December 09, 2025
Hindi Hindi
Uncategorised

Uncategorised (34598)

अन्य ख़बर

अन्य ख़बर (5894)

धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

भारतीय लोक जीवन में श्री राम कृष्ण व्याप्त है
यही है सनातन संस्कृति - संत निरंजन

दुर्ग ग्रामीण / शौर्यपथ / पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू धर्मपत्नी श्रीमती स्व.कमला देवी साहू जी की पुण्य स्मृति में आयोजित ग्राम पाऊवारा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म का भव्य आयोजन किया गया।
कथा के पांचवे दिन कथा वाचक संत श्री निरंजन महाराज जी ने भगवान श्री कृष्ण अवतार की कथा का विस्तृत वर्णन करते हुये श्रोताओं को आनंदित किये।
ईश्वर के संकल्प सृष्टि का सृजन पालन संहार होता है। भगवान के नेत्र खोलने पर मुस्कुराने पर प्रलय और आंख टेढ़ी कर देने पर संहार हो जाता है।मानव मात्र को कर्तव्य कर्म मे प्रेरित करने अकर्ता ईश्वर हमें कार्य करते हुए दिखाई देते हैं। आत्मा राम अनुभूति का विषय है निर्गुण ब्रह्म सगुन रूप में लीला करते है आत्म तत्व के लिए स्वयं पर स्वयं की कृपा होना आवश्यक है।
सच्चिदानंद भगवान को जानने के लिए गुरुओं सन्तो के सरणों में लोट कर पद-रज से स्वयं को आनन्दित करें। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलायें और श्री कृष्ण के रूप में सर्वत्र प्रेम बाँटे। जंगलो में घुमते हुए बनवासी राम भोले -भाले आदिवासीयो को, पिछड़ो को गले लगाकर समाज के मूल धारा से जोड़े। वही योगीराज भगवान कृष्ण गोरक्षा प्रकृति संवर्धन, संगठन,स्वास्थ्य, सात्विक भोजन, निर्भीकता, सहजता धैर्य, साहस, स्नेह जैसी मानवीय मूल्यों को स्थापित कर संसार को पीड़ा देने वाले दैत्यों' का संहार किये।
द्वारीकाधीश के रूप में भगवान श्री कृष्ण कला संस्कृति का पोषण करते हुए कुशल प्रज्ञा पालन किये।कर्तव्य पथ में असहाय बने अर्जुन को युध्द कि किए प्रेरित कर कुशल युध्द संचालक बनकर गीला-ज्ञान भक्ति और वैराग्य को संदेशवाहक बने।भगवान के इन दिब्य लीलाओ का स्मरण करते हुए दुःख दर्द भरे इस दुनिया में जीवन का बाग सजाना है। पल भर सत्‌संग कथा हरि का सबसे अनमोल खजाना है।
जीवन को उत्सव बनाकर सम्पूर्ण जीवन को प्रेम और आनंद पूर्वक व्यतित करते, नित्य हम भगवान श्री कृष्ण के संदेश को आत्मसात कर धन्य बनें।

जैसे ही कथा में वासुदेव जी नवजात श्रीकृष्ण जी को लेकर कथा स्थल पर पहुंचे तो श्रद्धालु झूम उठे। श्रद्धालुओं नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयघोष से पांडाल गूंज उठा। इस मौके पर श्रीकृष्ण जन्म की खुशी में बधाई गाई गई और प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर प्रदेश साहू संघ के अध्यक्ष डॉ निरेन्द्र साहू,पूर्व विधायक बालोद प्रीतम साहू,पूर्व विधायक साजा लाभचंद बाफना,पूर्व अध्यक्ष हस्त शिल्प बोर्ड दीपक साहू जिला अध्यक्ष साहू समाज नंद लाल साहू, कृष्णा साहू, मंजु साहू,रमेश साहू,अध्यक्ष सेवादल धमतरी होरिलाल साहू,तुलसी साहू,राष्ट्रीय महासचिव लक्ष्मी गुप्ता, हलधर साहू,कलाम, प्रभात धुर्वे,सरस्वती चंद्रकार,युगल पांडे, अखिलेश तिवारी,महेश दुबे, नवीन ताम्रकार,ईश्वर सोनी, राजेन्द्र ठाकुर, दीपिका चन्द्रकार, भीषम हिरवानी, रत्ना नारम देव,झमित गायकवाड़,सनीर साहू, रिवेन्द्र यादव, तारकेश्वर चन्द्रकार, घसिया देशमुख, बाबू लाल देशमुख, भुनेश्वरी ठाकुर,रुपेश देशमुख, मुकेश साहू, देवा साहू,गोपाल साहू, डालेश साहू नोहर साहू, सहित हजारों की संख्या में श्रोता समाज एवं समस्त आयोजन कर्ता व समस्त ग्रामवासी पाऊवारा बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

शौर्यपथ सम्पादकीय लेख 

दुर्ग शहर की राजनीति में चार दशक तक एक अदृश्य किंतु प्रभावशाली सत्ता रही—बंगले की राजनीति। कांग्रेस पार्टी भले सत्ता में आती-जाती रही, पर संगठन का वास्तविक संचालन लंबे समय तक एक ही पते के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। संगठन का दायरा कागज़ी रूप से विस्तृत था, किंतु व्यवहारिक संचालन सीमित दायरे में सिमट चुका था। शहर कांग्रेस कार्यालय का महीनों तक बंद रहना, चुनावी मौसम में भी वहां सन्नाटा पसरा होना और दूसरी ओर उसी समय बंगले में गतिविधियों की चहल-पहल—यह सब यह संकेत देता था कि दुर्ग में संगठन का अस्तित्व धीरे-धीरे धुंधला पड़ रहा है।

लेकिन इस बार समीकरण बदले हैं।
चार दशक बाद पहली बार दुर्ग कांग्रेस संगठन ने बंगले की छाया से बाहर निकलकर स्वतंत्र पहचान की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है। यह बदलाव केवल एक कार्यालय परिवर्तन भर नहीं है, बल्कि पूरी संगठनात्मक संस्कृति में हो रहे परिवर्तन का संकेतक है।


नए अध्यक्षों के आगमन ने बदली परिभाषा

दुर्ग ग्रामीण, भिलाई शहर और दुर्ग शहर—तीनों क्षेत्रों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति ने कार्यकर्ताओं के मन में उत्साह का संचार किया। उम्मीदें तब और मजबूत हुईं जब तीनों अध्यक्षों ने कांग्रेस कार्यालय में भव्य समारोह के साथ पदभार ग्रहण किया और यहीं से अपना दैनिक कार्य प्रारंभ किया।

सालों बाद पहली बार यह कार्यालय वास्तव में ‘आबाद’ दिखाई दिया।
यह दृश्य कार्यकर्ताओं के लिए महज़ औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि अब संगठन की पहचान किसी व्यक्तिगत निवास पर नहीं, बल्कि अपने आधिकारिक भवन की छत के नीचे बनेगी।


‘छत’ का बदलता अर्थ : अब सभी को साथ लेकर चलने की तैयारी

राजनीतिक विज्ञान में संगठनात्मक ढांचे की मजबूती को किसी भी पार्टी की रीढ़ माना गया है।
जहाँ छत सबको एक साथ जोड़ती है, वहीं उसका अभाव सभी को बिखेर भी सकता है।

दुर्ग में भी यही स्थिति थी—
कागज़ों में सैकड़ों पदाधिकारी, लेकिन जमीनी स्तर पर गिनती के सक्रिय कार्यकर्ता।
गुटबाजी का बोलबाला, किन्तु समाधान का कोई साझा मंच नहीं।

लेकिन अब जब संगठन एक स्वतंत्र छत के नीचे सक्रिय दिख रहा है, तो यह केवल स्थान परिवर्तन नहीं बल्कि सत्ता केंद्रण से सामूहिक निर्णयवाद की ओर बढ़ते कदमों का सूचक है। पर्दे के पीछे चल रही मनमानी और मतभेद अब खुले में विमर्श के माध्यम से सुलझाए जाएंगे। यह बदलाव केवल संरचनात्मक नहीं, बल्कि मानसिकता का परिवर्तन भी है।


बंगले की राजनीति से संगठनात्मक राजनीति तक – एक बड़ा मोड़

वर्षों तक संगठन का दायरा इतना सीमित था कि आम जनता और कार्यकर्ताओं के लिए कांग्रेस मतलब बंगला हो गया था। यही राजनीतिक असंतुलन संगठन की जड़ें कमजोर कर रहा था।
आज जब कार्यकर्ता अपने कार्यालय में सक्रियता देख रहे हैं, तो उनमें अपनत्व की भावना जागृत हो रही है। संगठन और कार्यकर्ता के बीच की दूरी अब कम होती दिखाई दे रही है।

यह परिवर्तन कुछ लोगों को जरूर असहज कर रहा है—क्योंकि व्यक्तिगत सत्ता का परिदृश्य सिमट रहा है—लेकिन बहुसंख्य कार्यकर्ताओं के लिए यह लंबे समय से प्रतीक्षित सकारात्मक बदलाव है।


गुटबाजी सभी दलों में, लेकिन समाधान संगठन के तहत

यह सही है कि केवल कांग्रेस ही नहीं, हर राजनीतिक दल में गुटबाजी का अस्तित्व रहता है।
परंतु महत्वपूर्ण यह है कि
संगठन वह मंच होता है जहाँ अलग-अलग विचारधाराएँ, अलग-अलग व्यक्तित्व और अलग-अलग मत एक ही छत के नीचे खड़े होकर पार्टी की दिशा तय करते हैं।

दुर्ग कांग्रेस में यह मंच वर्षों तक निष्क्रिय रहा।
अब जबकि कार्यालय केंद्रित संरचना विकसित हो रही है, उम्मीद की जा रही है कि नेतृत्व सामूहिक रणनीति, सामूहिक निर्णय और सामूहिक मेहनत की दिशा में कार्य करेगा।


अध्यक्षों पर अब बड़ी जिम्मेदारी

तीनों अध्यक्षों पर अब एक बड़ी जिम्मेदारी है—
संगठन को बंगले की राजनीति से दूर रखते हुए, कार्यकर्ताओं में विश्वास, पारदर्शिता और समन्वय स्थापित करना।

यह बदलाव स्थायी बनेगा या फिर समय के साथ वापस पुराने ढर्रे पर लौटेगा—यह आने वाले दिनों में तय होगा। किंतु वर्तमान परिदृश्य यह स्पष्ट करता है कि दुर्ग कांग्रेस अब परिवर्तन की राह पर अग्रसर है। संगठन सक्रिय है, कार्यकर्ता आशान्वित हैं और लंबे समय से स्थिर पड़ी राजनीतिक ऊर्जा अब गति पकड़ती दिख रही है।


आगे की राह—संगठन की मजबूती से विपक्ष का सशक्त निर्माण

दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस वर्तमान में विपक्ष की भूमिका में है।
ऐसे में संगठन की सक्रियता केवल आंतरिक मजबूती ही नहीं, बल्कि मजबूत विपक्ष के रूप में जनता के मुद्दों को उठाने की क्षमता भी प्रदान करेगी।
नई नेतृत्व टीम यदि इसी सामूहिक सोच के साथ आगे बढ़ी, तो संगठन न केवल अपने अंदरूनी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि राजनीतिक परिदृश्य में भी प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।


निष्कर्ष

चार दशक बाद दुर्ग कांग्रेस में आया यह परिवर्तन केवल कार्यालय परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
मनमानी की राजनीति के बजाय सामूहिक नेतृत्व की ओर बढ़ते कदम—यह वही बदलाव है जिसकी कार्यकर्ताओं को वर्षों से प्रतीक्षा थी।

अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह नया ढांचा भविष्य में संगठन को किस दिशा में ले जाएगा।
लेकिन एक बात तय है—
दुर्ग कांग्रेस की यह नई शुरुआत न केवल उत्साहजनक है, बल्कि इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज होने योग्य भी है।

   भिलाई निगम / शौर्यपथ / कैलाश नगर, मानसरोवर मंदिर के समीप स्थित खसरा नंबर 1591, 1592 एवं 1593, जो लंबे समय से शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है, को बचाने के लिए स्थानीय नागरिकों ने बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया। वर्ष 2023 में पार्षद नेहा साहू की पहल पर इस भूमि पर सामुदायिक भवन निर्माण हेतु नगर निगम भिलाई द्वारा निविदा जारी की गई थी, परंतु शासन परिवर्तन के बाद निविदा निरस्त हो गई।

भूमि पर कब्जे के लगातार प्रयास

भूमि लंबे समय से खाली होने के कारण भू-माफियाओं की नजर बनी हुई थी। इसी क्रम में आशा वैष्णव द्वारा अपने निजी खसरों (1588 और 1590/1) का सीमांकन शासकीय भूमि पर करवाने का प्रयास किया गया। मोहल्लेवासियों एवं पार्षद नेहा साहू ने स्थल पंचनामा में इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, क्योंकि बिना मूल दस्तावेज और रजिस्ट्री के शासकीय भूमि पर सीमांकन किया जा रहा था।
लगातार शिकायतों के बाद नगर निगम आयुक्त एवं अतिरिक्त तहसीलदार को भूमि संरक्षण हेतु आवेदन किया गया, जिसके आधार पर राजस्व प्रकरण दर्ज कर टीम गठित की गई। सीमांकन प्रक्रिया कई बार भू-माफियाओं के हस्तक्षेप के कारण बाधित होती रही और महीनों तक प्रकरण लंबित रहा।

शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा

18 नवंबर 2025 को सुनील कश्यप एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा संपूर्ण भूमि पर पोल, प्री-कास्ट दीवार और कैमरा लगाकर कब्जा कर लिया गया। जब मोहल्लेवासियों ने इसका विरोध किया तो सुनील कश्यप ने दावा किया कि उसने यह जमीन आशा वैष्णव से खरीदी है। इसकी शिकायत पार्षद नेहा साहू ने नगर निगम, तहसीलदार, एसडीएम दुर्ग और कलेक्टर को दी, परन्तु तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच भू-माफियाओं द्वारा अवैध प्लॉटिंग भी शुरू कर दी गई।

01 दिसंबर से अनिश्चितकालीन धरना

प्रकरण में विलंब व लगातार कब्जों के विरोध में पार्षद नेहा साहू तथा मोहल्लेवासी 01 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। इसी दिन तहसीलदार भिलाई ने आशा वैष्णव को काम रोकने और शासकीय भूमि सीमांकन का आदेश जारी किया।

सीमांकन में 80% भूमि शासकीय पाई गई

दो दिन चली सीमांकन प्रक्रिया में कब्जाई गई भूमि का करीब 80% हिस्सा शासकीय पाया गया।
जांच टीम ने बताया कि निजी खसरा 1590/1 का चिन्हांकन भी आवश्यक है। सीमांकन के बाद लगभग 28–30 घर शासकीय भूमि पर निर्मित पाए गए, जिनमें से आधे से अधिक घरों को आशा वैष्णव या उनके पिता द्वारा बेचा गया था। शेष घर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अनुमोदित पाए गए।

छह दिन बाद प्रशासन से वार्ता

लगातार छह दिनों के धरने के बाद 06 दिसंबर 2025 की शाम को तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, जामुल थाना प्रभारी व टीम धरनास्थल पहुंचे। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि शासकीय भूमि को सुरक्षित किया जाएगा। निजी खसरों की स्थिति स्पष्ट होने तक क्षेत्र की वर्तमान स्थिति यथावत रखी जाएगी।

धरना समाप्त

संतोषजनक चर्चा के बाद पार्षद नेहा साहू एवं मोहल्लेवासियों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की और जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा मीडिया का आभार व्यक्त किया।

bhilai / shouryapath / 06 दिसंबर 2025 को सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के कोक ओवन एवं कोल केमिकल विभाग के सभागार में मुख्य महाप्रबंधक (कोक ओवन) तुलाराम बेहरा के मुख्य आतिथ्य में राजभाषा के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देने तथा भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित नीतियों के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि तुलाराम बेहरा ने उद्बोधन में कहा कि कार्यक्षेत्र में वार्तालाप हिंदी में करने से संवाद सरल बनता है। कंप्यूटर, दस्तावेजों एवं रजिस्टरों में हिंदी में लेखन आज की आवश्यकता है। राजभाषा नीति के अनुसार पत्राचार एवं कार्यालयीन कार्य हिंदी में किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें शत-प्रतिशत कार्य हिंदी में करने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिए। हिंदी हमारे समग्र निष्पादन को भी बेहतर बनाती है।

महाप्रबंधक एवं विभागीय हिंदी समन्वय अधिकारी एम.एस. नायडू ने विभाग द्वारा हिंदी के क्षेत्र में की जा रही पहलों, विशेष कार्यों तथा संयंत्र स्तरीय प्रतियोगिताओं के विजेताओं की जानकारी दी। विभागीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि विभाग में राजभाषा के सांविधिक प्रावधानों का पालन किया जाता है तथा अधिकारियों के सभी नामपट्ट और रबर स्टाम्प द्विभाषी हैं।

कार्यक्रम में राजभाषा विभाग द्वारा सामान्य ज्ञान आधारित एक रोचक प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें एम.एस. नायडू, विजेन्द्र कुमार वर्मा और हेमराज क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार विजेता रहे। प्रोत्साहन पुरस्कार मधुसूदन नायक (महाप्रबंधक–प्रभारी सीआरजी), देवेन्द्र कुमार सोनी (इंजीनियरिंग एसोसिएट) और डी. विक्टर (चार्जमेन) को प्रदान किए गए।

कार्यशाला में महाप्रबंधक (प्रभारी प्रचालन) झगर सिंह, महाप्रबंधक (यांत्रिकी) मधुसूदन नायक, टी.ए. गगन किशोर, इंजीनियरिंग एसोसिएट राजेश वर्मा, रमेश दौने, राजेन्द्र कुमार गजेन्द्र, लोकचंद यादव, लेखराम घरेन्द्र, भोपाल सिंह ब्राहेन, उदय राज रामटेके, केदार वर्मा, अनिश कुमार राम, जूनियर इंजीनियरिंग एसोसिएट नरेन्द्र कुमार जोशी तथा टेक्नीशियन वी. दिवाकर राव, डेविड कुमार और दीनबंधु दुर्गा सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

उप प्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन–राजभाषा) जितेन्द्र दास मानिकपुरी ने राजभाषा के सांविधिक प्रावधानों की जानकारी दी तथा ऑनलाइन वॉइस टाइपिंग एवं ‘सैप’ प्रणाली में हिंदी में नोटशीट तैयार करने का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का संचालन इंजीनियरिंग एसोसिएट राजेश वर्मा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन इंजीनियरिंग एसोसिएट विजेन्द्र कुमार वर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया।

  रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के नेतृत्व में कवर्धा जिले में महिला सशक्तिकरण के प्रयासों ने पिछले दो वर्षों में अभूतपूर्व गति पकड़ी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में शुरू की गई महत्वपूर्ण योजनाओं ने कवर्धा की महिलाओं को नई दिशा और मजबूत आधार प्रदान किया है। महतारी वंदन योजना से लेकर सोनोग्राफी शिविर, लखपति दीदी योजना और महतारी सदन जैसी पहलें जिले को महिला विकास के नए मॉडल के रूप में स्थापित कर रही हैं।

महतारी वंदन योजना: माताओं-बहनों को मिला 251.63 करोड़ का आर्थिक संबल

कवर्धा विधानसभा की 1 लाख 30 हजार से अधिक महिलाओं को महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता निरंतर मिल रही है। अब तक 251 करोड़ 63 लाख 96 हजार रुपये महिलाओं के खातों में पहुंच चुके हैं।
21 माह की राशि के बाद हाल ही में 22वीं किश्त भी जारी कर दी गई है। कई महिलाओं ने इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा, घर-गृहस्थी और छोटी-मोटी घरेलू जरूरतों को पूरा करने में किया, जिससे उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता आई।

409 कन्याओं का सामूहिक विवाह, उपमुख्यमंत्री बने बाराती

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से कवर्धा में 409 कन्याओं का सामूहिक विवाह धूमधाम से सम्पन्न हुआ। श्री शर्मा स्वयं बाराती बनकर नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देने पहुंचे—यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हुई।

वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य क्रांति: निःशुल्क सोनोग्राफी शिविर से 1000 से अधिक गर्भवती महिलाएं लाभान्वित

सुदूर वन क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए निःशुल्क सोनोग्राफी शिविर अब तक 1,000 से अधिक महिलाओं के लिए जीवनदायिनी साबित हुए हैं।
समय पर जांच होने से जटिल गर्भावस्था के मामलों की पहचान और उपचार आसानी से संभव हो रहा है, जिससे जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत हुई है।

स्वरोजगार को बढ़ावा: 100 महिलाओं को मिला सिलाई मशीन का संबल

महिला रोजगार को नई दिशा देने के लिए उपमुख्यमंत्री ने 100 से अधिक महिलाओं को सिलाई मशीन वितरित की हैं। यह कदम ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का सरल और प्रभावी माध्यम साबित हो रहा है।

लखपति दीदी योजना: कवर्धा की 13,924 महिलाएँ बनीं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कवर्धा में बने 6,158 स्व-सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहे हैं। यही नहीं, आजीविका गतिविधियों से जुड़कर 13,924 महिलाएँ “लखपति दीदी” के रूप में उभरकर सामने आई हैं—जो किसी भी जिले के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि है।

महतारी सदन — महिला सशक्तिकरण के लिए नया संस्थागत केंद्र

कबीरधाम जिले को उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर 19 महतारी सदनों की बड़ी सौगात मिली है।
अब तक निर्मित 5 महतारी सदनों का लोकार्पण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा किया जा चुका है जबकि शेष 14 भवनों का निर्माण 3.45 करोड़ की लागत से तेज़ी से जारी है। ये महतारी सदन महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, परामर्श, स्वास्थ्य शिक्षा और समूह गतिविधियों के लिए समर्पित स्थान के रूप में विकसित किए जा रहे हैं।

महिला विकास के नए युग की शुरुआत

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निरंतर प्रयासों ने कवर्धा में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सुरक्षा, सामूहिक विवाह, आजीविका प्रोत्साहन और बुनियादी संरचना के विकास जैसे कदमों ने कवर्धा को महिला विकास का अग्रणी जिला बनाने की दिशा में बड़ी भूमिका निभाई है। कवर्धा की महिलाएं आज अधिक सक्षम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर हो रही हैं—और इस सफर में श्री विजय शर्मा के प्रयास एक मजबूत आधारस्तंभ के रूप में सामने आए हैं।

  रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल रमेन डेका ने स्वतंत्रता सेनानियों और देश की रक्षा में अपना जीवन समर्पित करने वाले पूर्व सैनिकों की स्मृति को संरक्षित करने के लिए ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
राज्यपाल डेका ने आज लोकभवन में राजधानी रायपुर के कलेक्टर गौरव सिंह से इस संबंध में चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से स्वतंत्रता सेनानी श्री रामकृष्ण तिवारी का उल्लेख किया जिन्होंने आजादी के आंदोलन में परिवार सहित अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। उन्होंने जेल, त्याग और संघर्ष की कठिन यातनाएं झेलीं। उनसे जुड़े अभिलेख, विरासत को संरक्षित रखने के लिए निर्देश दिया।
श्री डेका ने रायपुर में ऐसी पहचान योग्य जगहों की पहचान करने तथा वहां स्मारक, सूचना पट्ट या मेमोरियल गैलरी के रूप में संरक्षित करने के भी निर्देश दिए। राज्यपाल ने कहा कि यह कार्य प्रशासन की पहल और समाज के सहयोग से मिलकर किया जाना चाहिए, तभी उनकी स्मृतियां अविस्मरणीय बन पाएंगी।

    रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश में भूमि और संपत्ति के मूल्यांकन नियमों को लेकर उठे तीव्र विरोध व व्यापक सुझावों के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने कई अहम निर्णय लिए हैं जिनका आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि ये बदलाव नगरीय विकास, रियल एस्टेट सेक्टर और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखकर किए गए हैं ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और किफायती हो सके।

मुख्य निर्णय — क्या बदला गया

1400 वर्ग मीटर तक के भूखंडों पर इंक्रीमेंटल गणना समाप्त: नगरीय क्षेत्रों में 1400 वर्ग मीटर तक के भूखंडों के लिए इंक्रीमेंटल आधार पर मूल्यांकन की वर्तमान व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब पूर्व प्रचलित स्लैब प्रावधान पुनः लागू होंगे — नगर निगम क्षेत्रों में 50 डेसिमल, नगर पालिका में 37.5 डेसिमल और नगर पंचायत में 25 डेसिमल तक स्लैब दरों पर मूल्यांकन होगा।

सुपर बिल्ट-अप एरिया की गणना विलोपित: बहुमंजिला भवनों में फ्लैट, दुकान और कार्यालय के हस्तांतरण पर अब सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर बाजार मूल्य लागू नहीं होगा; स्थानांतरण का मूल्यांकन अब बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किया जाएगा। यह प्रावधान मध्य प्रदेश शासन के समय से चले आ रहे पुराने नियम को बदलता है और वर्टिकल डेवलपमेंट को गति देने की मांग को पूरा करता है।

मंजिलों के आधार पर छूटें: बहुमंजिला और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मूल्यांकन में बेसमेंट व प्रथम तल पर 10% तथा द्वितीय तल व ऊपर के तल पर 20% की कटौती लागू की गई है — इससे मध्यम वर्ग को किफायती दरों पर फ्लैट और व्यावसायिक स्थान मिलना आसान होगा।

कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों में दूरी-आधारित छूट: किसी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मुख्य मार्ग से बने हिस्से से मापी गई 20 मीटर की दूरी के बाद स्थित संपत्तियों के लिए भूखंड दरों में 25% की छूट दी जाएगी। यह व्यवस्था वास्तविक स्थिति के आधार पर अधिक न्यायसंगत मूल्यांकन सुनिश्चित करेगी।

जिला मूल्यांकन समितियों को निर्देश: बोर्ड ने निर्देश दिया है कि हाल ही में दरों में वृद्धि के बाद प्राप्त आपत्तियों, ज्ञापनों और सुझावों का परीक्षण कर 31 दिसंबर तक गाइडलाइन दरों में संशोधन के प्रस्ताव जिला स्तर से भेजे जाएं; इन प्रस्तावों के आधार पर केंद्रीय बोर्ड आगामी गाइडलाइन दरों पर अंतिम निर्णय लेगा।

पृष्ठभूमि और प्रशासनिक कदम

नई कलेक्टर गाइडलाइन 20 नवंबर को लागू की गई थी, जिसके बाद प्रदेश भर में तीव्र विरोध और आपत्तियाँ उठीं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संकेत के बाद सरकार ने समीक्षा के लिए कदम उठाते हुए सेंट्रल वैल्यूएशन बोर्ड की बैठक बुलाई।

रजिस्ट्रेशन विभाग ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी थी। बैठक के बाद महानिरीक्षक पंजीयन एवं सुपरिटेंडेंट ऑफ स्टैंप्स, छत्तीसगढ़, रायपुर ने संशोधित गाइडलाइंस और आदेश जारी किए। अधिकारियों ने बताया कि ये प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं ताकि अस्थिरता दूर हो और रियल एस्टेट सेक्टर को स्थिर दिशा मिल सके।

सरकार का मकसद और अपेक्षित प्रभाव
प्रशासन का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और शहरी भूमि के समुचित उपयोग को प्रोत्साहित करना है। बिल्ट-अप एरिया पर मूल्यांकन तथा मंजिल-आधारित छूटों से वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे शहरी आवास और व्यावसायिक इकाइयों की उपलब्धता और किफायती विकल्पों में इजाफा होगा।

आगे की प्रक्रिया
केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा माँगे गए जिलास्तरीय प्रस्तावों के मिलने के बाद बोर्ड अंतिम गाइडलाइन दरों की घोषणा करेगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन प्रावधानों को वापस लिया गया है, वे तत्कालीन आदेशों के अनुरूप लागू माने जाएँगे, जबकि नए छूट-प्रावधान संस्थागत स्तर पर लागू होंगी।

हजारों फ्लाइट रद्द और देरी के कारण खिलाड़ियों के परिवार व समर्थक फंसे, यात्रा योजनाएं हुईं बाधित DGCA ने एयरलाइन के CEO को कारण बताओ नोटिस जारी, क्रू रोस्टरिंग और…

  रायपुर/ शौर्यपथ / Óमहासमुंद जिले के सेनभाठा, बागबाहरा में धान का टोकन ना मिलने की वजह से एक किसान मनोबोध गाढ़ा के आत्महत्या के प्रयास को सरकार की प्रताडऩा करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि पूरे प्रदेश में धान खरीदी बाधित है, भाजपा सरकार की मंशा किसानों से उनके रकबा के आधार पर तय 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी करने की नहीं है, पिछले 3 दिनों से किसान मनोबोध टोकन के लिए चक्कर लगा रहा था आज हताश और निराशा होकर किसान ने अपना गला ही काट लिया, सरकार के फर्जी दावों की हकीकत सामने हैं। पूरे प्रदेश में लगभग यही स्थिति है, किसानों को रकबा के अनुपात में जीतने धान का टोकन काटा गया है उतनी खरीदी भी नहीं की जा रही है। सरकार और प्रशासन की अक्षमता से किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हैं, बागबाहरा के किसान मनोबोध गाढ़ा की हालत नाज़ुक है। सरकार उसके इलाज का समुचित प्रबंध कराए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि किसान विरोधी भाजपा सरकार ने अपने ही पूर्व निर्धारित लक्ष्य से कम धान खरीदने का षड्यंत्र करके एनआईसी के द्वारा लक्ष्य घटाकर सोसाइटियों को किसानों से कम खरीदी के लिए बाध्य किया जा रहा है। जिन किसानों का टोकन 10 दिन पहले कट गया है उनसे भी खरीदी नहीं की जा रही है, तौलाई के लिए घुमाया जा रहा है। टोकन के लिए किस भटक रहे हैं, भाजपा सरकार की मंशा धान खरीदी करने की नहीं है, किसान समिति के चक्कर लगा लगाकर हताश हो चुके हैं, बागबाहरा की घटना इस सरकार के किसान हत्यारी सरकार होने का प्रमाण है।

  कवर्धा / शौर्यपथ / कवर्धा शहर के विकास को नई दिशा देते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 10 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से बनने वाले गौरव पथ का विधिवत भूमिपूजन किया। यह बहुप्रतिक्षित मार्ग राजनांदगांव बायपास (पिलारी नहर) से नवीन बाजार तक तैयार किया जाएगा, जिससे शहर की यातायात सुविधा, व्यापारिक गतिविधियां और शहरी सौंदर्य में उल्लेखनीय सुधार होगा।
भूमिपूजन कार्यक्रम में सांसद संतोष पाण्डेय, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गौरव पथ केवल सड़क नहीं बल्कि कवर्धा के भविष्य को गति देने वाला विकास मार्ग है। उन्होंने बताया कि शहर में दो आधुनिक चौपाटियों का निर्माण, प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण, मेडिकल कॉलेज के लिए 300 करोड़ से अधिक की स्वीकृति, सड़क उन्नयन और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार जैसे कार्य तेजी से प्रगति पर हैं।
सांसद संतोष पाण्डेय ने इसे कवर्धा के लिए ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि नई सरकार के संयुक्त प्रयासों से शहर में बड़े पैमाने पर विकास कार्य शुरू हुए हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन 11 दिसंबर को किया जाएगा, जो स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
करीब 2 किलोमीटर लंबा गौरव पथ रामनगर, शिवाजी कॉलोनी, शांतिदीप कॉलोनी और नवीन बाजार के हजारों नागरिकों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा और शहर को आधुनिक स्वरूप प्रदान करेगा।

Page 1 of 2472

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)