्षा करेंगे। यहां पर दिए गए उपाय प्रचलित मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके कारगर होने की पुष्टि हम नहीं करते हैं।
4. राम रक्षा स्तोत्रम् के 11 बार किए जाने वाले पाठ से पानी को भी सरसों की तरह सिद्ध किया जा सकता है। इस पानी को औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पानी को रोगी को पिलाया जा सकता है। इससे ली जाने वाली औषधि का तेजी से प्रभाव होता है। पानी को सिद्ध करने के लिये राम रक्षा स्तोत्रम का पाठ करते हुए तांबे के बर्तन में पानी भरकर इसे अपने हाथ में पकड़ कर रखें और अपनी दृष्टि पानी में रखें। यहां पर दिए गएउपाय प्रचलित मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके कारगर होने की पुष्टि हम नहीं करते हैं।
5. जो व्यक्ति नित्य राम रक्षा स्तोत्रम् का पाठ करता रहता है वह आने वाली कई तरह की विपत्तियों से बच जाता है।
6. इसका प्रतिदिन पाठ करने से व्यक्ति को दीर्घायु, संतान, शांति, विजयी, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
7. इसके नित्य पाठ करने से मंगल ग्रह का कुप्रभाव भी समाप्त हो जाता है।
8. इसका नित्य पाठ करने वाले व्यक्ति के मन में सकारात्मक भाव का संचार होता है और उसके चारों और सुरक्षा का एक घेरा निर्मित हो जाता है।
9. इसका नित्य पाठ करने से मनुष्य के मन से हर तरह का भय निकल जाता है और वह निर्भिक जीवन जीता है।
10. इसका नित्य पाठ करने से भगवान शिव की भी कृपा प्राप्त होती है क्योंकि इस स्त्रोत की रचना बुध कौशिक ऋषि ने भगवान शंकर के कहने पर ही की थी। भगवान शंकर ने उन्हें इस स्त्रोत की रचना की प्रेरणा स्वप्न में दी थी।

 

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