August 14, 2026
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    खेती-किसानी और परंपरागत रोजगार के अवसरों को मजबूत करने के साथ ही, हमने ऐसे अनेक उपाय किए हैं-मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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    उत्तर बस्तर कांकेर /शौर्यपथ / ‘‘लोकवाणी‘‘ की 22वीं कड़ी का आयोजन कांकेर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत भैराडीह में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि ‘‘जिला स्तर पर विशेष रणनीति से विकास की नई राह‘‘ भाग-दो विषय पर विभिन्न जिलों से हमें इतनी तथ्यात्मक जानकारी मिल रही है कि एक ही विषय पर दो कड़ियों का प्रसारण करने की योजना बनाई गई। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समस्याओं को चिन्हित करना, उनके समाधान की तलाश करना, उन्हें लागू करना और जनता को राहत दिलाना, इन सब कामों में जिला प्रशासन की केन्द्रीय भूमिका है।
               मुख्यमंत्री ने प्रदेश वासियों से चर्चा करते हुए कहा कि 7 अक्टूबर ले नवरात्र श्ुरू हो गे हे, जम्मो मन देवी दाई के पूजापाठ म लगे हें, हमन अब्बड़ भाग मानी हरन के प्रदेश के चारो कोती देवी-दाई के बड़े-बड़े मंदिर हवय, अउ एकर आसीरवाद प्रदेस ल मिलत हे। दंतेवाड़ा म दंतेश्वरी दाई, डोंगरगढ़ म बम्लेश्वरी दाई, रतनपुर म महामाया दाई, चन्द्रपुर म चन्द्रहासिनी दाई बिराजे हे। चन्दखुरी रायपुर म कौशल्या दाई के प्राचीन मंदिर हे, जेखर पुनरोद्धार अउ विकास के काम करे गे हे। गांव-गांव, सहर-सहर म सीतला दाई अउ देवी के हर स्वरूप के मंदिर हवय। नवरात्रि म जंवारा बोय गे हे। जोत जलाए गे हे। नारी सक्ति के रूप म हमन बेटी मन के पूजा करथन अउ कन्या भोज कराए के घलो हमर परंपरा हे। ये अवसर म मोर अपील हे के बेटी मनके, नारी मनके सम्मान के भाव, बछर म दू बार नवरात्र म रखे के साथ ही, येला पूरा साल अउ पूरा जिनगी भर निभाना हे। इही सही मायने म छत्तीसगढ़ महतारी के सेवा हरे। हमर परंपरा अउ संस्कृति के सिक्षा ल सब्बो मन ल, अपन जिनगी म उतारना हे। दाई-दीदी के अधिकार अउ मान-सम्मान दे बर, समाज के बेवस्था ल हमर सरकार ह अउ मजबूत करे हे। नवरात्रि के बाद दसहरा तिहार आही। भगवान राम के जीत के तिहार। सत्य के जीत, न्याय के जीत के तिहार हे। अहंकार के प्रतीक रावण के अंत के तिहार हे। करवा चौथ, देवारी, गौरा-गौरी पूजा, मातर, गोवर्धन पूजा, छठ पूजा, भाई दूज, जम्मो तिहार के आप मन ल बधाई, अउ सुभकामना देवत हंव। मोर एकठन निवेदन हे, के आप मन सावधानी के साथ, कोरोना ले बचे के जम्मो सुरक्षा उपाय के साथ, मास्क पहिन के नाक, मुंह ढांक के, तिहार मनावव।
            अबूझमाड़ का मतलब था, ऐसा स्थान, ऐसा वन क्षेत्र, जिसे बूझा नहीं जा सका है। जब हम सरकार में आए तो मुझे लगा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि प्रदेश का कोई क्षेत्र अबूझा रह जाए। जहां की आशाओं, आकांक्षाओं को समझने, जनसुविधाओं और विकास की योजनाओं को पहुंचाने की कोई व्यवस्था ही न हो। राज्य के किसी अंचल के बारे में राज्य सरकार यह कहे कि वह क्षेत्र तो बूझा ही नहीं गया, इससे बड़ी विडम्बना और क्या हो सकती थी?मैंने जांच कराई तो पता चला कि नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखण्ड के कुल 237 ग्राम तथा नारायणपुर विकासखण्ड के 9 ग्राम अभी भी असर्वेक्षित हैं। सर्वेक्षण नहीं होने के कारण यहां के किसानों सहित विभिन्न वर्ग के लोगों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। इसे ध्यान में रखते हुए हमने मसाहती सर्वे कार्य को प्राथमिकता से कराने का निर्णय लिया है। अब तक ओरछा विकासखण्ड के 4 ग्रामों तथा नारायणपुर विकासखण्ड के 9 ग्रामों का प्रारंभिक सर्वे पूर्ण कर, उन्हें भुईंयां सॉफ्टवेयर के साथ जोड़ा गया तथा 6 अन्य ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य प्रक्रिया में है। आई.आई.टी. रुड़की के सहयोग से 19 ग्रामों का प्रारंभिक नक्शा एवं अभिलेख तैयार कराया गया है। हमने निर्णय लिया है कि राज्य शासन के निर्णय के अनुसार सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक प्रारंभिक अभिलेख अथवा मसाहती खसरा को आधार मानकर कब्जेदार को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाए। इसी कड़ी में जिला प्रशासन द्वारा विशेष शिविर लगाकर मनरेगा के तहत भूमि समतलीकरण, डबरी निर्माण, कृषि विभाग की राजीव गांधी किसान न्याय योजना, किसान सम्मान योजना, किसान क्रेडिट कार्ड योजना आदि का लाभ दिया जाएगा। उद्यानिकी विभाग के द्वारा मिनी बीज किट, नलकूप खनन, ड्रिप सिंचाई योजना, शेड नेट योजना आदि के प्रकरण भी तैयार किए जा रहे हैं। इन ग्रामों के हितग्राहियों से शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवेदन लिया गया है। ओरछा विकासखण्ड से 1 हजार 92 तथा नारायणपुर विकासखण्ड से 1 हजार 842 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए पात्र हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है। मैं कहना चाहता हूं कि अबूझमाड़ को ठीक ढंग से बूझने की दिशा में हमने ठोस कार्यवाही शुरू कर दी है। जल्दी ही इसका लाभ जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगेगा। हम यह कहकर अबूझमाड़ के लोगों को उनके वाजिब अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते कि अबूझमाड़ का सर्वेक्षण नहीं हुआ। जो काम इतने वर्षों तक नहीं हुआ, वह हम जल्दी से जल्दी कराके, वहां की जनता की सुख-सुविधा में भरपूर बढ़ोत्तरी करना चाहते हैं, जिसकी शुरुआत हो चुकी है।
            मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए हमने तरह-तरह के उपाय किए हैं। खेती-किसानी और परंपरागत रोजगार के अवसरों को मजबूत करने के साथ ही, हमने ऐसे अनेक उपाय किए हैं, जिससे आप लोगों को ऐसी आर्थिक मदद मिले, जो पहले नहीं मिलती थी। राजीव गांधी किसान न्याय योजना, सुराजी गांव योजना, गोधन न्याय योजना, वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, लघु धान्य फसलें-जिन्हें मिलेट्स कहा जाता है, उनके उत्पादन और प्रसंस्करण की व्यवस्था, सिंचाई के लिए निःशुल्क पानी की व्यवस्था, कृषि ऋण माफी, सिंचाई कर माफी, पौनी-पसारी योजना जैसे अनेक कामों से गांवों वालों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। लेकिन हम हर समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। जैसे ही यह बात ध्यान में आई कि बीजापुर जिले के चंदूर, तारलागुड़ा और कोत्तूर गांव के लोग मिर्ची तोड़ने और मिर्ची की खेती का काम बहुत अच्छे से करते हैं और इसमें रोजगार के लिए वे नदी पार करके दूसरे राज्य चले जाते हैं। तो बीजापुर जिला प्रशासन ने यह अध्ययन कराया कि मिर्ची की खेती हम छत्तीसगढ़ में, बस्तर में, बीजापुर में ही क्यों नहीं करा सकते ? क्योंकि मिर्ची की खेती के लिए जो जलवायु चाहिए वह तो यहां भी है। इस तरह इन तीन गांवों में 155 एकड़ जमीन के स्वामी 78 किसान परिवारों को तैयार किया गया। डीएमएफ एवं मनरेगा के माध्यम से खेतों की फेंसिंग, बीज, खाद, बोर, ड्रिप इरिगेशन, मलिं्चग एवं विद्युत आदि प्रारंभिक व्यवस्था करके नर्सरी तैयार कर ली गई है। इस तरह जो लोग पहले मूंग की खेती करके प्रति एकड़ लगभग 10 हजार रुपए कमाते थे, वे मिर्ची की खेती करके, एक से डेढ़ लाख रुपए तक प्रति एकड़ कमाएंगे। इसके अलावा मिर्ची तोड़ने के काम में स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार, बेहतर रोजी और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी, जिससे वे अपने गांव, अपने घर और अपने परिवार में रहते हुए काफी राशि बचा सकेंगे। मैं बार-बार कहता हूं कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डीएमएफ एवं मनरेगा से इसमें काफी मदद की जा सकती है। स्थानीय मौसम, मिट्टी और विशेषता को देखते हुए जिस तरह बीजापुर में मिर्ची की खेती का सपना साकार हो रहा है। वैसे ही अन्य जिलों में भी वहां की विशेषता के अनुसार बहुत से काम हो रहे हैं और इसमें बहुत बढ़ोत्तरी करने की संभावना है। मैं चाहता हूं कि स्थानीय टैलेंट, स्थानीय युवा और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से हम विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल को और ज्यादा विस्तार दें। इससे छत्तीसगढ़ का हर क्षेत्र समृद्ध और खुशहाल होगा।
            भैराडीह के लोकवाणी कार्यक्रम में सरपंच कृष्णा मण्डावी, उप सरपंच मनराखन पटेल, ग्राम पटेल ठाकुर राम नेताम, सचिव कनेसिंह दर्रो, सियाराम कोरेटी, रामजी पटेल, कुंवर कोमरा, सगन यादव, धनसिंह यादव, जगदीश पटेल, मुकेश नाग, धनश्याम, कैलाश, रमेश, रामप्रसाद, वेदप्रकाश, मन्नूराम, लल्लूराम, आशाराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
    लोकवाणी का आगामी प्रसारण 14 नवम्बर, 2021 को होगा, जिसमें मुख्यमंत्री ‘उद्यमिता और जनसशक्तीकरण का छत्तीसगढ़ मॉडल’ विषय पर चर्चा करेंगे। आप इस विषय पर अपने विचार सुझाव और सवाल दिनांक 27, 28 और 29 अक्टूबर, 2021 को दिन में 3 बजे से 4 बजे के बीच फोन नम्बर 0771-2430501, 2430502, 2430503 में रिकार्ड करा सकते हैं।

     

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    Last modified on Sunday, 10 October 2021 17:07

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